Your browser does not support JavaScript!

एपेन्डिसाइटिस (उपचार)

This post is also available in: English (English)

एपेन्डिसाइटिस का इलाज कैसे किया जाता है?

एपेन्डिसाइटिस को एक आपात स्थिति माना जाता है, जहां 24 घंटे के बाद एपेन्डिक्स के फूटने की संभावना काफी बढ़ जाती है। कई जगहों पर सर्जरी को उपचार का मुख्य आधार माना जाता है, और सर्जरी के बाद एंटीबायोटिक् दवाओं का इस्तेमाल संक्रमण को रोकने के लिए किया जाता है।

 

सर्जरी:

एपेन्डिसाइटिस के लिए पसंदीदा उपचार सर्जरी होता है, जोकि सूजे हुये एपेन्डिक्स को बाहर निकालने के लिए की जाती है, जिसे एपेन्डेक्टमी कहा जाता है। सर्जरी का प्रयोग निश्चित मामलों में ही किया जाता है, जहाँ बुखार और दर्द की समस्या लगातार बनी रहती है या जहां जटिलताओं का विकास होता है। शुरुआती सर्जरी एपेन्डिक्स के फूटने की संभावना को कम कर देता है।

सर्जरी सामान्य संज्ञाहरण (एनीस्थीसिया) के तहत दो तरीकों से किया जा सकता है:

• लेप्रोस्कोपिक सर्जरी: इस सर्जरी में पेट में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिनमें से कैमरा लगी हुयी पतली ट्यूब डाली जाती है, जिसे लैप्रोस्कोप कहा जाता है। यह उपकरण पेट के अंदर से एपेन्डिक्स को काटकर बाहर ले आता है। इस सर्जरी में संक्रमण जैसी जटिलताओं की संभावना कम होती है। छोटा चीरा लगाने के कारण इसमें रिकवरी की संभावना काफी अधिक होती है।

 

appendicetomy copy1 1

 

• लैप्रोटॉमी सर्जरी: यह सर्जरी लेप्रोस्कोपिक डिवाइस का इस्तेमाल नहीं करती है, और निचले क्षेत्र में पेट को खोलने के लिए तुलनात्मक रूप से एक बड़ा कट (5-10 सेंटीमीटर) लगाया जाता है। इस सर्जरी को फोड़ा, एपेन्डिक्स के फूटने और पेरिटॉनिटिस जैसी जटिलताओं में पसंद किया जाता है- जिनकी वजह से संक्रमण पेट में फैलता है।

 

रिकवरी का समय:

• एक सफल सर्जरी के बाद एक व्यक्ति को अस्पताल में आम तौर पर 1-2 दिनों के लिए रखा जाता है।

• डॉक्टर दोनों सर्जरी में, कई दिनों तक शारीरिक गतिविधि न करने की सलाह देते हैं।

– लेप्रोस्कोपिक सर्जरी: 3 से 5 दिन

– लैप्रोटॉमी सर्जरी: 10 से 14 दिन

 

सर्जरी के बाद जटिलतायें:

• सर्जरी के बाद जटिलताएं: आम जटिलताये जो हो सकती हैं:

• घाव में संक्रमण- सबसे आम जटिलता

• छोटे आंत्र छोरों का फैलाव जिसे इलियस कहा जाता है

• निमोनिया- फेफड़ों में संक्रमण

सर्जरी की जटिलता दर आम तौर पर, मौत के 1 से कम जोखिम और अन्य पोस्ट सर्जरी के मुद्दों के 14 से भी कम सुझाव अध्ययनों के साथ बहुत कम है। जटिलताओं के साथ एपेन्डिसाइटिस के मामलों में यह थोड़ा अधिक है।

यदि सर्जन, सर्जरी के दौरान सामान्य अपेन्डिक्स पाता है तो क्या किया जाता है?

ऐसे कई मामले, जिनमें एपेन्डिसाइटिस का संदेह काफी अधिक होता है, लेकिन सर्जरी के दौरान एपेन्डिक्स सामान्य पाया जाता है। ऐसे मामलों में सर्जन भविष्य एपेन्डिसाइटिस की किसी भी संभावना से बचने के लिए एपेन्डिक्स को निकालना पसंद करते हैं। कुछ मामलों में सर्जन एक अलग पैथोलाजी पाते हैं, और शल्य चिकित्सा से इसका इलाज करते हैं।

एपेन्डिसाइटिस की जटिलता का इलाज कैसे किया जाता है?

जटिलता का उपचार जटिलता के प्रकार के अनुसार होता है।

पेरिटोनाइटिस के साथ फूटी एपेन्डिसाइटिस: आमतौर पर इन मामलों में तुरंत सर्जरी की आवश्कता होती है, क्योंकि पेरिटोनाइटिस मौत का कारण बन सकती है। इन रोगियों को लेप्रोटॉमी सर्जरी के लिए ले जाया जाता है, जहां एपेन्डिक्स को निकाल दिया जाता है, और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पेरिटोनम को साफ किया जाता है।

एपेन्डिक्स फोड़ा: इन रोगियों को आम तौर पर सर्जरी से पहले, और कई बार सर्जरी के दौरान फोड़ा की जगह में नली/ट्यूब डाल डालकर इनका इलाज किया जाता है। ट्यूब को पेट की दीवार केसे से अंदर डाला जाता है। इसे लगभग 2 सप्ताह तक अंदर रखा जाता है, जो फोड़े को धीरे-धीरे नालियों के माध्यम से बाहर निकाल देती है, और रोगी को संक्रमण के इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। लगभग 6 से 8 सप्ताह के बाद जब संक्रमण और सूजन नियंत्रण में होती है, तो सर्जन सर्जरी द्वारा एपेन्डिक्स को हटा देता है।

क्या एपेन्डिसाइटिस के मामलों में सर्जरी से बचा जा सकता है? क्या एंटीबायोटिक एपेन्डिसाइटिस में सर्जरी की जरूरत को रोक सकती हैं?

हाल के कई अध्ययनों से पता चलता है कि, एपेन्डिसाइटिस के साधारण मामलों में एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इनका इलाज किया जा सकता है। इनमें से अधिकांश लोगों को पहले वर्ष के दौरान एपेन्डिक्स सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है।

5 साल की अवधि के बाद भी इन मरीजों में अपेन्डिसाइटिस की देर से पुनरावृत्ति 40 प्रतिशत से कम पाई गयी है। अभी भी उपचार का मुख्य आधार सूजे हुये एपेन्डिक्स को सर्जरी द्वारा बाहर निकालना है। वर्तमान में केवल कुछ सेंटर ही बिना सर्जरी के इलाज कर रहे हैं।

एक व्यक्ति को अपने पसंदीदा उपचार का विकल्प चुनने से पहले, अपने डॉक्टर से शल्य चिकित्सा और गैर शल्य चिकित्सा विधियों के फायदे और नुकसान के बारे में चर्चा करनी चाहिए।

सर्जरी के बाद रिकवरी पीरियड के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिये?

1. सर्जरी के बाद कई दिनों के लिए ज़ोरदार शारीरिक गतिविधि को सीमित करें:

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी: 3 से 5 दिन

लैप्रोटॉमी सर्जरी: 10 से 14 दिन।

2. अधिक आराम करें, जो शरीर को ठीक करने में मदद करता है।

3. शारीरिक गतिविधि को धीरे-धीरे बढ़ाये, रोज के सामान्य कार्य और हल्की-फुल्की सैर के साथ शुरु करें। और फिर कुछ दिनों और हफ्तों के बाद जिम तथा खेलकूद जैसी जोरदार गतिविधियां प्रारम्भ करें।

4. डॉक्टर के साथ रिकवरी के समय, फोलो-अप और काम की शुरुआत के बारे में चर्चा करें।

5. यदि दर्द की दवा काम नहीं कर रही है, या आपको बुखार, खांसी आदि जैसे कोई नए लक्षण विकसित होते हैं, तो डॉक्टर को सूचित करें।

TOP HEALTH NEWS & RESEARCH

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

A single targeted dose of radiotherapy could be as effective at treating breast cancer as a full course, a long-term…

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

The loss of smell that can accompany coronavirus is unique and different from that experienced by someone with a bad…

Lancet Editor Spills the Beans

Lancet Editor Spills the Beans

Editors of The Lancet and the New England Journal of Medicine: Pharmaceutical Companies are so Financially Powerful They Pressure us…

मदर एंड चाइल्ड

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर अवधि क्या है? एक प्रसवोत्तर अवधि एक एैसा समय अंतराल है, जिसमें मां बच्चे को जन्म देने के बाद…

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर या स्तनपान आहार क्या है? पोस्टपार्टम डाइट वह डाइट है, जो मां को एक बार बच्चे के जन्म के…

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाने और बचने वाले खाद्य पदार्थों की सूची गर्भ धारण करने के बाद, बच्चे…

मन और मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का निदान किया जाता है? नैदानिक इतिहास: डॉक्टर आम तौर पर लक्षणों का विस्तृत इतिहास…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का इलाज किया जाता है? सामान्यीकृत चिंता विकार का उपचार लक्षणों की गंभीरता और जीवन…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है? चिंता, किसी ऐसी चीज के बारे में परेशानी या घबराहट की भावना है, जो हो…