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विडाल टेस्ट

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यह परीक्षण क्यों किया जाता है?

विडाल टेस्ट एन्टेरिक फिवर (टाइफाइड और पैराटिफॉइड फीवर) को स्क्रीन या डायग्नोसिस करने के लिए किया जाता है।

यह परीक्षण भारत जैसे विकासशील देशों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है, जहां एन्टेरिक फिवर की समस्या आमतौर पर अधिक पायी जाती है। इस परिक्षण की निम्नलिखित भूमिकायें है:

स्क्रीनिंग: इसमें, यह परिक्षण किसी संदिग्ध व्यक्ति में संक्रमण की संभावना की जांच करने के लिए किया जाता है। इसमें जाँच के लिए सिर्फ एक खून का सैंपल लिया जाता है, जो बैक्टीरिया के खिलाफ बनने वाले एंटीबॉडी (प्रोटेक्टिव प्रोटीन) के उच्च स्तर को दिखाता है।

डायग्नोसिस: इसमें, यह परीक्षण एन्टेरिक फिवर की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। यहां आपके शरीर से 10 से 14 दिन के अंतराल में दो ब्लड सैंपल लिए जाते हैं। पहला सैपल तीव्र संक्रमण के दौरान लिया जाता है, और दूसरा नमूना रिकवरी की अवधि के दौरान लिया जाता है। दोनों नमूनों मूल्यों के बीच चार गुना बढ़ोत्तरी को मूल रूप से डायग्नोसिस माना जाता है; हालांकि, इसमें कुछ कमी पायी जाती है।

वर्तमान परिदृश्य में टाइफाइड फीवर डायग्नोसिस में विडाल टेस्ट की क्या भूमिका है?

टाइफाइड फिवर के निदान (डायग्नोसिस) के लिए विडाल टेस्ट का उपयोग काफी विवादास्पद रहा है। इसके बारे में हुए कई सारे अध्ययनों में ज्यादातर में झूठे परिणाम आये हैं।

हालांकि, इससे होने वाले कुछ फायदों, तथा अन्य विकल्पों की कमी के कारण, इसका उपयोग अभी भी दुनिया के कई हिस्सों में किया जा रहा है।

 

विकसित देशों में भूमिका

संक्रमण की घटनाओं में कमी और ब्लड कल्चर जैसे अधिक विश्वसनीय परीक्षणों की उपलब्धता के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे विकसित देशों में इस परीक्षण का उपयोग नहीं किया जाता है।

 

स्थानिक क्षेत्रों में भूमिका

• सिंगल ब्लड टेस्ट: टाइफाइड प्रभावित क्षेत्रों में सिंगल ब्लड टेस्ट की भूमिका, कई अध्ययनों में निम्नलिखित कारणों से विश्वसनीय नहीं मानी जाती है:

– किसी व्यक्ति को साल्मोनेला बैक्टीरिया तथा उससे जुड़ी प्रजातियों की एक छोटी मात्रा से होने वाला लगातार जोखिम।

– टाइफाइड फिवर (बुखार) के पिछले एपिसोड से पैदा होने वाला प्रतिरक्षण (इम्युनाईजेशन)।

– मलेरिया जैसे संक्रमणों के कारण आने वाले गलत परिणाम।

• टू ब्लड टेस्ट: डायग्नोसिस के लिए दो नमूनों का उपयोग, गलत परिणाम तथा दूसरे खून के नमूने में देरी के कारण नियमित रूप से नहीं किया जाता है।

 

ब्लड कल्चर की भूमिका बनाम विडाल परीक्षण की भूमिका

टाइफाइड बुखार के निदान के लिए सबसे खरा परीक्षण ब्लड कल्चर है। यह परीक्षणः-

• महंगा होता है।

• हर जगह उपलब्ध नहीं होता है।

• परिणामों की पुष्टि करने के लिए लगभग 3-5 दिन लेता है।

कभी-कभी एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग के कारण भी, ब्लड कल्चर के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

हालाँकि, विडाल टेस्ट आमतौर पर काफी सस्ता, आसानी से उपलब्ध तथा करने में आसान होता है। इसमें कम से कम उपकरणों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार, टाइफाइड फिवर के संभावित निदान के लिए, स्थानिक क्षेत्रों में इसका उपयोग व्यापक रूप से किया जा रहा है। इसे आगे चलकर एक मजबूत नैदानिक संदेह और अन्य परीक्षणों के परिणामों द्वारा समर्थित किया जा सकता है।

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यह कब किया जाता है?

विडाल टेस्ट आम तौर पर तब किया जाता है, जब आप टाइफाइड बुखार स्थानिक क्षेत्र (भारत के सभी क्षेत्रों) के रहने वाले हैं, या फिर आपको 3 दिनों से अधिक बुखार है।

यह तब और महत्वपूर्ण हो जाता है, जब आपको कोई विशेष स्थानीयकरण संकेत नहीं है या आपके लक्षण अस्पष्ट हैं जैसे:

बुखार- विशेष रूप से, जो पहले सप्ताह में गुजरते दिनों के साथ बढ़ता है और 104 डिग्री फारेनहाइट (स्टेप लैडर पैटर्न) तक पहुँच जाता है।

• भूख न लगना

• ऊर्जा की कमी (लस्सिट्यूड)

• बीमारी की सामान्य भावना (अस्वस्थता)

• सिरदर्द

• जी मिचलाना और उल्टी

पेट की शिकायत- दस्त, कब्ज, दर्द और पेट फूलना

बढ़ी हुआ लिवर और स्प्लीन- परीक्षण या अल्ट्रासाउंड पर

विशिष्ट संकेत- त्वचा पर गुलाबी धब्बे और अपेक्षाकृत कम हृदय गति। ये संकेत दुर्लभ हैं, लेकिन टाइफाइड बुखार में आमतौर पर पाये जाते हैं।

टेस्ट के लिए क्या नमूना लिया जाता है, और इसे कैसे एकत्र किया जाता है?

इस टेस्ट के लिए आपको ब्लड सैंपल देना होगा। नमूना निम्नलिखित चरणों में आपके हाथ की नस से एकत्र किया जाता है:

• तकनीशियन या नर्स अपनी बांह के चारों ओर एक बैंड लपेटकर नसों में रक्त प्रवाह को कम करने की कोशिश करेंगे, जिससे कि नसे ऊभर कर अच्ची तरह से दिखें।

• वह सुई लगाने को जगह को एल्कोहल में डूबी हुयी काॅटन से साफ करेगा। जिसके बाद वह खून खींचने के लिए नस में एक पतली सुई डालेगा। इस प्रक्रिया के दौरान आपको हल्की से चुभन महसूस  हो सकती है, जोकि गंभीर नहीं होती है।

• खून इकट्ठा करने की ट्यूब या शीशी सुई के दूसरे छोर से जुड़ी होती है।

• इसके बाद, तकनीशियन आपके हाथ के चारों ओर बैंड को ढीला कर देगा, जिससे की खून शीशी में जमा हो सके।

• पर्याप्त सैंपल इकट्ठा करने के बाद, वह बैंड को खोल देगा और सुई लगाने की जगह को काॅटन या गाॅज की मदद से हल्का दबायेगा, इसके बाद बैंडेज लगा देगा।

परीक्षण के लिए क्या तैयारी जरूरी है?

परीक्षण के लिए आपको खाली पेट रहने या कोई खास तैयारी करने की जरूरत नहीं है।

विडाल टेस्ट में क्या परीक्षण किया जाता है?

विडाल टेस्ट उन एंटीबॉडी की मात्रा का पता लगाता है जोकि बैक्टीरिया के खिलाफ विकसित होती है जिनसे टाइफाइड बुखार होता है।

कोई भी सूक्ष्म जीव आपके शरीर में प्रवेश करते ही, शरीर में रक्षा प्रतिक्रिया शुरू कर देता है। यह प्रक्रिया सूक्ष्म जीव को मारने के लिए कुछ कोशिकाओं और प्रोटीन का उत्पादन करती है। एंटीबॉडी एक ऐसा ही प्रोटीन है जो इसके खिलाफ बनता है तथा आपके शरीर में बहता है।

विडाल टेस्ट जैसे सीरोलॉजिकल परीक्षण संक्रमित माइक्रोब के संपर्क का आकलन करने के लिए आपके खून में इन एंटीबॉडी की उपस्थिति का पता लगाता हैं। इस प्रकार, यह संक्रमण के कारण की पहचान करने में मदद करता है।

विडाल टेस्ट साल्मोनेला टाइफी पर मौजूद दो एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी का पता लगाता है- वह बैक्टीरिया जिससे टाइफाइड बुखार होता है। ये दो एंटीजन, “एच एंटीजन” जो आपके बालों पर मौजूद होते है तथा “ओ एंटीजन” जो आपके शरीर पर मौजूद होते हैं।

 

प्रक्रिया

परीक्षण के दौरान, “ओ” और “एच” एंटीजन युक्त एक विशेष तरल को सीरम (आपके रक्त से फ़िल्टर) की बराबर मात्रा के साथ मिलाया जाता है। यदि आपके खून में दो एंटीजन के लिए एंटीबॉडी है, तो दोनों तरल पदार्थों का मिश्रण दिखाई देने वाले क्लम्प बनाएगा। इसे एग्लुटिनेशन कहते हैं।

ओ एंटीजन के खिलाफ आईजीएम एंटीबॉडी, एक्यूट टाइफाइड बुखार के दौरान पहले दिखाई देता है, जबकि एच एंटीजन के खिलाफ आईजीजी एंटीबॉडी बाद में बनता है और लंबे समय तक रहता है।

विडाल टेस्ट दो प्रकार के होते हैं- स्लाइड एग्लुटिनेशन और ट्यूब एग्लुटिनेशन टेस्ट। स्लाइड टेस्ट का इस्तेमाल शुरुआती स्क्रीनिंग के लिए किया जाता है और स्लाइड टेस्ट के नतीजों की पुष्टि के लिए ट्यूब टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है ।

दोनों परीक्षणों में, एंटीजन युक्त तरल एजेंट को आपके खून से प्राप्त क्रमिक रूप से पतला सीरम की बराबर मात्रा के साथ मिलाया जाता है। परिणाम 0 से +4 तक एग्ल्युटिनेशन की डिग्री के अनुसार स्कोर किये जाते हैं:

• 0 (कोई एग्ल्युटिनेशन नहीं),

• +1 (25 प्रतिशत एग्ल्युटिनेशन)

• +2 (50 प्रतिशत एग्ल्युटिनेशन),

• +3 (75 प्रतिशत एग्ल्युटिनेशन)

• +4 (100 प्रतिशत एग्ल्युटिनेशन)

50 या 2+ एग्लुटिनेशन का प्रदर्शन करने वाले सीरम की कम से कम मात्रा को टाइटर (सीरम गतिविधि का आखिरी हिस्सा) के रूप में दर्शाया जाता है।

 

परिणाम निम्नलिखित रूप में दर्शाया जाता है:

• कोई एग्ल्युटिनेशन नहीं- क्लम्पिंग के अभाव में, या

• एग्ल्युटिनेशन 1:20, 1:40, 1:80 या 1:160 आदि जैसे टाइटर्स के साथ प्रस्तुत करता है।

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परीक्षा परिणाम का क्या मतलब है?

विडाल टेस्ट साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया के “ओ” और “एच” एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी का पता लगाता है।

क्लम्पिंग की मौजूदगी या गैर-मौजूदगी और इसे उत्पादित करने के लिए आवश्यक सीरम की कम मात्रा परिणाम को निर्धारित करती है।

 

विडाल टेस्ट
कोई एग्ल्युटिनेशन नहींखून में साल्मोनेला एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी की गैर-मौजूदगी।
एग्ल्युटिनेशन की मौजूदगीसाल्मोनेला एंटीजन के खिलाफ खून में एंटीबॉडी की मौजूदगी।

1:20, 1:40, 1:80, 1:160, 1:320 की टाइटर वैल्यू के साथ कट ऑफ वैल्यू:

• आईजीएम एंटीबॉडी: 1:80

• आईजीजी एंटीबॉडी: 1:160

फाल्स पोजिटिव

ऐसे कई कारक हैं जो कभी-कभी टाइफाइड बुखार न होने पर भी टेस्ट को पोजिटिव दिखाते हैं। इसे फाल्स पोजिटिव परीक्षण कहा जाता है, और इसके कारण इस प्रकार हैं:

अन्य ग्रुप डी साल्मोनेला बैक्टीरिया: टाइफाइड बुखार का कारण बनने वाले बैक्टीरिया (साल्मोनेला टाइफी) के अलावा, कई अन्य प्रकार के साल्मोनेला बैक्टीरिया है जोकि ए से लेकर ई प्रकार के ग्रुप में बंटे हैं। ग्रुप डी में साल्मोनेला टाइफी के साथ कई अन्य बैक्टीरिया होते हैं, जो टाइफाइड बुखार का कारण नहीं बनते हैं लेकिन इसमें “ओ” एंटीजन होता है।

ग्रुप ए और बी साल्मोनेला बैक्टीरिया: ग्रुप ए और बी से अन्य बैक्टीरिया भी होते हैं, जिनमें साल्मोनेला टाइफी के समान “ओ” एंटीजन होता है।

विडाल टेस्ट ओ एंटीजन के खिलाफ एंटीबॉडी का पता लगाता है, तथा उसे मापता है, फिर चाहे साल्मोनेला किसी भी प्रकार का हो- टाइफाइड हो या नाॅन-टाइफाइड साल्मोनेला।

अन्य रोगाणु: इसके अलावा, मलेरिया परजीवी जैसे अन्य रोगाणु होते हैं जो समान एंटीजन क्रॉस रिएक्टिविटी दिखा सकते हैं।

पिछला संक्रमण या प्रतिरक्षण (इम्युनाइजेशन): इस बात की भी महत्वपूर्ण संभावना है कि, टाइफाइड संक्रमण या कम एक्सपोजर के पिछले इतिहास वाला व्यक्ति खून में एंटीबॉडी विकसित कर सकता है। यह स्थानिक क्षेत्रों में विशेष रूप से आम है, जहां लोगों को बीमारी के पिछले इतिहास की उच्च संभावना होती है।

 

फाल्स निगेटिव

जब टाइफाइड बुखार से पीड़ित होने पर भी आपका विडाल टेस्ट निगेटिव आता है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। इसे फाल्स निगेटिव परीक्षण कहा जाता है, और इसके कारण इस प्रकार हैं:

एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग: यदि आप विडाल टेस्ट कराने के पहले से ही अपनी बीमारी के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग कर चुके हैं, तो यह खून में एंटीबॉडी के स्तर को कम कर सकता हैं। इस प्रकार, परीक्षण में कम टाइटर्स और फाल्स निगेटिव परिणाम आता है।

कैरियर स्टेट: इस स्टेट में, आपके अंदर साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया तो हो सकता हैं, लेकिन संक्रमण विकसित नहीं होता है और खून में पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण एंटीबॉडी हो सकते हैं।

 

निगेटिव विडाल टेस्ट के कारणपोजिटिव विडाल टेस्ट के कारण
• कोई साल्मोनेला टाइफी संक्रमण नहीं

• कैरियर स्टेट

• पूर्व एंटीबायोटिक उपचार

• एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए होस्ट में अपर्याप्त बैक्टीरियल एंटीजन

• परीक्षण में तकनीकी खामियाँ

• कामर्शियल एंटीजन तैयार करने में अंतर

• साल्मोनेला टाइफी संक्रमण की उपस्थिति- टाइफाइड बुखार

• साल्मोनेला बैक्टीरिया एंटीजन से पहले का संक्रमण या इम्युनाइजेशन

• नाॅन-टाइफाइडल साल्मोनेला से क्रॉस-रिएक्शन

• परिवर्तनशीलता और लगातार मानकीकृत एंटीजन तैयारी

• मलेरिया संक्रमण

• डेंगू जैसी अन्य बीमारियां

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