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फूड पॉइजनिंग

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खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) क्या है?

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खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) या खाने से होने वाली बीमारी पाचन तंत्र का एक संक्रमण या जलन है, जोकि दूषित खाने या पीने में उपस्थित सँक्रमित जीवाणु या विषाक्त पदार्थों के कारण होता है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) का कारण क्या है?

जैसे की पहले चर्चा की गयी है, की खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) दूषित खाने में मिले सँक्रमित जीवणुओं से होता है, जोकि जीवाणु, विशाणु, परजीवी या विषाक्त पदार्थ के रूप में खाने में मिले हो सकते हैं। हानिकारक रसायनों से भी खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) हो सकता है। भोजन में खराबी, खाना बनाने या पकाने के समय किसी भी वक्त आ सकती है। यह घर या बाहर उन सभी जगहों पर हो सकता है, जहाँ खाना अच्छी तरह पकाया नही जाता है, या उसको संभाल कर नही रखा जाता है।

सँक्रमित जीवाणु खाध पदार्थों को किस तरह खराब कर सकते हैं?

सँक्रमित जीवाणु खाद्य पदार्थों में मिलकर उसे कई तरह से खराब कर सकते हैं।

• संक्रमित व्यक्तियों से जो खाने को बनाते हैं यह उसकी देख-रेख करते है।

• दूषित भोजन यह सतह से या दूषित बर्तनों, चम्मच या चाकू के उपयोग से।

• स्वयं खाने से भी, यदि उसको अच्छी तरह से धोया या पकाया न जाये तो वह लोगों को संक्रमित कर सकता है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) के लक्षण क्या है?

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) के लक्षण, खाने के साथ शरीर के अंदर जाने वाले संक्रामक सूक्ष्मजीवों पर निर्भर करते हैं। यह लक्षण खाना खाने के तुरंत बाद या कई दिनों या हफ्तों के बाद विकसित हो सकते हैं। सबसे आमतौर पर होने वाले लक्षण इस प्रकार है:

• जी मिचलाना

• उल्टी होना

• दस्त जोकि या पतले और खूनी हो सकते है

• पेट दर्द या ऐंठन/ मरोड़ होना

• बुखार आना

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) के लक्षण आमतौर पर कुछ घंटों या कई दिनों तक रहते है। कुछ मामलों में खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) से न्युरोलोजिक लक्षण भी हो सकते हैं, जैसे आँखो में धुंधलापन, चक्कर आना या हाथों में झुनझुनाहट। कुछ दुर्लभ मामलों में खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) से जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जैसे किडनी का खराब होना, गठियाबाई (आर्थराइटिस), दिमागी बुखार जोकि संक्रामक सूक्ष्मजीव और शरीर की अवस्था पर निर्भर करती है।

चिकित्सक से सलाह कब लेनी चाहिये तथा इसकी चेतावनी के लक्षण क्या है?

एक व्यक्ति को चिकित्सक से सलाह तब लेनी चाहिये, जब उसके लक्षण लगातार तथा गंभीर हों। यदि कोई गंभीर चिकित्सकीय स्थिति हो या कोई चिंताजनक संकेत या लक्षण हों जैसे:

• लगातार उल्टी होना

• खूनी उल्टी या मल आना

• 3 दिन से अधिक समय तक दस्त या 24 घंटे में 6 या उससे अधिक पतले दस्त होना

• पेट में तेज दर्द होना

• मुँह से लिया गया 4 F (38 C) से अधिक बुखार

• निर्जलीकरण के सकेत व लक्षण- अधिक प्यास लगना, मुँह सूखना, पेशाब का न होना या कम होना, अत्यधिक थकावट, जी मिचलाना या पतले दस्त के कारण होने वाली उलझन

• न्युरोलोजिकल (स्नायु से संबधित) लक्षण जैसे कि आँखो में धुंधलापन, माँशपेशियों में कमजोरी या हाथों में झुनझुनाहट होना

कम उम्र के बच्चे और बूढ़े लोग जिनमें यह लक्षण होते है उन्हें चिकित्सक से तुरंत सलाह लेनी चाहिये, क्योंकि इनमें निर्जलीकरण का खतरा अधिक होता है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) के विकसित होने के जोखिम कारक क्या है?

व्यक्ति में लक्षणों का विकसित होना या न होना, या संक्रमित भोजन को खाने के बाद बीमार पड़ना, संक्रामक जीवों, जोखिम की मात्रा, उम्र, रोगप्रतिरोधक शक्ति और व्यक्ति के सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। मोटे तौर पर उन्हें व्यक्तिगत कारकों और पर्यावरणीय कारकों में बाँटा जा सकता है।

व्यक्तिगत जोखिम कारक: कम रोगप्रतिरोधक शक्ति, विशेष शारीरिक अवस्था या किसी बीमारी से ग्रसित लोग उन समूहों में आते है जिनमें बीमारी के विकसित होने का खतरा अधिक होता है बजाय स्वस्थ्य लोगों के।

बूढ़े वयस्क: उम्र के बढ़ने के साथ रोगप्रतिरोधक प्रणाली कमजोर हो सकती है, और शरीर के अंदर जाने वाले सँक्रामक जीवों से लड़ने में कम प्रभावकारी हो सकती है।

गर्भवती महिलायें: गर्भावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों में खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) का खतरा अधिक बढ़ जाता है, जोकि सामान्य व्यक्तियों के मुकाबले काफी गंभीर हो सकता है। बच्चों में इस बीमारी का विकास दुर्लभ होता है।

नवजात और छोटे बच्चे: इनमें रोगप्रतिरोधक प्रणाली काफी कमजोर होती है, इसलिए इनमें खाने से विकसित होने वाली बीमारी का खतरा अधिक होता है।

दीर्घकालिक बीमारी: जैसे कि डायबिटीज, लिवर की बीमारी या एड्स

रोगप्रतिरोधक क्षमता को दबाने वाला इलाज: कैंसर से ग्रसित वह लोग जो कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी ले रहे है, या फिर वह लोग जो रोगप्रतिरोधक क्षमता का दबाने का इलाज ले रहे हैं, उनमें खाने से विकसित होने वाली बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

पर्यावरणीय कारक: यह वह कारक हैं जिनमें भोजन के शरीर में पहुँचने से पहले भोजन को बनाने या भंडारण के दौरान दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है।

खाना बनाने से पहले या बाद में गलत तरीके से भोजन का भंडारण- भोजन को कमरे के तापमान में 2 घंटे से अधिक समय तक छोड़ना विशेष रूप से गर्म और उमस की स्थिति में, भोजन को खराब कर देता है।

तैयारी के बाद खाने को को गलत तरीके से पकाना या दुबारा गरम करना।

बिना धोये या गंदे हाथों से खाना बनाना या रखना विशेष रूप से बाथरूम के इस्तेमाल के बाद, डायपर्स बदले के बाद या पालतू जानवरों के संपर्क में आने के बाद।

गंदी जगह में खाना बनाना या दूषित चीजों का इस्तेमाल करना जैसै चाकू, मेज या सब्जियों को काटने का तख्ता।

बिना पका या अधपका खाना भोजन से होने वाली बीमारीयों का एक अतिसंवेदनशील कारक होता है, विशेष रुप से तब जब वह गंदी जगह पर बनाया और रखा जाता है, जहां पर संक्रमण अधिक होता है, जैसे बिना पका या अधपका खाना जैसे सलाद और माँस। आमतौर पर खाना बनाने के दौरान लगने वाले ताप से सूक्ष्म जीव खत्म हो जाते है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) की जटिलतायें क्या हो सकती है?

निर्जलीकरण: खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) की सबसे सामान्य और गम्भीर जटिलता निर्जलीकरण है, जोकि दस्त या उल्टी के कारण हो सकता है। यह शरीर में पानी और जरुरी नमक तथा खनिजों को कम करता है। शिशुओं, बूढ़े वयस्क और दबी हुई रोगप्रतिरोधक क्षमता तथा गंभीर बीमारी से ग्रस्त लोग गंभीर निर्जलीकरण का शिकार हो सकते हैं, इन लोगों को अस्पताल में भर्ती होने तथा महत्वपूर्ण चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता पड़ सकती है। गंभीर मामलों में निर्जलीकरण मौत का कारण बन सकता है।

कुछ प्रकार के खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) में कुछ लोगों के लिए गंभीर जटिलताओं की संभावना होती है। इनमें शामिल हैं:

लिस्टेरिया संक्रमण: लिस्टेरिया मोनोसाइटोजींस के साथ खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) गर्भावस्था के दौरान गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इससे गर्भावस्था के शुरूआती दौर में गर्भपात भी हो सकता है। गर्भावस्था के बाद की अवधि में यदि माँ थोड़ा सा भी बीमार है, तो यह म्रतजन्म, समय से पहले जन्म या जन्म के बाद जानलेवा संक्रमण का कारण बन सकती है। लिस्टेरियल संक्रमण से बचने वाले नवजात बच्चों में स्नायु क्षति (न्युरोलोजिकल डैमेज) और उनके विकास में देरी आदि जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।

ऐस्चेरेचिया कोलाई (ई कोलाई) संक्रमण: कुछ ई कोलाई स्ट्रेंस से एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसे हिमोलाइटिक यूरेमिक सिंड्रोम कहा जाता है, जिससे किडनी के अंदर छोटी रक्त नलिकाओं की परत में संक्रमण से क्षति पहुंचती है, जिससे कभी-कभी किडनी भी खराब हो जाती है। वयस्कों, 5 साल से छोटे बच्चों और वह लोग जिनमें रोगप्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इन लोगों में इस बीमारी के पनपने का खतरा अधिक होता है। अधिक और खूनी दस्त के होने के मामलें में इन लोगों को चिकित्सक से तुरंत सलाह लेनी चाहिये।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) की पहचान कैसी की जाये?

रोग से संबन्धित जानकारी: खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) की पहचान आमतौर पर रोग से संबन्धित जानकारी पर निर्भर करती है, जिनमें लक्षणों की जानकारी, बीमारी की अवधि, बीमारी कब शुरू हुयी और किसी विशेष तरह का खाना यदि किसी ने खाया है, इत्यादि के बारें में पूँछा जाता है। डाॅक्टर इसमें शारीरिक परिक्षण करके निर्जलीकरण संकेतों का पता लगाते है।

डायग्नोस्टिक जाँचें: स्वास्थ्य सें संबन्धित जानकारी और लक्षणों के आधार पर बीमारी के कारकों का पता लगाने के लिए आपके चिकित्सक कुछ डायग्नोस्टिक जाँचें कर सकते हैं, जैसे कि खून की जाँच, परजीवियों का पता लगाने के लिए कल्चर और इग्जैमिनेशन सहित मल की जाँच जिससें संक्रामक जीवों का पता चल सके। बहुत सारे मामलों में खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) के कारक की पहचान नहीं हो पाती है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) का इलाज क्या है?

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) का इलाज आमतौर पर सरल होता है, और यह काफी हद तक यह लक्षणों की गंभीरता तथा समस्या की स्थिति पर निर्भर करता है। ज्यादातर लोगों में, बीमारी कुछ दिनों में बिना इलाज के ही ठीक हो जाती है। कभी-कभी लक्षण लम्बे समय तक रह सकते है या कुछ मामलों में यह विशेष रुप अत्यधिक जोखिम वाले समूहों या जटिल हो सकता है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) के इलाज मे शामिल हैं:

शरीर में पर्याप्त पानी और लवण जैसे सोडियम, पोटेशियम और कैल्सियम की मात्रा को बनाये रखना जोकि, दस्त और उल्टी के कारण कम हो जाते हैं। कुछ मामलों में इसकी पूर्ती पर्याप्त पानी के पीने से, इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर प्राक्रतिक तरल से या लवणों जैसे नारियल पानी इत्यादि या घर में बने नमक और चीनी के घोल तथा बाजार में उपलब्ध ओआरएस से की जा सकती है। गंभीर मामलों में विशेष रुप से बच्चों में तथा बूढ़ें वयस्कों में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड़ती है, जहाँ पर चिकित्सक नमक और तरल की भरपाई नस (IV line) में सुई लगाकर ग्लुकोज के चढ़ाये जाने से करता है।

एंटीबायोटिक्स: एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल की सलाह आमतौर पर नहीं दी जाती है, लेकिन खाने से होने वाली कुछ प्रकार की बीमारीयों में या फिर जब लक्षण काफी गंभीर हों, तब इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। लिस्टेरिया के कारण होने वाले खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) में अस्पताल में भर्ती होने के साथ-साथ इंजेक्शन द्वारा दी जाने वाली एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता पड़ती है। गर्भावस्था के दौरान, एंटीबायोटिक के तुरंत इलाज से बच्चे को संक्रमण से बचाने में मदद मिलती है। वायरस के कारण होने वाली खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) में एंटीबायोटिक्स आमतौर पर काम नहीं करती हैं। कुछ प्रकार के विषाक्त पदार्थ संबंधी या जीवाणु संबंधी खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) में एंटीबायोटिक्स मौजूदा लक्षणों को बिगाड़ सकती हैं। वयस्को में होने वाले दस्त जोकि खूनी नहीं होते है या जिन्हें कोई बुखार नहीं होता है, उनमें लोपेरामाईड (loperamide) या बिस्मथ सबसेलाईसाईलेट (bismuth subsalicylate) दवाई लेने से राहत मिल सकती है। इन दवाईयों के इस्तेमाल के बारे में चिकित्सक से सलाह लें। इनसे संबन्धित लक्षणों जैसे जी मिचलाना, उल्टी या बुखार में लक्षण से संबन्धित इलाज दिया जा सकता है।

जीवनशैली में परिवर्तन और घरेलू उपचार

जैसा की हम जानते हैं कि खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) प्राय: कुछ ही दिनों में बिना इलाज के अपने आप ही ठीक हो जाता है। एक व्यक्ति निर्जलीकरण को रोकने के लिए और लक्षणों को कम करने के लिए घरेलू उपचार का इस्तेमाल कर सकता है।

• पेट और आँतों को आराम देना: कुछ घंटो के लिए खाने और पीने पर रोक लगाना।

पानी के छोटे- छोटे घूँट पीना या बर्फ को चबाना।

साफ सोडा या कैफीन रहित पेय इलेकट्रोलाईट्स के साथ पीना।

• धीरे-धीरे नियमित आहार पर वापस आना: इसकी शुरूआत नरम, कम वसायुक्त, आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, टोस्ट, जिलेटिन, केला और चावल से की जा सकती है।

• कुछ प्रकार के खानों और खाद्य पदार्थों से परहेज: इसकी सलाह तब तक दी जाती है, जब तक व्यक्ति अच्छा महसूस न करे। इनमें दूध से संबंधित पदार्थ, कैफीन, एल्कोहल, निकोटीन, और वसायुक्त तथा अत्यधिक मौसमी भोजन शामिल हैं।

• आराम: रोगप्रतिरोधक शक्ति और कमजोरी से उबरने के लिए आराम की आवश्यकता होती है।

स्वयं को और अपने आस-पास के लोगों को खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) से कैसे बचाया जाये?

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती माहिलाओं तथा उसके भ्रूण, उम्रदराज वयस्कों और कमजोर रोगप्रतिरोधक प्रणाली के लोगों में गंभीर औऱ जानलेवा होती है। खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) को रोकने के लिए निम्नलिखित चीजें करनी चाहिये।

• बाथरुम जाने के बाद, डायपर बदलने के बाद, जानवरों को छुने के बाद या कूड़ा या अन्य गंदी चीजों के छूने के बाद हाँथ अच्छी तरह से धोना।

• खाने को बनाने और तैयार करने से पहले और बाद में, हाँथ अच्छी तरह से धोना ।

• बर्तनों, किचन, सब्जी काटने वाले तख्ते आदि को अच्छी तरह से धोना

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• संक्रमण से बचने के लिए कच्चे खाने को पके खाने से दूर रखना जैसे, कच्चा माँस, अंडा, मछली, सेलफिश।

• खराब होने वाले खाने को खरीदने या बनाने के 2 घंटे के अंदर फ्रिज में रखना। जब कमरे के तापमान 90 F (32.2 C) से अधिक हो तो खाने को 1 घंटे के अंदर फ्रिज में रखें।

• बिना पके दूध या उससे बने पदार्थों के सेवन से बचना।

• खाने से पहले फलों और सब्जियों को अच्छी तरहे से धोना ।

• रेफ्रिजेरेटर को 40°F (4.4°C) से अधिक ठंडा और फ्रीजर को 0°F (-18°C) से नीचे रखना।

• मांस और समुद्री भोजन को अच्छी तरह से पकाना।

• जर्दी के द्रढ़ होने तक अंडे को पकाना।

• जानवरों से प्राप्त भोजन को अंदरूनी तापमान पर अच्छी तरह से पकाये जोकि फूड थर्मामीटर से अच्छी तरह से जाँचा जा सकता है: बीफ 160°F (71°C); चिकन 165°F (77°C); टर्की 165°F (82°C); सुअर का माँस 145°F (71°C)। सुनिश्चित करे मछली और सेलफिश अच्छी तरह से पकी हो।

• भोजन को सुरक्षित रूप से परिभाषित करें। कमरे के तापमान पर भोजन न करें। भोजन को पिघलाने का सबसे सुरक्षित तरीका है कि इसे रेफ्रिजरेटर में डीफ्रॉस्ट किया जाए। यदि आप “डीफ्रॉस्ट” या “50 प्रतिशत पावर” सेटिंग का उपयोग करके जमे हुए भोजन को माइक्रोवेव करते हैं, तो इसे तुरंत पकाना सुनिश्चित करें। संदेह होने पर उसे बाहर फेंक दें। यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि कोई भोजन अच्छी तरह से तैयार, परोसा या संग्रहीत किया गया है, तो उसे त्याग दें। कमरे के तापमान पर बचे हुए भोजन को अधिक समय तक छोड़ने से उसमें बैक्टीरिया या विषाक्त पदार्थ शामिल हो सकते हैं, जिन्हें पकाने से नष्ट नहीं किया जा सकता है। उस भोजन का स्वाद न लें, जिसके बारे में आप निश्चित नहीं हैं – उसे बाहर फेंक दें। यहां तक ​​कि अगर यह दिखने में और महकने में ठीक लग रहा है, तो भी यह खाने के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता है।

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