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सिर की चोट (हेड इंजरी)

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सिर की चोट क्या है?

head injury-information

सिर की चोट एक ऐसी चोट है, जो सिर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। यह खोपड़ी, खोपड़ी की हड्डी, खून की नसें और दिमाग इत्यादि को प्रभावित करती है। इसमें मामूली से लेकर गंभीर चोटें हो सकती हैं, जोकि गुलुम, त्वचा पर खंरोच, खोपड़ी की हड्डी टूटना, दिमाग की चोट और दिमाग के अंदर खून का रिसाव आदि हैं।

सिर की चोट अचानक झटके या धक्के से होती है, जोकि आमतौर पर सड़क दुर्घटना (RTA), गिरने या मारपीट के कारण होती है। सिर की चोट से जब दिमाग को नुकसान पहुँचता है, तब इसे ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) कहा जाता हैं। ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) से कन्कशन जैसी मामूली तथा डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी जैसे गंभीर नुकसान हो सकते हैं।

भारत सहित दुनिया भर में, ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) विकलांगता, मौत और सामाजिक-आर्थिक नुकसान का एक प्रमुख कारण है। ऐसा अनुमान है कि, भारत में हर साल लगभग 15 से 20 लाख लोग चोटिल होते हैं, जिनमें से लगभग 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है। भारत में ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) का एक प्रमुख कारण सड़क दुर्घटना (RTA) है, जोकि सभी मामलों का लगभग 60 प्रतिशत है। सिर की चोट (बीमारी की दशा) की पहचान और इलाज, चोट की गंभीरता और उसके प्रकार पर निर्भर करता है। ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) से होने वाली विकलांगता और मौत की अधिक दर की वजह से, सिर की सभी चोटों का आंकलन सही ढंग से करके उसका सही तरीके से इलाज किया जाना चाहिये।

सिर की चोट या ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी कितनी आम है?

भारत सहित दुनिया भर में ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) विकलांगता, मौत और सामाजिक-आर्थिक नुकसान का एक प्रमुख कारक है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि, भारत में लगभग 15 से 20 लाख लोग इससे प्रभावित होते हैं, जिनमें से लगभग 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है।

भारत में ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) के सबसे सामान्य कारक हैं:

• सड़क दुर्घटना, सभी चोटों का लगभग 60 प्रतिशत।

• ऊँचाई से गिरना, 20-25 प्रतिशत मामलों में।

• मारपीट, 10 प्रतिशत मामलों में।

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) के मामलों में नशा एक प्रमुख कारक माना गया है, जोकि चोट के समय 15 से 20 प्रतिशत देखा गया है।

सिर की चोट दिमाग को कैसे नुकसान पहुँचाती है? सिर की चोट की प्रक्रिया क्या है?

सिर की चोट या ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) सिर पर अचानक झटके या किसी मजबूत चीज के सिर पर लगने से होती है। यह हड्डी की परत के सिर के टकराने से भी होती है, जोकि अक्सर बल के विपरीत दिशा मे होती है, जिसे काउंटर ब्लो या काउंटर चोट कहा जाता है। कभी-कभी ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) खोपड़ी की हड्डी के टूटने से भी होती है।

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) को दो हिस्सों में बाँटा जा सकता है:

प्राथमिक चोट: यह एक ऐसी दिमागी चोट है, जोकि चोट के प्रभाव के तुरंत बाद विकसित होती है। इसमें दिमाग कीं खरोंच, दिमाग के अंदर या बाहर खून का रिसाव, दिमाग की नंसों का फट जाना और खोपड़ी की हड्डी का टूट जाना इत्यादि शामिल है।

माध्यमिक चोट: यह चोट प्रतिक्रिया के रूप में चोट लगने के कुछ समय बाद विकसित होती है। इसमें दिमाग कि कोशिकाएं सूजकर खोपड़ी की हड्डियों के बीच दब जाती है, जिससे खून में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इस तरह की चोट प्राथमिक चोट की तुलना में काफी हानिकारक हो सकती है।

सिर की चोट या ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी के कारण क्या है?

दिमाग, हड्डी की एक मजबूत परत तथा सेरिब्रोस्पाईनल फ्लूएड से ढका होता है। सेरिब्रोस्पाईनल फ्लूएड दिमाग के चारों तरफ लचीलापन पैदा करता है, जोकि चोट से दिमाग की रक्षा करता है। हाँलांकि, किसी तेजी से आने वाली, या किसी मजबूत चीज से, सिर के अचानक टकराने के कारण, पड़ने वाला प्रभाव गंभीर चोट पैदा कर सकता है। ऐसा पाया गया है कि, इंट्राक्रेनियल प्रेशर (ICP) से होने वाली दिमागी चोट की हद 26 psi होती है। इससे नीचे होने पर दिमाग को कोई चोट नहीं लगती है, या वह चोट मामूली होती है। गँभीर या जानलेवा चोट 35psi से ऊपर होती है, जिसका प्रेशर कार के टायर में भरी जाने वाली हवा के आसपास होता है।

सिर की चोट या ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) के सामान्य कारण इस प्रकार हैं:

सड़क दुर्घटना (RTA): भारत में यह सबसे सामान्य कारक है।

ऊँचाई से गिरना: जैसे कि बेड से नीचे गिरना, सीढ़ियों पर या बाथरूम में गिरना। यह ज्यादातर बच्चो और बूढ़ों में होता है।

शारीरिक हमला: मारपीट होना, गोली लगना, घरेलू हिंसा होना, या बच्चो और बूढ़ों को चोट लगना।

खेलकूद के दौरान लगने वाली चोट: यह मुक्केबाजी, रग्बी, क्रिकेट, फुटबाल और स्केटबार्डिंग मे काफी सामान्य होती है।

नवजात और छोटे बच्चों में एक अलग प्रकार कि चोट काफी सामान्य होती है, जोकि सिर को तेजी से हिलाने से होती है।

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी कितने प्रकार की होती है?

चोट के प्रकार और प्रभाव से कई तरह की दिमागी चोट हो सकती है, जोकि आगे चलकर उसकी पहचान और इलाज को निश्चित करती हैं।

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) कई तरह की हो सकती हैं:

• कन्कशन: यह एक मामूली तरह की ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) होती है। इसके लक्षण आमतौर पर अस्थायी होते है तथा इससे दिमाग को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है। हाँलांकि, जब दूसरा कन्कशन पहले के तुरंत बाद होता है, तो यह दिमाग को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है, और कुछ मामलों मौत भी हो सकती है। कन्कशन विभिन्न प्रकार की चोटों जैसे गुलुम, प्रहार, सिर पर आघात, सड़क दुर्घटना (RTA), खेलकूद की चोट, विस्फोट की चोट आदि से हो सकता है। इससे प्रभावित व्यक्ति कुछ समय के लिए अपनी याद्दाश्त खो सकता है, या उसको चीजों को समझनें में दिक्कत आ सकती है। उसको आसपास की चीजों या परिस्थितियों को समझनें में दिक्कत आ सकती है, और इस तरह से उसे घबराया हुआ बोला जा सकता है।

• अंदरूनी चोट (कन्ट्युजन): इस प्रकार की दिमागी चोट में आघात (ट्रॅामा) के कारण दिमाग की कोशिकाओं में खंरोच आ जाती है, जिसके कारण दिमाग में मौजूद खून की छोटी- छोटी नसें फट जाती हैं। यह दिमाग में चोट की जगह पर तुरंत देखा जा सकता है, जिसे काॅप इंजरी कहते हैं, या चोट के विपरीत जिसे काउंटरकाॅप इंजरी कहते हैं।

• काॅप और काउंटरकाॅप इंजरी: इन चोटों में प्रभाव के बिल्कुल नीचे की जगह, या इसके विपरीत जगह शामिल होती है, इसलिए इनका नाम चोटों के अनुसार होता है। ये चोटें अचानक सुस्ती के कारण होती हैं, जिसमें दिमाग खोपड़ी की हड्डी से बार-बार टकराता है। इसे अंदरूनी चोट (कन्ट्युजन), रक्तश्राव (सबड्युरल हिमोरेज) या सेकन बे, और सिंड्रोम में देखा जा सकता है।

• हिमेटोमा: यह चोट क्रेनियम के अंदर खून की नसों के फटने के कारण होती है, जिससे कारण खून बाहर निकलने लगता है। जोकि दिमाग की कोशिकाओं (टिस्यू) या दिमाग की सतह के अंदर थक्के को बनाता है।

– इंट्रापैरेनकाईमल हिमेटोमा: जब खून दिमाग की कोशिकाओं के अंदर जमा हो जाता है, तब इसे इंट्रापैरेनकाईमल हिमेटोमा कहा जाता है।

– एपिड्यूरल हिमेटोमा: जब खून ड्युरा नामक बाहरी सुरक्षा खोल  तथा खोपड़ी की हड्डी के बीच में जमा हो जाता है, तब इसे एपिड्यूरल हिमेटोमा कहा जाता है। यह आमतौर पर ड्युरल रक्त धमनियों के फटने से होता है, जोकि आमतौर पर खोपड़ी की हड्डी के टूटने से होती है। हिमेटोमा एपिड्यूरल/ एक्स्ट्राड्यूरल जगह को घेरता है और दिमाग पर के ऊपर दबाव बनाता है, जिस कारण कई लक्षण पैदा होते हैं।

– सबड्यूरल हिमेटोमा: इसमें खून ड्यूरा के अंदर और सबआर्कनाइड जगह के ऊपर जमा हो जाता है, जिससे दिमाग पर अधिक जोर पड़ता है। यह आमतौर पर नसों के फटने से होता है, जोकि दिमाग से ड्यूरा की ओर जाती है। इसको एपिड्यूरल हिमेटोमा से अधिक खतरनाक माना जाता है। यह आमतौर पर बूढ़े लोगों में गिरने के कारण होता है।

– सबआर्कनाइड हिमोरेज: यहाँ पर खून का बहाव दिमाग के पास मौजूद सबआर्कनाइड जगह से होता है। आमतौर पर सबआर्कनाइड जगह सीएसएफ (CSF) की परत से भरी होती है, जोकि दिमाग को लचीलापन प्रदान करती है।

– इंट्रावेन्ट्रिक्युलर हिमोरेज: यहाँ पर खून का बहाव अंदरुनी होता है, या फिर यह दिमाग के अंदर मौजूद वेन्ट्रिकल्स (निलय) में फैल जाता है। वेन्ट्रिकल्स, सीएसएफ (CSF) से भरी जगहें होती है, जोकि की सीएसएफ (CSF) के निर्माण और फैलाव में शामिल होती है। इस तरह का हिमोरेज सीएसएफ (CSF) के बहाव में रूकावट पैदा कर सकता है, जिससे वेन्ट्रिकल्स (निलय) फैल जाती है और दिमाग के अंदर दबाव बनाती है।

• इडीमा: किसी भी ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) से दिमाग के फोकल और डिफ्यूज क्षेत्र मे सूजन या इडीमा हो सकता है। इडीमा दिमाग की कोशिकाओं में सूजन पैदा करता है, जोकि क्रेनियम में उपस्थित सीमित जगह की हड्डी के विपरीत दबाव बनाता है।

डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी: यह एक ऐसी चोट है जो दिमाग की कोशिकाओं के लंबे जुड़े फाइबर को नुकसान पहुँचाती हैं जिसे एक्सोन कहा जाता है। इस प्रकार की चोट आमतौर पर वाहन दुर्घटना में होती है। यहाँ पर तेज गति का प्रभाव खोपड़ी के अंदर मौजूद दिमाग की कोशिकाओं को पीछे और आगे की ओर तेजी से ढकेलता है। इससे स्नायु तंत्र फट जाता है परिणामस्वरूप दिमाग के काम पर असर पड़ता है।

डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी (DAI) को गंभीर दिमागी चोट माना जाता है, जोकि लगभग 25 प्रतिशत लोगों में मौत का कारण होती है। गंभीर दिमागी चोट एक ऐसी चोट है जहाँ पर एक विशेष न्यूरोलॉजिकल स्केल जिसे ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) कहा जाता है, इसकी वैल्यू 8 से नीचे देता है। यदि ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) 6 घंटे तक इसकी वैल्यू 8 से नीचे देता है तो उसे डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी (DAI) माना जाना चाहिये।

खोपड़ी के फ्रैक्चर: यह एक स्थिति है, जिसमें दिमाग को चारों ओर से सुरक्षा प्रदान करने वाली हड्डी टूट जाती है। यह एक स्थिति है, जिसे गंभीर दिमागी चोट के साथ जोड़ा जा सकता है, विशेष रूप से छोटे बच्चो में जिनकी खोपड़ी की हड्डी मुलायम होती है।

खोपड़ी के फ्रैक्चर निम्न प्रकार से हो सकते हैं:

अनडिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर: यहाँ पर टूटी हुयी हड्डी अपनी समान जगह पर रहती है, बस केवल उसमें एक टूट पैदा हो जाती है।

डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर: यहाँ पर टूटी हुयी हड्डी का कोई भी टुकड़ा अपनी जगह से अलग हो जाता है।

डिप्रेस्ड फ्रैक्चर: यह एक ऐसे प्रकार का डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर जिसमें हड्डी का टुकड़ा दिमाग के अंदर की ओर दब जाता है, जिससे दिमाग में दबाव पैदा होता है। इस फ्रैक्चर में सर्जरी द्वारा इलाज की आवश्यकता पड़ती है।

खुली हुयी चोट (ओपेन फ्रैक्चर): यह एक ऐसा फ्रैक्चर है जिसमें खाल फट जाती है और हड्डी बाहर दिखने लगती है।

स्कल बेस फ्रैक्चर: खोपड़ी की हड्डी के एक हिस्से का फ्रैक्चर, जोकि एक सतह का काम करती है, जिस पर दिमाग रखा रहता है। यह एक बहुत गंभीर फ्रैक्चर होता है। इस प्रकार के फ्रैक्चर मे व्यक्ति में सीएसएफ (CSF) का रिसाव हो सकता है। यह नाक या कान से पतले द्रव के रूप में बाहर आ सकता है। इन लोगों में फ्रैक्चर की जगह के आधार पर काली आँख या कान के चारों और चोटें विकसित हो सकती हैं।

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ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी की गंभीरता को कैसे जानें? गंभीरता के आधार पर ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी को किस तरह से वर्गीक्रत किया जाता हैं?

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) को न्युरोलोजिकल आँकलन के विशेष यंत्र, ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS), के आधार पर कम, मध्यम और गंभीर दर्शाया जाता है। ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) व्यक्ति की चेतना को कुछ दिशा निर्देशों के अनुसार माप करके दिमाग कि चोट की गंभीरता का पता लगाता है। ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) न्युरोलोजिकल परिक्षण के दौरान तीन चीजों का आंकलन करके स्कोरिंग देता है।

1. आँख खोलना: अचानक आँख खोलने पर 4, आवाज के लिए आँख खोलने पर 3, दर्द के कारण आँख खोलने पर 2 और बिना किसी लक्षण में 1

2. मौखिक प्रतिक्रिया: सामान्य बातचीत के लिए 5, उन्मुख बातचीत के लिए 4, शब्दों के लिए 3- बिना किसी जुड़ाव के, आवाज निकालनें की क्षमता के साथ शब्दों के बोलने की क्षमता कमी के लिए 2 और बिना किसी लक्षण में 1

3. मोटर प्रतिक्रिया: सामान्य के लिए 6, स्थानीय दर्द के लिए 5, दर्द के कम होने में 4, डीकोर्टिकेट पोश्चर के लिए 3, और डीसेरीब्रेट पोश्चर के लिए 2

ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) के अनुसार ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जाता है:

• कम: जब ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) 13 से 15 के बीच होता है।

• मध्यम: जब ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) 8 से 12 के बीच होता है।

• गंभीर: जब ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) 8 से नीचे होता है।

सिर की चोट के लक्षण क्या है?

सिर की चोट के लक्षण गंभीरता, प्रकार और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। यह हल्के भी हो सकते हैं जिनसे सिर पर केवल गुलुम या खँरोच आ सकती है। या फिर इतने गंभीर होते हैं कि सिर की हड्डी टूट भी सकती है या ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) हो सकती है जिसके लक्षण इस प्रकार हैं:

हल्की ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI):

• सिरदर्द होना

• चेतना और जागरूकता में बदलाव: जैसे कि घबड़ाना, उलझन होना, गुमराह होना या फिर कुछ सेकेंड से लेकर कुछ मिनटों तक होश खो देना।

• जी मिचलाना और उल्टी होना।

• थकावट महसूस करना, नींद आना या थकी आँखें।

• नींद की समस्या: जैसे कि सोने में परेशानी महसूस करना या जरूरत से ज्यादा सोना।

• संवेदी समस्यायें: जैसे कि आँखो में धुंधलापन, कान में सीटी जैसा बजना, महक और स्वाद की धारणा में बदलाव, रोशनी की तरफ संवेदनशील होना।

• मानसिक और संज्ञानात्मक समस्यायें: याद्दाश्त और ध्यान में समस्या, सिर घूमना या अवसाद और चिंता की भावना।

मध्यम से गंभीर ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI):

मध्यम ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) से घायल व्यक्ति में ऊपर दिये गये हल्की ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) के लक्षणों के अलावा निम्नलिखित लक्षण दिखायी दे सकते हैं।

हमेशा रहने वाला सिरदर्द, या समय के साथ बिगड़ने वाला सिरदर्द।

होश खोना जोकि कई मिनटों से लेकर घंटों तक रह सकता है। नींद से जगने में असमर्थता।

लगातार उल्टी होना।

चोट के बाद के दौरे।

• अंगों, ऊँगलियों और पैर के ऊँगलियों में कमजोरी और सुन्नता।

• समन्वय या संतुलन बिगड़ना।

• एक या दोनों पुतलियों का सिकुड़ना।

• नाक से एक तरह का पानी निकलना।

• कान से पानी या खून निकलना।

• गहरे भ्रम या भटकाव की स्थिति।

• उग्रता, चिड़चिड़ापन, अक्रामकता या असामान्या व्यवहार।

• बोलने में जुबान लड़खड़ाना।

• लंबे समय तक बेहोशी की स्थिति (कोमा) में रहना।

जैसा कि दिमाग के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग कामों को करते हैं इसलिए दिमाग के किसी भी हिस्से की चोट अलग-अलग लक्षण पैदा करती है।

ये इस प्रकार हैं:

फ्रंटल लोब: इस तरह की चोट में भावनात्मक या व्यवहारात्मक बदलाव, दिमाग की क्षमता में कमी, याद्दाश्त की कमी, शरीर के एक तरफ लकवा मार जाना, आँखों की रोशनी चले जाना, गंध की भावना में बदलाव आ सकता है।

पराईटल लोब: हाँथ और आँख के समन्वय में परेशानी होना। पढ़ने, लिखने, नाम बुलाने और गणित के सवाल हल करने में परेशानी होना। शरीर के दूसरे हिस्सों में जागरुकता की कमी, तापमान और छूने की भावना में बदलाव होना।

ओसिपिटल लोब: देखने में परेशानी जैसे कि द्रष्टि दोश, धुँधलापन, हैलुसिनेशन (मनघडंत चीजें दिखना).

टेम्पोरल लोब: याद्दाश्त की समस्या (छोटी और लंबी अवधि), भाषा को बोलने और समझनें में परेशानी होना, लोगों के पहचानने में परेशानी होना, चीजों को पहचाननें और बोलनें में परेशानी होना, गुस्से के साथ बर्ताव करना या दौरा पड़ना।

ब्रेनस्टेम: साँस लेने और चीजों को निगलनें में परेशानी होना, संतुलन में परेशानी होना, जी मिचलाना और चक्कर आने जैसा महसूस करना।

सेरेबेलम: चलने में परेशानी होना, संतुलन को बनाये रखने में परेशानी होना, शरीर के हिस्सों का हिलना या चक्कर आना।

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डाॅक्टर से कब संपर्क करना चाहिये या तुरंत सहायता कब लेनी चाहिये?

सिर की सभी चोटों की जाँच उचित तरह से की जानी चाहिये, विशेष रूप से बच्चों, बूढ़ों, महत्वपूर्ण प्रभाव, होश खोना, उल्टी, चीजों को समझने में बदलाव, तथा भ्रम या भटकाव की स्थिति के मामलों में।

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी की पहचान कैसे की जाती है?

आमतौर ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरीस आपातकालिक होती हैं, जिसमें मरीज को सीधे अस्पताल के आपातकालीन विभाग (इमरजेंसी डिपार्टमेंट) में ले जाया जाता है। आपातकालीन कक्ष (इमरजेंसी रूम) के अंदर चोट की हालत की जानकारी ली जाती है। बाद में ग्लास्गो कोमा स्केल (GCS) का इस्तेमाल करके शारीरिक और न्युरोलोजिकल परिक्षण से दिमाग की चोट की गंभीरता का पता लगाया जाता है।

बाद में इसमें इमेजिंग टेस्ट होते है जो नीचे दी गई चीजों का पता लगाने में मदद करते हैं।

सिर के चोट की हालत का पता लगाने के लिए।

चोट की गंभीरता और निष्कर्ष का पता लगाने के लिए।

बीमारी की हाल का पता लगाने और उसका इलाज निश्चित करने के लिए।

ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) के मामलों में निम्नलिखित इमेजिंग जाँचे की जाती है।

कम्प्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन: ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) के सभी मरीजों में की जाने वाली यह एक मुख्य जाँच होती है। यह जाँच एक्स-रे के इस्तेमाल से दिमाग और हड्डियों की इमेज बनाती है, और नील (कन्ट्युसन), नकसीर (हिमोरेज), हिमेटोमा (hematoma), सूजन और खोपड़ी के फ्रैक्चर का पता लगाती है। यह डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी (diffuse axonal injury) के सभी मामलों का पता शायद न लगा पाये, जिसका पता सिर्फ MRI में पता चलता हैं।

मैग्नेटिक रेसोनेन्स इमेजिंग (MRI): यह जाँच उन मामलों में की जा सकती है, जहाँ पर कुछ और अधिक सूचना की आवश्यकता पड़ती है, या फिर रोग के लक्षण सीटी (CT) के परिणाम से मेल नहीं खाते हैं। मैग्नेटिक रेसोनेन्स इमेजिंग (MRI) छोटी से छोटी परेशानी का पता लगा सकता है, जोकि सीटी (CT) द्वारा पता नहीं चल पाती हैं। यह जाँच सीटी (CT) में न दिखने वाले डिफ्यूज एक्सोनल इंजरी (DAI) का पता लगा सकती है, और उन मामलों में सीटी (CT) के परिणाम मेल नहीं खाते है।

सिर की चोट का इलाज कैसे किया जाता है?

सिर की चोट का इलाज चोट की गंभीरता और प्रकार पर निर्भर करता है। सिर की हल्की चोट में आमतौर पर चोट की जगह पर दर्द के अलावा कोई लक्षण नहीं पाये जाते हैं। इन मामलों में केवल दर्द की दवाई जैसे एसिटामिनोफेन दी जाती है, और आराम करने की सलाह दी जाती है।

NSAID’s की दर्द निवारक दवाईयाँ जैसे इबुप्रोफेन और एस्पिरिन से बचना चाहिये, जिससे की दिमाग में होने वाले खून के रिसाव (यदि वह मौजूद है) को रोका जा सके।

सिर की चोट के कारण फटने वाली खाल को धागे से सिल दिया जाता है और बैंडेज से ढक दिया जाता है।

सिर की गंभीर चोट या बिगड़ते हुये लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता और विशेष इलाज की आवश्यकता पड़ती है।

यह बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, की इलाज जल्द से जल्द प्रारम्भ किया जाये, जिससे की स्थिति को खराब होने से रोका जा सके और मौत को टाला जा सके। कुछ मामलों में तुरंत सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। कुछ मामलों में सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ती है और उन्हें इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में रखा जाता है, जोकि इन जैसे मामलों के लिए प्रमुख होता है, और न्युरोक्रिटिकल केयर प्रदान करता है।

इन मामलों निम्न इलाज शामिल हो सकते हैं।

 

न्युरोक्रिटिकल केयर:

इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में भर्ती जानलेवा ट्रोमैटिक ब्रेन इंजरी (TBI) से पीड़ित मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यह देखभाल न्युरो-इंटेन्सिविस्ट के देखरख में दी जाती है जोकि डाक्टर होते है, और इन जैसे मरीजों को विशेष देखभाल प्रदान करते हैं। इन मरीजों में आमतौर पर शरीर के दूसरे हिस्से में चोट के अलावा दिमाग पर गहरी चोट होती है। इन मरीजों में शरीर के महत्वपूर्ण काम काफी प्रभावित होते है जैसे कि दिल की गति (हार्ट रेट), रक्त चाप (ब्लड प्रेशर), साँस की गति, आक्सीजन सैचुरेशन (oxygen saturation) जिनकी लगातार देखरेख और ध्यान की आवश्यकता पड़ती है।

यह बहुत सारे चिकित्सकीय यंत्रों (मेडिकल डिवाईसेस) द्वारा किया जाता है जोकि निम्न हो सकती हैं।

• वेंटिलेटर: कुछ मरीज अपने आप साँस नहीं ले पाते हैं। इन मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा जाता है जोकि उसके लिए साँस लेने और छोड़ने का काम करता है। यह ब्लड प्रेशर, साँस की गति, आक्सीजन सैचुरेशन और दिल की विधुतीय क्रिया का आकलन करता है।

• इंट्राक्रैनील प्रेशर (आईसीपी) मॉनिटर: सीएसएफ (CSF) दबाव को मापने के लिए सिर के अंदर एक छोटा कैथेटर डाला जाता है, जो इंट्राक्रैनील प्रेशर (आईसीपी) के बढ़ने पर डाक्टर का सावधान करता है।

• खाने की नली (फीडिंग ट्यूब): इस नली को नाक के रास्ते पेट के अंदर डाला जाता है जिससे मरीज को खाना और दवाई द्रव (liquid) के रूप में दिया जाता है।

• ईईजी (EEG): इन मरीजों में दौरे का पता लगाने के लिए दिमाग की गतिविधी पर ध्यान रखा जाता है।

 

दवाईयाँ:

• स्यामक और दर्दनिवारक दवाईयाँ: सिर की गंभीर चोट में ये दवाईयाँ मदद करती हैं। यह मरीज को शाँत करती हैं, उनको बदले और अक्रामक व्यवहार से बचाती है तथा दर्द को रोकती हैं।

• इंट्राक्रैनील प्रेशर (आईसीपी) को नियंत्रित करने के लिए मूत्रवर्धक या दवायें: ये दवायें दिमाग में सूजन को कम करती हैं तथा इंट्राक्रेनियल दबाव को ठीक से संभालती हैं। यह दिमाग से अतिरिक्त पानी को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती हैं।

• दौरा रोकने की दवाईयाँ: ये दवाईयाँ उन मरीजो को दी जाती हैं जिनमें चोट लगने के एक हफ्ते के अंदर दौरा पड़ने की संभावना अधिक होती है, जिससे की दौरा पड़ने से रोका जा सके।

• एंटीबायोटिक्स: ये संक्रमण को रोकने और उसके इलाज के लिए दी जाती हैं।

 

सर्जरी:

महत्वपूर्ण प्रभाव डालने वाले खून के बड़े थक्कों को हटाने, टूटी हुयी खोपड़ी की हड्डी को ठीक करने और बह रही खून की नसों को ठीक करने के लिए सर्जरी का आवश्यकता पड़ सकती है।

ऐसे मामलों में निम्न सर्जरी का जाती है।

• सिर में होल करके थक्के को हटाना: इस सर्जरी में खोपड़ी में छेद करके थक्के को बाहर निकाला जाता है। आमतौर पर यह एपिड्यूरल हिमेटोमा के मामलों में किया जाता है।

• क्रैनियोटमी: इस सर्जरी में खोपड़ी की हड्डी के एक हिस्से को हटाकर प्रभावित हिस्से को ठीक किया जाता है जैसे कि खोपड़ी की हड्डी टूटना, खून के थक्ते को हटाना या खून की नलियों को सही करना। बाद में हड्डी के उस हिस्से को स्क्र्यु की मदद से सही जगह पर बिठा दिया जाता है।

• क्रैनिएक्टमी: ऐसे मामलों में जहाँ पर सिर के अंदर दबाव अधिक बन जाता है, वहाँ पर खोपड़ी की हड्डी के एक हिस्से को हटाकर दिमाग पर दबाव को कम किया जाता है। इस तरह यह सूजे हुये दिमाग को पर्याप्त जगह प्रदान करता है। एक विशेष प्रकार के टिस्यू (कोशिका) को दिमाग के उस खुले हुये हिस्से पर रखकर उसे खाल से ढक दिया जाता है। सूजन चले जाने के बाद, हटाये गये हड्डी के उस हिस्से को 1 से 3 महीने के बाद दुबारा उसी जगह पर लगाया जाता है। इस प्रक्रिया को क्रैनियोप्लास्टी कहा जाता है। इसके साथ कभी-कभी दबाव को कम करने के लिए थक्के और खून को भी निकाला जाता है।

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Editors of The Lancet and the New England Journal of Medicine: Pharmaceutical Companies are so Financially Powerful They Pressure us…

मदर एंड चाइल्ड

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर अवधि क्या है? एक प्रसवोत्तर अवधि एक एैसा समय अंतराल है, जिसमें मां बच्चे को जन्म देने के बाद…

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर या स्तनपान आहार क्या है? पोस्टपार्टम डाइट वह डाइट है, जो मां को एक बार बच्चे के जन्म के…

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

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बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाने और बचने वाले खाद्य पदार्थों की सूची गर्भ धारण करने के बाद, बच्चे…

मन और मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का निदान किया जाता है? नैदानिक इतिहास: डॉक्टर आम तौर पर लक्षणों का विस्तृत इतिहास…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

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कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का इलाज किया जाता है? सामान्यीकृत चिंता विकार का उपचार लक्षणों की गंभीरता और जीवन…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

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सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है? चिंता, किसी ऐसी चीज के बारे में परेशानी या घबराहट की भावना है, जो हो…