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डिप्रेशन (अवसाद) के लिए योग

डिप्रेशन (अवसाद) क्या है?

अवसाद मन की एक ऐसी स्थिति है, जहां नकारात्मक विचार आपके दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, और जीवन की गुणवत्ता में बाधा डालते हैं।

यह मानसिक बीमारी के सबसे आम कारणों में से एक है, जो किसी के मन, मनोदशा और चीजों को करने की क्षमता की स्थिति को प्रभावित करता है।

डिप्रेशन किस तरह सामने आता है?

लक्षण

• अपराध बोध या बेकारपन की भावना

• एकाग्रता में कमी

• फैसले न ले पाना

• किसी भी बात के बारे में सही महसूस न करना

• आत्महत्या का विचार आना

• लगातार हल्का, थका हुआ या थकान महसूस करना

• कुछ भी करने में रुचि की कमी

• वजन में महत्वपूर्ण परिवर्तन, कम या ज्यादा सकता है

• भूख न लगना या अधिक भोजन करना

डिप्रेशन शरीर को कैसे प्रभावित करता है?

डिप्रेशन का शरीर पर मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और भावनात्मक प्रभाव पड़ता है। यह विभिन्न तरीकों से सामने आता है। उनमें से कुछ नीचे दिये गये हैं।

• उदासी या खालीपन की भावना

• नींद न आना, सोने में परेशानी

• याद्दाश्त या निर्णय लेने के साथ समस्या

• घबड़ाहट का कारण

• दिल का दौरा पड़ने का खतरा

• रिश्ते की समस्यायें, सामाजिक अलगाव की समस्या पैदा करता है, या खुद को नुकसान पहुँचाने की कोशिश

• वजन में उतार-चढ़ाव

• प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है

• ऊर्जा का कम स्तर

• दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है

योग डिप्रेशन में कैसे मदद करता है?

योग के विभिन्न प्रकारों का प्रदर्शन करके, कोई भी अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। इसमें कई  मुद्रायें (आसन), श्वास अभ्यास (प्राणायाम), विश्राम (शावा आसन), और मध्यस्थता तकनीक (ध्यान) का उपयोग आदि शामिल है। यह अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए, मन और शरीर के गठजोड़ को बेहतर करने में मदद करता है।

यह लचीलेपन में सुधार, तनावग्रस्त मांसपेशियों को ढीला करके दर्द से राहत प्राप्त करने में मदद करता है। यह भावनाओं और विचारों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। यह पल्स दर और रक्तचाप (बीपी) को ठीक बनाये रखने में मदद करता है। यह तनाव से संबंधित मस्तिष्क रसायनों (कोर्टिसोल) के स्तर को कम करता है। यह मन को शांत करता है और भय, चिंता या पैनिक अटैक को कम करने में मदद करता है।

माना जाता है कि, योग हार्मोनल असंतुलन को रेगुलेट करने में मदद करता है, और नियमित रूप से (>12 सप्ताह) किए जाने पर, मूड के उत्थान में मदद करता है।

ध्यान तकनीकों, के साथ धीमी गति से साँस अभ्यास, शांति और भलाई की भावना की एक निश्चित समझ को प्रेरित करने में मदद करते हैं। यह तनाव को कम करता है, और ध्यान को बेहतर तरीके से केंद्रित करने में सहायता करता है। यह अवसाद पैदा करने वाले कई कारकों से निपटने में मदद करता है।

योग, आपके भीतर की शक्ति और मानसिक शांति को मजबूत करने में मदद करता है, जो अवसाद से लड़ने के लिए दो आवश्यक तत्व हैं। योग के ध्यान के तरीके एक-एक करके संबंध स्थापित करने में मदद करते हैं। बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं, और शरीर-मस्तिष्क संबंध को मजबूत करते हैं।

डिप्रेशन के लिए योग आसन:

 

• अधोमुखस्वानासना (डाउनवर्ड- फेसिंग डाॅग पोज)

1. अपने पेट के बल सीधा लेट जायें।

2. हथेली को नीचे की ओर करके, अपने हाथों को अपने बगल में रखें।

3. फिर अपने बाॅटम को ऊपर की ओर उठाएं।

4. अपने पैरों और जांघों को सीधा करें, और उन्हें ऊपर और पीछे की ओर धकेलें।

5. घुटनों को झुकाने से बचें और उनके बीच दूरी बनाए रखें।

6. घुटने, कूल्हे के जोड़ और हाथों के साथ सीधाई में होने चाहिए।

7. अपने सिर को बाहों के बीच रखें, और कोहनी पर हाथ झुकाने से बचें।

8. 30 सेकंड के लिए इसी मुद्रा में रहें। 10 बार दोहराएं।

 

• पसीमोत्तना (सीटेड फार्वर्ड बेन्ड)

1. पैरों को अपने सामने फैलाकर एक चटाई/फर्श पर सीधे बैठें।

2. सुनिश्चित करें कि आपके बाॅटम और जांघें, चटाई/फर्श के संपर्क में रहें।

3. पूरे एक्सरसाइज के दौरान अपने पैरों को सीधा रखें।

4. जहां तक हो सके अपनी बाहों को फैलाएं, अपने पैरों को पकड़ने की कोशिश करें या बाहों को साइड में रखें।

5. अपनी रीढ़ को कूल्हे के जोड़ के स्तर से लंबा रखें और फैलाएं।

6. साँस लेते समय, अपने पैरों को खींचने और अपनी रीढ़ को सीधा करने की कोशिश करें।

7. साँस छोड़ने के दौरान, अपने माथे को पैरों की ओर लायें, और इसी मुद्रा में बने रहने की कोशिश करें। जब तक आप कर सकते हैं, तब तक करें।

 

• हलासना (प्लो पोज)

1. पैरों को सीधा करके, और बाहों को बगल में रखकर, पीठ के बल लेट जायें।

2. फिर एक गहरी सांस लें और अपने बाॅटम और पैरों को अपनी छाती के ऊपर उठाएं।

3. आपकी रीढ़ आपके सिर की ओर एक अवतल आकार लेनी चाहिए।

4. सांस लेते समय अपने धड़ को अपने पैरों के मोड़ तक ले जायें।

5. सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे अपने घुटनों को अपने माथे पर नीचे लायें।

6. जमीन पर अपने पैरों की उंगलियों को दबायें।

7. 10 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें। और फिर दोहराएँ।

 

• प्रसरितापाडोत्नासना (वाइड-एंगल स्टैंडिंग फॉरवर्ड बेन्ड)

1. पैरों को अलग करके सीधे खड़े हो जायें।

2. अपना पेट संलग्न करें और अपनी एड़ी पर दबाएं।

3. कंधों को दूर करें, सांस छोड़ते हुए आगे मुड़ें।

4. आगे और नीचे की ओर देखें।

5. अपनी रीढ़ की हड्डी को लंबा और सीधा रखें।

6. जब तक आपका माथा चटाई/फर्श को छू न जाये, तब तक नीचे झुकते रहें।

7. पैरों के आर्क के साथ कंधे के साथ लाइन में अपनी बाहें लाये।

8. अगर आपकी गर्दन में दर्द होता है, तो अपने क्राउन को आराम देने के लिए ब्लॉक या तकिया का इस्तेमाल करें।

9. 15 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें। 10 बार दोहराएं।

 

• उर्ध्वधनुर्साना (अपवर्ड फेसिंग बो पोज)

1. पीठ के बल लेट जायें।

2. अपने दोनों घुटनों को मोड़ें।

3. अपने हाथों को वापस ले, उन्हें कंधे के ऊपर रखें।

4. साँस लें और अपने कूल्हों और धड़ को उठाकर एक मेहराब बनाएं।

5. 10 सेकंड के लिए इसी मुद्रा में रहें।

6. सांस छोड़ें और लेटने की स्थिति में वापस आयें।

7. 10 बार दोहराएं।

 

• बालासना (चाइल्ड्स पोज)

1. अपने पैरों को पीछे मोड़कर आराम से बैठें।

2. अपनी एड़ी पर अपने कूल्हों को रखें। पैर फर्श को छूना चाहिए।

3. दोनों बड़े पैर की उंगलियों को एक दूसरे को छूना चाहिए।

4 अपने घुटनों को अलग करें और अपनी जांघों के बीच अपनी छाती को नीचे लाएं।

5. अपनी बाहों को फैलायें।

6. आपका माथा और हथेलियाँ जमीन/चटाई से छूना चाहिए।

7. दोहराते हुये गहरी सांस लें।

 

• सालाम्बसर्वांगासना (शोल्डरस्टैंड)

1. अपनी पीठ के बल लेट जायें।

2. अपनी रीढ़ सीधी और हाथों को किनारे रखें।

3. सांस छोड़ते हुए अपने पैरों को छाती की ओर ऊपर की ओर बढ़ाते समय अपने घुटनों को मोड़ें।

4. अपने हाथों से अपनी पीठ को सपोर्ट करें।

5. जांघें, कूल्हे, धड़ को ऊपर उठाते हुये, पैरों को सीधा रखें, जब तक कि आप अपने कंधों पर आराम कर रहे हैं।

6. गर्दन का बेस उठाएं, ताकि उस पर कोई तनाव डालने से बचा जा सके।

7. अपनी उरोस्थि (अपनी छाती के बीच में प्रमुख हड्डी) अपनी ठोड़ी की ओर ले जाएँ।

8. 10 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें, नीचे आयें और 5-10 बार इसे दोहराएं।

अधिक जानें …

इस लेख के पीछे अनुसंधान:

1. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5871291/
2. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC5843960/
3. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3293477/
4. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/11156813

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