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यूटेराइन फाइब्रॉएड

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फाइब्रॉएड क्या हैं?

फाइब्रॉएड यूटेरस की माँसपेशियों की, असामान्य वृद्धि होती है।

यह महिलाओं में पाये जाने वाला सबसे आम, बिना कैंसर वाला (बेनाइन) पेल्विक ट्यूमर होता है।

ये ट्यूमर शायद ही कभी कैंसर मास के रूप में बदल सकते है, जिसकी संभावना 2 प्रतिशत से भी कम होती है।

यह कई बार रूटीन अल्ट्रासाउंड परिक्षण या सी-सेक्शन के दौरान अचानक दिख जाते हैं। ज्यादातर फाइब्रॉएड में लक्षण नहीं होते हैं, इसलिए इनमें किसी भी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।

फाइब्रॉएड को कई नामों से जाना जाता है जैसे, मायोमास, लियोमायोमास, फाइब्रोमा, फाइब्रोमायोमा, लेकिन सबसे अधिक उन्हें फाइब्रॉएड के रूप में जाना जाता है।

यह सब कैसे होता है?

यूटेरस, विशेष प्रकार के मांसपेशियों के तंतुओं (फाइबर) की कई परतों से बना होता है। इन्हे चिकनी माँसपेशी कोशिकायें कहा जाता है। जब इनमें से किसी एक माँसपेशी में किसी प्रकार की आनुवंशिक उत्तेजनाओं के कारण असामान्य वृद्धि दिखाई देती है, तो इसके परिणामस्वरूप छोटे या बड़े माॅस/ट्यूमर का गठन होता है।

कुछ सिद्धांतों के अनुसार, यह माना जाता है कि फाइब्रॉएड, एस्ट्रोजन हार्मोन पर निर्भर माॅस होते हैं। ये हार्मोन, प्रत्येक मासिक धर्म के दौरान यूटेरस की परत के विकास और क्षय का कारण बनते हैं। इस कारण से यह, रजोनिवृत्ति (पोस्ट-मीनोपाॅसल) के बाद न के बराबर दिखायी देते है। यदि ये फाइब्रॉएड महिलाओं में पहले से मौजूद होते हैं, तो रजोनिवृत्ति (पोस्ट-मीनोपाॅसल) के बाद इनके आकार में कमी दिखायी देती है।

इनमें खून की आपूर्ति काफी अच्छी होती है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान जब खून की आपूर्ति और एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ जाता है, तो यह बड़े पैमाने पर विकसित हो सकते है, और गर्भावस्था को जटिल बना सकते है।

फाइब्रॉएड 35 साल की उम्र के बाद की 20-30 प्रतिशत महिलाओं में देखा जाता है। यदि आपके परिवार के किसी भी सदस्य में फाइब्रॉएड का इतिहास है, तो आपको इसके होने का खतरा 1.5-3.5 गुना बढ़ जाता है, क्योंकि फाइब्रॉएड के 40 प्रतिशत मामले आनुवंशिक गड़बड़ी के कारण होते हैं (परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलने वाली आनुवंशिक गड़बड़ी)।

 

जोखिम कारक

• मोटापा

• पारिवारिक इतिहास

• 30 साल से अधिक उम्र

• गर्भावस्था

• अफ्रीकी-अमेरिकी में अधिक आम होते है- इनमें यह कम उम्र में पाये जाते है, और अधिक लाक्षणिक होते है

• आहार कारक- बहुत अधिक लाल मांस, बीयर या अल्कोहल का सेवन, फाइब्रॉएड विकसित करने के आपके जोखिम को बढ़ाता है।

विभिन्न प्रकार के फाइब्रॉएड क्या हैं?

• फाइब्रॉएड को उसकी स्थिति के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।

• यूटेरस की दीवार में होने वाले फाइब्रॉएड को इंट्रा-म्यूरल कहा जाता है, और यह सबसे आम प्रकार है।

• यूटेरस की अंदरूनी परत में पाये जाने वाले फाइब्रॉएड को सबम्युकोसल फाइब्रॉएड कहा जाता है। जब ये यूटेरस के बाहर प्रोजेक्ट करते हैं, तो उन्हें पेडनक्यूलेटेड कहा जाता है।

• यूटेरस की बाहरी परत के भीतर कुछ फाइब्रॉएड पाए जाते हैं, जिन्हे सबसेरोसल फाइब्रॉएड कहा जाता है।

• सर्विक्स में पाए जाने वाले फाइब्रॉएड को सर्वाइकल फाइब्रॉएड कहा जाता है।

संकेत और लक्षण क्या हैं?

फाइब्रॉएड के आकार और स्थिति के अनुसार, इसके लक्षण भिन्न-भिन्न होते हैं। अधिकांश मामलों में यह कोई लक्षण पैदा नहीं करते है, खासकर जब ये आकार में छोटे होते हैं।

 

सबमुकोसल फाइब्रॉएड और इंट्राम्यूरल फाइब्रॉएड के कारण होने वाली समस्या

• रक्तस्राव (ब्लीडिंग) में वृद्धि- यूटेरस के अंदर की परत (एंडोमेट्रियम) मासिक धर्म के दौरान हार्मोन के प्रभाव से कट जाती है, जो ब्लीडिंग के लिए जिम्मेदार होती है। फाइब्रॉएड के मामले में सतह क्षेत्र बढ़ जाता है, जिस कारण ब्लीडिंग और बढ़ जाती है।

• बढ़ी हुई ऐंठन/दर्द- चूंकि शरीर फाइब्रॉएड को बाहरी अंग मानता है, इसलिए वह संकुचन से इसे बाहर निकालने की कोशिश करता है। जब यह इसे बाहर निकालने में विफल रहता है, लेकिन संकुचन की प्रक्रिया चलती रहती है, जिसके परिणाम स्वरूप ऐंठन की तरह दर्द बना रहता है।

• मासिक धर्म की बढ़ी हुई अवधि

 

सबसेरोसल फाइब्रॉएड और सर्वाइकल फाइब्रॉएड से निम्नलिखित समस्याये हो सकती हैः

• पेशाब और मल त्यागने में बढ़ोत्तरी- फाइब्रॉएड यूरीन बैग या यूरीन ट्यूब, तथा मलाशय पर दबाव पैदा करते हैं।

• पेशाब करने के बाद अधूरी भावना

• पेल्विक या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना

• संभोग के दौरान दर्द होना।

सामान्य तौर पर, लक्षण भी महिला की उम्र के अनुसार भिन्न होते हैं। बहुत कम लड़कियों में यह मासिक धर्म की समस्याओं और डिस्मेनोर्रिया (मासिक धर्म के दौरान दर्द) का कारण बन सकता है।

विवाहित महिलाओं में यह गर्भधारण में दिक्कत पैदा कर सकता है, और गर्भपात होने की संभावना भी बढ़ सकती है।

गर्भवती महिलाओं में यह देर से गर्भपात, समय से पहले प्रसव, भ्रूण के विकास में बाधा, अपर्याप्त प्रसव दर्द, श्रम में बाधा (सर्वाइकल फाइब्रॉएड) उत्पन्न कर सकता है। रजोनिवृत्ति (पोस्ट-मिनोपाॅसल) के करीब महिलाओं में यह अधिक ब्लीडिंग और दर्द का कारण बन सकता है।

जटिलताएं क्या हैं?

फाइब्रॉएड आमतौर पर तब तक जटिल नहीं होते हैं, जब तक कि वे आकार में बहुत अधिक बढ़ नहीं जाते। इससे फाइब्रॉएड का केंद्र पर्याप्त रक्त आपूर्ति प्राप्त करने में सक्षम नहीं होता है और, खत्म होना शुरू हो जाता है। इससे फाइब्रॉएड की संरचना में परिवर्तन दिखता है और दर्द में वृद्धि हो सकती है।

 

अलर्ट संकेत

• आपके पीरियड्स के दौरान स्पॉटिंग या भारी रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होना

• लगातार तेज दर्द होना

• ब्लैडह को खाली करने में परेशानी

• बेहोशी, हल्कापन या सांस लेने में तकलीफ होना – यह लाल रक्त कोशिकाओं (एनीमिया) की की के कारण होता है

फाइब्रॉएड की पहचान कैसे करें?

 

अल्ट्रासाउंड

• यह सबसे आसान, सस्ता और सुविधाजनक तरीका है।

• यह ट्रांस-अबडोमिनल (पेट के ऊपर प्रोब रखकर) या ट्रांसवेजिनल (योनि के माध्यम से पतली बेलनाकार प्रोब डालकर) किया जा सकता है।

• यह यूटेरस, ओवरीस और इनके आसपास की संरचनाओं की छवियों को कैप्चर करता है।

• अन्य जटिलताओं को देखने में मदद करता है जैसे किडनी पर बैक प्रेशर, जिससे वे फूल जाते हैं।

 

एमआरआई

• पेल्विक एमआरआई स्कैन, विस्तार से परिक्षण के लिए किया जाता है।

• आकार और स्थान का बेहतर अनुमान प्रदान करता है।

• परिवर्तन/पतन को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है।

• आसपास की संरचनाओं में देखे गए परिवर्तनों के बारे में विवरण प्रदान करता है।

 

डायग्नोस्टिक लेप्रोस्कोपी

• पेट पर एक छोटे से कट के माध्यम से पेट के अँदरूनी भाग (यूटेरस, ओवरीस और पेल्विक संरचनाओं) को देखने में मदद करता है।

• संरचनाओं को देखने के लिए कट के माध्यम से कैमरा और लाइट लगी हुयी ट्यूब डाली जाती है।

• यह एक आक्रामक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें संज्ञाहरण की आवश्यकता होती है, इसलिए इस प्रक्रिया से बचा जाता है ।

 

डायग्नोस्टिक हिस्टीरोस्कोपी

• यह कुशल और समय लेने वाली प्रक्रिया है।

• इसमें एक प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मचारी की आवश्यकता होती है।

• लाइट लगी हुयी एक लंबी पतली ट्यूब को, वेजाइना और सर्विक्स के माध्यम से यूटेरस में डाला जाता है।

• हिस्टीरोस्कोप, सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड और उनके रिसेक्शन का पता लगाने में मदद करता है।

हिस्टेरोसैलपिंगोग्राफी और सोनो-हिस्टीरोग्राफी जैसी कुछ अन्य जांचें भी होती हैं, लेकिन अधिक समय और संबंधित जटिलताओं के कारण इन प्रक्रियाओं को नियमित रूप से नहीं किया जाता है।

 

फाइब्रॉएड का इलाज कैसे करें?

फाइब्रॉएड का इलाज नहीं भी किया जाये तो ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है, बशर्ते  उनमें कोई लक्षण न हो, या फिर उनके आकार में कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन न हुये हो। सबसे महत्वपूर्ण उपचार समय-समय पर परिक्षण से है, जोकि शुरू में 6 महीने और फिर अल्ट्रासाउंड स्कैन की मदद से वार्षिक होता है।

प्रबंधन दो प्रकार के होते हैं, मेडिकल और सर्जिकल

 

मेडिकल

• यह पारंपरिक प्रबंधन है।

• छोटे आकार के फाइब्रॉएड के लिए अच्छा होता है।

• इसे सर्जरी से पहले बहुत बड़े फाइब्रॉएड के आकार को सिकोड़ने के लिए किया जा सकता है, जिससे सर्जरी के दौरान खून की हानि के जोखिम को कम किया जा सके।

• नॉनस्टेरॉयड एन्टी-इंफ्लामेंट्री ड्रग्स (NSAID) जैसे, आईबुप्रोफेन या मेफेनेमिक एसिड, दर्द के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

• एंटी एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन युक्त दवाओं का उपयोग फाइब्रॉएड की चिकित्सा थेरेपी के लिए किया जाता है। गोनाडोट्रोफिन-रिलीजिंग हार्मोन (जीएनआरएच) एनालॉग एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में गिरावट पैदा करने में मदद करते हैं, इस तरह यह फाइब्रॉएड के आकार को सिकुड़ने में मदद करते हैं।

• इंट्रा-यूटेराईन उपकरण युक्त प्रोजेस्टेरोन जैसे दवायें, फाइब्रॉएड और इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

• यूलिप्रिस्टल एसीटेट जैसी नई एंटी-प्रोजेस्टेरोन दवाओं का उपयोग करें, क्योंकि यह फाइब्रॉएड के विकास को नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

सर्जिकल

• मायोमेक्टॉमी – यह केवल फाइब्रॉएड को हटाने की प्रक्रिया है। इसमें फाइब्रॉएड को हटाकर यूटेरस के खुले हुये हिस्से को सिल दिया जाता है। इसे लेप्रोस्कोपी, हिस्टेरोस्कोपी या लेप्रोटॉमी की विधि के माध्यम से किया जा सकता है। यह युवा और गर्भधारण करने वाली उम्र महिलाओं (38 साल से कम उम्र) के लिए एक बेहतर विकल्प है।

• एंडोमेट्रियल एब्लेशन – इस प्रक्रिया में यूटेरस की परत को, लेजर, फ्रीजिंग तकनीक या ब्लीडिंग को नियंत्रित करने वाले तरीकों की मदद से हटा दिया जाता है। इस प्रक्रिया से प्रजनन या बच्चा न होने की समस्या हो सकती है।

• हिस्टेरेक्टॉमी – इस प्रक्रिया में फाइब्रॉएड सहित पूरे यूटेरस को हटा दिया जाता है। यह प्रक्रिया अधिक उम्र तथा अपना परिवार पूरा कर चुकी महिलाओं के लिए बेहतर होती है।

• लेप्रोस्कोपी- इस प्रक्रिया में फाइब्रॉएड के टुकड़े करके उन्हे मोर्सेलेशन नामक मशीन से बाहर खींच लिया जाता है। यह एक कम आक्रामक सर्जिकल विकल्प है। मोर्सेलेशन के उपयोग से फाइब्रॉएड के टुकड़े बिखर जाते है, जिससे वह कई जगहों पर फैल जाते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए एंडोबैग का उपयोग किया जा सकता है।

• यूटेराइन आर्टरी एम्बोलाइजेशन (यूएई)- इस प्रक्रिया खून की नसों में छोटे कैथेटर डालकर, यूटेरस तथा फाइब्रॉएड को खून की आपूर्ति रोक देते हैं। इससे वह आकार में सिकुड़ जाते हैं। यह बेहद प्रभावी और गैर आक्रामक विधि है, लेकिन एक बहुत महंगी प्रक्रिया है।

• मायोलिस– यह लेप्रोस्कोपिक रूप से लेजर या तरल नाइट्रोजन की मदद से, यूटेरस की मांसपेशियों को खत्म करने की प्रक्रिया है।

 

उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए- क्या करें और क्या न करें

• व्यायाम- फैट कोशिकाएं एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाती हैं जिससे फाइब्रॉएड में वृद्धि होती है। व्यायाम करने से, वजन को कम करने तथा मोटापे को रोकने में मदद मिलती है।

• सही खाना- फाइबर (सब्जियां, जई और सूखे फल), पोटेशियम (खट्टे भोजन, केले, एवोकाडो और कैंटालूप), ग्रीन टी, हल्दी और डेयरी उत्पादों (अपने विटामिन डी प्राप्त करें) को अपने आहार में शामिल करें। बहुत ज्यादा चीनी, रेड मीट, सोया मिल्क/बीन्स, टोफू, फॉक्स सीड्स, फ्रूट जूस और जंक फूड का सेवन करने से बचें।

• शराब के सेवन से बचें

• अपने ब्लड प्रेशर के स्तर को बनाए रखें- नमक के बहुत ज्यादा सेवन से बचें, व्यायाम करें और नियमित रूप से अपने रक्तचाप की जांच करें।

• धूम्रपान छोड़ें

फाइब्रॉएड के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य:

• यह गंभीर स्थिति नहीं है।

• फाइब्रॉएड के अधिकांश मामलों में किसी भी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है।

• फाइब्रॉएड की कैंसर में बदलने की संभावना बहुत कम होती है।

• अनुपचारित फाइब्रॉएड के सभी मामलों में सावधानीपूर्वक नियमित रूप से डाॅक्टर को दिखाने की आवश्यकता हौती है।

• 30 प्रतिशत महिलाओं को 30 साल की उम्र के बाद फाइब्रॉएड होते हैं।

• सर्जरी द्वारा हटाने के बाद भी फाइब्रॉएड के फिर से बढ़ने के आसार होते है।

• फाइब्रॉएड के साथ युवा महिलाओं में प्रजनन के कारण मायोमेक्टमी उत्कृष्ट परिणाम देता है।

• ओपन सर्जरी और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में सफलता की दर लगभग समान है।

• कुछ जटिल मामलों में, खुली सर्जरी, लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से बेहतर परिणाम देती है।

• मायोमेक्टॉमी प्रक्रिया के दौरान यदि रक्तस्राव (ब्लीडिंग) नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो हिस्टेरेक्टॉमी को जीवन रक्षक प्रक्रिया के रूप में किया जाता है।

• लेप्रोस्कोपी यदि विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है, तो उसका उत्कृष्ट कॉस्मेटिक मूल्य होता है।

• यूटेराइन आर्टरी एम्बोलाइजेशन, एक बहुत प्रभावी गैर-आक्रामक विधि है।

• फाइब्रॉएड के सटीक कारण की पहचान अभी भी नहीं का जा सकी है।

• हर फाइब्रॉएड को हिस्टेरेक्टॉमी या मायोमेक्टॉमी की आवश्यकता नहीं होती है।

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