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प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) के लिए योग

योग शरीर की मदद कैसे करता है?

योग एक अभ्यास है, जिसके कई सारे स्वास्थ्य लाभ है। यह जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद करता है।

योग में कई क्रियायें होती हैं, जिनमें शरीर के खिंचाव से लेकर ध्यान तथा साँस के अभ्यास शामिल है।

इन क्रियाओं से प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) में काफी सुधार होता है। यह तनाव को कम करके प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को मजबूत करता है। कैंसर और एचआईवी रोगियों में भी योग और ध्यान का अभ्यास करने से तनाव के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभावों में कमी होती है।

योग मांसपेशियों को फैलाने में मदद करता है, शरीर के हिस्सों में नया खून पहुंचाता है, और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने के लिए क्या आसन हैं?

कुछ आसन जो एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) बनाने में मदद कर सकते हैं, नीचे दिये गये हैं। उन्हें करने के तरीके और उनके फायदे भी बताए गए हैं।

 

बालासना

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इसे बच्चे की मुद्रा भी कहते है, यह पीठ की मांसपेशियों के खिंचाव में मदद करता है।

स्टेप:

• टखनों पर शरीर को आराम देते हुए एड़ी पर बैठें।

• धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और अपने माथे को फर्श पर रखें।

• बाहों को और आगे बढ़ाएं और उन्हें सिर के सामने फर्श पर रखें।

• धीरे-धीरे छाती को घुटनों पर सिकोड़ें।

• सांस सही से बनाये रखें और कुछ सांसों के लिए आसन को बनाये रखें।

• धीरे-धीरे उठें और बैठने की स्थिति में लौटें।

लाभ:

• यह छाती में भारीपन को कम करने में मदद करता है।

• यह पीठ की मांसपेशियों को फैलाता है और आराम देता है।

• कब्ज को कम करने में मदद करता है।

सावधानी: गर्भवती महिलाओं को इस आसन को करने से बचना चाहिए।

भुजंगासना

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इसे हम कोबरा मुद्रा के नाम से भी जानते है, यह आसन पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को फैलाता है।

स्टेप:

• पेट के नीचे रखते हुए फर्श पर लेट जाएं।

• हथेलियों को छाती के बगल में रखें और पैर एक-दूसरे के करीब रखें।

• सांस लेते समय, बाहों को फैलाएं और शरीर को ऊपर की ओर खींचे, निचले शरीर को जमीन पर बनाए रखें।

• नियमित रूप से और धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते समय इस स्थिति में बने रहें।

• कुछ साँस के लिए स्थिति बनाए रखने के बाद, आराम करें और धीरे-धीरे जमीन पर सीधा लेटने के लिए नीचे आएं।

• सलम्ब भुजंगासना जैसे अन्य दूसरे आसनों को भी किया जा सकता है, जहां शरीर को जमीन पर आगे की भुजाओं के साथ कोहनी पर सपोर्ट किया जाता है।

लाभ:

• गर्दन, पीठ, कंधे और पेट की मांसपेशियों में लचीलापन और ताकत प्रदान करता है।

• खून के दौड़ान को बेहतर बनाता है, तनाव को कम करता है और सफेद रक्त कोशिकाओं को रिलीज करके प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) बढ़ाता है।

• यह छाती के विस्तार में सुधार करता है, और फेफड़ों को बाहर निकालते समय फेफड़ों की गतिशीलता में भी मदद कर सकता है।

 

सेतु-बंधासना

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इसे ब्रिज पोज भी कहा जाता है। यह एक बैक स्ट्रेचिंग व्यायाम है।

स्टेप:

• ऊपर की ओर देखते हुए फर्श पर लेट जाएं, और घुटनों को मोड़ें।

• शरीर के बगल में भुजाओं को रखें।

• सांस लें और धीरे-धीरे नितंबों को जमीन से ऊपर की और धक्का दें।

• गर्दन को फर्श पर रखें और पेट को इस तरह से मूव करें कि छाती ठोड़ी के करीब पहुंच जाए।

• गर्दन, पैर और बाहों का उपयोग करके शरीर के लिए सपोर्ट बनाए रखें।

• इस स्थिति में रहें और सांस लें। कोर को शामिल करने के लिए सांस लेते समय आप और खिंचाव पैदा कर सकते है।

• सांस छोड़ते समय धीरे-धीरे शरीर को नीचे लाएं और जमीन पर लेट जाएं।

लाभ:

• यह कोर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है।

• यह खून के दौड़ान को बेहतर बनाने में भी मदद करता है, जोकि ब्लड शुगर के स्तर को कम कर सकता है।

 

ताड़साना

yoga tadasana scaled

इसे माउंटेन पोज भी कहा जाता है और यह एक बुनियादी आसन है जिसे हर कोई कर सकता है।

स्टेप:

• जमीन पर एड़ी और पंजों के साथ खड़े हो जाएं।

• अपनी बाहों को एक साथ इंटरलॉक करें और खड़े होते समय इसे सिर से ऊपर उठाएं।

• अब धीरे-धीरे सांस लें और एड़ी को जमीन से ऊपर उठाएं, और पैर की उंगलियों पर शरीर रखें।

• एड़ी को ऊपर उठाने के दौरान, रीढ़ की हड्डी को बढ़ाते हुए, बाहों को आगे खींचने की कोशिश करें।

• कोई भी इस स्थिति को कुछ सेकंड के लिए बनाये रख सकता है।

• सांस छोड़ें और उसे धीरे-धीरे छोड़ते जायें, एड़ी को जमीन पर छूते हुए और शुरुआती स्थिति में वापस आयें।

• अन्य विविधताओं में, एड़ी को नीचेे रखा जा सकता है और हाँथों को नीचे  की ओर करते हुए बाहर की ओर फैलाया जा सकता है।

लाभ:

• यह शरीर के संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करता है।

• यह मांसपेशियों को स्ट्रेच करने और शरीर को आराम देने में भी मदद करता है।

• इस आसन से तनाव दूर हो सकता है और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे कार्डियो पल्मोनरी फंक्शन में सुधार होता है।

 

उत्कतआसना

yoga utkatasana

इसके कुर्सी मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है।

स्टेप:

• आप इसे आसन को सरल ताड़ासन के साथ शुरु करें।

• घुटनों को झुकाकर और कूल्हे को बाहर की ओर धकेलकर गहराई से सांस लेंते हुए पालथी मार कर बैठ जाएं।

• काल्पनिक कुर्सी पर बैठने का दिखावा करें।

• इस पोजीशन को कुछ समय के लिए बनाये रखें।

• सांस छोड़ते हुए और धीरे-धीरे शुरुआती ताड़ासन स्थिति में वापस लौटते हुए खड़े हो जाएं।

लाभ:

• पैर के व्यायाम की तरह, यह पैर की मांसपेशियों, विशेष रूप से जांघ की मांसपेशियों की मुख्य ताकत को बढ़ाता है।

• यह सहनशक्ति में भी सुधार कर सकता है क्योंकि आसन को बनाए रखने के लिए मांसपेशियों में ताकत की आवश्यकता होती है।

त्रिकोनासना

yoga-triangle-pose

इसे त्रिकोण मुद्रा भी कहा जाता है, क्योंकि “ट्राइकॉन” शब्द ट्राएंगल में अनुवाद करता है।

स्टेप:

• पैरों को एक दूसरे से कुछ दूरी पर रखकर, उल्टा वी बनाते हुए खड़े हो जायें।

• कंधे के साथ एक सीधी रेखा को बनाए रखते हुए हाथ को बाहर की ओर फैलाएं।

• एक गहरी सांस लें और ऊपरी शरीर को एक तरफ घुमाते हुए बग़ल में इस तरह से मोड़ें कि एक हाथ पिंडली को छू जाए और दूसरा सीधे ऊपर की ओर हो।

• इस आसन को कुछ सेकंड या कुछ सांस के लिए बनाए रखें।

• साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में वापस लौटें।

• साँस अंदर लें और आसन को दूसरी तरफ घुमाकर करें।

लाभ:

• यह संतुलन की भावना प्रदान करता है और यह पेट की मांसपेशियों को शमिल करता है।

• यह खून के दौड़ान को बढ़ाता है, पाचन में सुधार करता है और ब्लड शुगर के स्तर को कम करके डायबिटीज में मदद करता है।

विपरीत करणी

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यह आसन सरल है और इसे दीवार के ऊपर पैर के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है।

स्टेप:

• एक दीवार से कुछ फीट दूर जमीन पर लेट जाएं।

• धीरे-धीरे पैरों को उठाकर दीवार पर रखें। पैरों के साथ दीवार के बराबर की स्थिति तक पहुंचें, जैसे 12 बजे का इशारा करती हुयी घड़ी।

• इस आसन को कुछ मिनटों तक बनाए रखें और धीरे-धीरे सांस लेते रहें।

• गर्दन और सिर को ठीक से आराम देते हुए कूल्हे को थोड़ा उठाने की कोशिश करें।

• हैमस्ट्रिंग या पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर बहुत ज्यादा जोर न डालें।

• सही सांस लेते हुए धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में वापस लौटें।

लाभ:

• यह पैरों से लिम्फ तरल पदार्थ को बाहर निकालने में मदद कर सकता है।

• यह पैरों से ऊपरी शरीर तक खून के दौड़ान में भी सुधार कर सकता है, और उन पर गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव को कम कर सकता है।

• गुरुत्वाकर्षण आधारित और समर्थित व्यायाम, ऊर्जा का स्तर कम होने पर उपचार लाभ प्रदान कर सकते हैं।

 

उत्तानासना

yoga-uttanasana

इसे फॉरवर्ड बेन्ड भी कहा जाता है, और इसे करना काफी आसान है।

स्टेप:

• अपने पैरों को हिप दूरी रखते हुए सीधे खड़े हो जाएं।

• अब सांस लेते समय धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और जांघ और कूल्हे की मांसपेशियों को आराम दें।

• आप हाँथो को फर्श पर, घुटने पर, जांघ पर रख सकते हैं या पैर की उंगलियों को पकड़ सकते है।

• इस आसन को कुछ सासों तक बनाए रखें।

• बाहर की ओर सांस लें और धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में लौटें।

लाभ:

• उलटा व्यायाम साइनस के प्रवाह में सुधार करके भारीपन को दूर करने में मदद करता है, और बलगम झिल्ली को स्वस्थ रखने के लिए फेफड़ों को साफ करता है।

• यह पीठ की मांसपेशियों के लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

गरुड़ासना

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इसे ईगल पोज भी कहा जाता है और इसमें पैर और बाहों की मांसपेशियों का इस्तेमाल होता है।

स्टेप:

• कुर्सी मुद्रा में जाकर शुरू करें और घुटनों को मुलायम रखें।

• वजन को बाएं पैर पर डालें और दाएं पैर को उठाएं, दाएं जांघ को बाईं जांघ पर रखें।

• अब दाएं पैर को बाएं पैर के चारों ओर लपेटें, बाएं पिंडली की मांसपेशी पर दाहिने टखने की कुंडी लगाएं।

• बाहों को ऊपर उठाएं और एक-दूसरे के चारों ओर हाँथों को इस तरह मोड़ें कि हथेलियां एक साथ आएं।

• जो भी पैर ऊपर रहता है; उसका दूसरी तरफ का हाथ ऊपर रहना चाहिए।

• पूरे आसन में सांस लेने का उचित चक्र बनाए रखना सुनिश्चित करें।

• साँस छोड़ते समय, बाहों को धीरे-धीरे पहले खोलें और फिर पैरों को खोलकर, खड़े होने की स्थिति में वापस पहुंचें।

लाभ:

• यह कंधे की मांसपेशियों को आराम और खिंचाव में मदद करता है जो रोज के तनाव को दूर करने में मदद करता है।

• यह इसमें शामिल सभी मांसपेशियों की ताकत में सुधार करता है।

• शरीर के संतुलन में भी सुधार होता है।

कुरमासना

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इसे कछुआ मुद्रा भी कहा जाता है, जो इसके संस्कृत नाम का अनुवाद है। यह एक जटिल और उन्नत आसन है जिसमें अभ्यास की आवश्यकता है।

स्टेप:

• अपने पैरों को अलग रखकर और शरीर को सीधा रखते हुए बैठ जायें।

• घुटनों और ऊपरी शरीर को आगे की ओर मोड़ें और हाथों को घुटनों के नीचे रखें।

• धीरे-धीरे ऊपरी शरीर को घुटनों के साथ नीचे लायें।

• कंधे को घुटनों से नीचे होना चाहिए और नीचे देखते समय ठोड़ी और छाती को जमीन पर छूने के लिए धीरे से नीचे धकेल देना चाहिए।

• ऊपरी शरीर को पसलियों के किनारे को छूने वाली भीतरी जांघों से नीचे झुकना चाहिए।

• पूरे आसन में एक उचित श्वास चक्र बनाए रखें और इसे कुछ सेकंड के लिए धारण करें।

• धीरे-धीरे शुरुआती स्थिति में वापस आते समय सांस छोड़ते हुए आराम करें।

लाभ:

• यह लचीलापन में सुधार करता है, गर्दना को खींचता है और खून के दौड़ान में सुधार करता है, कंधे, पीठ और पैर की मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है।

• यह थाइमस ग्रंथि को सपोर्ट करता है, और प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में सुधार करता है।

 

जो लोग योग करते हैं,  उनमें योग नहीं करने वाले लोगों की तुलना में तनाव का स्तर कम स्वाभाविक रूप से कम होता है।

योग आसन कई सारी बिमारियों से लड़ने में मदद करता है, जिसमें डायबिटीज भी शामिल है। यह दिल के कामकाज, श्वसन में सुधार करता है। यह कैंसर और गठिया के खिलाफ लड़ने में मदद करता है।

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