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माइंडफुलनेस: यह क्या है और, क्या यह फायदेमंद है?

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माइंडफुलनेस – वर्तमान में मौजूद होने का एक एहसास है – जिसने पिछले कुछ वर्षों में पश्चिमी देशों में काफी लोकप्रियता हासिल की है। इसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों के इलाज के लिए एक वैकल्पिक उपचार के रूप में भी प्रस्तुत किया गया है। लेकिन इस सब के पीछे विज्ञान क्या कहता है? आइए इसके बारे में गहरायी से जाने।

Mindfulness

माइंडफुलनेस क्या है?

माइंडफुलनेस एक स्थिति है जिसमें आप वर्तमान में पूरी तरह से मौजूद होते हैं। इसमें आप अपने चारों ओर मौजूद क्षणों के बारे में पूरी तरह से सजग होते हैं और उसका अनुभव करते हैं। इसमें आपके विचार और अनुभव दोनों शामिल हैं। माइंडफुलनेस का अभ्यास वास्तव में अपने विचारों में संलग्न हुये बिना उनके प्रति सचेत रहना है। जब यह अभ्यास एक निश्चति समय के लिए लगातार किया जाता है, तो यह मानसिक प्रक्रियाओं पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करता है। इस प्रकार यह बेहतर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

यहां, माइंडफुलनेस और ध्यान के बीच के अंतर को नोट करना महत्वपूर्ण है। ध्यान एक सचेत अवस्था का अनुभव करने का एक साधन है। एक बार जब आप नियमित रूप से ध्यान के माध्यम से सचेत अवस्था का अनुभव करना शुरू कर देते हैं, तो आपका लक्ष्य दिन के अधिकांश समय ध्यान के बिना, एक सचेत अवस्था में उपस्थित होना होता है।

ध्यान करने के अलग-अलग तरीके हैं। प्रचीन भारतीय अभ्यास योग इनमें से शायद सबसे ज्यादा आम है। कुछ चीनी अभ्यास भी मौजूद है जैसे ताई ची और किगोंग।

माइंडफुलनेस कैसे काम करता है?

मोटे तौर पर, माइंडफुलनेस आपके दिमाग को बदल सकता है। मूल रूप से यह आपके दिमाग के बिंदुओं को एक दूसरे से जोड़ता है। जोड़ने के यह तकनीक आपको रोजमर्रा की जिंदगी के तनावों से बेहतर तरीके से निपटने का बढ़ावा देती है। यह समझने के लिए कि जोड़ने कि यह प्रक्रिया कैसे होती है, यह समझना महत्वपूर्ण है कि हमारा दिमाग का ढ़ाँचा क्या है।

दिमाग के तीन मुख्य क्षेत्र हैं – ब्रेनस्टेम, लिम्बिक क्षेत्र और कॉर्टेक्स। ब्रेनस्टेम शरीर के बुनियादी कार्यों के लिए जिम्मेदार है, जैसे भूख, या हमारी नींद का पैटर्न। यह हमारी उड़ान या लड़ाई प्रतिक्रिया के लिए भी जिम्मेदार है। लिम्बिक क्षेत्र हमारी भावनाओं के लिए जिम्मेदार है। एमिग्डाला और हिप्पोकैम्पस लिम्बिक क्षेत्र का हिस्सा हैं। इस प्रकार, लिम्बिक क्षेत्र लोगों के लिए हमारे भावनात्मक जुड़ाव को निर्धारित करता है, और हमारी यादों को बनाये रखने की क्षमता रखता है। कॉर्टेक्स, खुद ही तीन क्षेत्रों में विभाजित है: फ्रंटल कॉर्टेक्स, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, और पोस्टिरियर कॉर्टेक्स।

प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हमारी आत्म भावना और हमारी नैतिकता के लिए जिम्मेदार है। फ्रंटल कॉर्टेक्स वह जगह है जहां सभी विचार पैदा होते हैं। यह दिमाग का वह क्षेत्र है जो हमें कल्पना करने में मदद करता है। पोस्टिरियर कॉर्टेक्स भौतिक जगह में हमारी क्रियाओं और स्थान को ट्रैक करता हैं।

दिमाग के विभिन्न क्षेत्र न्यूरॉन्स के माध्यम से एक दूसरे से बात करते हैं। एक आम दिमाग में लगभग, 100 अरब न्यूरॉन्स होते हैं। जब यह न्यूरॉन्स एक दूसरे से बात करने के लिए फायर करते है, तो यह फायरिंग पैटर्न हमारे दिमाग को आकार देने का निर्धारण करता है। यह आकार तब यह निश्चित करता है कि हम बाहरी और आंतरिक उत्तेजनाओं का जवाब कैसे देते हैं। यह बदले में, यह निर्धारित करता है कि क्या हम लगातार तनावग्रस्त, चिंतित या अन्यथा महसूस करते हैं।

सौभाग्य से दिमाग के अध्ययनों से पता चला है कि दिमाग के आकार को बदलना संभव है। इसे समझने के लिए न्यूरोप्लास्टी की अवधारणा को समझना जरूरी है। न्यूरोप्लास्टिसिटी हमारे दिमाग की नए न्युरल कनेक्शन बनाने की क्षमता है। सरल शब्दों में, इसका मतलब न्यूरॉन्स के बीच नए कनेक्शन बनाना है, जो पहले से मौजूद नहीं है। यह हमारे दिमाग में हर समय होता है, जैसे-जैसे हम नई चीजों का अनुभव है, या नए कौशल सीखते हैं।

हालांकि, एैसे कई सबूत मौजदू हैं, जिनसे पता चलता है कि हम अपने दिमाग में इन नए कनेक्शन को डायरेक्ट कर सकते है, वास्तव में जोड़ सकते हैं। न्यूरोप्लास्टिसिटी का उपयोग करके अपने दिमाग के बिंदुओं को फिर से जोड़ने के कई तरीके हैं, जैसे कि एक नया संगीत वाद्य यंत्र सीखना, यात्रा करना, नृत्य करना, या यहां तक कि कला बनाना।

नए शोध में पाया गया है कि माइंडफुलनेस प्रशिक्षण न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा दे सकता है। अनिवार्य रूप से, बार-बार स्वेच्छा से आपने ध्यान को नियंत्रित करके, दिमाग के कोर्टेक्स हिस्से में नयुरोन नेटवर्क को मजबूत किया जाता है। यह विभिन्न न्यूरोकेमिकल्स के रिलीज के माध्यम से होता है। चूंकि कॉर्टेक्स क्षेत्र में न्युरान कनेक्शन बढ़ जाते हैं, इसलिए इससे याद्दाशत् और ध्यान अवधि में सुधार होता है, और तनाव कम होता है, कॉर्टेक्स क्षेत्र के सभी कार्य में सुधार होता है।

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विभिन्न रोगों और स्थितियों से लड़ने में माइंडफुलनेस के लाभ क्या हैं?

माइंडफुलनेस मेडिटेशन के क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध अपेक्षाकृत नया है। इसके बारे में कई अध्ययन चल रहे हैं और उनके परिणामों पर सक्रिय रूप से बहस की जा रही है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर सचेतन की प्रभावशीलता को मापने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक व्यक्तिपरकता शामिल है। आप एक रोज अभ्यास करने वाले और किसी ऐसे व्यक्ति के बीच अंतर कैसे करते हैं, जिसने अभी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में माइंडफुलनेस का अभ्यास करना शुरू किया है? माइंडफुलनेस की विभिन्न परिभाषाओं और विभिन्न शोधकर्ताओं के बीच आम सहमति बनाना भी एक चुनौती है।

एैसा कहा जाता है कि, ब्रेन इमेजिंग के क्षेत्र में प्रगति से माइंडफुलनेस के वैज्ञानिक अध्ययन में कुछ वस्तुनिष्ठता आयी है। उदाहरण के लिए, फंक्सनल मैग्नेटिक रेसोनेन्स इमेजिंग (एफएमआरआई) का उपयोग करके, वैज्ञानिक मस्तिष्क तरंगों के रूप में दिमाग की गतिविधि को माप सकते हैं। हमारे शरीर और मन पर माइंडफुलनेस के प्रभावों पर कई प्रारंभिक अध्ययनों ने आशाजनक परिणाम दिखाए हैं। इनमें शामिल हैं:

1. तनाव और पुराने दर्द में कमी

एैसे कई सबूत मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि, माइंडफुलनेस का अभ्यास तनाव को कम कर सकता है और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकता है। माइंडफुलनेस-आधारित संज्ञानात्मक चिकित्सा, माइंडफुलनेस मेडिटेशन के साथ संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा को जोड़ती है। नैदानिक अध्ययनों से पता चला है कि यह पुराने अवसाद (डिप्रेशन) के इलाज के लिए प्रभावी हो सकता है। शोध के अनुसार, माइंडफुलनेस तीव्र अवसाद (एक्यूट डिप्रेशन) या चिंता वाले रोगियों में पतन के एपिसोड को कम कर सकता है।

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि, मानसिक स्वास्थ्य पर माइंडफुलनेस का प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य के प्रबंधन और सुधार के अन्य तरीकों के बराबर है। कम से कम, प्रारंभिक अध्ययन तो यही सुझाव देते है। मानसिक स्वास्थ्य पर माइंडफुलनेस मेडिटेशन के प्रभावों की ठीक से जांच करने के लिए अधिक गहन अध्ययनों की आवश्यकता है।

यह कैसे काम करता है:

सैद्धांतिक रूप से बोला जाये, तो माइंडफुलनेस दोहराव वाले विचार-पैटर्न को कम करने लगता है, जिसे चिंतन भी कहा जाता है। क्रोनिक डिप्रेशन और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों वाले रोगियों को दोहराव वाले विचारों के आने का खतरा होता है। माइंडफुलनेस एैसे लोगों को इस तरह के व्यवहार को अधिक कुशलता से नियंत्रित करने में सक्षम बनाता है।

चिकित्सकीय रूप से बोला जाये, तो नियमित माइंडफुलनेस ध्यान, दिमाग के बिंदुओं को जोड़ सकता है। शुरुआती अध्ययनों के अनुसार, माइंडफुलनेस आपके दिमाग के हिप्पोकैम्पस में ग्रे मैटर बढ़ा सकता है। दिमाग का यह क्षेत्र मुख्य रूप से याद्दाश्त और सीखने के लिए जिम्मेदार होता है। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि, माइंडफुलनेस आपके दिमाग के एमिग्डाला में भी ग्रे मैटर को कम कर सकता है। आपके दिमाग का यह क्षेत्र भावनाओं को शक्ल देने के लिए जिम्मेदार होता है। एमिग्डाला में असामान्यताएं अवसाद, चिंता, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और यहां तक कि ऑटिज्म से भी जुड़ी हुई हैं। एमिग्डाला के कार्य को रेगुलेट करके, माइंडफुलनेस मानसिक स्वास्थ्य में सुधार दिखाता है।

2. बेहतर प्रतिरक्षा

कई अध्ययनों से पता चला है कि, माइंडफुलनेस मेडिटेशन से हमारी रोग से लड़ने वाली कोशिकाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब भी हमारे शरीर में वायरस या अन्य हानिकारक जीवों का सामना होता है, तो यह बड़ी संख्या में रोग से लड़ने वाली कोशिकाओं का उत्पादन करता है। रोग से लड़ने के लिए विभिन्न प्रकार की  कोशिकाएं हैं, जैसे टी-कोशिकाएं, एन्टी इंफ्लामेट्री प्रोटीन, इम्यूनोग्लोबुलिन और न्यूट्रोफिल।

एचआईवी-1 के मरीजों के एक छोटे से नियंत्रित परीक्षण में, माइंडफुलनेस से शरीर में टी-कोशिकाओं की गतिविधि को बढ़ता हुआ देखा गया है। टी कोशिकाये, जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, एैसी कोशिकायें होती जो रोगों से लड़ने के लिए अपनी प्रतिरक्षा द्वारा बुलायी जाती हैं। टी-कोशिकाओं की बढ़ी हुई गतिविधि से पता चलता है कि कैंसर से लड़ने में माइंडफुलनेस काफी उपयोगी हो सकता है।

माइंडफुलनेस मेडिटेशन, तीव्र श्वसन संक्रमण (एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन) से लड़ने में भी मददगार होता है। एक छोटे से परीक्षण के अनुसार,वह रोगी जो नियमित रूप से माइंडफुलनेस ध्यान का अभ्यास करते हैं, उनमें इंटरल्यूकिन-8 प्रोटीन और न्यूट्रोफिल के स्तर में सुधार हुआ था। न्यूट्रोफिल सफेद रक्त कोशिकाएं हैं। इंटरल्यूकिन-8 प्रोटीन की अधिक गिनती के साथ, यह पता चलता है कि माइंडफुलनेस प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) में सकारात्मक सुधार कर सकता है।

एक और अध्ययन से पता चलता है कि माइंडफुलनेस मेडिटेशन, रूमेटॉयड आर्थराइटिस के रोगियों में सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर को कम कर सकता है। शरीर में सी-रिएक्टिव प्रोटीन का उच्च स्तर सूजन का संकेत है। एक माइंडफुलनेस मेडिटेशन कोर्स के बाद सी-रिएक्टिव प्रोटीन का कम स्तर यह बताता है कि, माइंडफुलनेस शरीर में सूजन को कम कर सकता है, और रूमेटॉयड आर्थराइटिस वाले लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।

3. उम्र धीरे बढ़ना

जैसे-जैसे कोशिकाओं की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे हम बूढ़े होते जाते हैं। हम लोगों में बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगते हैं, जब हमारी कोशिकाओं की उम्र अधिक हो जाती है और नई कोशिकायें बनना बंद हो जाती है। यह एक प्राकृतिक जैविक घटना है। हालांकि, तनाव, चिंता और बीमारियों जैसे कारकों के कारण सेल एजिंग बढ़ सकती है। इसके अलावा, जिस गति से आपकी उम्र बढ़ती हैं, वह टेलोमेरेस नामक प्रोटीन से प्रभावित होती है, जो आपके क्रोमोसोम के अंत में मौजूद होती हैं। टेलोमेरेस की लंबाई उस गति के विपरीत आनुपातिक है जिस पर आपकी उम्र बढ़ती है।

इस प्रकार, टेलोमेरेस की लंबी संरचनाओं का मतलब है कि आपकी कोशिकाओं की उम्र धीमी है, जो आपकी वृद्धावस्था प्रक्रिया को धीमा कर देती है। छोटे पैमाने पर अध्ययनों से पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से माइंडफुलनेस मेडिटेशन का अभ्यास करते हैं, उनमें टेलोमेरेस संरचनाएं लंबी होती हैं। इस प्रकार, दूसरों की तुलना में उनकी उम्र धीमी हो सकती है।

4. बेहतर संज्ञानात्मक कामकाज

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे दिमाग के संज्ञानात्मक कार्यों में स्वाभाविक गिरावट आती है। संज्ञानात्मक कार्य का मतलब समस्या को सुलझाना, सोच, तर्क, निर्णय लेने, और ध्यान की आपकी क्षमता से है। एैसे बहुत से सबूत है जिनसे पता चलता है कि माइंडफुलनेस बुढ़ापे से जुड़े संज्ञानात्मक गिरावट को धीमा कर सकता है। यह देखा गया है कि माइंडफुलनेस युवा वयस्कों में ध्यान की अवधि और सीखने की क्षमता में सुधार कर सकता है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, तो यह आपके दिमाग की धीमा करने वाली प्रक्रिया को कम करने में उपयोगी हो सकता है। इस संदर्भ में, माइंडफुलनेस दिमाग के संज्ञानात्मक कार्य से जुड़े अल्जाइमर या अन्य स्थितियों को कम करने के लिए एक प्रभावी उपचार साबित हो सकता है।

चेतावनी: बहुत सारे अध्ययन जिनका उद्देश्य माइंडफुलनेस की प्रभावकारिता को मापना है, बहुत छोटे नमूना पर आधारित हैं। हालांकि उन्होंने माइंडफुलनेस से जुड़े सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं, लेकिन उन्हें विभिन्न शारीरिक और मानसिक स्थितियों के लिए सिद्ध वैकल्पिक उपचारों के लिए आधार के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। वास्तव में, इन छोटे अध्ययनों में, माइंडफुलनेस प्रभावकारिता के मामले में उपचार के अन्य रूपों के बराबर था। यह पता चलता है कि, माइंडफुलनेस कुछ स्थितियों के प्रबंधन में मददगार हो सकता है, इसे उपचार के एकमात्र रूप के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

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स्वस्थ वयस्कों में माइंडफुलनेस के लाभ क्या हैं?

माइंडफुलनेस स्वस्थ वयस्कों के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। स्वस्थ वयस्कों में माइंडफुलनेस के कुछ लाभों में शामिल हैं:

1. बेहतर ध्यान और अधिक संज्ञानात्मक लचीलापन

संज्ञानात्मक लचीलापन का मतलब, जल्दी से दो अलग अवधारणाओं के बीच स्विच करने की क्षमता से है। एक शोध अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने अनुभवी ध्यान करने वालों को ध्यान न करने वाले लोगों के विपरीत खड़ा किया। उन्होंने पाया कि अनुभवी ध्यान करने वालों में ध्यान की अवधि बेहतर थी। वे ध्यान भटकाने वाली जानकारी से बचने में भी माहिर थे। इसके अलावा, अनुभवी ध्यानियों में बेहतर संज्ञानात्मक लचीलापन था।

2. बेहतर मेमोरी

एक अध्ययन में, ध्यान करने वाले सैन्य समूह के खिलाफ ध्यान न करने वाले सैन्य समूह को खड़ा किया। दोनों समूह अपने कामकाज के तनाव के एक ही स्तर पर थे। शोध अध्ययन में 2 महीने के माइंडफुलनेस ट्रेनिंग के बाद दोनों समूहों की वर्किंग मेमोरी कैपेसिटी की तुलना की गई। अध्ययन में पाया गया कि ध्यान न करने वाले समूह ने कामकाजी स्मृति क्षमता में गिरावट दिखाई, जबकि ध्यान करने वाले समूह ने इसमें उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई। परिणाम सीधे दिमाग के हिप्पोकैम्पस पर माइंडफुलनेस के सकारात्मक प्रभावों से संबंधित हो सकता है, जिसे इस लेख में पहले ही बताया गया है।

अध्ययन के आधार पर, ऐसा लगता है कि माइंडफुलनेस प्रशिक्षण आपकी याददाश्त और सीखने की क्षमता में सुधार कर सकता है। यह भी पता चलता है कि माइंडफुलनेस काम करने की हानि से भी रक्षा कर सकता है, जोकि तनावपूर्ण वातावरण में काम करने का सीधा परिणाम हो सकता है।

माइंडफुलनेस का अभ्यास कैसे करें?

माइंडफुलनेस का अभ्यास करने के बारे में जाने का कोई एक तरीका नहीं है। बहुत सारी तकनीकें है, और आपको उसे चुनना चाहिए जो आपके लिए सबसे अच्छा काम करती है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन का लक्ष्य ही आपके दिमाग को वर्तमान में मौजूद रहने के लिए प्रशिक्षित करना है। निरंतरता यहां बहुत जरूरी है। जितना अधिक नियमित रूप से आप अपने अभ्यास के साथ हैं, न्यूरोप्लास्टिसिटी के कारणों के वजह से आपको उतना ही बेहतर फल मिलेगा, जैसा कि ऊपर बताया गया है।

माइंडफुलनेस मेडिटेशन की कुछ सबसे आम तकनीकें हैं:

1. केंद्रित साँस

सांस लेते ही आप अपना ध्यान छाती के उठने और गिरने पर केंद्रित करें। जब आप खुद को विचलित पाते हैं, तो सांस लेने की प्रक्रिया पर अपना ध्यान वापस लायें।

2. अपने शरीर को स्कैन करना

वर्तमान में मन को एंकर करने की एक और तकनीक, अपने शरीर को सिर से पैर तक स्कैन करना है। किसी भी निगल्स या दर्द जो आप महसूस कर रहे हैं, उस पर अपना ध्यान केंद्रित करें। जैसे-जैसे आप आराम से होते हैं, अपने पैरों और बाहों को एक-एक करके बढ़ायें और उस पर ध्यान केंद्रित करें।

3. अपने विचारों पर ध्यान देना

आपके मन का भटकना और विचलित होना बहुत स्वाभाविक है। एक प्रमुख माइंडफुलनेस तकनीक, इन विचारों पर नजर रखना है, लेकिन उनके साथ शामिल नहीं होना है। किसी भी सकारात्मक या नकारात्मक विचारों को आपके पास आते ही न लड़ें। हालांकि, यह कहने में आसान हो सकता है। यह माइंडफुलनेस तकनीक अधिक अनुभवी चिकित्सकों के लिए अधिक उपयोगी हो सकती है।

4. विजुअलाइजेशन

अपने मन को एंकर करने के लिए एक-एक चीज, विचार या व्यक्ति पर ध्यान दें। उन्हें अपने सामने होने की कल्पना करें और आप कैसा महसूस कर रहे हैं उस पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें। यहां फिर से, यह महत्वपूर्ण है कि आप उनसे लड़ने की कोशिश न करें जिन्हे आप महसूस कर रहे हैं। यहाँ पर लक्ष्य भावनाओं के साथ उलझाने के बजाय उन पर ध्यान केंद्रित करना है।

शुरुआत में, इनमें से कोई भी अभ्यास बहुत चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शुरुआत करने वाले के लिए, छोटे से शुरू करना महत्वपूर्ण है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन के 5 से 10 मिनट के साथ शुरू करें। जैसे-जैसे आप अधिक आराम महसूस करते हैं, इसकी अवधि में बढ़ोत्तरी करें, हर रोज एक घंटे तक करें। यदि आपको 5-10 मिनट का माइंडफुलनेस प्रशिक्षण मुश्किल भी लगता है, तो एक मिनट के अभ्यास के साथ शुरू करें। यह चॉकलेट के एक टुकड़े को ध्यान से खाने जैसा सरल हो सकता है। इसे काटें, धीरे-धीरे, इसके हर बिट का स्वाद लें। इसके बनावट और स्वाद पर ध्यान केंद्रित करें।

एक अन्य विचार एक मिनट के लिए ध्यान से सांस लेना है। एक आरामदायक कुर्सी में बैठ जायें, और एक मिनट के लिए, अपनी सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करें। जैसे-जैसे आप अधिक आरामदायक होते हैं, अवधि बढ़ाएं।

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अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में माइंडफुलनेस को कैसे शामिल करें?

हम में से ज्यादातर लोग बहुत व्यस्त जीवन व्यतीत करते हैं। हर किसी के लिए यह संभव नहीं हो सकता है कि वह 45 मिनट हर रोज माइंडफुलनेस प्रशिक्षण के लिए समर्पित करे। हालांकि, जरूरी नहीं कि आपको माइंडफुलनेस का अभ्यास करने के लिए अलग से समय निर्धारित करना पड़े। आप अपने रोजमर्रा के कार्यों को करते समय समय ऐसा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब आप सुबह अपने दांतों को ब्रश कर रहे हों तो माइंडफुलनेस का अभ्यास करें। टूथब्रश की गति, उसकी आवाज, और यह आपके दांतों पर कैसा लगता है, इस पर ध्यान केंद्रित करें। यहां आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में माइंडफुलनेस को शामिल करने के कुछ अन्य आसान तरीके दिए गए हैं:

1. जब आप जागते हैं तो इसका अभ्यास करें। अपने बिस्तर से उठने से पहले बैठ जाएं, अपनी आंखें बंद करें और वर्तमान में अपने दिमाग को एंकर करें। ऊपर बताई गई किसी भी तकनीक से मदद लें।

2. जब आप इंतजार कर रहे हों तो इसका अभ्यास करें। हो सकता है कि आप किसी को दिखाने के लिए, या मीटिंग शुरू करने के लिए इंतजार कर रहे हों। वर्तमान में रहने पर अपने मन को प्रशिक्षित करने के लिए इस समय का उपयोग करें। अपने आसपास की चीजों पर ध्यान दें, जिस तरह से चीजें दिखती हैं, वे कैसे गंध करते हैं, और वे आपको कैसा महसूस कराते हैं।

3. अपने आप को और अधिक जागरूक होने के लिए याद दिलाने के लिए एक संकेत का उपयोग करें। एक संकेत आपके कार्यालय के डेस्क पर मौजूद कोई वस्तु हो सकती है, आपके घर में एक निश्चित दरवाजा, या यहां तक कि एक निश्चित दुकान जहाँ से हर रोज काम पर जाने के लिए निकलते हैं। जब भी आप कोई संकेत देखते हैं, तो वर्तमान क्षण में अपने मन को एंकर करें।

गाइडेड माइंडफुलनेस के लिए सबसे अच्छे उपकरण क्या हैं?

हमारा दिमाग बहुत जटिल अंग है। इसे प्रशिक्षित करना काफी कठिन हो सकता है। इसलिए, आपको निर्देशित माइंडफुलनेस प्रशिक्षण की आवश्यकता हो सकती है, खासकर यदि आप शुरुआत कर रहे हैं। यहां माइंडफुलनेस प्रशिक्षण के लिए कुछ बेहतरीन उपकरण दिए गए हैं:

1. हेडस्पेस

यह सबसे प्रसिद्ध मेडिटेशन ऐप है। 2010 में लॉन्च होने के बाद से, इसने दुनिया भर में 60 मिलियन लोगों का एक विशाल उपयोगकर्ता आधार प्राप्त किया है। ऐप एक फ्रीमियम मॉडल पर काम करता है। पेड सब्सक्रिप्शन आपको ऑफलाइन एक्सेस के लिए डाउनलोड करने का विकल्प सहित सैकड़ों माइंडफुलनेस अभ्यासों तक पहुंच प्रदान करता है। हेडस्पेस के लिए भुगतान की गई सदस्यताएं प्रति माह $ 12.99 से शुरू होती हैं।

2. काॅल्म

यह एक और ऐप है जो आईओएस के साथ-साथ एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं के लिए भी उपलब्ध है। इसने शुरुआती, मध्यवर्ती और उन्नत के लिए माइंडफुलनेस कार्यक्रमों का मार्गदर्शन किया है। ऐप में मूड चेक-इन फीचर भी है, जो आपको इस बात पर चिंतन करने की अनुमति देता है कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं। हालांकि, ऐप में फ्री टियर में बहुत सीमित कंटेंट है। आपको अधिकांश ऐप बनाने के लिए सदस्यता लेनी होगी। सदस्यता प्रति माह $ 12.99 से शुरू होती है।

3. कोर्सेरा पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम

कोर्सेरा पर कई सारे माइंडफुलनेस पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं,जोकि एक ऑनलाइन प्लेटफा्र्म है। इन पाठ्यक्रमों को येल विश्वविद्यालय और नेथरलेंड के लीडेन विश्वविद्यालय जैसे सम्मानित विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों द्वारा पढ़ाया जाता है।