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माइग्रेन के लिए योग

योग और माइग्रेन क्या है?

योग एक प्राचीन प्रथा है, जिसकी उत्पत्ति भारत में हुई थी। यह जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद करता है, तथा माइग्रेन से जुड़े सिरदर्द की गंभीरता और दवाओं की लागत को कम करता है।

योग, माइग्रेन से पीड़ित व्यक्तियों का इलाज करते हुए, एक सहायक चिकित्सा के रूप में काम करता है।

माइग्रेन टीस की तरह उठने वाले दर्द के रूप में अनुभव किया जाता है। यह आम तौर पर सिर के एक तरफ होता है। यह प्रकाश (फोटोफोबिया), ध्वनि (फोनोफोबिया), और मतली या उल्टी की संवेदनशीलता के साथ जुड़ा हो सकता है।

योग माइग्रेन के साथ कैसे मदद करता है?

योग, में अलग-अलग आसन और साँस अभ्यास करने से दिमाग को शांत करने में मदद मिलती है, और माइग्रेन से जुड़े लक्षणों से छुटकारा मिलता है।

योग, हार्मोनल स्तर को रेगुलेट करने में मदद करता है, और कोर्टिसोल के स्तर को कम करता है, इसलिए तनाव का स्तर कम हो जाता है।

यह स्वस्थ मन और शरीर के बीच सही संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

यह एंजियोटेन्सिन II और नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को कम करके, और पल्स रेट (वागल उत्तेजना) को कम करके, दिमाग (पैरापेथेम्पोटिक तंत्रिका तंत्र) पर काम करता है। यह मांसपेशियों को आराम देने, दर्द से राहत देने और माइग्रेन से जुड़े सिरदर्द के इलाज के लिए जरूरी दवा की खुराक को, कम करने में मदद करता है।

नियमित अभ्यास माइग्रेन के ट्रिगर और गंभीरता को रोकने में मदद करता है। यह दवाओं की लागत को कम करने में, उचित लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक बहुत प्रभावी तरीका है। योग थेरेपी से तनाव और सिरदर्द को मैनेज करने में भी अच्छे परिणाम आते हैं।

योग के लाभ

• तनाव के स्तर में कमी।

• चिंता दूर करता है।

• हृदय गति (हार्ट रेट) में सुधार करता है।

• जीवन की अच्छी गुणवत्ता को प्राप्त करने में मदद करता है।

• शरीर की साँस, समग्र शक्ति और लचीलेपन में सुधार करता है।

• माइग्रेन की तीव्रता को कम करता है।

• दवा की खुराक को कम करता है।

माइग्रेन के इलाज के लिए आसन

 

• उत्तनासना (स्टैन्डिंग फार्वर्ड बेन्ड)

1. एक चटाई पर पैरों का सीथा करके खड़े हो जायें।

2. फिर अपने घुटनों को सीधा रखते हुए नीचे झुकें।

3 घुटनों और रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए, अपने हाथों से अपनी एड़ियों को पकड़ने की कोशिश करें।

4. सांस लेते समय, अपने पैरों को खींचने और अपनी रीढ़ को सीधा करने की कोशिश करें।

5. साँस छोड़ने के दौरान, अपने पैरों की ओर माथा लाने और इसी मुद्रा में बने रहने की कोशिश करे। जब तक आप कर सकते हैं, तब तक करें।

 

• बिटासना (कैट पोज)

1. टेबलटॉप स्थिति में जायें, अपने हाथों और घुटनों पर रहें।

2. रीढ़ की हड्डी को न्युट्रल स्थिति में रखें।

3. हाथ, कलाई और कंधे एक ही पंक्ति में होना चाहिए।

4. मुड़े हुये घुटनें कूल्हे के साथ सीध में होने चाहिए।

5. साँस छोड़ते समय, अपनी पीठ को छत की ओर एक गोल आकार में  मेहराब की तरह मोड़ें। अपने पेट को अंदर की ओर खींचे, और अपने सिर को छाती की ओर अंदर कर्ल करें (म्याँउ करते हुये बिल्ली की तरह) ।

6. साँस लेते समय, आराम करें और सिर छत की ओर करते हुये टेबलटॉप स्थिति में वापस जाएं।

 

• सेतु बंध सर्वान्गासना (ब्रिजिंग)

1. दोनों घुटने मोड़कर लेट जायें।

2. पैर चटाई/फर्श पर रखें।

3. हथेलियों को ऊपर की ओर करते हुये, अपनी बाहों का विस्तार करें।

4. अपने पेट पर ध्यान केंद्रित करें, इसे अंदर खींचें और अपने बाॅटम को उठाएं। अपने पेट को इंगेज रखें, और बाॅटम उठाते समय कंधे नीचे होने चाहिए।

5. 10 सेकंड के लिए इसी स्थिति में बने रहें, और फिर नीचे जायें। 10 बार दोहराएं।

 

• बालासना (चाइल्ड्स पोज)

1. अपने पैरों को पीछे मोड़कर आराम से बैठें।

2. अपनी एड़ी पर अपने कूल्हों को आराम दें। पैर फर्श को छूने चाहिए।

3. पैर अंगूठे को एक दूसरे को छूने चाहिए।

4 अपने घुटनों को अलग करें, और अपनी जांघों के बीच अपनी छाती को नीचे लाएं।

5. अपनी बाहों को फैलायें।

6. आपके माथे और हथेलियाँ जमीन/चटाई को छूनी चाहिए।

7. बार-बार गहरी सांस लें।

 

• पासीमोत्तना (सीटेड फार्वर्ड बेन्ड)

1. अपने पैरों को सामने की ओर फैलाते हुये चटाई/फर्श पर सीधे बैठें।

2. अपने बाॅटम और जांघों को चटाई/फर्श के संपर्क में रखना सुनिश्चित करें।

3 पूरे एक्सरसाइज के दौरान अपने पैरों को सीधा रखें।

4. जहां तक संभव हो, अपनी बाहों को फैलाएं, अपने पैरों को पकड़ने की कोशिश करें। अपनी पिंडलियों की माँसपेशियों की ओर रखें।

5 अपनी रीढ़ को, कूल्हे के जोड़ के स्तर तक लंबा रखें और फैलाएं।

6. साँस लेते समय, अपने पैरों को खींचने और अपनी रीढ़ को सीधा करने की कोशिश करें।

7. साँस छोड़ने के दौरान, अपने पैरों की ओर अपना माथा लाने और उसी मुद्रा में बने रहने की कोशिश करें। जब तक आप कर सकते हैं, तब तक रहें।

 

• अधोमुखस्वनासना (डाउनवर्ड फेशिंग डॅाग पोज)

1. टेबलटॉप स्थिति के साथ शुरू करें।

2. फिर अपने घुटनों को उठाएं।

3. पैरों को सीधा करें और अपने घुटनों को झुकाने से बचें।

4. नीचे की ओर हथेलियों के साथ अपनी बाहों को फैलाएं।

5. अपनी पीठ को आराम दें और अपने शरीर को “A” रूप में लाएं।

6. 10 सेकंड के लिए इसी मुद्रा में बने रहें। टेबलटॉप स्थिति में वापस आयें, और दोहराएं।

 

• पद्मसाना (लोटस पोज)

1. चटाई पर सीधा बैठें।

2. अपनी पीठ को सीधा रखें।

3. आराम करें और अपने कंधों नीचे रखें।

4. अपने हाथ नमस्ते की मुद्रा में रखें।

5. अपने पैरों को मोड़ें और उन्हें आर-पार करें।

6. पैरों को आर-पार करते हुये और अपनी जांघों पर रखें।

7. मुद्रा (पोज) को बनाये रखते हुये अपनी सांस लेने पर ध्यान दें।

8. 10-15 बार दोहराएं

 

• शवासना (कोर्प्स पोज)

1. अपनी हथेलियों को छत की ओर रखते हुए, अपनी पीठ के बल लेट जाएं।

2. अपनी आँखें बंद करें।

3. अपने पूरे शरीर को आराम दें।

4. पांच से तीस मिनट तक इसी मुद्रा में रहें।

अधिक जानें …

माइग्रेन को रोकने के अतिरिक्त तरीके

नियमित रूप से (4-6 महीने) योग अभ्यास करते समय, बेहतर परिणाम प्राप्त करने  के लिए, नीचे दिये गये कुछ सुझावों को शामिल करने का प्रयास करें।

• अपने आहार का ध्यान रखें: चॉकलेट, स्वाद बढ़ाने वाले, ज्यादा चीनी, प्रसंस्कृत (प्रोसेस्ड) भोजन, और खट्टी क्रीम, दही, या छाछ जैसे किण्वित (फर्मेन्टड) डेयरी उत्पादों से बचें।

• अपने शराब का सेवन सीमित करें: शराब का सेवन करने से बचें, विशेष रूप से वाइन।

• अपने कैफीन का सेवन सीमित करें।

• एक्यूप्रेशर की कोशिश करें- शरीर में कुछ प्रेशर पॉइंट माइग्रेन से जुड़े सिरदर्द को दूर करने में मदद करते हैं।

• पुदीना और लैवेंडर तेल जैसे तेलों का उपयोग करना: ये सिरदर्द से राहत पाने में मदद करते हैं। इन्हें माथे और कनपटी के ऊपर लगाएं।

• अदरक की चाय पीएं- अदरक की चाय सिर दर्द की गंभीरता को कम करने में मदद करती है, और उल्टी की भावना को भी कम कर सकती है, जो कभी-कभी माइग्रेन से जुड़ी होती है।

योग करने से कब बचें?

योग यदि पर्यवेक्षण के अंतर्गत या प्रशिक्षित किए जाने के बाद किया जाता है, तो इसका कोई मतभेद या कोई रिकार्डेड प्रतिकूल दुष्प्रभाव नहीं पाया गया है। इन स्थितियों में योग करने से बचने की सलाह दी जाती हैः

• माइग्रेन अटैक के दौरान प्रदर्शन करने से बचें, क्योंकि इससे स्थिति बिगड़ सकती है।

• कुछ व्यक्तियों में, यह माइग्रेन के लिए ट्रिगर के रूप में भी कार्य कर सकता है। योग करने से पहले डॉक्टर और अपने योग ट्रेनर से सलाह लें।

• फेफड़ों की परेशानियों (न्यूमोथोरेक्स या प्लूरल एफ्यूजन), जो सांस लेने के अभ्यास के साथ बढ़ सकती हैं।

• हाल ही में पेट की सर्जरी का इतिहास।

• हड्डी की स्थिति जैसे फ्रैक्चर या ट्यूमर।

इस लेख के पीछे अनुसंधान:

1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4097897/
2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4540885/
3. M, Kaliappan KV: The efficacy of yoga therapy in the treatment of migraine and tension headaches. J Indian AcadApplPsychol, 1987, 13: 95–100.
4. Sharma N, Singhal S, Singh A, et al. : Effectiveness of integrated yoga therapy in treatment of chronic migraine: randomized controlled trial. J Headache Pain, 2013, 14: 1.

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