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लैक्टोज इंटोलिरेन्स

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लैक्टोज इंटोलिरेन्स क्या है? लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन क्या है?

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लैक्टोज क्या है: लैक्टोज, दूध और दुग्ध उत्पादों में प्राक्रतिक रूप से मौजूद चीनी होती है, जिसे मिल्क शुगर के नाम से भी जाना जाता है।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन क्या है: इस स्थिति में आपकी आँतें लैक्टोज को पचाने में असमर्थ होती है।

लैक्टोज इंटोलिरेन्स क्या है: यह, आंत में मौजूद अनपचे लैक्टोज को शरीर द्वारा बर्दाश्त न कर पाने की असमर्थता होती है। इसके परिणामस्वरूप दस्त, गैस और सूजन जैसे लक्षणों का विकास होता है।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन के सभी मामलों में लक्षण नहीं होते हैं, इसलिए इन्हे लैक्टोज इंटोलिरेन्स का मामला नहीं कहा जा सकता है।

लैक्टोज इंटोलिरेन्स से ग्रसित ज्यादातर लोग, लक्षणों को विकसित किए बिना थोड़ी मात्रा में लैक्टोज का सेवन कर सकते हैं। लैक्टोज को सहन करने की क्षमता लोगों में अलग-अलग होती है।

दूध से एलर्जी: लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन या लैक्टोज इंटोलिरेन्स, दूध से होने वाली एलर्जी से अलग होती है। यह एलर्जी एक प्रतिक्रिया होती है, जो दूध या दुग्ध उत्पादों के सेवन के बाद होती है। एलर्जी प्रतिक्रिया दूध में मौजूद प्रोटीन के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होती है, जो मध्यम से लेकर गंभीर या जानलेवा हो सकती है।

तथ्यों के बारे में जाने: लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन, भोजन में मौजूद लैक्टोज को न पचा पाने की असमर्थता होती है। जबकि लैक्टोज इंटोलिरेन्स एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन से पीड़ित व्यक्ति आंत से संबंधित शिकायत/लक्षण विकसित करता है।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन/लैक्टोज इंटोलिरेन्स का कारण क्या है?

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन, लैक्टोज को पूरी तरह से न पचा पाने की असमर्थता है। यह लैक्टेस नामक एंजाइम की कमी के कारण होता है। यह एंजाइम आम तौर पर छोटी आंत में मौजूद होता है।

लैक्टेस, जटिल शुगर लैक्टोज को सरल ग्लूकोज और गैलेक्टोज में तोड़ने के लिए जिम्मेदार होता है। जोकि शरीर द्वारा उपयोग किए जाने के लिए खून में अवशोषित होता है।

लैक्टेस के अभाव में लैक्टोज छोटी आंत में टूट नहीं पाता है, इस तरह यह बड़ी आंत में आगे बढ़ जाता है। बड़ी आंत में, सामान्य बैक्टीरिया इसे तोड़ने की कोशिश करता है, जिसके परिणामस्वरूप तरल पदार्थ और गैसों का उत्पादन होता है। यह कुछ लोगों में लैक्टोज इंटोलिरेन्स के लक्षणों के विकास का कारण बनता है।

लैक्टेज की कमी का कारण क्या हो सकता है?

लैक्टेस की कमी दो चीजों का परिणाम हो सकती है:

1. जीन की असामान्यता, जिसे प्राथमिक लैक्टोज इंटोलिरेन्स कहा जाता है।

2. आंत की अन्य समस्याओं के परिणामस्वरूप, जिसे माध्यमिक लैक्टोज इंटोलिरेन्स कहा जाता है।

 

प्राइमरी लैक्टोज इंटोलिरेन्स:

यहाँ जीन में खराबी आने से छोटी आंत में लैक्टेस एंजाइम उत्पादन की कमी हो जाती है। यह व्यक्ति को दो तरीकों से प्रभावित कर सकता है:

1. लैक्टेस नॉनपरसिस्टेन्स: कम लैक्टेस का सबसे आम कारण है, जहां छोटी आंत जीवन के 1 वर्ष के बाद लैक्टेस के कम स्तर का उत्पादन करती है। इन लोगों में लैक्टेस उत्पादन उम्र के साथ धीरे-धीरे कम हो जाता है, और बढ़ती उम्र के साथ दूध और इसके उत्पादों का पाचन मुश्किल हो जाता है। लैक्टोज इंटोलिरेन्स के लक्षण बचपन में देरी से, जल्दी या मध्य वयस्कता से पहले दिखाई नहीं दे सकते हैं।

यह स्थिति एशियाई और अफ्रीकी आबादी में सबसे आम है, जो लगभग 60-80 प्रतिशत आबादी को प्रभावित कर रही है। यह अमेरिकियों की करीब 44 प्रतिशत आबादी और यूरोप की 5-17 आबादी में देखा जाता है।

2. लैक्टेस की कन्जेनाइटल कमी: यह शायद ही कभी देखी जाने वाली स्थिति होती है, जहां छोटी आंत कम उत्पादन करती है। यह स्थिति तब होती है, जब माता-पिता दोनों बच्चे को एक ही खराब जीन पास करते हैं।

 

सेकेन्डरी लैक्टोज इंटोलिरेन्स:

यह कम आम होता है। यह तब देखा जाता है, जब आँत की कोई बीमारी या अपरिपक्वता से लैक्टेस के उत्पादन में अस्थायी रूप से कमी आ जाती है।

1. छोटी आंत रोग/स्थिति: यहां संक्रमण, सूजन (क्रोन रोग या सीलिएक रोग की तरह), दवायें, सर्जरी या विकिरण चिकित्सा जैसी स्थितियां छोटी आंत को नुकसान पहुंचा सकती हैं। और अस्थायी रूप से लैक्टेज एंजाइम का उत्पादन करने की क्षमता को कम कर सकती हैं। स्थिति के सफल उपचार से, लैक्टेस का सामान्य उत्पादन हो सकता है।

2. समय से पहले जन्म: समय से पहले होने वाले या अपरिपक्व शिशुओं में, छोटी आंत जन्म के बाद शुरुआती दिनों के दौरान पर्याप्त लैक्टेस का उत्पादन नहीं कर सकती है। जिसके परिणामस्वरूप लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन होता है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा हो जाता है, स्तनपान का उत्पादन बढ़ता है और सामान्य हो जाता है।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन कितना आम है?

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन दुनिया के अधिकांश भाग में फैली एक वैश्विक स्थिति है, जोकि लगभग 68 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करती है। यह दुनिया में 3 में से लगभग 2 लोगों में पाया जाता है।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन से पीड़ित सभी लोगो में लैक्टोज इंटोलिरेन्स विकसित नहीं होता हैं।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन/लैक्टोज इंटोलिरेन्स से आमतौर पर कौन अधिक प्रभावित होते हैं?

लैक्टोज इंटोलिरेन्स किसी को भी प्रभावित कर सकता है, लेकिन पश्चिमी देशों के लोगों की तुलना में अफ्रीका और एशिया के लोगों में यह अधिक आम है। यह सबसे अधिक एशिया और अफ्रीका के लोगों में देखा जाता है। इसका मध्य पूर्व की आबादी के 57-83 प्रतिशत में होने का अनुमान है। यह पश्चिमी देशों में कम आम है, जो अमेरिका की 36 प्रतिशत आबादी और यूरोप की 28 प्रतिशत को प्रभावित करता हैं ।

चूंकि इन जनसंख्या समूहों में लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन होने की संभावना अधिक होती है, इसलिए उनमें लैक्टोज इंटोलिरेन्स विकसित होने की संभावना भी अधिक होती है।

लैक्टोज इंटोलिरेन्स के लक्षण क्या हैं?

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लैक्टोज इंटोलिरेन्स से पीड़ित लोग, दूध या दुग्ध उत्पाद, अतिरिक्त लैक्टोज, पैक/प्रसंस्कृत भोजन के सेवन के कुछ ही घंटों के भीतर लक्षण विकसित करते हैं:

दस्त होना

सूजन आना

गैस और पेट फूलना

जी मिचलाना

उल्टी होना

• ऐंठन के साथ दर्द होना

• पेट से गुड़गुड़ाहट की आवाज आना

• कभी-कभी सिरदर्द होना

लक्षण हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं, जोकि सेवन की गयी लैक्टोज की मात्रा और लैक्टेस एंजाइम के उत्पादन करने की क्षमता पर आधारित हो सकते हैं।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन से कौन सी अन्य समस्याओं या जटिलतायें हो सकती हैं?

दूध में कई पोषक तत्व होते हैं जैसे, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन ए और डी इत्यादि। ये हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होते हैं।

लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन और इंटोलिरेन्स से इन पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और उनमें फ्रैक्चर भी हो सकते हैं। न्यूट्रियेन्ट्स जर्नल में छपी रिसर्च के अनुसार, लैक्टोज इंटोलिरेन्स से पीड़ित लोगों में हड्डी के घनत्व और फ्रैक्चर के विकास का खतरा अधिक होता है। यह खतरा दूध का कम सेवन करने वाले लोगों से भी अधिक होता है।

 

लैक्टोज इंटोलिरेन्स की पहचान कैसे की जाती है?

लैक्टोज इंटोलिरेन्स की पहचान के लिए डॉक्टर लक्षणों के बारे में पूछेंगे। इसके लिए वह आपके शरीर परिक्षण करेंगे और कुछ जरूरी जाँचों करायेंगे।

डॉक्टर कुछ समय के लिए दूध और उसके उत्पादों को न लेने की सलाह दे सकते हैं।

डाॅक्टर शारीरिक परिक्षण में निम्नलिखित चीजें कर सकते हैं:

पेट की सूजन के लिए जाँच कर सकते हैं।

दर्द का पता करने के लिए आपका पेट दबा सकते हैं।

आँतों की आवाज सुनने के लिए स्टेथोस्कोप का प्रयोग कर सकते हैं।

संदेह के मामले में, डॉक्टर लैक्टोज इंटोलिरेन्स की पुष्टि करने के लिए कुछ विशेष परिक्षणों की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर, यह परिक्षण उन स्थितियों को जानने के लिए भी कर सकते हैं, जिनमें लैक्टोज इंटोलिरेन्स जैसे लक्षण दिखायी देंते हैं। यें स्थितियां सीलिएक डिजीज, इरिटेबल बाॅवल डिजीज, इन्फ्लामेट्री बाॅवल डिजीज, या स्माल बाॅवल बैक्टिरियल ओवरग्रोथ हो सकती है।

लैक्टोज इंटोलिरेन्स की पहचान करने के लिए, किए जा सकने वाले विशिष्ट परीक्षण इस प्रकार हैं:

• हाइड्रोजन ब्रीद टेस्ट: इसमें व्यक्ति को एक तरल पीने के लिए दिया जाता है, जिसमें लैक्टोज का स्तर ज्यादा होता है। इसके बाद व्यक्ति को नियमित अंतराल पर कंटेनर में सांस लेने के लिए कहा जाता है, और उन सांसों में हाइड्रोजन को मापा जाता है। आम तौर पर, सांस में हाइड्रोजन की मात्रा काफी कम होती है। हालांकि, लैक्टोज के न पच पाने के मामले में, यह कोलन में बैक्टीरिया द्वारा फर्मेन्ट हो जाता है, जिससे हाइड्रोजन बनता है। यह आंतों द्वारा अवशोषित (अबशोर्पसन) होता है, और आखिर में सांस द्वारा बड़ी मात्रा में बाहर निकाल जाता है। डॉक्टर यह भी आकलन करते हैं कि, क्या परीक्षण के दौरान लक्षण बिगड़ते है, जोकि इसके इसकी पहचान का संकेत देते हैं।

• लैक्टोज इंटोलिरेन्स टेस्ट: इसमें व्यक्ति को लैक्टोज से भरपूर तरल पीने के लिए दिया जाता है। इसके दो घंटे बाद खून में ग्लूकोज की मात्रा मापने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है। यदि ब्लड ग्लूकोज का स्तर 2 घंटे के बाद नहीं बढ़ता है, तो यह आंत से लैक्टोज के अधूरे पाचन और अवशोषण का सुझाव देता है।

• स्टूल एसिडिटी टेस्ट: यह परीक्षण शिशुओं और उन बच्चों में किया जा सकता है, जो अन्य परीक्षणों से नहीं गुजर सकते हैं। लैक्टोज के अपच के मामले में कोलन में लैक्टोज का फर्मेन्टेशन, लैक्टिक एसिड और अन्य एसिड पैदा करता है, जो मल के नमूने में पाया जाता है।

लैक्टोज इंटोलिरेन्स का इलाज कैसे किया जाता है?

लैक्टोज इंटोलिरेन्स का इलाज, कारण पर निर्भर करता है।

सेकेन्डरी लैक्टोज इंटोलिरेन्स: यदि लैक्टोज इंटोलिरेन्स आंत की किसी स्थिति या समस्या के कारण है, तो डॉक्टर स्थिति का इलाज करने और लैक्टेस के सामान्य उत्पादन को ठीक करने का लक्ष्य रखेंगे।

सेकेन्डरी लैक्टोज मैलअब्सोर्पशन से पीड़ित समय से पहले पैदा होने वाले बच्चे, उपचार के बिना बेहतर हो जाते हैं।

यदि लैक्टोज इंटोलिरेन्स प्राथमिक मैलअब्सोर्पशन (आनुवंशिक कारकों के कारण) के कारण होता है, तो उपचार में लैक्टोज के सेवन को कम करना और अन्य सहायक उपाय करना शामिल है।

 

I. लैक्टोज के सेवन से बचना या कम करना:

यह दो तरीकों से किया जा सकता है:

• दूध और दुग्ध उत्पादों से बचना या कम करना: लैक्टोज इंटोलिरेन्स वाले अधिकांश लोग कुछ मात्रा में लैक्टोज का आनंद ले सकते हैं, और इस प्रकार दूध और उसके उत्पादों के सेवन को कम करके लक्षणों के विकास से बच सकते हैं।

• लैक्टोज के बिना या लैक्टोज की कमी वाले दूध या दुग्ध उत्पाद लेने से दूध में मौजूद अन्य प्रमुख पोषक तत्वों के सेवन को कम किए बिना, आहार में लैक्टोज की मात्रा कम करने में मदद मिल सकती है। ये उत्पाद किराने (ग्रोसरी) की दुकानों में पाए जा सकते हैं।

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निम्नलिखित तरीकों का उपयोग करके लक्षणों के विकास को भी कम किया जा सकता है:

• दूध या उसके उत्पादों के छोटे सर्विंग्स लेना: एक बार में लगभग 120 मिलीलीटर तक दूध पीना। यह लैक्टोज को पचाने के लिए, लैक्टेस की कम मात्रा का उत्पादन करता है। इससे बिना पचे हुये लैक्टोज की छोटी मात्रा छूट जाती है।

• अन्य खाद्य पदार्थों के साथ दूध पीना: इससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो सकती है और लक्षण कम हो सकते हैं।

• डेयरी उत्पादों की विभिन्न विविधताओं के सेवन की कोशिश करना: विभिन्न डेयरी उत्पादों में लैक्टोज की विभिन्न मात्रा होती है।

स्विस या चेडर जैसे हार्ड चीज में लैक्टोज की थोड़ी मात्रा होती है।

दही और मक्खन जैसे कल्चर्ड दुग्ध उत्पाद लक्षण पैदा नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इसमें बैक्टीरिया होते हैं, जो स्वाभाविक रूप से लैक्टोज को पचाने वाले एंजाइम का उत्पादन करते हैं।

कुछ लोग फुल फैट डेयरी उत्पादों को हजम करने में सक्षम होते हैं, जैसे फुल दूध/ चीज।

 

II. लैक्टेस एंजाइम की खुराक लेना:

यह भोजन में सेवन किये गये लैक्टोज को पचाने के उद्देश्य से, लैक्टेस का बाहरी स्रोत प्रदान करता है। यह भोजन से ठीक पहले या दूध में जोड़े गए बूंदों के रूप में या गोलियों के रूप में लिया जा सकता है। एक अध्ययन में पाया गया कि, लैक्टेज सप्लिमेंट और प्रोबायोटिक दोनों लैक्टोज इंटोलिरेन्स में प्रभावी होते हैं। लैक्टेस सप्लिमेंट, प्रोबायोटिक से काफी बेहतर होते है। ये उत्पाद हर किसी के लिए उपयोगी नहीं होते हैं। कुछ अध्ययनों से इसके कम लाभ दिखें हैं।

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