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यूरीन प्रोटीन टेस्ट

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परीक्षण की आवश्यकता क्यों है/ऐसा क्यों किया जाता है?

यह परिक्षण नीचे दी गयी निम्नलिखित स्थितियों में किया जाता है:

• आपके पेशाब में प्रोटीन की अतिरिक्त मात्रा को जांचने के लिए।

• आपकी किडनी के कामकाज का मूल्यांकन और निगरानी करने के लिए।

• किडनी की किसी भी असामान्यता या नुकसान का पता लगाने के लिए।

यह कब किया जाता है?

यह परीक्षण तब किया जाता है जब:

• आप एक नियमित सालाना स्वास्थ्य जांच करवाते हैं।

• यदि आपको किडनी की बीमारी के कोई संकेत या लक्षण हैं।

• कोई भी बीमारी या विकार जो आपके किडनी को प्रभावित कर सकता है जैसे डायबिटीज, हाई बीपी आदि।

डॉक्टर आपको इस परिक्षण को कराने के लिए कह सकते हैं, अगर वह पाते है कि आपका पिछला यूरीन प्रोटीन परिक्षण पोजिटिव था।

किस नमूने की आवश्यकता है और इसे कैसे एकत्र किया जाता है? /नमूना कैसे एकत्र किया जाता है?

आप दिन के किसी भी समय रैंडम यूरीन सैंपल या 24 घंटे का यूरीन सैंपल इकट्ठा कर सकते हैं। कभी-कभी, इस 24 घंटे के मूत्र नमूने को सुबह के नमूने (सुबह 8 से 11 बजे के बीच एकत्र) और रात के नमूने (11 से 8 बजे के बीच एकत्र) के साथ विभाजित तरीके से एकत्र किया जा सकता है।

डॉक्टर क्रिएटिनिन और सीरम प्रोटीन लेवल की जांच के लिए ब्लड टेस्ट कराने लिए भी सकते हैं ।

परीक्षा से पहले किन तैयारियों की जरूरत होती है?

परीक्षा से पहले किसी तैयारी की जरूरत नहीं है।

क्या परीक्षण किया जाता है?

यह टेस्ट पेशाब में मौजूद किडनी द्वारा रिलीज प्रोटीन लेवल की जांच करता है। शरीर में प्रोटीन और एल्बुमिन का खत्म होना क्रमशः 150mg/day और 30mg/day होता है। संक्रमण, ज्यादा व्यायाम, तनाव, गर्भावस्था, ठंड और आहार जैसी स्थितियां पेशाब में प्रोटीन के बढ़ने का कारण बन सकती हैं, जोकि अस्थायी होता है। पेशाब में प्रोटीन की लगातार मौजूदगी कि़डनी की समस्या और कुछ अन्य संबंधित मुद्दों की संभावना को इंगित करती है। इस समस्या के सही कारण का निर्धारण करने के लिए, आमतौर पर अतिरिक्त परीक्षणों की आवश्यकता होती है।

यूरीन प्रोटीन परीक्षण के कई प्रकार उपलब्ध हैं, उनमें से कुछ नीचे दिये गये हैं:

• पेशाब में प्रोटीन की उपस्थिति की जांच करने के लिए, एक सेमी-क्वान्टिटेटिव प्रोटीन परिक्षण किया जाता है, जिसे डिपस्टिक कहा जाता है। यह टेस्ट रैंडम यूरिन सैंपल से किया जा सकता है।

• 24 घंटे यूरीन सैंपल में प्रोटीन की मौजूदगी की व्याख्या 24 घंटे में पेशाब के जरिए शरीर द्वारा जारी किये गये प्रोटीन की मात्रा के रूप में की जाती है।

• यूरीन क्रिएटिनिन, पेशाब में प्रोटीन की जांच करते समय रैंडम यूरीन सैंपल में भी चेक किया जा सकता है। इसे क्रिएटिनिन (यूपीसीआर) का यूरिन प्रोटीन अनुपात कहा जाता है।

पेशाब में क्रिएटिनिन की लगातार जारी होना एक सामान्य प्रक्रिया है। यह मांसपेशियों के मेटाबोलिज्म का प्रतिफल (बायप्रोडक्ट) है। जब यूपीसीआर की गणना करने के लिए, यूरीन प्रोटीन परीक्षण के साथ यूरीन क्रिएटिनिन परिक्षण किया जाता है, तो रैंडम यूरीन सैंपल की सटीकता, 24 घंटे यूरीन सैंपल के साथ तुलना के लायक हो जाती है (जो अन्यथा बच्चों और कुछ वयस्कों के लिए एक बोझिल कार्य है)।

खून में मौजूद प्रोटीन जैसे एल्बुमिन, ग्लोब्यूलिन आदि शरीर के कामकाज के लिए आवश्यक हैं। इनमें से एल्बुमिन खून में प्रमुख प्रोटीन है। जब खून किडनी के सामान्य कामकाज के माध्यम से पूरे शरीर में दौड़ता है, तब ये खराब उत्पादों को फ़िल्टर करते हैं, और प्रोटीन को बनाए रखते हैं। लेकिन जब किडनी को नुकसान होता है या वह कुछ अन्य स्थितियों से प्रभावित होती हैं, तो वह पेशाब में कुछ प्रोटीन रीलीज करती हैं, जिसका पता यूरीन प्रोटीन परीक्षण द्वारा लगाया जा सकता है।

पेशाब में प्रोटीन की मौजूदगी आमतौर पर डायबिटीज और हाई बीपी जैसे रोगों में देखी जाती है, जो किडनी को नुकसान पहुंचाती है। जैसे-जैसे किडनी को नुकसान होता है, वैसे-वैसे पेशाब में प्रोटीन का स्तर बढ़ता है।

आमतौर पर जिस व्यक्ति को किडनी की समस्या शुरुआती अवस्था में होती है, उसमें कोई संकेत और लक्षण नजर नहीं आते हैं। लेकिन अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो सांस लेने में तकलीफ, थकान, एडीमा और जी मिचलाना आदि लक्षण देखे जा सकते हैं। मल्टीपल मायलोमा, लिंफोमा और एमिलोइडोसिस जैसी स्थितियां शरीर में अतिरिक्त प्रोटीन का निर्माण करती हैं, जिससे पेशाब में अतिरिक्त प्रोटीन दिखता है।

पेशाब में एल्बुमिन की उपस्थिति, जिसे एल्बुमिनुरिया कहा जाता है, डायबिटीज और हाई बीपी वाले लोगों में किडनी के नुकसान का एक संवेदनशील संकेतक है। इसलिए इन रोगियों में यूरीन प्रोटीन के बजाय यूरीन एल्बुमिन के लिए स्क्रीन करने की सिफारिश की जाती है।

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परिक्षण परिणाम का क्या मतलब है?

निगेटिव

• पेशाब के सैंपल में, प्रोटीन की कोई पता लगाने योग्य मात्रा मौजूद नहीं है।

पाॅजिटिव

• संक्रमण, गर्भावस्था, जोरदार व्यायाम, आहार, ठंड और शारीरिक और भावनात्मक तनाव जैसी क्षणिक स्थितियों के कारण पेशाब के नमूने में अस्थायी रूप से प्रोटीन का पता चल सकता है। इन स्थितियों के समाधान के बाद यूरीन प्रोटीन टेस्ट दोहराया जाना चाहिए।

• जब पेशाब में प्रोटीन का लगातार पता चलता है (आमतौर पर कई नमूने समय की अवधि में लिये जाते है), तो यह किडनी को नुकसान या पहले से मौजूद गंभीर स्थिति का सुझाव दे सकता है। नुकसान की गंभीरता पेशाब में मौजूद प्रोटीन की मात्रा से मापा जाता है। जब पेशाब में प्रोटीन की मात्रा समय के साथ बढ़ जाती है, तो यह किडनी के नुकसान के बढ़ने का सुझाव देता है।

ऐसी कई स्थितियां हैं जो पेशाब में प्रोटीन के स्तर में वृद्धि का कारण बन सकती हैं। सही कारण निर्धारित करने के लिए, आपके डॉक्टर कुछ अतिरिक्त परिक्षणों की सलाह दे सकते है। पेशाब में प्रोटीन की मौजूदगी के कुछ कारण नीचे दिए गए हैं:

• डायबिटीज

• हाई बीपी

• मल्टीपल मायलोमा

• कंजेस्टिव हार्ट फेलियर

• यूरीनरी ट्रक्ट इंफेक्शन

• एमिलोइडोसिस

• गुड पोश्चर सिंड्रोम

• यूरीनरी ब्लैडर कैंसर

• ल्यूपस

• हैवी मेटल पायजनिंग

• प्रीक्लेम्पसिया

• दवा उपचार

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