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प्रोस्टेट इन्लार्जमेंट (बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया/बीपीएच)

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बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया क्या है?

बेनाइन प्रोस्थेटिक हाइपरप्लेसिया (बीपीएच) पुरुषों की ऐसी स्थिति होती है, जिसमें प्रोस्टेट नामक ग्रंथि (ग्लैंड) कैंसर के विकास के बिना आकार में बढ़ जाती है। इस स्थिति को उम्र से संबंधित माना जाता है। यह आमतौर पर 40 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को प्रभावित करता है। एक व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसमें बीपीएच के विकास की संभावना बढ़ती जाती है।

प्रोस्टेट ग्रंथि (ग्लैंड) मूत्राशय (यूरीनरी ब्लैडर) के ठीक नीचे, आपके पेट के निचले हिस्से में मौजूद होती है। यह मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) नामक ट्यूब जैसी संरचना को घेरे हुए होती है, जो पेशाब को शरीर से बाहर निकालती है।

जब प्रोस्टेट आकार में बढ़ जाता है, तो यह मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) को दबाता है। इसके कारण लुमेन में पिंचिंग होती है और पेशाब के बाहर निकलने में समस्या पैदा होती है। बदले में यह मूत्राशय पर वापस दबाव डालता है, जिससे अंततः यह कमजोर हो जाता है और पूरी तरह से खाली होने की अपनी क्षमता खो देता है।

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प्रोस्टेट ग्रंथि और उसके कार्य के बारे में अधिक जानें

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया किस कारण होता है?

बेनाइन बीपीएच का सही कारण ज्ञात नहीं है। हाँलांकि, इसे उम्र बढ़ने के साथ विकसित और बदतर होने के लिए जाना जाता है।

हार्मोन की भूमिका:

मुख्य रूप से दो हार्मोन निम्नलिखित तरीकों से बीपीएच के विकास के साथ जुड़े पाये गये है।

• टेस्टोस्टेरोन/एस्ट्रोजन संतुलन में परिवर्तन: एक व्यक्ति का शरीर अपने पूरे जीवनकाल में टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन नामक दो हार्मोन का उत्पादन करता है। व्यक्ति की उम्र बढ़ने के साथ ही, खून में सक्रिय टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है। इससे एस्ट्रोजन का अनुपात अधिक हो जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि, प्रोस्टेट के भीतर एस्ट्रोजन का उच्च अनुपात उन पदार्थों की गतिविधि को बढ़ाता है, जिनसे प्रोस्टेट सेल के विकास को बढ़ावा मिलता हैं। यह बाद में बीपीएच का कारण बनता है।

• डाइहाइड्रोटेस्टोस्टेरोन (डीएचटी): यह टेस्टोस्टेरोन का एक प्रकार है, जो प्रोस्टेट विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार उम्र के साथ ब्लड टेस्टोस्टेरोन की एक बूँद भी, बढ़ी उम्र के पुरुष प्रोस्टेट में DHT के महत्वपूर्ण स्तर को जमा करते रहते हैं। यह प्रोस्टेट कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देना जारी रख सकता हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो पुरुष डीएचटी का उत्पादन नहीं करते हैं, उनमें बीपीएच विकसित नहीं होता हैं।

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया कितना आम है?

बीपीएच, बूढ़े पुरुषों में होने वाली मूत्र प्रणाली की सबसे आम समस्या है। बीपीएच और उसके कारण होने वाले लक्षण 40 वर्ष से कम उम्र के पुरुषों में दुर्लभ होते हैं। बीपीएच और इसके कारण होने वाले लक्षण उम्र के साथ काफी बढ़ जाते हैं। ये विभिन्न आयु समूहों को प्रभावित करते है, जोकि इस प्रकार हैः

31 से 40 वर्ष की उम्र के बीच 8 प्रतिशत पुरुषों में

51 से 60 वर्ष की आयु के 50 प्रतिशत पुरुषों में

61 से 70 वर्ष की आयु के 70 प्रतिशत पुरुषों में

81 से 90 वर्ष की आयु के 90 प्रतिशत पुरुषों में

बीपीएच को भारतीय पुरुषों में, प्रोस्टेट की सबसे आम समस्या माना गया है, जिसका प्रतिशत लगभग 93 प्रतिशत है।

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया विकसित करने के लिए कौन अधिक संवेदनशील है?

पुरूषों में नीचे दिये गये निम्नलिखित कारकों से बीपीएच के विकास का खतरा अधिक होता है:

यदि आपकी उम्र 40 वर्ष या उससे अधिक है

• परिवार का इतिहास: यदि आपके परिवार में किसी को बीपीएच है

चिकित्सा स्थितियांः दिल और खून की नसों का रोग, और टाइप 2 डायबिटीज

• मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी

इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) से पीड़ित

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया के लक्षण क्या हैं?

बीपीएच के लक्षण दो मुख्य कारणों से होते हैं। पहला, बढ़ा हुआ प्रोस्टेट यूरेथ्रा को सिकोड़ देता हैं, और दूसरा  ब्लैडर पर लगातार बैक प्रेशर के कारण वह परेशानी भरा हो जाता है। इससे लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट सिम्पटम जैसे लक्षण होते हैं, जोकि इस प्रकार है:

• फ्रिक्वेंसी: इसमें पूरे दिन पेशाब करने की दर बढ़ जाती है, जोकि दिन में 7 से 8 बार या उससे अधिक होती है।

नोक्टुरिया: इसमें पेशाब जाने के लिए कई बार नींद से जागने की आवश्यकता होती है।

• अर्जेंसी: इसमें पेशाब रोक पाने की क्षमता कम हो जाती है, और पेशाब जाने की इच्छा तेज हो जाती है।

• हिचकिचाहट (हेजिटेंसी): पेशाब करते समय परेशानी या झिझक की भावना होती है।

• खराब प्रवाह (पुअर फ्लो): पेशाब की एक कमजोर या बाधित धारा निकलती है।

• ड्रिबलिंग: पेशाब करने के बाद, बूंदों में पेशाब निकलता है।

• पेशाब का ठहराव: यूरीनरी ब्लैडर को पूरी तरह से खाली करने के बाद पेशाब की मौजूदगी की भावना होती है।

• पेशाब न रोक पाना: बिना इच्छा के पेशाब करना।

प्रोस्टेट का आकार हमेशा लक्षणों की गंभीरता तय नहीं करता है। कुछ पुरुषों में प्रोस्टेट बढ़े होने के बावजूद उनके लक्षण हल्के होते हैं, या उनमें कोई भी लक्षण नहीं होते हैं। जबकि कुछ पुरुषों में यदि प्रोस्टेट हल्का भी बढ़ा होता है, तो उनमें लक्षण काफी महत्वपूर्ण होते हैं।

यह भी पाया गया है कि, BPH से प्रभावित आधे से भी कम पुरुषों में लक्षण विकसित करते है।

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया की जटिलताएं क्या हैं?

कभी-कभी बीपीएच के कारण निम्नलिखित समस्यायें पैदा हो सकती हैं:

• मूत्र प्रवाह की पूरी रुकावट: इसे अक्यूट यूरीनरी  रिटेंशन कहा जाता है। इसमें व्यक्ति पेशाब करने में असमर्थ होता है। व्यक्ति को अंडरलाइंग बीपीएच का पता तब तक पता नहीं चलता है, जब तक कि उसकी हालत बिगड़ नहीं जाती। यह सुडोफेड्रिन, डिफेनहाइड्रिन या ऑक्सीमेटाजोलिन युक्त ठंड और खाँसी की दवाओं के अधिक सेवन से ट्रिगर हो सकता है।

पेशाब में खून आ सकता है

यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई): आमतौर पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर में पेशाब बना रह सकता है

• मूत्राशय को नुकसान (ब्लैडर डैमेज) हो सकता है

• गुर्दे को नुकसान (किडनी डैमेज) हो सकता है

मूत्राशय में पथरी (यूरीनरी ब्लैडर स्टोन) हो सकती है।

बीपीएच से पीड़ित अधिकांश पुरुषों में यह समस्या जटिल नहीं होती हैं। हालांकि, यदि किडनी को नुकसान जैसी कोई स्थिति विकसित होती हैं, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

 

डॉक्टर से सलाह कब लेनी है

पुरुषों में ऊपर बताये गये लक्षण किसी और स्थिति का सुझाव दे सकते हैं। इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता होती है। ये लक्षण यूटीआई, प्रोस्टेट की सूजन, ब्लैडर या किडनी की पथरी, या प्रोस्टेट कैंसर आदि हो सकते हैं। इस प्रकार ऊपर बताये गये लक्षणों से पीड़ित सभी पुरुषों को डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। बीपीएच के कारण को जानने के लिए ठीक से मूल्यांकन करना चाहिए और इसका इलाज कराना चाहिये।

निम्नलिखित लक्षणों से पीड़ित व्यक्तिोयं को तत्काल चिकित्सा देखभाल की मदद लेनी चाहिए:

• पेशाब करने में असमर्थता होना

• पेशाब में खून आना

• पेशाब में दर्द या जलन होना

• बुखार और ठंड के साथ लोअर यूरिनरी ट्रैक्ट के लक्षण होना

अधिक जानें …

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया का निदान (डायग्नोस) कैसे किया जाता है?

आपके डॉक्टर निम्नलिखित आधार पर बीपीएच का निदान (डायग्नोस) करते है:

• चिकित्सकीय इतिहास

• शारीरिक परिक्षण

• लैब टेस्ट

 

चिकित्सकीय इतिहास

आपके डॉक्टर आपके व्यक्तिगत और पारिवारिक स्वास्थ्य संबंधी इतिहास के बारे में जानकारी लेंगे।

वह निम्नलिखित विवरण पूछ सकते हैं:

• आपके लक्षण क्या हैं?

• आप इस समस्या का कब से सामना कर रहे हैं?

• आपके लक्षण कैसे शुरू हुए और क्या यह समय के साथ खराब हो गया है?

• यदि आपको यूटीआई का कोई इतिहास है?

• आप रात में कितना पानी या तरल पीते हैं?

• यदि आपको कोई अन्य चिकित्सा स्थिति या बीमारी है?

• यदि आप कोई दवा या सप्लिमेंट ले रहे हैं?

• यदि आपके परिवार में किसी को भी यूरीनरी ट्रैक्ट डीजीज या प्रोस्टेट कैंसर का  इतिहास है?

 

शारीरिक परिक्षण

डिजिटल रेक्टल परिक्षण: इस परिक्षण में आपके डॉक्टर प्रोस्टेट के आकार, स्थिरता या असामान्यता की जाँच करते हैं। वह आपको मेज पर एक तरफ लेटकर, घुटनों को अपनी छाती के करीब रखने के लिए कहेंगे। इसके बाद वह प्रोस्टेट को महसूस करने के लिए आपके मलाशय में दस्ताना पहने हुये उंगली डालेंगे। वह आपको आपकी परेशानी को कम करने के लिए अंदर और बाहर गहरी सांस लेने के लिए कह सकते है। प्रोस्टेट के आकार के अलावा, वह प्रोस्टेट में किसी माॅस के विकास के बारे में डॉक्टर को सूचित कर सकता है। कई डॉक्टर 40 साल और उससे अधिक उम्र के सभी पुरुषों के लिए इस परीक्षण की सलाह देते हैं।

अन्य शारीरिक परीक्षण:

अंडकोश (स्क्रोटम) में किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए जैसे, सूजन और दर्द।

कमर में किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए जैसे, बढ़े हुए या नरम लिम्फ नोड्स।

मूत्रमार्ग से किसी भी असामान्य डिस्चार्ज की जांच करना या लिंग की असामान्यता।

 

लैब टेस्ट

इसके बाद आपके डॉक्टर आपको निम्नलिखित परिक्षण करने के लिए कह सकते है:

• यूरिनलाइसिस (मूत्र परीक्षण): यह परिक्षण ये जांचने के लिए किया जाता है कि, आपके लक्षण मूत्र संक्रमण या बीपीएच के कारण हैं या नहीं।

• प्रोस्टेट स्पेसेफिक एंटीजन (पीएसए): यह एक खून की जाँच है, जो प्रोस्टेट कैंसर स्क्रीनिंग के लिए किया जाता है। यह कैंसर की संभावना को नकारने के लिए किया जाता है, जो प्रोस्टेट के बढ़ने का कारण हो सकता है।

• यूरोडायनेमिक परिक्षण: ये परीक्षण मूत्र के प्रवाह की दर का आकलन करता है। यह पेशाब करने के बाद ब्लैडर में बची पेशाब की मात्रा और पेशाब करते समय ब्लैडर में पड़ने वाले दबाव का आँकलन करता है। इस तरह यह मूत्राशय ब्लैडर के कामकाज की जांच करता हैं।

• सिस्टोस्कोपी: इस परिक्षण में डॉक्टर, ब्लैडर में साइटोस्कोप नामक एक विशेष ट्यूब डालते हैं। इस ट्यूब पर एक कैमरा लगा होता है, जो ब्लैडर में यूरेथ्रा के माध्यम से पारित किया जाता है। यह परिक्षण मूत्राशय में किसी असामान्यता की जांच करता है।

• ट्रांसरेक्टल अल्ट्रासाउंड: यह एक विशेष प्रकार का अल्ट्रासाउंड होता है, जो प्रोस्टेट की असामान्यताओं की जांच करने के लिए किया जाता है। यहां पर रेडियोलॉजिस्ट, प्रोस्टेट की तस्वीरें लेने के लिए  एक लंबी और पतली छड़ीनुमा उपकरण को आपके मलाशय (रेक्टम) में डालेंगे। यह प्रोस्टेट के सटीक आकार को मापने, उसकी आंतरिक संरचना को देखने और प्रोस्टेट से उत्पन्न होने वाले मास की जांच करने में सक्षम होता है।

• बायोप्सी: इस जाँच के लिए आपके डॉक्टर माइक्रोस्कोप से जाँच के लिए, ऊतक का नमूना लेने के लिए प्रोस्टेट में एक सुई डालेंगे। यह विशेष रूप से आपके प्रोस्टेट ग्रंथि में कैंसर कोशिकाओं की उपस्थिति से इंकार करने के लिए किया जाता है। यह परिक्षण एनिस्थिसिया (आमतौर पर स्थानीय) और अल्ट्रासाउंड, सीटी या एमआरआई स्कैन जैसे इमेजिंग अध्ययन के तहत किया जाता है।

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बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया का इलाज कैसे किया जाता है?

लक्षणों की गंभीरता, जीवन की गुणवत्ता पर इसके प्रभाव और किसी की व्यक्तिगत वरीयता के आधार पर बेनाइन प्रोस्थेटिक हाइपरप्लेसिया (बीपीएच) का इलाज निम्नलिखित विकल्पों द्वारा किया जा सकता है।

• जीवन शैली में परिवर्तन के साथ या उसके बिना पूरी प्रतीक्षा करें

• दवाएं

• न्यूनतम आक्रामक प्रक्रियाएं और सर्जरी

कुछ पुरुषों में प्रोस्टेट के बढ़े होने के बावजूद कोई लक्षण नहीं होते है। इन पुरुषों को और हल्के लक्षणों वाले लोगों में इलाज की जरूरत नहीं होती है। जबकि, कुछ पुरुषों में, लक्षणों को दूर करने के लिए एक से अधिक उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लेसिया के इलाज के बारे में और अधिक जानें

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