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अपने बच्चे के लिए एक दिनचर्या की स्थापना

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ओह, कैसे हम सब चाहते है कि हमारे बच्चे को जितनी जल्दी हो सके एक अच्छी दिनचर्या हासिल हो जाये, जिससे कि हम एक बेहद जरूरी और अच्छी नींद प्राप्त कर लें। यह हमारे लिए एक मनचाही इच्छा और सफलता है, कि हमारे बच्चे शुरूआत से ही एक दिनचर्या पालन कर रहें है।

हर बच्चा अलग होता है, और खाने, सोने और जागने के एक अलग पैटर्न का पालन करता है। सुझाए गए उपचार और चाल में कुछ परिवर्तन उनमें से अधिकांश को दैनिक दिनचर्या का पालन करने में मदद कर सकते हैं।

एक नवजात शिशु के साथ शुरू करने के लिए, फिर चाहे स्तनपान के लिए, फार्मूला या एक्सप्रेस्ड दूध देने के लिए, खिलाने का समय और नींद चक्र निर्धारित करना आवश्यक हो जाता है। आम तौर पर, यह प्रारंभिक महीनों (1-2 महीने) के लिए प्रत्येक फ़ीड के बीच 2-2.5 घंटे (30-90 मिलीलीटर) अंतर के साथ शुरू होता है। फिर आप अगले 2 महीनों के लिए 4 घंटे (120-150ml) के अंतर को बढ़ा सकते हैं और जब बच्चा 4-6 महीने के आसपास को हो जाता है, तो प्रत्येक फ़ीड के बीच 5-6 घंटे (~ 180-240ml) का अंतर रखने का प्रयास कर सकते हैं। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि, जितना दूध वह पी सकता है, उससे अधिक मात्रा में दूध पीने के लिए मजबूर न करें। शांत रहें और आराम करें, जब बच्चे का पेट भर जायेगा तो वह आपको थका हुआ और नींद महसूस करने जैसा संकेत देगा।

एक बार फ़ीड के बीच की अवधि निर्धारित हो जाने के बाद, अगले फीड से पहले खुद को तैयार करें। डायपर बदलने और दूध की बोतल (फार्मूला या स्तन दूध) के लिए सब कुछ तैयार रखना अच्छा होता है। डायपर बदलें, बच्चे को फीड करायें, उन्हें बर्प करने दें और सो जाने दें!

यह डायपर रैस से बचने में भी मदद करता है, यदि आप अपने डायपर बदलने और खाने की अवधि में मेलजोल में रखते हैं, तो यह गंदे डायपर को दूर रखता है।

फीडिंग

खिलाने (फीडिंग) के लिए एक अवधि निर्धारित करें। ध्यान भटकाने और अधिक शोर-शराबे वाले कमरे में बच्चे को खिलाने (फीडिंग) से बचें। यह बच्चे को खिलाने (फीडिंग) पर ध्यान देने में मदद करता है, जिससे बच्चा जल्दी सो जाता है। बच्चे को खिलाएं, हवा पास करने दें, चेहरे को साफ करें और जीभ तथा मसूड़ों को साफ करने के लिए मलमल के कपड़े का इस्तेमाल करें। याद रखें, कोमल और सावधान रहें, जिससे की बच्चे को बहुत ज्यादा परेशानी न हो ताकि बच्चा धीरे-धीरे सो सके।

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल- बच्चे को रात में कैसे सुलायें?

बच्चे को दिन और रात के बीच अंतर बताने से शुरू करें.

दिन के समय में पर्दे को खींचकर रखने का प्रयास करें या कमरे में कुछ रोशनी करें। बच्चे को दिन के समय सुलाने के लिए रखने के दौरान कमरे में मामूली शोर या आवाज सुनिश्चित करें, वहां पूरी तरह से शाँति नहीं होना चाहिए। अपने दैनिक दिनचर्या को जारी रखें, शोर और गड़बड़ी पर थोड़ा नरमी बरतें, लेकिन इसे पूरी तरह से खत्म न करें।

फिर रात में कमरे को अंधेरा, एकांत और शांतिपूर्ण रखें। आप धीरे से लोरी/सफेद शोर संगीत बजायें, ताकि बच्चे को उचित नींद लेने में मदद मिल सके। सोने से पहले, अपने बच्चे को बतायें और स्वीकार करायें, कि यह उसके बिस्तर पर जाने तथा सोने का समय है। मेरा विश्वास करें, कि बच्चे अपने सुंदर दिमाग में, दोहराने वाली बातों को अच्छी तरह से समझते और ध्यान देते हैं।

सोने के लिए कार्बनिक शांत/ठंडे तेल के साथ अपने बच्चे को एक कोमल मालिश देने के लिए एक दिनचर्या बनाने की कोशिश करे, उसके बाद नहाने, पोछने और नमी देने की प्रक्रिया का पालन करें। यह बच्चे को शांत करने में काफी मदद करता है। इसके बाद सोने की शॉर्ट स्टोरी पढ़ें, बच्चे को दूध पिलाएं और उसे बिस्तर पर रख दें। सोने के लिए बिस्तर पर रखने से पहले एक शुभरात्रि चुंबन तथा सीने से लगाने को शामिल करने की कोशिश करें। इससे बच्चे को सोने का समय समझने में मदद मिलती है।

नवजात शिशु खाने (फीड) के लिए हर 2-4 घंटे में जगेंगे, इसलिए पहले तैयार रहना बेहतर है और बच्चे को फीड के लिए उठने और रोने न दें। बच्चे की फ़ीड अवधि के अनुसार रात में बच्चे को दूध दें। इस तरह बच्चा पूरी तरह से नहीं उठता है, और आसानी से फ़ीड लेने के बाद फिर से वापस सो जाता है।

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, उसके खाने (फीड) की अवधि में बढोत्तरी होती जाती है, और इस तरह बच्चे की रात में जगने की अवधि कम होती जाती है। आम तौर पर, जब बच्चा 2-3 महीने का हो जाता है, तो वह रात में 1-2 बार जगते है। अपने बच्चे के लिए सोने का समय शाम के 7-8 बजे तय करने की कोशिश करें, इस तरह आपको रात के 11-12 बजे के आसपास एक फ़ीड देना होगा इसके बाद  3-4 बजे पर एक और, और फिर इसके बाद सुबह 7:00 बजे उठने के दौरान।

6 महीने के बाद आम तौर पर बच्चा, उठे बिना 10-12 घंटे के लिए सोने में सक्षम हो जाता है।

यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चा आरामदायक कपड़े में है (बच्चे को ज्यादा कपड़े न पहनायें) और कमरे में तापमान न ही बहुत ठंडा या गर्म है। अपने बच्चे को कपड़े में लपेटें, आप लगभग 4 महीने के लिए यह कर सकते हैं । इससे वे बहुत सहज और गर्म महसूस करते हैं।

अपने बच्चे को एक ही स्थान पर सुलाना याद रखें। यह एक अच्छी नींद पैटर्न स्थापित करने में मदद करता है, और उन्हें यह समझने में मदद करता है कि, उसके सोने का समय कब है और उन्हें कहाँ सोना है।

चूंकि सभी बच्चे अलग-अलग होते हैं, उनमें से कुछ धीमी गति से या तेजी से बढ़ सकते हैं, इसलिए घबराएं नहीं और आराम करें। ये सभी थोड़ी बहुत देरी के बावजूद, आखिर में सुंदर मनुष्य के रूप में विकसित होते हैं। बतायी गयी युक्तियों (टिप्स) को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार बदलें, जैसे कि 6 महीने के कुछ बच्चों को अभी भी रात में फ़ीड की आवश्यकता हो सकती है। कोई बात नहीं, उन्हें फीड करें, अपने बच्चे आवश्यकता के अनुसार सब कुछ दे। बिना किसी दिनचर्या के सनकी बच्चे की तुलना में एक शांत बच्चा है अच्छा होता है। ऐसे बच्चे की तुलना में जो रात को सोता नहीं है और आपको आराम नहीं करने देता है, वह बच्चा अच्छा होता जो रात में फीडिंग के लिएआपको जगाता और बाद में सो जाता है।

नींद की कुछ समस्याएं

जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते है, वैसे-वैसे उनकी नींद का पैटर्न बदलता जाता है। अपने बच्चे के लिए निर्धारित दिनचर्या में परिवर्तन लाने के लिए तैयार रहें। बच्चे की जरूरतों के अनुसार संशोधित करें। बड़े बच्चों के लिए, जिन्होने ठोस भोजन लेना शुरु कर दिया है, उन्हें शाम को भी ठोस भोजन के साथ शुरू करने की सलाह दी जाती है। इससे बच्चो का लंबे समय तक पेट भरा रहता हैं और अच्छी तरह से सोने में मदद भी करता हैं।

ऐसे दिन भी हो सकते हैं, जब बच्चे को मौसम के नीचे महसूस होगा या उन्हे दाँतो की समस्या होगी। वे बच्चे की दैनिक दिनचर्या या नींद में हस्तक्षेप करते हैं। छोटी सी टिप, सोने से पहले अपने बच्चे को बर्फीले निबल्स/टिफर देना है। यह उन मसूड़ों को शांत करने में मदद करता है और आपके बच्चे को शांति से सोने देता है। बुखार से पीड़ित बच्चे के लिए सोने से पहले पैरासिटामोल खुराक देना सहायक होता है, जो उन्हे बीमारी/लक्षणों से होने वाली अशांति को कम करके सोने में सहायक होता है।

यदि आप उन्हें एक दिनचर्या में डालने के कई प्रयास के बाद भी, अपने बच्चे के साथ नींद की समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो स्वास्थ्य सलाहकार से मदद लेना सबसे अच्छा होता है।