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इरिटेबल बावल सिंड्रोम (उपचार)

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इरिटेबल बावल सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है?

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) का इलाज लक्षणों पर निर्भर करता है। हल्के लक्षणों को आमतौर पर जीवनशैली और खानपान में बदलाव से तथा तनाव को काबू करके नियंत्रण में लाया जा सकता है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के मध्यम और गँभीर मामलो में दवाईयों और मानसिक स्वास्थ्य उपचार की जरूरत होती है।

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के उपचार के कई विकल्प उपलब्ध हैं, जहाँ कुछ विकल्प कुछ लोगों में दूसरे की तुलना में अच्छा काम करते हैं।

डाक्टर, मरीज और डायटीसियन द्वारा एक साथ उठाये गये कदम इलाज में मदद कर सकते हैं।

 

जीवनशैली में बदलाव

• शारीरिक गतिविधी में बढ़ोत्तरी या रोज व्यायाम करना

• तनाव से दूर रहना और योग, मालिश जैसी आरामदेह तकनीकों को अपनाना

• अच्छी नींद लेना

खानपान में बदलावः डाक्टर या डायटीसियन द्वारा निम्नलिखित बदलावो को करने के लिए कहा जा सकता है।

अधिक रेशेदार (fiber) भोजन का सेवन: यह इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित मरीजों में कब्ज की समस्या को कम कर सकता है। एक दिन में लगभग 22-34 ग्राम रेशेदार भोजन लेने की सलाह दी जाती है। रेशेदार भोजन दो प्रकार के होते हैं- घुलनेवाले या न घुलनेवाले। फलों, बींस और जई (oats) में मौजूद घुलनशील रेशे (fiber) इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) में काफी मददगार साबित होते हैं।

ऐसे खानपान से दूर रहना जो इन लक्षणों को पैदा करते हैं: कुछ लोगों में यह ग्लुटेन नामक प्रोटीन के कारण हो सकता है जो गेंहूँ, जौ और राई में मिलता है। इन लोगों में सेलियक डीजीज न होने के बावजूद इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण विकसित होते हैं। जबकि कुछ लोगो में यह विशेष प्रकार के कार्बोहाईड्रेट से हो सकता है जो फ्रुक्टोज, लैक्टोज और FODMAPs में मिलते हैं।

FODMAPs की कमी वाले खानपान को अपनाने से लक्षणों में राहत मिलती है।

• खूब सारा तरल पदार्थ पीना

 

दवाईयाँ

यह आमतौर पर मध्यम और गंभीर लक्षणों में दी जाती है या फिर तब, जब जीवनशैली या खानपान में बदलाव से कोई मदद नहीं मिलती है।

• फाईबर सप्लिमेंट (fiber supplements): को पानी या किसी तरल पदार्थ के साथ लेने से कब्ज में मदद मिलती है।

• लैक्जेटिव: यदि फाईबर सप्लिमेंट (fiber supplements) काम नहीं करता है, तब डाक्टर मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड ओरल या पॉलीइथिलीन ग्लाइकोल दे सकते हैं।

• दस्त रोकने की दवा: लोपरामाइड, दस्त को नियंत्रित कर सकता है।

• एंटीकोलिनर्जिक दवाएं: ये दवायें दस्त से पीड़ित लोगों की दी जाती हैं, जैसे डायसाईक्लोमाईन।

• सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिअप्टेक इनहीबिटर्स (SSRI) एन्टीडिप्रेसेंट्स: ये दवायें इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित उन लोगों को दी जाती हैं, जिनको कब्ज या तनाव की शिकायत होती है- जैसे फ्लुओक्सेटीन या पैरॉक्सिटाइन।

• ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स: ये दवायें डिप्रेशन को कम करनें के साथ ही पेट के न्यूरोंस की गतिविधि को कम करके दर्द में मदद कर सकती हैं। डिप्रेशन के न होने पर, कम खुराक दी जाती है जैसे- इमिप्रेमाईन, डेसिप्रेमाईन, नोरप्रामाईन।

• दर्द की दवायें: प्रिगाबलिन या गाबापेंटिन जैसी दवायें तेज दर्द या सूजन में दी जा सकती हैं।

• प्रोबायोटिक्स: कुछ डाक्टर पेट के सामान्य बैक्टीरिया में बदलाव को सही करने के लिए प्रोबायोटिक्स दे सकते हैं।

 

मानसिक स्वास्थ्य उपचार

इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) से ग्रसित कुछ मरीजों को राहत पहुँचाने के लिए डाक्टर मानसिक स्वास्थ्य उपचार तथा परामर्श की सलाह दे सकते हैं। यह सलाह निम्न हो सकती हैं-

• कोग्नाईटिव बिहेवियोरल थेरेपी: विचार और व्यवहार में परिवर्तन करके इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करती है।

• गट डाईरेक्टेड हाईप्नोथेरेपी: जहाँ पर थेरेपिस्ट (चिकित्सक) सम्मोहन का इस्तेमाल करके लक्षणों में सुधार लाते है।

• आराम करने की तकनीक: चिंता और तनाव को करने में मदद करती है।

 

बचाव

तनाव से निपटने के तरीको को अपनाने से इरिटेबल बावल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षणों में मदद मिल सकती है।

इनको अपनाकर देखें:

• परामर्श (Counseling): एक सलाहकार तनाव के दौरान आपके व्यवहार में बदलाव लाकर आपकी मदद कर सकते है। अध्ययनों से यह पता चला है कि साईकोथरेपी, लक्षणों में काफी मददगार साबित होती है।

• बायोफीडबैक: विधुतीय तरंगें आपको शरीर के कामकाज के बारे में सूचना उपलब्ध कराती हैं। फीडबैक आपको जटिल परिवर्तनों पर ध्यान देने में मदद करता है, जैसे लक्षणों को कम करने के लिए कुछ माँशपेशियों का आराम देना।

• आराम देने वाले व्यायाम: ये व्यायाम एक के बाद एक आपके शरीर की माँशपेशियों को आराम पहुँचाते हैं। अपने पैरों की माँशपेशियों को कड़ा करके प्रारम्भ करे, फिर बाद में तनाव को धीरे-धीरे जाने दें। फिर अपनी पिंडलियों (calves) को कड़ा करके ढीला छोड़ें। ऐसा तब तक करें जब तक कि आपके शरीर, आँखों और खोपड़ी की माँशपेशियोँ को आराम न मिले।

• माइंडफुलनेस ट्रेनिंग: यह तकनीक तनाव घटाने में उपयोगी पायी जाती है। यह तकनीक चिंता और व्याकुलता को हटाकर आपको वर्तमान स्थिति में बनाये रखने में मदद करती है।

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