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लिवर ट्रान्सप्लान्ट

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लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रान्सप्लान्ट) क्या है?

लिवर ट्रांसप्लांट एक बड़ी सर्जरी है। इसमें आपके क्षतिग्रस्त या खराब काम करने वाले लिवर को, किसी अन्य व्यक्ति के स्वस्थ लिवर के साथ बदल दिया जाता है। लिवर देने वाले व्यक्ति को लिवर डोनर कहा जाता है।

स्वस्थ लिवर, एक रोगग्रस्त व्यक्ति से भी प्राप्त किया जा सकता है। इसे डीजीज्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (डीडीएलटी) कहा जाता है। स्वस्थ लिवर, जीवित व्यक्ति से भी लिया जा सकता है। इसमें लिवर का केवल एक हिस्सा लिया जाता है। इसे लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (एलडीएलटी) कहा जाता है।

लिवर कई जरूरी काम करता है। यह शरीर के सामान्य कामकाज के लिए आवश्यक होता है। किसी बीमारी या जहरीले पदार्थ के कारण लिवर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकता है। यह लिवर की विफलता का कारण बन सकता है। इससे बाद में मौत भी हो सकती है। लिवर प्रत्यारोपण, मरीज को एक स्वस्थ लिवर प्रदान करता है। यह लिवर सामान्य रूप से कामकाज करता है।

 

लिवर प्रत्यारोपण, में आपके रोगग्रस्त या घायल लिवर (दाएं) को हटाकर, स्वस्थ लिवर (बाएं) के साथ बदल दिया जाता है।

 

लिवर प्रत्यारोपण कितना आम है?

ज्यादातर लिवर प्रत्यारोपण संयुक्त राज्य अमेरिका में किये जाते है, जहाँ कि लगभग 7000 प्रत्यारोपण प्रतिवर्ष किये जाते है। इसके बाद चीन और ब्राजील का नंबर आता हैं। भारत में हर साल करीब 800 से 1000 लिवर ट्रांसप्लांट किए जाते हैं। इनमें से अधिकांश लगभग 85 प्रतिशत प्रत्यारोपण एलडीएलटी होते हैं, और शेष 15 प्रतिशत प्रत्यारोपण डीडीएलटी होते हैं।

उत्तर भारत में किए गए लगभग सभी प्रत्यारोपण एलडीएलटी होते हैं, जोकि  लगभग 97 प्रतिशत हैं। जबकि, भारत के दक्षिणी और पश्चिमी भागों में डीडीएलटी भी महत्वपूर्ण संख्या में किये जाते है। हाल के वर्षों में मरने वाले दानदाताओं की संख्या और प्रत्यारोपण अधिनियम में किए गए परिवर्तनों के कारण इसमें काफी बढ़ोत्तरी हुयी है।

यह अनुमान लगाया गया है कि भारत में लगभग 20,000 लोगों को हर साल लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है, जिसे घोर कम आंकने वाला भी माना जाता है।

लिवर ट्रांसप्लांट क्यों किया जाता है? लोगों को लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत कब होती है?

लिवर प्रत्यारोपण ज्यादातर लिवर फेलियर के इलाज के लिए किया जाता है। आमतौर पर एक व्यक्ति में अक्यूट लिवर फेलियर के बजाय क्रोनिक लिवर फेलियर ज्यादा होता है। ऐसे व्यक्ति को अपना जीवन बचाने के लिए लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत होती है।

क्रोनिक लिवर फेलियर/सिरोसिस के सामान्य कारण, जिन्हें लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता होती है (भारतीय परिदृश्य के अनुसार):

• क्रोनिक हेपेटाइटिस सी (24 प्रतिशत)- दुनिया भर में लिवर प्रत्यारोपण का सबसे आम कारण।

• एल्कोहलिक लिवर डीजीज (22 प्रतिशत)

• नॉनअल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (21 प्रतिशत)

• क्रोनिक हेपेटाइटिस बी (18 प्रतिशत)

एैसे क्रोनिक लिवर फेलियर काफी कम होते है, जिनमें जीवन जीने के लिए लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है।

क्रोनिक लिवर फेलियर के आम कारण हैं

भारत में टीबी रोधी दवाओं और पश्चिमी देशों में पैरासिटामोल के साथ देखी गई दवा से होने वाली चोट, लिवर फेलियर का एक कारण है।

• फुलमिनेंट वायरल हेपेटाइटिस भारत में ज्यादातर हेपेटाइटिस ई के कारण होता है। दुनिया के अन्य हिस्सों में यह  हेपेटाइटिस बी द्वारा, विशेष रूप से हेपेटाइटिस डी के संयोजन के साथ होता है।

• कम सामान्य कारणों में दवाओं की प्रतिक्रिया (रियेक्शन), हर्बल दवाएं, विषाक्त पदार्थ, लिवर में रक्त वाहिकाओं में रुकावट शामिल है।

लिवर प्रत्यारोपण उन बीमारियो में भी किया जाता, जिनका कोई इलाज नहीं होता है, या जहां अन्य उपचार सफल नहीं हो पाते हैं:

• लिवर कैंसर (एचसीसी) जिसने लिवर की खून की नसों पर क्रमण न किया हो। यह भी एक महत्वपूर्ण कारण (10 प्रतिशत) होता है।

• बिलियरी अट्रेसिया– लिवर प्रत्यारोपण के लिए बच्चों में सबसे आम कारण होता है, जोकि सारे मामलों का 75 प्रतिशत है। इस स्थिति में पित्त (बिलियरी) की पानी निकालने की प्रणाली असामान्य होती है।

• एंजाइम की कमी के कारण अन्य गंभीर प्रणालीगत समस्याएं- प्राथमिक हाइपरऑक्सेलुरिया, मेपल सिरप मूत्र रोग आदि होते हैं।

• मेटाबोलिक रोग जिसमें लिवर क्षतिग्रस्त हो जाता है जैसे टाइरोसिनिया, विल्सन की बीमारी (Wilson’s disease).

• अन्य: बड चियारी सिंड्रोम

लिवर प्रत्यारोपण के प्रकार क्या हैं?

स्वस्थ लिवर के स्रोत के आधार पर मुख्य रूप से दो प्रकार की लिवर प्रत्यारोपण प्रक्रिया की जाती है।

लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT)

यह भारत में किया जाने वाला सबसे आम प्रकार का प्रत्यारोपण है। यहां पर डोनर एक जीवित व्यक्ति होता है जो अक्सर परिवार का सदस्य होता है, जोकि अपने लिवर का एक हिस्सा दान करता है। आमतौर पर, डोनर के लिवर का राईट लोब हटा दिया जाता है, जोकि खराब लिवर हटाने के बाद, आपके शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है।

डोनर का बचा हुया लिवर और आपके शरीर में प्रत्यारोपित लिवर दोनों सर्जरी के बाद कई हफ्तों के भीतर सामांय आकार वापस बढ़ जाते है। इस प्रकार, डोनर और प्राप्तकर्ता दोनों को पर्याप्त कार्यशीलता प्रदाना करता है।

डीजीज्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (DDLT)

इस प्रकार के प्रत्यारोपण सबसे अधिक पश्चिमी देशों में किये जाते है, और काफी हद तक भारत के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से में। डीडीएलटी में, आमतौर पर हाल ही में मरे हुये व्यक्ति का पूरा लिवर लिया जाता है, और आपके खराब लिवर को हटाकर उसे प्रत्यारोपित किया जाता है।

कभी-कभी, डोनर लिवर को दो भागों में विभाजित किया जाता है, जहां बड़े हिस्से को वयस्क में रखा जाता है और छोटे हिस्से को बच्चे या छोटे वयस्क में रखा जाता है। इस प्रकार के प्रत्यारोपण को स्प्लिट लिवर ट्रांसप्लांट कहा जाता है।

मरे हुये दानदाता, आम तौर पर मस्तिष्क मृत (brain dead) लोग होते हैं, जो अपने क्षतिग्रस्त मस्तिष्क के कारण अपने जीवन को बनाए रखने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। इन लोगों से लिये गये दान को donation after brain death (DBD) कहा जाता है। एक बार शरीर से निकाले गए लिवर को 12 घंटे कें अंदर प्रत्यारोपित करना पड़ता है।

अन्य प्रकार के मृत दानदाता वह होते है, जो किसी गंभीर आघात (ट्रामा) से गुजरते है जोकि उन्हे जीवन को बनाये रखने के लिए अयोग्य बनाता है, हाँलांकि उनका दिमाग बराबर काम करता रहता है। इसे कार्डियक डेथ (डीसीडी) के बाद का डोनेशन कहा जाता है।

ब्रेन डेथ और डोनेशन आफ्टर ब्रेन डेथ के बारे में और जानें

भारत में लिवर ट्रांसप्लांट की लागत क्या है?

भारत में लिवर ट्रांसप्लांट अधिकांश केंद्र 20-30 लाख रुपये की सीमा में लिवर प्रत्यारोपण का पैकेज प्रदान करते हैं। लागत, अक्सर यात्रा और परिवार के सदस्यों के रहने के खर्च के कारण अधिक हो सकती है। जटिलताओं के विकास जिसमें लंबे समय तक रहने और बढी हुयी उपचार लागत की आवश्यकता होती, इससे लागत और भी अधिक हो सकती है।

भारत में कितने विदेशी नागरिक लिवर प्रत्यारोपण सर्जरी का विकल्प चुनते हैं?

भारत में कुल मिलाकर लाइव डोनर लिवर ट्रान्सप्लान्ट कराने वाले मरीजों में से लगभग 10-15 प्रतिशत विदेशी होते है, जो कुछ केंद्रों में 25 प्रतिशत से भी अधिक हैं।

लिवर प्रत्यारोपण के बाद जीवित रहने की दर क्या हैं?

सफल लिवर प्रत्यारोपण की संभावना और जीवित रहने की अच्छी संभावना बहुत सारी चीजों पर निर्भर करता है, जिसमें सर्जरी और उसके बाद की देखभाल शामिल है।

हालांकि, सामान्य तौर पर यह अनुमान लगाया गया है, कि अमेरिका में लिवर ट्रांसप्लांट से गुजर रहे 100 लोगों में से 75 लोग ट्रांसप्लांट सर्जरी के 5 साल बाद भी जीवित रहते हैं। भारत में प्रमुख केंद्रों पर हाल के वर्षों में 5 साल जीवित रहने की दर लगभग 80 से 90 प्रतिशत है, जैसे यदि 100 लोग सर्जरी कराते हैं, तो उनमें से 80 से 90 लोग 5 साल के बाद भी जीवित रहते हैं।

लम्बे समय तक जीवित रहने की दर इस बात पर निर्भर करती है कि, आप पोस्ट प्रत्यारोपण देखभाल कैसे करते हैं, डॉक्टर के साथ नियमित फाॅलो-अप करते हैं या नहीं, और पूरे जीवन भर दवाई कितनी अच्छी तरह से लेते है।

इस पर बाद में विस्तार से चर्चा की गयी है

अगर आपको लगता है कि आपको लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत है तो क्या करें?

अपनी बीमारी के लिए एक विकल्प के रूप में लिवर प्रत्यारोपण पर विचार करते समय पहली बात जा आपको ध्यान रखनी चाहिये वह है, अपने डॉक्टर के साथ इसके बारे में बातचीत करें। डॉक्टर एक विकल्प के रूप में लिवर प्रत्यारोपण पर विचार तब करेंगे, जब इलाज के सारे विकल्प खत्म हो चुके हों। या फिर तब, जब आपकी बीमारी लाइलाज हो गयी हो और आप नये लिवर के अलावा आपका काम न चल रहा हो। वह नैदानिक टिप्पणियों के माध्यम से आपका आकलन करेगें और प्रयोगशाला परिणामों के माध्यम से एक स्कोर की गणना करेगें, ताकि यह संकेत मिल सके कि आपको लिवर प्रत्यारोपण की कितनी तत्काल आवश्यकता है।

स्कोर को वयस्कों के लिए एमइएलडी (मॉडल एंड स्टेज लिवर डिजीज) और बच्चों के लिए पीइएलडी (पीडियाट्रिक एंड स्टेज लिवर डिजीज) कहा जाता है। स्कोर की गणना सरल रक्त परीक्षणों जैसे क्रिएटिनिन, बिलीरुबिन और आईएनआर के माध्यम से की जाती है। स्कोर जितना अधिक होगा उतनी जल्दी आपकों लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत होगी। स्कोर 6 से 40 की बीच होता है, जहां 6 सबसे कम बीमार व्यक्ति को दिखाता है, और 40 सबसे अधिक बीमार व्यक्ति को दिखाता है। डॉक्टर आपके लिवर की बीमारी और किसी अन्य बीमारी की उपस्थिति का मूल्यांकन करने के लिए कुछ इमेजिंग परीक्षणों का भी आदेश देगें।

मतभेद:

हालांकि कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर आपकों यह भी बता सकते हैं, कि आपकी चिकितस्कीय स्थिति जैसे रोगग्रस्त/कमजोर दिल या फेफड़े, ट्रान्सप्लान्ट जैसी बड़ी सर्जरी का समर्थन नहीं करतीं है, या आपके जीवन को खतरे में डाल सकती हैं। कभी-कभी लिवर कैंसर जैसी बीमारी रक्त वाहिकाओं या शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती है, जो आपको लिवर प्रत्यारोपण से गुजरने के लिए रोक सकती है, या इसमें देरी हो सकती है जब तक कि यह बीमारी लिवर तक ही सीमित न हो जाये। एक गंभीर संक्रमण या शराब या नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या भी, आपको लिवर प्रत्यारोपण से गुजरने के लिए रोक सकती है।

प्रत्यारोपण के लिए फिट मानने के लिए कौन से परिक्षण किए जाते हैं?

अपने आप को लिवर प्रत्यारोपण के लिए फिट होने के लिए, आपकी बीमारी के दौरान किये गये सारे परिक्षण, मेडिकल रिकॉर्ड, प्रयोगशाला परीक्षणों की रिपोर्ट, इमेजिंग,और लिवर बायोप्सी रिपोर्ट को साथ में लाना चााहिये।

प्रत्यारोपण से ठीक पहले आपको फिट करने के लिए, डाक्टर कुछ जाँचे करवाने के लिए कह सकते हैं:

इमेजिंग स्टडीज: आमतौर पर डोनर और लिवर रेसिपियेंट के लिए किया जाता है।

• मल्टीफेज सीटी पेट: डायनेमिक या ट्रिपल फेज सीटी नामक एक विशेष प्रकार का सीटी किया जाता है। जहां आपके शरीर में एक रंग इंजेक्ट किया जाता है और छवियों को अलग-अलग समय पर लिया जाता है। ताकि लिवर और उसकी खून की नसों की अच्छी तरह से देखा जा सके। यह परीक्षण डोनर और रेसिपियेंट दोनों में किया जाता है। सीटी वॉल्यूमेट्री नामक एक विशेष परिक्षण लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (एलडीएलटी) में लिवर के वोल्यूम की गणना करता है।

• पेट और पेल्विस (पेट के निचले हिस्से) का अल्ट्रासाउंड

• डॉप्लर अल्ट्रासाउंड लिवर की खून की नसों के अंदर प्रत्यक्षता और प्रवाह का निर्धारण करने के लिए किया जाता है। लिवर प्राप्त  करने वाले रोगियो में किया जाता है।

• एमआरसीपी: यह एक विशेष प्रकार है एमआरआई होता है, जो पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट) की शारीरिक रचना को दर्शाता है। जो पित्त नलिकाओं की जटिलताओं से बचने के लिए सर्जरी की बेहतर योजना की अनुमति देता है।

खून का प्रकार, थक्का जमने की प्रक्रिया, एलएफटी और खून की जैव रासायनिक स्थिति की जांच करने के लिए रक्त परीक्षण। सेरोलॉजी स्क्रीनिंग और कैंसर स्क्रीनिंग जैसे, पुरुषों में पीएसए और महिलाओं में सीए 125 को भी शामिल किया जा सकता है।

यदि उपरोक्त परीक्षण किसी भी संदेह का सुझाव देते हैं, तो उसके अनुसार अन्य अतिरिक्त परिक्षण भी किए जा सकते हैं।

व्यक्ति शरीर की विभिन्न प्रणालियों का व्यापक मूल्यांकन करने के लिए गहन परिक्षणों से गुजरता है। जोकि खून की नसों, फेफड़ों, मनोवैज्ञानिक या मनोरोग समस्याओं, कैंसर और संक्रमण के लिए स्क्रीनिंग, और टीकाकरण की आवश्यकता से जुड़े होते हैं। निम्नलिखित परीक्षण पहले किए जाते हैंः

दिल और खून की नसों का मूल्यांकन:

• 2D इको (2D Echo)

• स्ट्रेस इको (Stress echo)

• कैरोटिड डॉप्लर (Carotid doppler)

फेफड़ों का मूल्यांकन:

• 100 एफआईओ पर आर्टेरियल ब्लड गैस

• पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी): आपके फेफड़ों की काम करने की क्षमता निर्धारित करने के लिए।

• छाती का एक्स-रे: फेफड़ों की असामान्यता का मूल्यांकन करने के लिए जैसे संक्रमण या माॅस

मैलिग्नेंसी स्क्रीनिंग:

• कोलोनोस्कोपी: पेट के कैंसर का संदेह दूर करने के लिए

• पैप्स स्मियर: सर्वाईकल कैंसर का संदेह दूर करने के लिए

• मैमोग्राफी: स्तन कैंसर का संदेह दूर करने के लिए

• प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए): प्रोस्टेट कैंसर का संदेह दूर करने के लिए

संक्रमण स्क्रीनिंग

• संक्रमण को बाहर करने के लिए दंत परीक्षा

• तपेदिक (टीबी) के लिए स्क्रीनिंग

वैक्सीन स्क्रीनिंग

यदि संकेत दिया जाता है तो निम्नलिखित टीके लगाये जाते है:

• हेपेटाइटिस ए वायरस

• हेपेटाइटिस बी वायरस

• न्यूमोकोकस

• इन्फ्लूएंजा

• डीटीएपी

• एचपीवी

मनोरोग परिक्षण

लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी कैसे की जाती है?

लिवर ट्रांसप्लांट एक प्रमुख सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसे पूरा होने में 12 घंटे या उससे अधिक समय लग सकता है।

यह इस बात पर निर्भर करता है, कि डोनर लिवर जीवित व्यक्ति या रोगग्रस्त व्यक्ति से प्राप्त किया गया है या नहीं। इसके आधार पर प्रत्यारोपण प्रक्रिया भिन्न होती है।

सामान्य तौर पर, ऑपरेशन से गुजरने वाले व्यक्ति को सर्जरी के लिए, निम्नलिखित चीजों से तैयार किया जाता है।

• दवायें और तरल पदार्थ देने के लिए आईवी लाइन लगाना।

• उन मशीनों से जोड़कर, जो हृदय गति, श्वसन दर, रक्तचाप आदि जैसी महत्वपूर्ण निगरानी करती हैं।

• होश खोने के लिए व्यक्ति को सामान्य संज्ञाहरण (general anesthesia) देना।

लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (LDLT)

• एलडीएलटी सर्जरी चुनी गयी सर्जरी होती है, जहां सर्जरी की तारीख और समय की योजना कई दिन पहले बनाई जाती है।

• लिवर डोनर (लिवर देने वाला) और लिवर रेसिपियेंट (लिवर प्राप्त करने वाला) की सर्जरी एक ही दिन की जाती है।

• यदि डोनर वयस्क है तो, सर्जन सबसे पहले डोनर का आपरेशन करता है। जिसमें वह लिवर का एक हिस्सा निकालता है, जोकि आमतौर पर लिवर का राइट लोब होता है। यदि प्राप्तकर्ता (रेसिपियेंन्ट) एक बच्चा है,  तो आमतौर पर लिवर का लेफ्ट लोब हटा दिया जाता है।

• हटाए गए हिस्से को क्षतिग्रस्त लिवर को हटाने के बाद, प्राप्तकर्ता (रेसिपियेंन्ट) के पेट के अंदर तुरंत रखा जाता है।

• सर्जन खून की नसों तथा बाइल डक्ट (पित्त वाहिनी) को प्रत्यारोपित जिगर के साथ जोड़ता है।

• प्राप्तकर्ता में लिवर का प्रत्यारोपित हिस्सा और डोनर में लिवर का बचा हुआ हिस्सा, दोनों कई हफ्तों के बाद अपने सामान्य आकार में आ  जाते हैं।

डीजीज्ड डोनर लिवर ट्रांसप्लांट (DDLT)

• डीडीएलटी आमतौर पर एलडीएलटी के विपरीत, पूर्व नियोजित तरीके से नहीं किया जाता है। सर्जरी, लिवर डोनर के अस्पताल में आने के बाद ही की जा सकती है।

• यदि डोनर लिवर अस्पताल में उपलब्ध है, तो प्राप्तकर्ता को तुरंत अस्पताल में आने के लिए कहा जाता है ।

• व्यक्ति को तुरंत भर्ती किया जाता है और सर्जरी के लिए फिटनेस की पुष्टि करने के लिए कई परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

• सर्जरी के लिए रोगी तैयार करने के बाद सर्जन पेट भर में एक लंबा चीरा बनाता है, और ध्यान के साथ प्राप्तकर्ता से रोगग्रस्त लिवर को हटा देता है।

• रोगग्रस्त लिवर हटाने के बाद, डोनर लिवर पेट के अंदर रखा जाता है, और डोनर लिवर की रक्त वाहिकाओं और पित्त वाहिनी को ध्यान से प्राप्तकर्ता में जोड़ दिया जाता है।

• अंत में सर्जन स्टेपल और टांके लगाकर पेट को बंद कर देते हैं।

प्रक्रिया के बाद और अस्पताल में रहने के दौरान क्या होता है?

• आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई): ट्रांसप्लांट के बाद व्यक्ति को आईसीयू में ले जाया जाता है, जहां उसे सर्जरी से ठीक होने के दौरान कुछ दिनों तक लगातार कड़ी निगरानी में रखा जाता है।

• वेंटिलेटर सपोर्ट: आईसीयू में व्यक्ति को अक्सर पहले 1-2 दिनों के लिए वेंटिलेटर पर रखा जाता है, जो उसे सपोर्ट के साथ सांस लेने में मदद करता है।

• एंटीबायोटिक: व्यक्ति को संक्रमण के विकास को रोकने के लिए एंटीबायोटिक भी दिया जाता है। ट्राइमेथोप्रिम/सल्फेमथोक्साजोल, फ्लूकोनाजोल और गैनिक्लोविर जैसे एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं ।

• शरीर के हिस्सों में, कई ट्यूब और कैथेटर डाले जाते है, जिससे व्यक्ति ठीक होने के दौरान कोई अन्य काम कर सके। ये इस प्रकार हैं

– एंडोट्रेकियल ट्यूब: मुंह के माध्यम से विंडपाइप (श्वासनली) में एक ट्यूब रखी जाती है, जो वेंटिलेटर से जुड़ी होती है जो व्यक्ति को अपना प्रयास किए बिना सांस लेने में मदद करती है।

– नासोगास्ट्रिक ट्यूब: पेट से स्राव को निकालने के लिए पेट में नाक के माध्यम से डाली जाने वाली एक पतली लंबी ट्यूब। जब तक आंत्र कार्य सामान्य नहीं हो जाता तब तक ट्यूब को कुछ दिनों के लिए रखा जाता है।

– ड्रेनेज ट्यूब: लिवर के चारों ओर एकत्र होने वाले रक्त और तरल पदार्थ को निकालने के लिए त्वचा के माध्यम से पेट में कुछ ट्यूब भी रखी जाती हैं। इन्हें करीब एक सप्ताह तक रखा जाता है।

– फोले कैथेटर: मूत्राशय के अंदर एक ट्यूब भी रखी जाती है जो मूत्र को लगातार बाहर निकालने में मदद करती है।

• अस्पताल में रहने के दौरान, किसी भी जटिलताओं के संदेह को दूर करने के लिए, नियमित रूप से प्रयोगशाला परीक्षण और डॉप्लर अध्ययन किये जाते है। व्यक्ति के ठीक होने की प्रक्रिया पर निगरानी रखी जाती है।

• व्यक्ति की हालत जब स्थिर हो जाती है, उसके बाद आगे की रिकवरी के लिए उसे प्रत्यारोपण रिकवरी क्षेत्र में ले जाया जाता है।

• यदि सर्जरी के बाद कोई महत्वपूर्ण जटिलताएं विकसित नहीं होती हैं, तो अस्पताल में रहने में लगभग 10 से 14 दिन लग सकते हैं।

• डिस्चार्ज से ठीक पहले टीम का एक डॉक्टर उस व्यक्ति और उसके परिवार को बताएगा कि ट्रांसप्लांट के बाद लिवर और शरीर की देखभाल कैसे की जाए, दवाइयां कैसे लें और निर्धारित ब्लड टेस्ट का पालन कैसे करें।

• व्यक्ति के लिए यह महत्वपूर्ण है कि, वह निर्धारित दवाओं को लेने के महत्व को समझे, नियमित रूप से स्वयं जाँच करे और, कुछ करने की या न करने की सलाह का पालन करे। यह सर्जरी के बाद जीवित रहने की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

लिवर प्रत्यारोपण सर्जरी की संभावित समस्याएं या जटिलताएं क्या हैं?

ऐसी कई जटिलताएं हैं जो सर्जरी के बाद या प्रत्यारोपण की लंबी अवधि के बाद हो सकती हैं।

ये जटिलताएं इस प्रकार हैं:

तत्काल जटिलताएं:

वे आम तौर पर सर्जरी के 3 महीने के भीतर होते हैं। इनमें आमतौर पर जटिलायें शामिल होती हैं, जोकि ग्राफ्ट रिजेक्शन औऱ या शल्य चिकित्सा शामिल हैं:

• जिगर ग्राफ्ट (नया जिगर) डिसफंक्शन

• सर्जरी के बाद रक्तस्राव (ब्लीडिंग)

• लिवर से जुड़ी खून की नसों में जटिलतायें, हेपेटिक आर्टरी क्लाट,  पोर्टल वेन क्लाट या हेपेटिक वेन आब्स्ट्रकसन।

• पित्त वाहिनी से संबंधित जटिलताओं-पित्त रिसाव, पित्त त्वचा में खोलने से बाहर आ रहा है (fistula), पित्त वाहिनी संकुचित (सख्त)

• संक्रमण

दीर्घकालिक जटिलताएं:

लंबे समय के बाद होने वाली जटिलताएं आमतौर पर इम्यूनो-सप्रेसेंट दवाओं के दीर्घकालिक उपयोग से संबंधित होती हैं, जो शरीर को किसी अन्य व्यक्ति से लिवर को अस्वीकार करने से रोकने के लिए दी जाती हैं।

• क्रोनिक ग्राफ्ट (प्रत्यारोपण लिवर)  रिजेक्शन

• गुर्दे की विफलता

• उच्च रक्तचाप (बीपी में वृद्धि)

• मधुमेह (डायबीटीज)

• डिस्लीपेडीमिया (असामान्य लिपिड का स्तर)

• हड्डी घनत्व या गैर दर्दनाक फ्रैक्चर में कमी

• मोटापा

• तंत्रिका तंत्र से संबंधित मुद्दे- कंपन, सिरदर्द, पैरास्थीसिया या अनिद्रा

• लिवर कैंसर

जिगर प्रत्यारोपण की जटिलताओं के बारे में अधिक जानें

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