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इरिटेबल बावल सिंड्रोम

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इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आई.बी.एस) क्या है?

IBS-information

• इरिटेबल बावल सिंड्रोम, काम करने का विकार है, जिसको आँतों की अतिसंवेदनशीलता से जुड़ा माना जाता है।

• आँतों की अतिसंवेदनशीलता से उनमें दर्द तथा सिकुड़न पैदा होती है, जिसकी वजह से दस्त और कब्ज भी हो सकते हैं।

• ये लक्षण एक साथ होते हैं, और गँभीरता तथा अवधि में यह अलग-अलग हो सकते हैं।

• इरिटेबल बावल सिंड्रोम आंत की किसी समस्या या स्थिति से जुडी नहीं होती। यह इन्फ्लामेट्री बावल डीजीज (आईबीडी) से अलग होती है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम कितना सामान्य है?

अध्ययनों से यह पता चलता है कि विश्व में लगभग 11 प्रतिशत लोगों को इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम होने का खतरा किनको ज्यादा होता है?

महिलाओं: में पुरूषों के मुकाबले इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) होने का खतरा दो गुना होता है।

युवा लोग: 50 साल से कम उम्र के लोगों में इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) होने का खतरा 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के मुकाबले 25 प्रतिशत ज्यादा होता है।

परिवार के किसी सदस्य को आई.बी.एस. की समस्या: इस समस्या के होने में जीन (genes) और आसपास का माहौल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मानसिक तनाव और स्वास्थ्य की स्थिति: इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के साथ चिंता, अवसाद (डिप्रेशन) और अन्य मानसिक समस्यायें जुड़ी होती हैं। अतीत में होने वाले अप्रिय घटनायें जैसे, बच्चों का शोषण, यौन शोषण, या गंभीर शारीरिक औऱ मानसिक चोट भी इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के विकास में अपनी भूमिका निभाते हैं।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम के लक्षण क्या है?

 

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के सबसे सामान्य लक्षण हैं:

1. पेटदर्द, जोकि आमतौर पर पेट साफ करने के दौरान होता है। ज्यादातर लोगों में यह खाने के बाद बढ़ जाता है, और मल त्याग करने के बाद ठीक हो जाता है।

2. आँतो की क्रियायों में बदलाव से कब्ज, दस्त या दोनो हो सकते हैं, जोकि इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के प्रकार पर निर्भर करता है।

 

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आई.बी.एस) के प्रकार:

आंतों की क्रियायों से होने वाले बदलाव के आधार पर इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) तीन प्रकार के होते है।

1. कब्ज के साथ इरिटेबल बावल सिंड्रोम: इसमें व्यक्ति में पेट साफ होने की कम से कम एक प्रक्रिया होती है, जिसमें

• एक तिहाई (1/3) से अधिक मल कड़ा और ढेलेदार होता है, और

• एक तिहाई (1/3) से कम मल पतला और पानीदार होता है।

2. दस्त के साथ इरिटेबल बावल सिंड्रोम: इसमें व्यक्ति में पेट साफ होने की कम से कम एक प्रक्रिया होती है, जिसमें

• एक तिहाई (1/3) से अधिक मल पतला और पानीदार होता है, और

• एक तिहाई (1/3) से कम मल कड़ा और ढेलेदार होता है।

3. मिक्स्ड बावल आदतों के साथ इरिटेबल बावल सिंड्रोम:

• एक तिहाई (1/3) से अधिक मल कड़ा और ढेलेदार होता है, और

• एक तिहाई (1/3) से अधिक मल पतला और पानीदार होता है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम के इलाज के लिए इसका प्रकार जानना महत्वपूर्ण होता है।

 

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आई.बी.एस) के अन्य लक्षण इस प्रकार हैं:

• पेट में उभार- जहाँ पर पेट भरा हुआ और फूला लगता है। इन लोगों में गैस की कम मात्रा भी लक्षण पैदा करती है।

• हवा पास करना या पेट फूलना

• पेट साफ न होने का आभास

• मल के साथ चिपचिपा पदार्थ (म्युकस) निकलना

• थकावट होना

• जी मिचलाना

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित महिलाओं में महावारी (महीना) के दौरान अधिक लक्षण दिखायी देते हैं।

कौन से लक्षण और संकेत चेतावनीपूर्ण होते है? या व्यक्ति को डाक्टर से तुरंत कब मिलना चाहिये?

नीचे दिये गये लक्षण किसी गंभीर समस्या का संकेत दे सकते हैं, जिसमें तुरन्त चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।

• बिना वजह के वजन घटना

• मल में या गुदा (एनस) से खून आना

• साँस लेने में दिक्कत होना

• त्वचा का पीला पड़ जाना (पीलिया)

इरिटेबल बावल सिंड्रोम किन कारणों से अचानक शुरु हो सकता है?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के बढ़ने या लक्षणों के बिगड़ने के कोई साफ कारण नहीं होते हैं।

कभी-कभी यह निम्नलिखित कारणों से हो सकता है:

• तनाव और चिंता

• खानपान: जैसे, मसालेदार या फैट वाला खाना, शराब, कैफीन, डेयरी उत्पाद आदि, इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) का कारण हो सकते हैं।

• हार्मोनल परिवर्तन: बहुत सारी महिलाओं में महावारी (महीना) के दौरान या उसके आसपास लक्षण काफी बिगड़ जाते हैं।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम से प्रभावित लोगों में अन्य कौन सी स्वास्थ्य समस्याये देखी जा सकती हैं?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित लोगों में दूसरी अन्य स्वास्थ्य समस्याये भी हो सकती हैं। जैसेः

• मानसिक समस्याये जैसे चिंता, अवसाद (डिप्रेशन) और दैहिक लक्षण विकार (सोमैटिक सिंप्टम डिस्आर्डर)

• लंबे समय से दर्द जैसे कि, पेट के नीचले भाग में दर्द, फाईब्रोमाएल्जिया और क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम

• पाचन समस्यायें जैसे अपच औऱ गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी)

इरिटेबल बावल सिंड्रोम से क्या हो सकता है? यह आपके जीवन को किस तरह प्रभावित कर सकता है?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) आपके जीवन के स्तर को काफी महत्वपूर्ण तरीके से प्रभावित कर सकता है। इसके कारण कुछ लोगों में कुछ समस्यायें पैदा हो जाती हैं, जोकि इस प्रकार हैं:

• मूड में बदलाब या मानसिक समस्यायें: स्थिति की जटिलता और उससे जुड़े लक्षणों जैसे दर्द और बिगड़ी हुये बावल मोशन से मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद (डिप्रेशन) भी हो सकता है।

• जीवन का निचला स्तर: समस्या की गंभीरता तथा उसका बार-बार होना व्यक्ति की क्षमता और प्रदर्शन को घटा सकता है, जिससे उसके जीवन का हर पहलू प्रभावित होता है।

• बवासीर: पुराना कब्ज या दस्त, गुदा (एनस) की आसपास की नसों को फुला सकता है जिसके फटने से खून भी निकल सकता है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम का कारण क्या है?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) का सही कारण ज्ञात नहीं है। शोध यह बताते हैं कि, विभिन्न समस्याओं के एक साथ होने से इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) होता है। इसे एक फंक्शनल गैस्ट्रोइन्टेस्टाईनल विकार माना जाता है, जोकि पेट और दिमाग के संपर्क की समस्या के कारण पैदा होती है। इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित लोगों में कुछ समस्याये आम होती हैं जो इस प्रकार हैं:

• परिवार के सद्स्यों में इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) का इतिहास

• शुरूआती जीवन में तनावपूर्ण घटनायें जैसे यौन या शारीरिक शोषण।

• मानसिक तनाव और समस्यायें: अवसाद (डिप्रेशन), चिंता और दैहिक लक्षण विकार (सोमैटिक सिंप्टम डिस्आर्डर) को इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के साथ जुड़ा देखा गया है।

• आंत की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इम्यून रिसपोंस) में बढ़त: इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित कुछ लोगो की आंतो में बढ़ी हुयी प्रतिरक्षा कोशिकायें दिखायी देती हैं, जो पेट की बढ़ी हुयी प्रतिरक्षा का संकेत देती है।

• आँतों में गंभीर संक्रमण का इतिहास।

• छोटी आँत के बैक्टीरिया में बदलाव: इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित कुछ लोगो में बैक्टीरिया के प्रकारो में परिवर्तन या सँख्या में बढ़त देखी जा सकती है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम की पहचान कैसे की जाती है?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की पहचान नैदानिक (क्लिनिकल) लक्षणों के आधार पर की जाती है, जिसमें अच्छी तरह से बनाये गये मापदंडों का इस्तेमाल होता है। अन्य स्थितियाँ जोकि आईबीएस की तरह लग सकती हैं, उसका पता लगाने के लिए, या इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की किसी जटिलता का संदेह दूर करने के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट की आवश्यकता होती है। डाक्टर लक्षणों का पूरा इतिहास लेगे, जिसके बाद शारीरिक परिक्षण और जाँचे होती हैं।

 

सम्पूर्ण चिकित्सकीय इतिहास:

डाक्टर पेट की समस्याओं के बारे में पूँछेंगे और हर एक समस्या और लक्षण की पूरी जानकारी लेंगे।

• पेटदर्द: डाक्टर आपके पेटदर्द के बारे में जानना चाहेंगे कि, वह किस प्रकार का है। क्या वह पेट साफ करने के बाद बढ़ता या घटता है।

• पेट साफ करने बार-बार जाना: यदि पेट साफ करने की क्रिया पहले से बढ़ी है या घटी है। पूरा पेट साफ न होने की भावना।

• मल का प्रकार: यदि मल ठोस, कड़ा और ढेलेदार है या फिर पतला, पानीदार या ढीला है। या इसमें दोनों समस्याये हैं।

• पेट में उभार: यदि पेट में उभार या फैलाव की भावना है।

• मल के रंग में बदलाव: मल में खून आना या काले रंग का होना।

• मलद्वार से खून निकलना।

• वजन कम होना: यदि वजन कम हुआ है।

• बुखार: पेट में संक्रमण का संकेत दे सकता है।

जी मिचलाना या उल्टी।

• थकान: यदि अत्यधिक थकान की भावना है।

• मूड या व्यवहार में बदलाव: यदि लक्षणों की शुरूआत में कोई उलझन, चिंता या तनाव की भावना होती है। यदि व्यक्ति सुस्त, उदास और आस-पास के माहौल में रुचि नहीं दिखाता है। अतीत में हुयी किसी अप्रिय घटना का एहसास।

• बढ़ने या राहत देने वाले कारक: यदि कुछ ऐसे कारक जोकि समस्या को बढ़ाते या शुरु करते है, जैसे कोई खाध पदार्थ या महावारी (महीना) इत्यादि।

• पारिवारिक इतिहास: परिवार का कोई भी सदस्य यदि इस जैसी समस्या का सामना कर रहा है, या उसमे इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की समस्या, पेटदर्द रोग या कोलोनिक कैंसर की समस्या पाई गयी है।

• दवाई का इतिहास: कौन सी दवा ली जा रही है।

 

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की पहचान के लिए क्लिनिकल मापदंड:

डाक्टर इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की पहचान कर सकते है, यदि मरीज को 3 महीने से हफ्ते में कम से कम एक बार दर्द होता है, जिसमें नीचे दिये गये कोई भी 2 लक्षण दिखायी देते हैं:

• मल त्याग करते समय दर्द या परेशानी, जोकि मल त्याग करने के बाद घटता या बढ़ता है।

• मल त्याग करने की संंख्या में बदलाव होना।

• मल के रूप में बदलाव

 

शारीरिक परिक्षण:

शारीरिक परिक्षण के दौरान डाक्टर शरीर का सामान्य परिक्षण करेंगे, और बाद में वह पेट का परिक्षण करेंगे, जहाँ पर वह निम्न समस्यायों की जाँच कर सकते हैं।

• पेट की सूजन

• पेट को दबाकर या थपथपाकर नरमी या दर्द का पता लगाना

• स्टेथोस्कोप द्वारा पेट की आवाज को सुनना

डाक्टर किसी समस्या को जानने के लिए मलद्वार (रेक्टल) में उंगली डालकर उसका परिक्षण भी कर सकते हैं।

 

जाँचे:

आमतौर पर, इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की पहचान के लिए डाक्टर कोई जाँच के लिये नहीं कहते हैं। ऐसी कोई दूसरी स्थिति जिसमें इसी तरह के लक्षण दिखायी दे सकते हैं, उसको जानने के लिए डाक्टर कुछ जाँचों के लिए कह सकते हैं जैसे खून की जाँच, मल की जाँच और अन्य जाँचे।

खून की जाँच

यह जाँच संक्रमण, खून की कमी (एनेमिया) या डाईजेस्टिव बीमारी को जानने के लिए की जाती है।

मल की जाँच

यह जाँच संक्रमण (बैक्टीरिया या पैरासाईट), मल में फैट या खून की जाँच करने के लिए कि जाती है।

 

अन्य अतिरिक्त जाँचें

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) की तरह दिखने वाली दूसरी स्थितियों की पहचान के लिए डाक्टर कुछ और जाँचों के लिए कह सकते हैं। इन जाँचों में शामिल हो सकते हैं:

• हाईड्रोजन ब्रीद टेस्ट: यह जाँच छोटी आँत में बढ़े बैक्टीरिया  या लैक्टोस इन्टोलिरेंस को जाँचने के लिए की जाती है।

अपर जीआई एन्डोस्कोपी: यह जाँच पेट को और छोटी आँत को अंदर से देखने लिए की जाती है। इसमें बायोप्सी से सेलियक डीजीज और अन्य बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

कोलोनोस्कोपी: यह जाँच इन्फ्लामेट्री बावल डीजीज या कोलोन कैंसर जैसी बीमारियों के संदेह को दूर करने के लिए की जाती है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) का इलाज लक्षणों पर निर्भर करता है। हल्के लक्षणों को आमतौर पर जीवनशैली और खानपान में बदलाव से तथा तनाव को काबू करके नियंत्रण में लाया जा सकता है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के मध्यम और गँभीर मामलो में दवाईयों और मानसिक स्वास्थ्य उपचार की जरूरत होती है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जहाँ कुछ विकल्प कुछ लोगों में दूसरे की तुलना में अच्छा काम करते हैं।

डाक्टर, मरीज और डायटीसियन द्वारा एक साथ उठाये गये कदम इलाज में मदद कर सकते हैं।

 

जीवनशैली में बदलाव

• शारीरिक गतिविधी में बढ़ोत्तरी या रोज व्यायाम करना

• तनाव से दूर रहना और योग, मालिश जैसी आरामदेह तकनीकों को अपनाना

• अच्छी नींद लेना

खानपान में बदलावः डाक्टर या डायटीसियन द्वारा निम्नलिखित बदलावो को करने के लिए कहा जा सकता है।

अधिक रेशेदार (fiber) भोजन का सेवन: यह इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित मरीजों में कब्ज की समस्या को कम कर सकता है। एक दिन में लगभग 22-34 ग्राम रेशेदार भोजन लेने की सलाह दी जाती है। रेशेदार भोजन दो प्रकार के होते हैं- घुलनेवाले या न घुलनेवाले। फलों, बींस और जई (oats) में मौजूद घुलनशील रेशे (fiber) इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) में काफी मददगार साबित होते हैं।

ऐसे खानपान से दूर रहना जो इन लक्षणों को पैदा करते हैं: कुछ लोगों में यह ग्लुटेन नामक प्रोटीन के कारण हो सकता है जो गेंहूँ, जौ और राई में मिलता है। इन लोगों में सेलियक डीजीज न होने के बावजूद इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण विकसित होते हैं। जबकि कुछ लोगो में यह विशेष प्रकार के कार्बोहाईड्रेट से हो सकता है जो फ्रुक्टोज, लैक्टोज और FODMAPs में मिलते हैं।

FODMAPs की कमी वाले खानपान को अपनाने से लक्षणों में राहत मिलती है।

• खूब सारा तरल पदार्थ पीना

 

दवाईयाँ

यह आमतौर पर मध्यम और गंभीर लक्षणों में दी जाती है या फिर तब, जब जीवनशैली या खानपान में बदलाव से कोई मदद नहीं मिलती है।

• फाईबर सप्लिमेंट (fiber supplements): को पानी या किसी तरल पदार्थ के साथ लेने से कब्ज में मदद मिलती है।

• लैक्जेटिव: यदि फाईबर सप्लिमेंट (fiber supplements) काम नहीं करता है, तब डाक्टर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड ओरल या पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल दे सकते हैं।

• दस्त रोकने की दवा: लोपरामाइड, दस्त को नियंत्रित कर सकता है।

• एंटीकोलिनर्जिक दवाएं: ये दवायें दस्त से पीड़ित लोगों की दी जाती हैं, जैसे डायसाईक्लोमाईन।

• सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअप्टेक इनहीबिटर्स (SSRI) एन्टीडिप्रेसेंट्स: ये दवायें इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित उन लोगों को दी जाती हैं, जिनको कब्ज या तनाव की शिकायत होती है- जैसे फ्लुओक्सेटीन या पैरॉक्सिटाइन।

• ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स: ये दवायें डिप्रेशन को कम करनें के साथ ही पेट के न्यूरोंस की गतिविधि को कम करके दर्द में मदद कर सकती हैं। डिप्रेशन के न होने पर, कम खुराक दी जाती है जैसे- इमिप्रेमाईन, डेसिप्रेमाईन, नोरप्रामाईन।

• दर्द की दवायें: प्रिगाबलिन या गाबापेंटिन जैसी दवायें तेज दर्द या सूजन में दी जा सकती हैं।

• प्रोबायोटिक्स: कुछ डाक्टर पेट के सामान्य बैक्टीरिया में बदलाव को सही करने के लिए प्रोबायोटिक्स दे सकते हैं।

 

मानसिक स्वास्थ्य उपचार

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित कुछ मरीजों को राहत पहुँचाने के लिए डाक्टर मानसिक स्वास्थ्य उपचार तथा परामर्श की सलाह दे सकते हैं। यह सलाह निम्न हो सकती हैं-

• कोग्नाईटिव बिहेवियोरल थेरेपी: विचार और व्यवहार में परिवर्तन करके इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती है।

• गट डाईरेक्टेड हाईप्नोथेरेपी: जहाँ पर थेरेपिस्ट (चिकित्सक) सम्मोहन का इस्तेमाल करके लक्षणों में सुधार लाते है।

• आराम करने की तकनीक: चिंता और तनाव को करने में मदद करती है।

 

बचाव

तनाव से निपटने के तरीको को अपनाने से इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षणों में मदद मिल सकती है।

इनको अपनाकर देखें:

• परामर्श (Counseling): एक सलाहकार तनाव के दौरान आपके व्यवहार में बदलाव लाकर आपकी मदद कर सकते है। अध्ययनों से यह पता चला है कि साईकोथरेपी, लक्षणों में काफी मददगार साबित होती है।

• बायोफीडबैक: विधुतीय तरंगें आपको शरीर के कामकाज के बारे में सूचना उपलब्ध कराती हैं। फीडबैक आपको जटिल परिवर्तनों पर ध्यान देने में मदद करता है, जैसे लक्षणों को कम करने के लिए कुछ माँशपेशियों का आराम देना।

• आराम देने वाले व्यायाम: ये व्यायाम एक के बाद एक आपके शरीर की माँशपेशियों को आराम पहुँचाते हैं। अपने पैरों की माँशपेशियों को कड़ा करके प्रारम्भ करे, फिर बाद में तनाव को धीरे-धीरे जाने दें। फिर अपनी पिंडलियों (calves) को कड़ा करके ढीला छोड़ें। ऐसा तब तक करें जब तक कि आपके शरीर, आँखों और खोपड़ी की माँशपेशियोँ को आराम न मिले।

• माइंडफुलनेस ट्रेनिंग: यह तकनीक तनाव घटाने में उपयोगी पायी जाती है। यह तकनीक चिंता और व्याकुलता को हटाकर आपको वर्तमान स्थिति में बनाये रखने में मदद करती है।

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