Your browser does not support JavaScript!

माइग्रेन

This post is also available in: English (English)

माइग्रेन क्या है?

माइग्रेन एक ऐसी स्थिति है, जहां आपको आमतौर पर सिर के एक तरफ तेज सिरदर्द होता हैं। सिरदर्द के साथ-साथ आपको जी मिचलाना तथा रोशनी या आवाज के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ोत्तरी जैसे अन्य लक्षण भी दिखायी देते हैं।

दर्द कुछ घंटों से लेकर पूरे दिन तक रह सकता है, जो अक्सर आपको परेशान कर देता है। दर्द कई दिनों या वर्षों के बाद फिर से हो सकता है।

माइग्रेन एक ऐसी समस्या है जो आपके साथ जीवन भर रह सकती है। इससे बचने के लिए आपको दवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है और इसको ट्रिगर करने वाले कारकों से बचने की आवश्यकता हो सकती है।

माइग्रेन कैसा लगता है?

गंभीर सिरदर्द के अलावा माइग्रेन के कई अन्य लक्षण होते हैं। यह लोगों को अलग तरह से प्रभावित करता है, और हर कोई एक ही लक्षण विकसित नहीं करता है। इस प्रकार, माइग्रेन की सही पहचान करना एक चुनौती हो सकती है।

माइग्रेन की विशेषताओं की पहचान करना।

निम्नलिखित विशेषताएं हैं जो माइग्रेन को पहचानने में आपकी मदद करती हैं:

 

1. सिरदर्द की विशेषता:

• स्थान- ज्यादातर लोगों में सिरदर्द, सिर के एक तरफ तक सीमित होता है।

• दर्द की तीव्रता- सिरदर्द आमतौर पर मध्यम से लेकर गंभीर हो सकता है।

• दर्द का प्रकार- आमतौर पर धड़कता या स्पंदन करता हुआ सिरदर्द (दर्द जो लहरों की तरह गंभीरता में बढ़ता और कम होता है)।

• दर्द का एक जगह से दूसरी जगह पर बढ़ना- यह अक्सर आंख और कनपटी के चारों ओर शुरू होता हैं और धीरे-धीरे सिर के पिछले हिस्से में फैलता चला जाता है। कुछ लोगों में यह आम हो जाता है। यह आमतौर पर कई घंटों में गंभीर होता चला जाता है।

 

2. आभा (ऑरा)

माइग्रेन की आभा (ऑरा) आपके शरीर की धारणा, देखने, सुनने या मनोवैज्ञानिक कार्यप्रणाली में गड़बड़ी है।

आप इन लक्षणों का अनुभव सिरदर्द से ठीक पहले या उसके दौरान करते हैं।

आभा (ऑरा) लगभग एक तिहाई लोगों में नजर आती है। ये आमतौर पर कुछ मिनटों से एक घंटे के बीच रहते हैं।

विशेषताएं:

• देखना- स्पॉट, लहराती लाइनें, या झिलमिलाती रोशनी दिखायी पड़ना। कभी-कभी, हल्का या थोड़ी देर के लिए दिखना बंद हो जाना।

• छूना- शरीर के एक तरफ विशेष रूप से चेहरे या हाथ पर सुन्न और झुनझुनाहट होना।

• बोलना- बोलने में परेशानी होना।

• सुनना- आवाज सुनाई देना, कान में घंटी बजना।

ये लक्षण कभी-कभी स्ट्रोक या दिमागी बुखार का संकेत दे सकते हैं। इस प्रकार, यदि आप पहली बार इन लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो इसमें चिकित्सा ध्यान देने की आवश्यकता है।

आईसीएचडी-3 ने, माइग्रेन आभा (ऑरा) और ट्रान्जियेंट स्ट्रोक (टीआईए) के बीच अंतर करने के लिए कुछ सुविधाओं का वर्णन किया है।

इस प्रकार, आभा (ऑरा) के आधार पर, माइग्रेन दो प्रकार के होते हैं:

आभा (ऑरा) के साथ माइग्रेन

आभा (ऑरा) के बिना माइग्रेन

एक और इकाई है जहां माइग्रेन आभा (ऑरा) सिरदर्द के बिना होती है। यदि आपको यह है, तो आपको दर्द हुये बिना एक आभा (ऑरा) या माइग्रेन के अन्य लक्षणों का अनुभव होगा।

 

3. जी मिचलाना और उल्टी

माइग्रेन के साथ आमतौर पर उल्टी और जी मिचलाने की भावना होती है।

 

4. रोशनी और आवाज के प्रति संवेदनशीलता होना

माइग्रेन में, आपको रोशनी और आवाज के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ोत्तरी का अनुभव होता हैं। व्यक्ति शांत, अंधेरे कमरे में बैठने में सहज महसूस करता है। तेज रोशनी और तेज आवाज भी माइग्रेन के दर्द को शुरू करने के लिए जाना जाता है।

 

5. प्रीमोनिटरी या प्रोड्रोमल लक्षण

कभी-कभी आपको माइग्रेन का सिरदर्द शुरू होने से एक दिन या कई घंटों पहले निम्न लक्षण विकसित हो सकते हैं।

लक्षण इस प्रकार हैं:

बेकार महसूस करना

चिड़चिड़ा हो जाना

बार-बार भोजन करने का मन करना

कब्ज का होना

गर्दन में जकड़ना होना

गंभीर दर्द के कारण कई लोगों में आँखों से पानी, बहती नाक, या छाती में भारीपन जैसी समस्यायें विकसित हो सकती हैं। कई लोग इसे साइनस सूजन के कारण सिरदर्द समझ लेते हैं।

माइग्रेन का दर्द कितनी देर तक रहता है, और माइग्रेन का दर्द कितनी बार हो सकता है?

माइग्रेन का दर्द कुछ घंटों से एक दिन तक रह सकता है। कुछ लोगों में, यदि इसका इलाज न किया जाये, तो यह 3 दिनों तक चल सकता है।

कई लोगों में माइग्रेन बार-बार होता है, और कुछ इसे जीवन भर अनुभव करते हैं। कुछ लोगों में, यह अक्सर होता है, सप्ताह में कई बार विकसित होता है। जबकि दूसरों में, यह केवल कभी-कभी होता है और कई सालों तक नहीं होता है।

माइग्रेन विकसित होने का खतरा किसे ज्यादा है?

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन होने का खतरा 3 गुना ज्यादा होता है। यह आमतौर पर 40-60 वर्ष की आयु के बीच लोगों को अधिक प्रभावित करता है, और वयस्कों तथा किशोरों में अधिक होता है।

माइग्रेन का कारण क्या हो सकता है या ट्रिगर कर सकता है?

कई लोगों में, माइग्रेन कुछ व्यक्तिगत या पर्यावरणीय कारकों से शुरू होता है। ट्रिगर अलग-अलग लोगों के लिए भिन्न होते हैं, लेकिन एक व्यक्ति के पास ट्रिगर का एक ही सेट होता है।

 

सामान्य माइग्रेन ट्रिगर:

1. शारीरिक कारक: थकान, नींद की कमी, नींद में गड़बड़ी या अधिक सोना।

2. हार्मोनल कारक: महावरी, ओव्यूलेशन या गर्भनिरोधक गोलियों की शुरुआत।

3. पर्यावरणीय कारक:

• मौसम में परिवर्तन जैसे, उमस, गर्मी, सूरज के संपर्क में, चकाचौंध में बढ़ोत्तरी।

• तेज या झिलमिलाती रोशनी

• तेज आवाज

• तेज गंध

4. भावनात्मक कारक: तनाव, चिंता, क्रोध।

5. आहार कारक:

• समय पर भोजन न करना।

• शराब पीना- आमतौर पर रेडवाइन।

• कैफीन के सेवन में बदलाव होना

• चॉकलेट, पुराने पनीर जैसे खाद्य पदार्थों के कारण

• एमएसजी- युक्त खाना- आमतौर पर एशियाई खाद्य पदार्थों, क्यूर्ड मांस, और नाइट्रेट युक्त मछली में देखा जाता है।

• हिस्टामाइन युक्त या उसको जारी करने वाले खाद्य पदार्थ।

माइग्रेन का कारण क्या है?

माइग्रेन का सही कारण अभी तक साफ नहीं है। माना जाता है कि यह, दिमाग के रसायनों, खून के दौड़ान और सिर में तंत्रिका कोशिकाओं की सक्रियता में अस्थायी बदलाव के कारण विकसित होता है। निम्नलिखित कारक माइग्रेन के विकास में भूमिका निभाते हैं।

 

ट्राइजेमिनोवास्कुलर सिस्टम एक्टिवेशन

वर्तमान में, यह ट्राइजेमिनल तंत्रिका (नर्व) के सक्रिय होने के कारण होता है, जो मेनिन्जेस को आपूर्ति प्रदान करता है, जिससे इसकी सूजन होती है। मेनिन्जेस की सूजन से दर्द पैदा होता है।

 

आनुवंशिकी

माइग्रेन से ग्रसित लगभग 70% लोगों में उनका कम से कम एक करीबी रिश्तेदार माइग्रेन से प्रभावित होता है। इससे यह पता चलता है कि, जीन माइग्रेन के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

माइग्रेन से जुड़ी अन्य चिकित्सा स्थितियां क्या हैं?

माइग्रेन दिल की स्थितियों और उसकी खून की नसों से संबंधित पाया गया है। यह दिमाग और उसके वास्कुलचर के मुद्दों से भी जुड़ा हुआ पाया गया है।

कार्डियो-वैस्कुलर स्थितियां: हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट शंट, माइट्रल वाल्व प्रोलैप्स, कोरोनरी हार्ट डिजीज की शुरुआत।

न्यूरो-वैस्कुलर स्थिति: माइग्रेन से ग्रसित व्यक्ति में स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है, फिर चाहें उसकी उम्र और सेक्स कोई भी हो। यह जोखिम उन युवा महिलाओं में सबसे अधिक है जिन्हें आभा (ऑरा) के साथ माइग्रेन होता है, खासकर जो गर्भनिरोधक गोलियों या धूम्रपान का उपयोग करती हैं।

हार्वर्ड के एक अध्ययन में, माइग्रेन से पीड़ित लगभग 20 हजार पुरुषों में दिल के दौरे का खतरा 42% तक अधिक पाया गया।

माइग्रेन को कैसे रोका जाए?

यदि आपको माइग्रेन है, तो आपको ट्रिगर के एक ही सेट के साथ दौरा विकसित होता हैं।

जब ये ट्रिगर घटनाओं की एक श्रृंखला को सक्रिय करने के लिए पर्याप्त रूप से तीव्र होते हैं, तो आप माइग्रेन का दौरा विकसित करते हैं।

इसलिए, माइग्रेन का दौरा रोकने के लिए सही समय पर विशेष ट्रिगर की पहचान करना और उससे बचना महत्वपूर्ण है।

 

रोकथाम

ट्रिगर की पहचान करें- ये आंतरिक कारक हो सकते हैं – हार्मोनल परिवर्तन, या आपके चारों ओर परिवेश के बाहरी कारक।

ट्रिगर से बचना- तेज रोशनी या तेज आवाज, विशेष भोजन, नींद में गड़बड़ी, भावनात्मक तनाव आदि से बचना।

जीवनशैली में बदलाव-

आप जीवनशैली में बदलाव लाकर और स्वस्थ जीवन अपनाकर जोखिम को कम कर सकते हैं।

इसमें शामिल है:

• रोज व्यायाम करना

• ध्यान करना

• अच्छी नींद लेना

• खुद को अच्छी तरह से हाइड्रेट रखना

• स्वस्थ भोजन का सेवन करना

• कैफीन और शराब से परहेज करना

दवाएं: कई लोगों को लक्षणों का अनुभव शुरू होने पर जल्दी दवा लेने से लाभ होता है।

 

बार-बार होने वाले माइग्रेन को रोकना

कभी-कभी लक्षण परेशानी भरे और बार-बार होने वाले होते है, या ऊपर बताये गए उपायों द्वारा मैनेज करने में मुश्किल हो जाते हैं।

इसके लिए आपको ऐसे डॉक्टर से सलाह ले जो माइग्रेन के ऐसे एपिसोड को रोकने के लिए आपको दवाइयां लिख सके।

यदि आप निम्नलिखित लक्षणों के साथ सिरदर्द का अनुभव करते हैं, तो आपको क्रोनिक माइग्रेन से पीड़ित कहा जाता है।

• एक महीने में 15 से अधिक दिनों के लिए होने वाला सिरदर्द

• तीन महीने के लिए होता है

• इनमें से कम से 8 एपिसोड माइग्रेन के लक्षण दिखाते हैं

क्रोनिक माइग्रेन के लिए, आपके डॉक्टर आपको समस्या को रोकने वाली दवाईयाँ देंगे। आमतौर पर दी जाने वाली निवारक दवाएं हैं

1. बीटा-ब्लॉकर्स- जैसे प्रोप्रानोलोल या एटनोलोल

2. एंटी-डिप्रेशेन दवाएं- एमट्रिप्टाईल

3. एंटी-सीजर दवाएं- जैसे कि टोपिरामेट या वैल्प्रोएट

एक्यूपंक्चर और न्यूरोमॉडुलेशन थेरेपी जैसे वैकल्पिक उपचार विकल्प कुछ रोगियों में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

माइग्रेन का इलाज क्या है?

 

सहायक उपचार

1. एक अंधेरे और शांत स्थान पर आराम करना- यह बहुत से लोगों को आराम देता है और उन्हें दौरे से बेहतर तरीके से निपटने कीअनुमति देता है।

2. अन्य सहायक उपाय- कुछ लोगों को निम्न चीजों से मदद मिलती है:

• भोजन का सेवन करने या पानी पीने से

• माथे पर आइस पैक या ठंडा कपड़ा रखने से

 

दर्दनाशक

आपको अक्सर काउंटर पर उपलब्ध दर्द निवारक दवा लेने से माइग्रेन के प्रबंधन में मदद मिल सकती हैं। आप निम्न दवायें ले सकते हैं:

1. इबुप्रोफेन

2. एस्पिरिन

3. पेरासिटामोल

माइग्रेन के शुरुआती लक्षणों का अनुभव होने पर इन दवाओं को लेना सबसे प्रभावी होता है। यह दवा को मजबूत लक्षण विकसित करने से पहले कार्य करने के लिए पर्याप्त समय देता है।

पानी में घुलने वाली गोलियां (घुलनशील दर्द निवारक) तेजी से कार्य करती हैं और आपको बेहतर मदद कर सकती हैं।

सावधानियाँ:

आपको इन दवाओं के साथ कई सावधानियां बरतने की जरूर है-

1. खुराक और आवृत्ति (डोज एंड फ्रिक्वेन्शी)- बतायी गयी दवा से अधिक दवाई न लें।

2. कुछ स्थितियों में लेने से बचें- यदि आपको पेट जुड़ी कुछ समस्यायें है, जैसे हाइपरएसिडिटी या अल्सर, या फिर लिवर या किडनी की परेशानी है, तो एस्पिरिन और इबुप्रोफेन जैसी दवाओं को लेने से बचें।

3. बच्चों को देने से बचें: 16 से कम उम्र के बच्चों को डॉक्टर से पर्ची (प्रिसक्रिप्शन) लेने के बाद ही ये दवाईयाँ दें।

 

एंटीमेटिक दवाएं

एंटीमेटिक्स दवाएं आपको जी मिचलाने और उल्टी का इलाज करने में मदद करती हैं। यह माना जाता है कि, ये दवाएं दर्दनिवारक दवाओं के प्रभाव को भी बढ़ाती हैं। दर्दनिवारक दवाओं के समान, इन्हे जल्दी लेने पर अधिक प्रभाव होता हैं।

आप निम्नलिखित दवाएं ले सकते हैं:

1. मेटोक्लोप्रेमाइड

2. ओंडैन्सेट्रॉन

 

ट्रिप्टन्स

माइग्रेन में भूमिका: माइग्रेन के मध्यम से गंभीर मामलों के लिए जहां दर्द निवारक काम नही करते हैं, डॉक्टर ट्रिप्टन लिखते हैं।

माइग्रेन के इलाज में इसकी खास भूमिका होती है। ट्रिप्टन सिर में होने वाले बदलावों को पीछे करके मदद करते हैं जिससे माइग्रेन होता है।

दवायें

आमतौर पर निर्धारित ट्रिप्टन हैंः

• सुमात्रिप्टन

• जोल्मित्रिप्टन

• रिजाट्रिप्टन

ये दवाईयाँ, गोलियों, इंजेक्शनऔर नाक स्प्रे के रूप में उपलब्ध हैं।

प्रभावशीलता- दवा का सेवन करने के 2 घंटे के भीतर लगभग 70% लोगों में माइग्रेन से पूरी राहत देखी जाती है। सबसे अच्छा रिस्पॉन्स तब देखने को मिलता है जब ट्रिप्टन को जल्दी शुरू किया जाता है, जैसे माइग्रेन में अन्य दवाएं।

दुष्प्रभाव: आमतौर देखे जाने वाले लक्षण झुनझुनी की बावना, गर्मी, फ्लशिंग, चेहरे, छाती के भारीपन की भावना महसूस करते हैं। कुछ को मुंह का सूखापन या नींद आ सकती है।

सावधानियाँ:

कार्डियोवैस्कुलर रोग: ट्रिप्टन दिल में खून के दौड़ान को प्रभावित कर सकते हैं। इस प्रकार हृदय रोग से ग्रस्त लोगों को उनसे सावधान रहने की जरूरत है। यदि आपके पास ऐसे परेशानियाँ हैं, तो आपको अपने डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

एसएसआरआई अवसादरोधी दवायें: एसएसआरआई से जुड़ी अवसादरोधी दवाओं के साथ लेने से बचना चाहिए। दूसरा विकल्प खोजने के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

TOP HEALTH NEWS & RESEARCH

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

A single targeted dose of radiotherapy could be as effective at treating breast cancer as a full course, a long-term…

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

The loss of smell that can accompany coronavirus is unique and different from that experienced by someone with a bad…

Lancet Editor Spills the Beans

Lancet Editor Spills the Beans

Editors of The Lancet and the New England Journal of Medicine: Pharmaceutical Companies are so Financially Powerful They Pressure us…

मदर एंड चाइल्ड

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर अवधि क्या है? एक प्रसवोत्तर अवधि एक एैसा समय अंतराल है, जिसमें मां बच्चे को जन्म देने के बाद…

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर या स्तनपान आहार क्या है? पोस्टपार्टम डाइट वह डाइट है, जो मां को एक बार बच्चे के जन्म के…

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाने और बचने वाले खाद्य पदार्थों की सूची गर्भ धारण करने के बाद, बच्चे…

मन और मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का निदान किया जाता है? नैदानिक इतिहास: डॉक्टर आम तौर पर लक्षणों का विस्तृत इतिहास…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का इलाज किया जाता है? सामान्यीकृत चिंता विकार का उपचार लक्षणों की गंभीरता और जीवन…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है? चिंता, किसी ऐसी चीज के बारे में परेशानी या घबराहट की भावना है, जो हो…