Your browser does not support JavaScript!

फैटी लिवर

This post is also available in: English (English)

फैटी लिवर क्या है?

फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है जिसमें लिवर के अंदर अत्यधिक फैट (वसा) जमा हो जाता है। आमतौर पर लिवर के अंदर फैट की थोड़ी मात्रा रहती ही है। जब लिवर की 5 प्रतिशत से ज्यादा कोशिकाओं में फैट जम जाता है तब उसे फैटी माना जाता है।

एैसा कहा जाता है कि फैटी लिवर कोई बीमारी नहीं है, बल्कि अन्य स्थितियों का परिणाम है, जो फैट के पाचन को प्रभावित करता है। फैट के न पच पाने से बचा हुआ फैट लिवर की कोशिकाओं में जमा हो जाता है। मध्यम और गँभीर स्थिति में, जमा हुआ फैट लिवर की कोशिकाओं को प्रभावित कर सकता है, जिस कारण लिवर में सूजन आ जाती है। इससे लिवर में फाईब्रोसिस पैदा हो जाते हैं, जिससे लिवर को नुकसान पहुँचता है और गंभीर स्थिति में लिवर फेल्यर (लिवर काम करना बंद कर देता है) हो जाता है।

फैटी लिवर के कारण अन्य समस्यायों  जैसे सूजन, फाईब्रोसिस और लिवर फेल्योर के पैदा होने की संभावना के मद्देनजर, इसका सही समय पर इलाज महत्वपूर्ण हो जाता है।

Progression-of-fatty liver

फैटी लिवर की कोशिकाओं की स्थिति और कारकों के आधार पर फैटी लिवर को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है।

अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD), जो काफी मात्रा में शराब पीने के कारण होता है।

अल्कोहलिक हेपेटाइटिस, जब अल्कोहलिक फैटी लिवर की कोशिकाओ में सूजन आ जाती है, तब इसे अल्कोहलिक हेपेटाइटिस कहा जाता है।

आगे चलकर यह अल्कोहलिक सिरोसिस में भी बदल सकता है, जिससे मौत भी हो सकती है।

नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD), ये एैसे मामले होते है, जिनमें शराब का सेवन न के बराबर होता है, और कोई दूसरा कारण भी पता नहीं चल पाता है। इसे आगे दो और प्रकारों में बांटा जा सकता है।

• नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD): जहां लिवर की कोशिकाओं में केवल फैट जमा हो जाता है।

• नान-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH): जब फैट का जमाव लिवर की कोशिकाओं में सूजन तथा फाईब्रोसिस के साथ या उसके बिना होता है।

लिवर में फैट का जमाव ठीक किया जा सकता है, जबकि फाइब्रोसिस का इलाज नहीं किया जा सकता है, इसे केवल रोका जा सकता है। सिरोसिस और लिवर फेल्योर का केवल एक ही इलाज है, वह है लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रान्सप्लान्ट) है जो एक जटिल सर्जरी है और जिसमें ठीक होने में समय लगता है।

फैटी लिवर कितना आम है?

विश्व में नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के मामले लगभग 6 से 35 प्रतिशत हैं। वहीं भारत में इसके मामले 9 से 32 प्रतिशत तक हैं। ग्रामीण आबादी में यह समस्या कम देखी जाती हैं, वहीं शहरी आबादी में यह समस्या अधिक होती है।

नान-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) का अनुमानित फैलाव कम है, जोकि 3 से 5 प्रतिशत है। आम आबादी में नान-अल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH) का फैलाव ज्ञात नहीं है।

अल्कोहलिक लिवर डिजीज के मामलों में, अत्यधिक शराब पीने वाले लगभग 20 प्रतिशत लोगों में फैटी लिवर की समस्या होती है। शराब के सेवन करने वाले लगभग 10 से 15 प्रतिशत लोगों में सिरोसिस की समस्या होती है।


फैटी लिवर के कारण क्या हैं?

यह माना जाता है कि लिवर में फैट का जमाव फैट के ठीक से न पच पाने के कारण होता है। यह किसी कोई बीमारी, शराब के सेवन और कुछ दवाईयाँ के सेवन के कारण हो सकता हैं। हालांकि कई मामलों में इसका कोई सीधा कारण पता नहीं चल पाता है, जिसे नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहा जाता है। इस तरह, फैटी लिवर के कारणों को निम्नलिखित वर्गों में बाँटा जा सकता है।

1. अन्य कारणों से होने वाला फैटी लिवरः

• अल्कोहलः अल्कोहल के अत्यधिक सेवन से फैटी लिवर हो सकता है, इसे अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (AFLD) कहा जााता है। अल्कोहल के अत्यधिक सेवन को पुरुषों के लिए हर हफ्ते 21 ड्रिंक और महिलाओं के लिए हर हफ्ते 14 ड्रिंक माना गया है। स्टैंडर्ड ड्रिंक साइज क्या होता है इसके बारे में जाने।

• भुखमरी

• पैरेन्टेरल पोषण: खून की नसों के माध्यम से दिया जाने वाले पोषण।

दवायें जैसे कॉर्टिकोस्टेरॉयड, मेथोट्रेक्सेट, टैमोक्सिफेन (स्तन कैंसर के लिए दवा), एमियोडैरोन (अरिदमिया के लिए दवा), वैलप्रोएट (दौरा के लिए दवा), एंटी रेट्रो वायरल दवायें, कुछ कैंसर कीमोथेरेपी दवायें विशेष रूप से पेट के कैंसर के लिए इत्यादि।

• संक्रमण: हेपेटाइटिस सी (जीनोटाइप 3)

• रोग: जैसे विल्सन रोग, रेय सिंड्रोम, लिपोडिस्ट्रॉफी, हेल्प सिंड्रोम, गर्भावस्था के अक्यूट फैटी लिवर, एबेटैलआईपीओप्रोटीनमिया, मेटाबोलिज्म की जन्मजात कमियाँ।

2.फैटी लिवर, जहां किसी सीधे कारण की पहचान नहीं की जा सकती है। इन मामलों को नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ये मामले किसी भी प्रत्यक्ष माध्यमिक स्थिति से जुड़े नहीं हैं, हालांकि यह कई जोखिम कारकों से जुड़े हुए देखे जाते हैं।

एैसे कुछ लोग जिनमें पाचन की समस्या नहीं होती है, उनको भी जीन में भिन्नता के कारण, PNPLA3 वेरिएंट के रूप, नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज हो सकती है।

NAFLD के लिए जोखिम कारक क्या हैं?

NAFLD को अब लिवर में मेटाबोलिक सिंड्रोम के प्रदर्शन के रूप में माना जाता है। मेटाबोलिक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के कई सारे शारीरिक और जैव रासायनिक कार्य गड़बड़ पाए जाते हैं। जब किसी व्यक्ति में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन द्वारा निर्धारित निम्नलिखित मानदंडों में से 3 या उससे अधिक पाए जाते हैं तो उसको मेटाबोलिक सिंड्रोम होता है । ये इस प्रकार हैंः

• मोटापा: पुरुषों में 90 सेमी (35.4 इंच) और महिलाओं में 80 सेमी (31.5 इंच) की कमर परिधि।

• डायबिटीज मेलाइटस: फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज में वृद्धि ‧100 मिलीग्राम/डीएल या बढ़े हुये ब्लड ग्लूकोज के लिए दवाएं लेना।

• डिस्लिपिडेमिया: खून में ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ा हुआ स्तर 150 मिलीग्राम/डीएल। घटा हुआ गु़ड कोलेस्ट्रोल, पुरुषों में 40 मिलीग्राम/डीएल और<महिलाओं में 50 मिलीग्राम/एलडीएल.

• उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर): सिस्टोलिक बीपी 130 या डायस्टोलिक बीपी 85 मिमी एचजी या उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के लिए दवाएं लेना।

अन्य जोखिम कारक:

• उम्र

• इंसुलिन प्रतिरोध

• उच्च कैलोरी आहार

• चीनी (फ्रक्टोज) और/या संतृप्त वसा में उच्च आहार

• पेट की आंत में गड़बड़ी और

• लगातार सूजन

फैटी लिवर और उसके कारण की पहचान कैसे करें? फैटी लिवर की पहचान कैसे करें या फैटी लिवर के कारण की पहचान कैसे करें?

फैटी लिवर आमतौर पर किसी लक्षण का उत्पादन नहीं करता है। आमतौर पर, इसे निम्नलिखित मामलों में संदेहास्पद पाया जाता है जहां:

• डिरेंन्ज्ड जिगर एंजाइम (एसीटी और एएलटी लेवल) एलएफटी परीक्षण के दौरान पाए जाते हैं या,

• उन लोगों में जिनमें मेटाबोलिक सिंड्रोम या मेटाबोलिक सिंड्रोम के खतरे जैसे मोटापा, डायबिटीज आदि जोखिम पाये जाते हैं।

कई बार, इसे इमेजिंग परीक्षण (USG, सीटी या एमआरआई) द्वारा पहचाना जाता है, जोकि किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या के लिए किये जाते है, यह फिर स्वास्थ्य जांच के दौरान किये जाते है।

फैटी लिवर के संदिग्ध मामलों में, डॉक्टर कारण की पहचान करने के लिए चिकित्सकीय इतिहास लेते है।

सबसे पहले, डॉक्टर शराब के सेवन के बारे में पूछेंगे। शराब के सेवन के मामलों में, डॉक्टर उसकी मात्रा के बारे में पूछताछ करेगें, यह जानने के लिए की क्या इससे फैटी लिवर हो सकता है।

फैटी लिवर के उन मामलों में जहां अल्कोहल का सेवन अत्यधिक पाया जाता है उसे अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज (AFLD) के रूप में चिह्नित किया जाता है।

वह लोग जो शराब नहीं पीते हैं, उनमें फैटी लिवर का कारण जानने के लिए और जाँँच कराने के लिए कहा जाता है।

लैब टेस्ट:

1. लिवर फ़ंक्शन टेस्ट: एएलटी और एसीटी (यदि पहले नहीं किया गया है)। सिंपल फैटी लिवर में, ALT स्तर AST से अधिक होता है ।

2. संक्रमण:

• वायरल हेपेटाइटिस बी: एचबीएसएजी, यदि क्रोनिक हेपेटाइटिस के लिए पोजिटिव एंटी-एचबीसी और एंटी-एचबी्स किया जाता है।

• वायरल हेपेटाइटिस सी: एंटी एचसीवी, यदि पोजिटिव एचसीवी-आरएनए किया जाता है।

3. ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस: महिलाओं में अधिक आम, यदि उनमें चकत्ते या गठिया, थायराइडाइटिस, वास्कुलाइटिस की शिकायत है तो इसे विशेष रूप से किया जाना चाहिए।

परीक्षण: एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी और एंटी-स्मूद मसल एंटीबॉडी। कभी-कभी बार एंटी एलकेएम-1 एंटीबॉडी भी किया जाता है।

4. आयरन ओवरलोड: सीरम फेरिटिन और ट्रांसफर इन लेवल किया जाता है। यदि यह बढ़ा हुआ होता है तो आनुवंशिक हीमोक्रोमेटोसिस के लिए परीक्षण किया जाता है।

5. विल्सन रोग: यह एक आनुवंशिक रोग है जहां दिमाग और लिवर में अत्यधिक तांबा जमा हो जाता है। इसमें टोटल सीरम कॉपर और सेरुलोप्लास्मिन किया जाता है जिनका स्तर विल्सन में कम होता हैं। तांबे के लिए मूत्र परीक्षण से पता चलता है कि उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।

यदि ऊपर दिये गये किसी भी परीक्षण का परिणाम सकारात्मक (पोजिटिव) आता है, तो उस स्थिति का तदनुसार इलाज किया जाता है।

यदि उपरोक्त परीक्षण नकारात्मक पाए जाते हैं, तो व्यक्ति को NAFLD होता है।

इन मामलों को निम्नलिखित परीक्षणों द्वारा फाइब्रोसिस या लिवर कोशिकाओ के नुकसान की उपस्थिति के लिए आगे मूल्यांकन किया जाता है:

1. फाइब्रोसिस प्रडेक्टिव सीरम बायोमार्कर (खून की जांच):

• एलएफटी: एएलटी, एसीटी अल्कालिन फॉस्फेटेस सहित, एल्बुमिन और γ-ग्लूटामाइल ट्रांसफरेस बच्चों के लिए की जाने वाली जांच। एडवाँस फाइब्रोसिस में, एसीटी से एएलटी अनुपात 1 से अधिक है।

• कोआगुलेशन परीक्षण: पीटी/आईएनआर

• सीबीसी के साथ प्लेटलेट काउंट

2. फास्टिंग ग्लूकोज या हीमोग्लोबिन A1C

3. लिपिड प्रोफाइल: सीरम टोटल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल-सी, और ट्राइग्लिसराइड स्तर

ग्लूकोज और लिपिड प्रोफ़ाइल के लिए ऊपर दी गयी जाँचें मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम का मूल्यांकन करने के लिए की जाती है।

यदि फाइब्रोसिस के लिए बायोमार्कर परीक्षण नकारात्मक (निगेटिव) है, तो कोई अन्य परीक्षण नहीं किया जाता है। व्यक्ति को फाइब्रोसिस के विकास की जांच करने और नियमित फोलोअप के लिए कहा जाता है।

यदि बायोमार्कर परीक्षण से फाइब्रोसिस का पता चलता हैं, तो फाइब्रोसिस की डिग्री की जांच करने के लिए इलास्टोग्राफी परीक्षण किया जाता है।

यदि इलास्टोग्राफी और बायोमार्कर दोनों परिणाम एक दूसरे के अनुरूप हैं, तो किसी अन्य परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि उपरोक्त परीक्षण मेल नहीं खाते हैं या NAFLD के कारण की पहचान नहीं हो पाती है, एैसी स्थिति में बायोप्सी की सलाह दी जाती है, जिसे खरा मानक माना जाता है:

NAFLD या NASH की पहचान की पुष्टि करें।

फाइब्रोसिस की उपस्थिति और फाइब्रोसिस की डिग्री की पुष्टि करें।

फैटी लिवर में इमेजिंग की क्या भूमिका है?

इमेजिंग परीक्षण फैटी लिवर और उसकी जटिलता की पहचान और प्रबंधन में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है।

ये परिक्षण स्थिति के साथ- साध  ग्रेड की गंभीरता की पहचान करने में मदद करते हैं। कुछ जाँचे लिवर फाइब्रोसिस की डिग्री को ग्रेड करने में मदद करती हैं।

ये परीक्षण स्थिति का निदान करने के साथ ही,  गंभीरता को ग्रेड करने में मदद कर सकते हैं। कुछ परीक्षण लिवर में फाइब्रोसिस की डिग्री को ग्रेड करने में मदद कर सकते हैं। इन परीक्षणों से सिरोसिस और पोर्टल हाइपरटेंशन जैसे फैटी लिवर की जटिलता का आकलन करने में भी मदद मिलती है। यह जाँचे फैटी लिवर की जटिलताओं जैसे सिरोसिस और पोर्टल हाईपरटेंशन के मूल्यांकन में मदद कर सकती है।

1. अल्ट्रासाउंड (यूएसजी): यह पहला इमेजिंग टेस्ट है, जिसका उपयोग फैटी लिवर का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह फैटी लिवर की पहचान कर सकता है और लिवर में फैट के जमा होने की स्थिति को ग्रेड कर सकता है। मध्यम से लेकर गंभीर फैटी लिवर की पहचान करने के लिए इसे अच्छा इमेजिंग परीक्षण माना जाता है।

अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर को 3 श्रेणियों में बाँटता है, जो हल्का, मध्यम और गंभीर है.

फैटी लिवर की अल्ट्रासाउंड ग्रेडिंग के बारे में अधिक जानकारी

2. सीटी स्कैन: हाँलांकि इसे फैटी लिवर का आकलन करने के लिए नहीं किया जाता है। इसे लिवर की जटिलताओं जैसे सिरोसिस, पोर्टल हाईपरटेंशन या एचसीसी (कैंसर) के मूल्यांकन के लिये किया जाता। यह छवियों को बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करता है।

3. एमआरआई: यह फैट के जमाव का पता लगाने में काफी संवेदनशील होता है। यह विकिरण (एक्स-रे) का उपयोग नहीं करता है। सीटी की तरह इसका इस्तेमाल भी लिवर फैट अनुमान में किया जा सकता है।

4. इलास्टोग्राफी: यह एक एैसा  परीक्षण है जो लिवर में मौजूद फाइब्रोसिस की डिग्री का पता लगा सकता है। यह फाइब्रोसिस की उपस्थिति या अनुपस्थिति का सुझाव देकर आगे के वर्कअप को निर्देशित करने में मदद करता है और कई बार बायोप्सी की आवश्यकता से बचने में मदद करता है। यह दो तरीकों से किया जा सकता है: अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी या एमआरआई इलास्टोग्राफी।

FIBROSCAN

फैटी लिवर/नैश में लिवर बायोप्सी की क्या भूमिका है?

लिवर बायोप्सी में डॉक्टर माइक्रोस्कोप की मदद से लिवर की कोशिकाओं की संरचना का बारीकी से निरीक्षण करते हैं। इससे वह लिवर की कोशिकाओं में विकसित होने वाली किसी भी असामान्यता की जांच करते है, जैसे फैट का जमाव, सूजन, फाइब्रोसिस या यहां तक कि ट्यूमर कोशिकाएं।

इसको NAFLD, NASH की पहचान और फाइब्रोसिस की डिग्री को ग्रेड करने के लिए खरा मानक परीक्षण माना जाता है। हालांकि, इसकी आक्रामक प्रकृति के कारण इसका उपयोग विशेष रूप से उन मामलों में किया जाता है जहां इमेजिंग परिणाम, क्लिनकल परिक्षम से मेल नहीं खाते हैं या जहां पर पहचान में असमंजस होता है।

प्रक्रिया:

यह प्रक्रिया सामान्य एनिस्थिसिया के बिना की जाती है। लिवर के टिश्यू का एक छोटा सा नमूना लेने के लिए एक विशेष सुई का उपयोग किया जाता है जो आमतौर पर आपके पेट की त्वचा के माध्यम से डाला जाता है। यह आम तौर पर अल्ट्रासाउंड की मदद से किया जाता है जो रक्त वाहिकाओं से बचते हुये सुई को सही दिशा में गाइड करता है। किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए निकाले गये ऊतक की जाँच माइक्रोस्कोप द्वारा की जाती है।

फैटी लिवर का इलाज कैसे करें?

उपचार का उद्देश्य लिवर में फैट के जमाव को कम करना तथा सूजन, फाइब्रोसिस और सिरोसिस जैसी स्थितियों से बचना है।

उपचार के विभिन्न विकल्प नीचे दिए गए हैं जो NAFLD के इलाज में मदद कर सकते हैं और कुछ हद तक इसकी जटिलताओं को रोक सकते हैं:

1. वजन घटाने: यह एकमात्र उपचार है जो फैटी लिवर में प्रभावी पाया जाता है। यह डायबिटीज की उपस्थिति या अनुपस्थिति में भी उपयोगी है।

weight loss before and after scaled

वजन घटाने की विधियां:

• आहार: डाइट में कमी फैटी लिवर के प्रबंधन में मदद कर सकती है। 0.5 से 1 किलो/सप्ताह के वजन में कमी हासिल करने के लिए, प्रतिदिन मानक से 500 से 1000 किलो कैलोरी कम आहार लेने की सलाह दी जाती है। मेडिटिरेनियन आहार कम फैट या कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार की तुलना में लिवर की चर्बी को कम करने में बेहतर पाया गया है।

• व्यायाम: यह पाया गया है कि प्रतिरोध प्रशिक्षण या एरोबिक व्यायाम के रूप में व्यायाम लिवर की चर्बी में कमी ला सकता है। यह प्रभाव शरीर के वजन में कमी के बावजूद होता है। 150 मिनट/सप्ताह से अधिक की शारीरिक गतिविधि लिवर के कामकाज में काफी सुधार कर सकती हैं।

• लिवर में फैट की मात्रा कम करने के लिए आहार और व्यायाम दोनों की सिफारिश साथ-साथ की जाती है।

वजन घटाने के लक्ष्यों की सिफारिश: फैटी लिवर (NAFLD) के इलाज के लिए कितना वजन घटाने की आवश्यकता है:

लोगों को सलाह दी जाती है कि वे शरीर का 5 प्रतिशत वजन कम करें और इसे बनाए रखें, ताकि फैट को जमाव को कम किया जा सके और मेटाबोलिक मुद्दों में सुधार करने में मदद मिल सके।

सूजन (स्टीटोहेपेटाइटिस) के साथ फैट का जमाव में सुधार करने के लिए शरीर का वजन  7 से 10 प्रतिशत कम करने की सलाह दी जाती है।

बच्चों में स्टीटोहेपेटाइटिस का प्रबंधन करने के लिए वजन घटाने के मापदंड का पता नहीं है।

weight loss exercise and healthy diet

2. दवाएं:

दवाएं वसा संचय को कम करने और/या मेटाबोलिक मापदंडों में सुधार करने में मदद कर सकती हैं ।

हालांकि, उन्हें आम तौर पर केवल बायोप्सी द्वारा निश्चित और नॉनअल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस के मामलों में लेने के लिए कहा जाता है।

• एंटीऑक्सीडेंट: डायबिटीज के साथ बायोप्सी सिद्ध नैश में दिन में दो बार विटामिन ई 400 आईयू लेना स्थिति में सुधार लाने में मदद करता है। नाईस दिशानिर्देश (ब्रिटिश दिशानिर्देश) डायबिटीज के साथ नैश और सिरोसिस के लिए एक ही चिकित्सा के उपयोग का सुझाव देते हैं।

– एहतियात: उपरोक्त चिकित्सा कई कारणों से मौत का खतरा बढ़ा सकती है, या कुछ रोगियों में प्रोस्टेट कैंसर का कारण बन सकती है। इस उपचार का विकल्प चुनने की योजना बनाने से पहले, अपने डॉक्टर के साथ जोखिमऔर लाभों पर चर्चा करने की सलाह दी जाती है।

• इंसुलिन सेंसिपर्स: पिओग्लिटाजोन हाइड्रोक्लोराइड एक 30 मिलीग्राम टैबलेट रोजाना टाइप 2 डायबिटीज के साथ या बिना बायोप्सी-सिद्ध नैश में दिया जा सकता है। यह उन लोगों द्वारा नहीं ली जानी चाहिये जिनमें कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर या फ्रैक्चर का जोखिम होता है। नाइस और यूरोपीय दिशानिर्देश डायबिटीज की उपस्थिति या अनुपस्थिति के बावजूद एडवांस्ड लिवर फाइब्रोसिस वाले वयस्कों में पिओग्लिटाज़ोन या विटामिन ई पर विचार करने की सलाह देते हैं।

• ओमेगा-3 फैटी एसिड

• इसको NAFLD या NASH में लेने की सलाह नहीं दी जाती है। इसे हाइपरट्राइग्लिसेराइडिया के लिए दिया जाता है जो NAFLD के लोगों में देखा जाता है। 830 मिलीग्राम/दिन या उससे अधिक की खुराक फायदेमंद पाई गई है।

• लिपिड कम करने वाले एजेंट

• स्टेटिन, NAFLD/NASH से ग्रसित लोगों में लिपिड असामान्यताओं को ठीक करने में मदद कर सकते हैं, और इस तरह लिवर के कामकाज में सुधार कर सकते है।

3 बैरिएट्रिक सर्जरी- यह एक ऐसी सर्जरी है, जो पेट के आकार को कम करती है और वजन कम करने में मदद करती है। इस सर्जरी को उन लोगों में एक विकल्प माना जा सकता है जो गंभीर रूप से या रुग्ण रूप से मोटापे से ग्रस्त हैं। एक अध्ययन में बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद करीब 85 प्रतिशत लोगों में NASH के खत्म होने का पता चला है। इसका इस्तेमाल NASH साथ रुग्ण मोटापे से ग्रस्त रोगियों में किया जाता है, जिनमें जीवन शैली में परिवर्तन के बावजूद कोई बदलाव नहीं आता है।

4. प्रतिरक्षण: क्रोनिक लिवर डिजीज वाले बच्चों और वयस्कों दोनों को सीडीसी द्वारा हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी और न्यूमोकोकल टीके लेने की सिफारिश की जाती है।

5. शराब की खपत: यदि किसी व्यक्ति को शराब के अत्यधिक सेवन के कारण फैटी लिवर होता है, तो शराब को पूरी तरह से छोड़ने पर फैटी लिवर को हल करने में मदद हो सकती है। ऐसा कहा जाता है कि 6 हफ्ते शराब छोड़ने से इन लोगों  में फैटी लिवर कम करने में मदद मिलती है। दुबाारा शराब का सेवन करने से फिर से फैटी लिवर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि किसी व्यक्ति को नान-अल्कोहलिक फैटी लिवर डीजीज है तो उसे भारी मात्रा में शराब का सेवन करने से बचना चाहिए .

6. कॉफी: कई अध्ययनों कॉफी के सुरक्षात्मक प्रभाव का पता चला है जो फाइब्रोसिस, लिवर कैंसर और सिरोसिस के विकास के खिलाफ मदद करती है। 2 से 4 कप कॉफी सिरोसिस के विकास और इससे मौत की संभावना को काफी कम करता है।

 

various types of coffee scaled

 

7. लिवर प्रत्यारोपण (लिवर ट्रान्सप्लान्ट): इसकी आवश्यकता उन लोगों में हो सकती है जिनमें NASH से संबंधित सिरोसिस विकसित होता है।

फैटी लिवर की जटिलताएं क्या हैं? फैटी लिवर से क्या हो सकता है?

यह पाया गया है कि NASH के साथ लगभग 3 से 15 प्रतिशत लोगों में सिरोसिस विकसित होते हैं। यह भी पाया गया है कि सिरोसिस और नैश के साथ लगभग 4 से 27 लोगों एचसीसी विकसित होता हैं।

NAFLD/नैश की मुख्य जटिलता सिरोसिस है, जहां फाइब्रोसिस के कारण लिवर जख्मी हो जाता है। सिरोसिस लिवर के अधिकतर हिस्से में फाइब्रोसिस विकसित होने के कारण होता है जो लिवर कोशिकाओं में सूजन को रोकने की प्रक्रिया में होता है।

सिरोसिस के बिगड़ने से निम्न समस्याओं को देखा जाता है:

• पेट में तरल पदार्थ का संचय (एसाइट्स)

• आपके भोजन पाइप (एसोफेगल वैरिस) में नसों का एंग्जोर्गमेंट, जो खूनी उल्टी का कारण बन सकता है।

• भ्रम का विकास, बदली हुई चेतना और बोलचाल में लडखड़ाहट (हेपेटिक एंसेफेलोपैथी)

• एचसीसी (लिवर कैंसर)

• लिवर की विफलता (लिवर फेल्योर): जब लिवर ज्यदातर काम करना बंद कर देता है।

TOP HEALTH NEWS & RESEARCH

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

A single targeted dose of radiotherapy could be as effective at treating breast cancer as a full course, a long-term…

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

The loss of smell that can accompany coronavirus is unique and different from that experienced by someone with a bad…

Lancet Editor Spills the Beans

Lancet Editor Spills the Beans

Editors of The Lancet and the New England Journal of Medicine: Pharmaceutical Companies are so Financially Powerful They Pressure us…

मदर एंड चाइल्ड

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर अवधि क्या है? एक प्रसवोत्तर अवधि एक एैसा समय अंतराल है, जिसमें मां बच्चे को जन्म देने के बाद…

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर या स्तनपान आहार क्या है? पोस्टपार्टम डाइट वह डाइट है, जो मां को एक बार बच्चे के जन्म के…

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाने और बचने वाले खाद्य पदार्थों की सूची गर्भ धारण करने के बाद, बच्चे…

मन और मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का निदान किया जाता है? नैदानिक इतिहास: डॉक्टर आम तौर पर लक्षणों का विस्तृत इतिहास…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का इलाज किया जाता है? सामान्यीकृत चिंता विकार का उपचार लक्षणों की गंभीरता और जीवन…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है? चिंता, किसी ऐसी चीज के बारे में परेशानी या घबराहट की भावना है, जो हो…