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योग मुद्रा- सेतु बंध सर्वांगासना (पुल मुद्रा)

सेतु बंध सर्वांगासना (पुल मुद्रा)

 

सेतु बंध सर्वांगासना (पुल मुद्रा) के लाभ

• यह आसन आपके सामने के शरीर को खींचने में मदद करता है, जांघों, कूल्हों, पेट और छाती को।

• यह पीठ के शरीर को मजबूत करने में मदद करता है- विशेष रूप से रीढ़, ग्लूट्स, पैर और पीठ को।

• यह पाचन में सुधार करने और शरीर को सक्रिय करने में मदद करता है।

• यह कोर और शरीर के निचले हिस्से को मजबूत बनाता है।

• यह एंडोक्राइन और नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है।

 

स्टेप:

क) आप अपनी पीठ के बल लेटकर, अपने दोनों घुटनों को मोड़कर, और अपने पैरों को फर्श पर कूल्हे जितनी चौड़ाई रखते हुए, इस आसन को शुरू कर सकते है।

ख) आप अपने हाँथो को, हथेलियाँ नीचे करते हुये शरीर के साथ रख सकते हैं। उंगलियों को इस समय लगभग हील्स को छू जाना चाहिये।

ग) अगला, जब आप अपने पैरों को फर्श पर धीरे से प्रेस करते हैं, धीरे से साँस ले और अपने कूल्हों को ऊपर उठायें, अपनी रीढ़ की हड्डी फर्श से ऊपर उठायें।

घ) अपने घुटनों को एक साथ दबाये, जिससे की वह कूल्हे जितनी चौड़ाई बनाते हुये अलग रहें।

ड़) अब, छाती उठाने के लिए धीरे-धीरे अपनी बाहों और कंधों को दबाएं। अपने पैरों और कूल्हों को अपने जितना हो सके उतना ऊंचा उठाने के लिए संलग्न करें।

च) सांस लें और 4-8 साँस के लिए पकड़कर रखें, फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए रीढ़ को वापस फर्श पर छोड़ दें।

 

संशोधन:

• शुरुआत में, आप सबसे कम ऊंचाई वाले योग ब्लॉक का उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यह इसे जेंटलर बनाने में मदद करेगा और स्थिरता प्रदान करेगा।

• आप गर्दन और ऊपरी रीढ़ पर दबाव को कम करने के लिए कंधे और गर्दन के नीचे एक कंबल भी रख सकते हैं।

• यदि आपको लगता है कि आपकी पीठ के निचले हिस्से में पर्याप्त लचीलापन नहीं है, तो आप एड़ियों के चारों ओर अपनी बाहों का उपयोग करके इसे रोककर रख सकते हैं, जिससे ऊपर जाने के लिए और रहने के लिए आवश्यक सपोर्ट मिलता है।

 

सावधानियाँ:

• अगर आप गर्दन दर्द से पीड़ित हैं तो इस पोज को करने से बचें।

• जिन मामलों में पीठ में चोट लग रही है, वहां इस आसन से बचें।

• अगर आपको घुटने का दर्द हो रहा है तो आपको योगा पोज को जरूर छोड़ देना चाहिए।

• अगर प्रैक्टिशनर को कंधे की चोट है तो आसन से बचना जरूरी है।

• पोज में रहते हुए अपने सिर को दाएं या बाएं मोड़ने से बचें।

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