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फूड पॉइजनिंग (उपचार)

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खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) का इलाज क्या है?

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) का इलाज आमतौर पर सरल होता है, और यह काफी हद तक यह लक्षणों की गंभीरता तथा समस्या की स्थिति पर निर्भर करता है। ज्यादातर लोगों में, बीमारी कुछ दिनों में बिना इलाज के ही ठीक हो जाती है। कभी-कभी लक्षण लम्बे समय तक रह सकते है या कुछ मामलों में यह विशेष रुप अत्यधिक जोखिम वाले समूहों या जटिल हो सकता है।

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) के इलाज मे शामिल हैं:

शरीर में पर्याप्त पानी और लवण जैसे सोडियम, पोटेशियम और कैल्सियम की मात्रा को बनाये रखना जोकि, दस्त और उल्टी के कारण कम हो जाते हैं। कुछ मामलों में इसकी पूर्ती पर्याप्त पानी के पीने से, इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर प्राक्रतिक तरल से या लवणों जैसे नारियल पानी इत्यादि या घर में बने नमक और चीनी के घोल तथा बाजार में उपलब्ध ओआरएस से की जा सकती है। गंभीर मामलों में विशेष रुप से बच्चों में तथा बूढ़ें वयस्कों में अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड़ती है, जहाँ पर चिकित्सक नमक और तरल की भरपाई नस (IV line) में सुई लगाकर ग्लुकोज के चढ़ाये जाने से करता है।

एंटीबायोटिक्स: एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल की सलाह आमतौर पर नहीं दी जाती है, लेकिन खाने से होने वाली कुछ प्रकार की बीमारीयों में या फिर जब लक्षण काफी गंभीर हों, तब इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। लिस्टेरिया के कारण होने वाले खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) में अस्पताल में भर्ती होने के साथ-साथ इंजेक्शन द्वारा दी जाने वाली एंटीबायोटिक्स की आवश्यकता पड़ती है। गर्भावस्था के दौरान, एंटीबायोटिक के तुरंत इलाज से बच्चे को संक्रमण से बचाने में मदद मिलती है। वायरस के कारण होने वाली खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) में एंटीबायोटिक्स आमतौर पर काम नहीं करती हैं। कुछ प्रकार के विषाक्त पदार्थ संबंधी या जीवाणु संबंधी खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) में एंटीबायोटिक्स मौजूदा लक्षणों को बिगाड़ सकती हैं। वयस्को में होने वाले दस्त जोकि खूनी नहीं होते है या जिन्हें कोई बुखार नहीं होता है, उनमें लोपेरामाईड (loperamide) या बिस्मथ सबसेलाईसाईलेट (bismuth subsalicylate) दवाई लेने से राहत मिल सकती है। इन दवाईयों के इस्तेमाल के बारे में चिकित्सक से सलाह लें। इनसे संबन्धित लक्षणों जैसे जी मिचलाना, उल्टी या बुखार में लक्षण से संबन्धित इलाज दिया जा सकता है।

जीवनशैली में परिवर्तन और घरेलू उपचार

जैसा की हम जानते हैं कि खाद्य-विषायण (फूड पायजिनिंग) प्राय: कुछ ही दिनों में बिना इलाज के अपने आप ही ठीक हो जाता है। एक व्यक्ति निर्जलीकरण को रोकने के लिए और लक्षणों को कम करने के लिए घरेलू उपचार का इस्तेमाल कर सकता है।

• पेट और आँतों को आराम देना: कुछ घंटो के लिए खाने और पीने पर रोक लगाना।

पानी के छोटे- छोटे घूँट पीना या बर्फ को चबाना।

साफ सोडा या कैफीन रहित पेय इलेकट्रोलाईट्स के साथ पीना।

• धीरे-धीरे नियमित आहार पर वापस आना: इसकी शुरूआत नरम, कम वसायुक्त, आसानी से पचने वाला भोजन जैसे खिचड़ी, टोस्ट, जिलेटिन, केला और चावल से की जा सकती है।

• कुछ प्रकार के खानों और खाद्य पदार्थों से परहेज: इसकी सलाह तब तक दी जाती है, जब तक व्यक्ति अच्छा महसूस न करे। इनमें दूध से संबंधित पदार्थ, कैफीन, एल्कोहल, निकोटीन, और वसायुक्त तथा अत्यधिक मौसमी भोजन शामिल हैं।

• आराम: रोगप्रतिरोधक शक्ति और कमजोरी से उबरने के लिए आराम की आवश्यकता होती है।

स्वयं को और अपने आस-पास के लोगों को खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) से कैसे बचाया जाये?

खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती माहिलाओं तथा उसके भ्रूण, उम्रदराज वयस्कों और कमजोर रोगप्रतिरोधक प्रणाली के लोगों में गंभीर औऱ जानलेवा होती है। खाद्य-विषायण (फूड पॉइजनिंग) को रोकने के लिए निम्नलिखित चीजें करनी चाहिये।

• बाथरुम जाने के बाद, डायपर बदलने के बाद, जानवरों को छुने के बाद या कूड़ा या अन्य गंदी चीजों के छूने के बाद हाँथ अच्छी तरह से धोना।

• खाने को बनाने और तैयार करने से पहले और बाद में, हाँथ अच्छी तरह से धोना ।

• बर्तनों, किचन, सब्जी काटने वाले तख्ते आदि को अच्छी तरह से धोना

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• संक्रमण से बचने के लिए कच्चे खाने को पके खाने से दूर रखना जैसे, कच्चा माँस, अंडा, मछली, सेलफिश।

• खराब होने वाले खाने को खरीदने या बनाने के 2 घंटे के अंदर फ्रिज में रखना। जब कमरे के तापमान 90 F (32.2 C) से अधिक हो तो खाने को 1 घंटे के अंदर फ्रिज में रखें।

• बिना पके दूध या उससे बने पदार्थों के सेवन से बचना।

• खाने से पहले फलों और सब्जियों को अच्छी तरहे से धोना ।

• रेफ्रिजेरेटर को 40°F (4.4°C) से अधिक ठंडा और फ्रीजर को 0°F (-18°C) से नीचे रखना।

• मांस और समुद्री भोजन को अच्छी तरह से पकाना।

• जर्दी के द्रढ़ होने तक अंडे को पकाना।

• जानवरों से प्राप्त भोजन को अंदरूनी तापमान पर अच्छी तरह से पकाये जोकि फूड थर्मामीटर से अच्छी तरह से जाँचा जा सकता है: बीफ 160°F (71°C); चिकन 165°F (77°C); टर्की 165°F (82°C); सुअर का माँस 145°F (71°C)। सुनिश्चित करे मछली और सेलफिश अच्छी तरह से पकी हो।

• भोजन को सुरक्षित रूप से परिभाषित करें। कमरे के तापमान पर भोजन न करें। भोजन को पिघलाने का सबसे सुरक्षित तरीका है कि इसे रेफ्रिजरेटर में डीफ्रॉस्ट किया जाए। यदि आप “डीफ्रॉस्ट” या “50 प्रतिशत पावर” सेटिंग का उपयोग करके जमे हुए भोजन को माइक्रोवेव करते हैं, तो इसे तुरंत पकाना सुनिश्चित करें। संदेह होने पर उसे बाहर फेंक दें। यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि कोई भोजन अच्छी तरह से तैयार, परोसा या संग्रहीत किया गया है, तो उसे त्याग दें। कमरे के तापमान पर बचे हुए भोजन को अधिक समय तक छोड़ने से उसमें बैक्टीरिया या विषाक्त पदार्थ शामिल हो सकते हैं, जिन्हें पकाने से नष्ट नहीं किया जा सकता है। उस भोजन का स्वाद न लें, जिसके बारे में आप निश्चित नहीं हैं – उसे बाहर फेंक दें। यहां तक ​​कि अगर यह दिखने में और महकने में ठीक लग रहा है, तो भी यह खाने के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता है।

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