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पैनिक अटैक और पैनिक डिस्आर्डर

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पैनिक अटैक और पैनिक डिस्आर्डर क्या है?

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डीएसएम-5 नें पैनिक अटैक को अचानक बढ़े हुये डर या बेचैनी के रूप में परिभाषित किया है। यह कुछ ही मिनटों में बढ़कर शरीर में गंभीर लक्षण पैदा करता हैं।

इस दौरान व्यक्ति में 4 या उससे अधिक लक्षण दिखायी देते हैं जोकि इस प्रकार हैं।

• घबराहट, दिल का तेजी से धड़कना या ह्रदय गति का बढ़ना।

• पसीना आना।

• काँपना या हिलना।

• साँस लेने में तकलीफ या गला दबने का एहसास होना।

• दम घुटने का एहसास होना।

• सीने में दर्द या बेचैनी होना।

• जी मिचलाना या पेट खराब होना।

• चक्कर आना, लड़खड़ाना, सिर में हल्कापन या गिरने जैसा महसूस करना।

• अवास्तविकता या खुद से अलग होने की भावना।

• संयम खोने या पागल होने का डर होना।

• मरने का डर होना।

• सुन्नता या झुनझुनाहट की भावना पैदा होना।

• ठंडी या गर्मी का एहसास होना।

कुछ लोगो में 4 से कम लक्षणों के साथ पैनिक अटैक पड़ हो सकता है। इसको सीमित लक्षण पैनिक अटैक कहा जाता है।

बहुत लोग अपने जीवन में एक या दो बार पैनिक अटैक का अनुभव कर सकते है। हाँलांकि, जब किसी व्यक्ति को एक महीने तक बार-बार पैनिक अटैक पड़ता है या उसके होने का डर लगा रहता है, तो इसे पैनिक डिस्आर्डर कहा जाता है।

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क्या पैनिक अटैक, एंग्साईटी अटैक से अलग होता है?

पैनिक अटैक, एंग्साईटी अटैक से अलग होते है। हाँलांकि, आमतौर पर लोग इन्हें समान समक्षते हैं और इसका इस्तेमाल एक-दूसरे के लिए करते है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि दोनों के लक्षण एक जैसे दिखायी देते हैं। ये लक्षण इस प्रकार हैं:

• डर लगना।

• बढ़ी हुयी ह्रदय गति या दिल का तेजी से धड़कना।

• सीने में दर्द होना।

• साँस लेने में तकलीफ होना।

• पसीना आना, काँपना।

• जी मिचलाना या पेट खराब होना।

• चक्कर आना।

डीएसएम-5, एंग्साईटी अटैक को एक इकाई के रूप में मान्यता नहीं देता है। लेकिन यह एंग्साईटी अटैक, पैनिक अटैक और पैनिक डिस्आर्डर का वर्णन विस्तार से करता है। हाँलाकि कुछ विशेषताएं हैं, जो उन्हें एक दूसरे से अलग करने में मदद कर सकती है:

• पैनिक अटैक के लक्षण अचानक विकसित होते हैं, जो 10 मिनट के अंदर अपने चरम पर पहुँच जाते हैं। ये लक्षण आमतौर पर काफी तेज होते हैं, जिसमें डर का लक्षण सबसे अधिक होता है। इसके साथ मानसिक लक्षण भी जुड़े होते हैं। इस कारण ज्यादातर लोग जीवन के खतरे से जुड़ी संदिग्ध स्थितियों जैसे दिल का दौरा (हार्ट अटैक) और साँस से संबंधित परेशानियों में डाक्टर या अस्पताल से सम्पर्क करते हैं। लगभग 10 मिनट के बाद ये लक्षण अपनें आप ही कम होने लगते हैं।

• जबकि चिंता के लक्षण कई मिनटों, घंटो या दिनों में धीरे-धीरे विकसित होते हैं। वे तीव्रता में अलग हो सकते हैं जोकि हल्के और गंभीर होते है, और काफी लम्बे समय तक टिक सकते हैं।

पैनिक अटैक और पैनिक डिस्आर्डर का कारण क्या होता है? पैनिक अटैक और पैनिक डिस्आर्डर के विकास से जुड़े जोखिम क्या है?

पैनिक अटैक या पैनिक डिस्आर्डर के सटीक कारण अभी तक पता नहीं चल पाये हैं, हाँलांकि कुछ खतरों की पहचान की गयी है जोकि इस प्रकार हैं:

आनुवाँशिक (जेनेटिक): कई अध्ययनो से आनुवाँशिक (जेनेटिक) झुकाव का पता चला है। पैनिक डिस्आर्डर से ग्रसित व्यक्तियों में उसके परिवार का कोई सदस्य, इस विकार से या भावनात्मक परेशानियाँ जैसे अवसाद (डिप्रेशन) से ग्रसित होता ही है।

लिंग: महिलाओं में पैनिक डिस्आर्डर पुरुषों के मुकाबले दो गुना अधिक होता है।

जीवन में तनाव की घटनायें: तनाव की महत्वपूर्ण घटनायें या जीवन में होने वाली बड़ी घटनायें व्यक्ति को पैनिक डिस्आर्डर की ओर ले जाती हैं। कुछ शोधकर्ताओं नें जीवन के तनावों की तुलना एक थर्मोस्टेट से की है, जो जब तनाब के प्रतिरोध को कम करता है तो इन परेशानियों के विकसित होने के लिए किसी व्यक्ति को तैयार कर सकता है। ये तनाव जीवन को बदलने वाले प्रमुख अनुभव हो सकते हैं जैसे मौत या आपके चाहने वाले को गंभीर बीमारी, शादी का टूटना, यौन शोषण या आघात या अपने पहले बच्चे को जन्म देना।

भावनात्मक स्वभाव: वह व्यक्ति जो तनाव या नकारात्मक भावनाओं के प्रति काफी संवेदनशील होता है, उसको पैनिक अटैक के होने का खतरा काफी अधिक होता है।

शारीरिक लक्षण: पैनिक डिस्आर्डर से ग्रसित एक व्यक्ति यदि शारीरिक लक्षणों के जैसे लक्षणों को महसूस करता है, तो वह इसका वर्णन पैनिक अटैक की शूरूआत के रूप में कर सकता है। इन लक्षणों से उत्पन्न डर और चिंता वास्तव में पैनिक अटैक को पैदा कर सकती है। बढ़ी हुयी ह्रदय गति, धूम्रपान, दवाईयों का सेवन या व्यायाम का एक प्रकरण (एपिसोड) इस समस्या को पैता कर सकता है।

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पैनिक डिस्आर्डर के लक्षण और संकेत क्या है?

जब व्यक्ति को पैनिक अटैक पड़ता है, तो उसमें तेज डर पैदा हो जाता है जोकि तेजी से बढ़ता है, और 10 मिनट के अंदर गंभीर रूप धारण कर लेता है। इस दौरान, व्यक्ति को अजीबोगरीब डर महसूस होता हैस और शरीर में कई सारे लक्षण दिखायी देते हैं, जोकि नीचे दिये गये हैं:

• गहरे डर, खतरा या आने वाली मुसीबत की भावना होना।

• स्थिति पर नियंत्रण के खोने या जान जाने का डर होना।

• घबराहट, दिल का तेजी से धड़कना।

• बढ़ी हुयी ह्रदय गति।

• पसीना आना, काँपना या हिलना।

• साँस लेने में तकलीफ या गला दबने का एहसास होना।

• दम घुटने का एहसास होना।

• सीने में दर्द या बेचैनी होना।

• जी मिचलाना या पेट खराब होना।

• चक्कर आना, लड़खड़ाना, सिर में हल्कापन या गिरने जैसा महसूस करना।

• अवास्तविकता या खुद से अलग होने की भावना होना।

• सुन्नता या झुनझुनाहट की भावना होना।

• ठंडी या गर्मी का एहसास होना।

ये शारीरिक लक्षण कथित डर या खतरे के प्रति शरीर की संवेदनशील प्रतिक्रिया का हिस्सा होते हैं। शरीर आमतौर पर इस तरह की प्रतिक्रिया को बनाए रखने में सक्षम नहीं होता है, जोकि लगभग 10 मिनट के लिए होती है और बाद में सामान्य हो जाती है। पैनिक अटैक का यह प्रकरण (एपिसोड) शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता है। हाँलांकि, इस दौरान व्यक्ति अत्यधिक डरा हुआ और स्थिति के नियंत्रण से बाहर महसूस करता है, जिससे उसमें भविष्य में इस तरह के प्रकरण के होने का डर पैदा हो जाता है। जब व्यक्ति को एक महीने तक यह अटैक बार-बार होता है और उसे इसके दुबारा होने के डर बना रहता है, तो यह कहा जा सकता है कि उसमें पैनिक डिस्आर्डर पैदा हो गया है। यह स्थिति व्यक्ति के लिए काफी दुखदायी होती है क्योंकि यह लगातर डर की भावना से जुड़ी होती है, जिससे व्यक्ति में अन्य दूसरी मानसिक और मनोवैज्ञानिक समस्यायें पैदा हो सकती हैं। यह मुख्य रूप से तब हो सकता है जब व्यक्ति इन समस्याओं को किसी दूसरे के साथ साझा नहीं करता है या चिकित्सकीय मदद नहीं लेता है।

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पैनिक डिस्आर्डर से पैदा होने वाली जटिलताएं और स्थितियाँ क्या हो सकती हैं?

यदि लगातार पैनिक अटैक का इलाज न किया जाए और इसे जीवन का हिस्सा बननें दिया जाये, तो यह पैनिक डिस्आर्डर के रूप में विकसित हो सकता है और जीवन के हर पहलू पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

• व्यक्ति डर की लगातार स्थिति में बना रह सकता है और कुछ स्थितियों से बचना शुरू कर सकता है जिससे स्कूल और काम में प्रदर्शन कम हो सकता है।

• वह समाज में मिलने-जुलने से बच सकता है या मेलजोल के दौरान अजीब क्षणों का सामना कर सकता है।

• इससे उसके व्यक्तिगत जीवन और संबंधों पर असर पड़ सकता है जोकि उसकी चिंता या डर को और बढ़ा सकती हैं।

इससे व्यक्ति में कुछ मनोवैज्ञानिक समस्यायें पैदा हो सकती हैं जोकि उसके जीवन के स्तर को और खराब कर सकती हैं।

भय (फोबिया): इन लोगों में कुछ चीजों और स्थितियों से धीरे-धीरे डर (फोबिया) पैदा हो सकता है जिसको वह पैनिक अटैक के साथ जोड़ते हैं। ये विशेष स्थितियाँ गाड़ी चलाकर घर छोड़कर जाना या बहुत सारे लोगों के सामने बोलना हो सकती हैं।

घबराहट की बीमारियाँ।

डिप्रेशन (अवसाद)।

मादक पदार्थों का सेवन जैसे शराब या ड्रग्स।

आत्महत्या का विचार या आत्हत्या।

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पैनिक अटैक या पैनिक डिस्आर्डर की पहचान कैसे की जाती है?

बहुत लोग जिनको पैनिक अटैक पहली बार पड़ता है, वे लोग अस्पताल की इमरजेंसी, सामान्य चिकित्सक या दिल के डाक्टर के पास जाते हैं। यह शरीर के लक्षणों की गंभीरता और तेज डर के कारण होता है जोकि उन्हें खराब परिणाम का विश्वास दिलाता है। इसके अलावा दौरे के समय महसूस होने वाले कुछ लक्षण दिल के दौरे की तरह होते हैं, जैसे सीने में तकलीफ, पसीना, घबराहट या चिंता/ भय का एहसास और अन्य:

 

क्लिनिकल इतिहास:

डाक्टर मरीज की पूरी जानकारी लेते है, जैसे बिगड़ने वाले कारक, दूसरी किसी बीमारी की जानकारी और परिवार सें संबंधित स्वास्थ्य की जानकारी।

 

शारीरिक परिक्षण और नब्ज (वाईटल्स):

यह शरीर की बीमारी या उसकी जटिलताँओं के संकेतों को देखने के लिए, शरीर की मूल स्थिति को समझने के लिए, खून की जांच: शारीरिक रोग या समस्या की किसी भी संभावना का पता लगाने, और शरीर के सामान्य स्वास्थ्य की जाँच करने के लिए किया जाता है। ये जाँचे व्होल ब्लड काउंट, हिमोग्राम, थाईराइड टेस्ट, कार्डिएक मार्कर व अन्य हो सकती हैं।

 

इलेकट्रोकार्डियोग्राम (ECG):

दिल से जुड़ी किसी समस्या की संभावना का पता लगाने के लिए किया जाता है।

एक बार जब शारीरिक बीमारी का संदेह दूर हो जाता है, या पहले से पता पैनिक अटैक या पैनिक डिस्आर्डर के मामले में, मरीज को मनोचिकित्सक/ मनोविज्ञानी के पास आगे के आँकलन और मदद के लिये भेजा जाता है।

मनोचिकित्सक/ मनोविज्ञानी मरीज की पूरी जानकारी लेंगे। वह आपके भय, शारीरिक लक्षण, परिवार की स्वास्थ्य जानकारी, कोई तनावपूर्ण घटना या परेशानी जो आपको परेशान कर रही है या ऐसा कोई कारक जो आपको कुछ स्थितियों से बचने के लिए मजबूर कर रहा हो आदि का मूल्यांकन करेंगें। डाक्टर आपसे मादक पदार्थों और एल्कोहल के सेवन और यदि आपके परिवार में किसी को मनोवैज्ञानिक समस्या है आदि के बारे में पूँछेगें।

पैनिक अटैक या पैनिक डिस्आर्डर की पहचान अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन (American Psychiatric Association) द्वारा बनाये गये दिशा निर्देशों के आधार पर की जाती है। यह डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैनुएल आफ मेंटल डिस्आर्डर्स (Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders, DSM-5) में प्रकाशित होती है जो इस प्रकार है:

 

पैनिक अटैक की पहचान के मानदंड

व्यक्ति को तेज डर या बेचैनी का अचानक अनुभव होता है, जो मिनटों के भीतर गंभीर हो जाता है। यह निम्न शारीरिक लक्षणों में से कम से कम चार से जुड़ा होता है:

• घबराहट, दिल का तेजी से धड़कना या ह्रदय गति का बढ़ना।

• पसीना आना।

• काँपना या हिलना।

• साँस लेने में तकलीफ या गला दबने का एहसास होना।

• दम घुटने का एहसास होना।

• सीने में दर्द या बेचैनी होना।

• जी मिचलाना या पेट खराब होना।

• चक्कर आना, लड़खड़ाना, सिर में हल्कापन या गिरने जैसा महसूस करना।

• अवास्तविकता या खुद से अलग होने की भावना होना।

• संयम खोने या पागल होने का डर होना।

• मरने का डर होना।

• सुन्नता या झुनझुनाहट की भावना होना।

• ठंडी या गर्मी का एहसास होना।

 

पैनिक डिस्आर्डर की पहचान के मानदंड

पैनिक अटैक से हमेशा पैनिक डिस्आर्डर की बीमारी नहीं होती है, और केवल कुछ लोगों में पैनिक डिस्आर्डर की समस्या पैदा होती, जिसकी पहचान निम्नलिखित मानदंडों द्वारा की जाती है:

• जब व्यक्ति में लगातार पैनिक अटैक पड़ते है, जिसमें से एक अटैक से लगातार चिंता बनी रहती है, जोकि एक महीने या उससे अधिक समय तक रहती है।

• यह समय अटैक से होने वाली चिंता और भय के परिणाम से चिन्हित किया जाता है। इसमें व्यक्ति को नियंत्रण खोने का डर या खराब परिणाम में दिल के दौरे जैसी समस्या हो सकती है।

• इस दौरान व्यक्ति के बर्ताव में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं जैसे कि उन परिस्थितियों से बचना जिससे पैनिक अटैक पड़ सकता है।

• और जब ये पैनिक अटैक किसी मादक पदार्थों के सेवन, बीमारी या दूसरे मानसिक समस्याओ जैसे सामाजिक भय के कारण नहीं होते हैं।

जब पैनिक अटैक बार-बार होते है और उनका इलाज नहीं किया जाता है, तव वह पैनिक डिस्आर्डर या दूसरी मानसिक समस्याओं के रूप में विकसित हो जाता है जिनका इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है।

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पैनिक डिस्आर्डर का इलाज कैसे किया जाता है?

पैनिक डिस्आर्डर का इलाज मनोचिकित्सा, दवाईयों या दोनो से किया जाता है। यह लक्षणों की गंभीरता, इलाज की उपलब्धता और व्यक्तिगत इच्छा पर निर्भर करता है। इलाज दौरे की गंभीरता और बार-बार होने को कम करने में मदद कर सकता है और इस तरह जीवन के स्तर को बेहतर करता है।

 

मनोचिकित्सा/ टाक थेरेपी:

एक विशेष प्रकार की मनोचिकित्सा जिसे संज्ञानात्मक व्यवहारवादी रोगोपचार- cognitive behavioral therapy (CBT) कहा जाता है। इसका उपयोग पैनिक डिस्आर्डर के इलाज में सबसे पहले किया जाता है। संज्ञानात्मक व्यवहारवादी रोगोपचार- cognitive behavioral therapy (CBT) व्यक्ति को समझने में मदद करता है कि पैनिक डिस्आर्डर के साथ कोई खतरा नहीं जुड़ा होता है। यह व्यक्ति के सोचने, व्यवहार करने और पैनिक अटैक के प्रकरण में प्रतिक्रिया करने के तरीकों में बदलाव लाने में मदद करता है। जब व्यक्ति पैनिक अटैक से होने वाली चिंता और भय में अलग तरीके से प्रतिक्रिया देना सीख जाता है तब दौरे कम या खत्म हो जाते हैं।

 

दवाईयाँ:

डाक्टर पैनिक अटैक के इलाज के लिए विभिन्न प्रकार की दवाईयाँ दे सकता है। ये इस प्रकार हो सकती हैं:

1. सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअपटेक इनहीबिटर्स (एसएसआरआई): ये पैनिक डिस्आर्डर के इलाज की पहली पसंद होती है जिसमें फ्लुओक्सेटीन, पैरॉक्सिटाइन और अन्य शामिल हैं। ये आमतौर पर अच्छी तरह सहन की जाती है और इनके कोई दुष्परिणाम नहीं होते हैं।

2. सेरोटोनिन-नॉरपेनेफ्रिन रीप्टेक इनहिबिटर (एसएनआरआई): ये दवाईयों का एक और समूह है जिसका उपयोग किया जा सकता है और इसमें वेनालाफैक्सिन और अन्य दवाईयाँ शामिल हैं।

एसएसआरआई और एसएनआरआई दवाईयाँ, प्रभाव को दिखाने के लिए कई हफ्ते ले सकती हैं। इनके दुष्परिणाम आमतौर पर गंभीर नहीं होते है, विशेष रूप से जब यदि इलाज कम खुराक से शुरू होता है और समय के साथ इसको बढ़ाया जाता है।

3. बीटा ब्लाकर्स: ये दवाईयाँ शारीरिक लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं जैसे कि बढ़ी हुयी ह्रदय गति।

4. बेंजोडायजेपाइन: ये नींद की दवाईयाँ होती हैं जो पैनिक अटैक के लक्षणों को कम करने में काफी प्रभावी होती हैं। हाँलांकि, जैसा कि इनके लगातार इस्तेमाल से मरीज में इसको सहने की क्षमता उत्पन्न हो जाती है और वह इन पर निर्भर हो जाता है इसलिए इन दवाईयों को थोड़े समय के लिए दिया जाता है।

व्यक्ति को इलाज जल्दी नहीं बंद करना चाहिये। मनोचिकित्सा और दवाईयाँ दोनों को प्रभाव दिखाने में थोड़ा समय लग सकता है। अलग-अलग लोग अलग-अलग दवाईयों काम आती हैं। एक स्वस्थ्य जीवन शैली को अपनाने से पैनिक डिस्आर्डर को सहीं से संभालने में मदद मिल सकती है। पूरी लेने से, स्वस्थ्य खान-पान से और नियमित व्यायाम से अच्छे प्रभाव आ सकते हैं। परिवार और मित्रों का सहयोग भी काफी मदद करता है।

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