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फैटी लिवर (डायग्नोसिस)

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फैटी लिवर और उसके कारण की पहचान कैसे करें? फैटी लिवर की पहचान कैसे करें या फैटी लिवर के कारण की पहचान कैसे करें?

फैटी लिवर आमतौर पर किसी लक्षण का उत्पादन नहीं करता है। आमतौर पर, इसे निम्नलिखित मामलों में संदेहास्पद पाया जाता है जहां:

• डिरेंन्ज्ड जिगर एंजाइम (एसीटी और एएलटी लेवल) एलएफटी परीक्षण के दौरान पाए जाते हैं या,

• उन लोगों में जिनमें मेटाबोलिक सिंड्रोम या मेटाबोलिक सिंड्रोम के खतरे जैसे मोटापा, डायबिटीज आदि जोखिम पाये जाते हैं।

कई बार, इसे इमेजिंग परीक्षण (USG, सीटी या एमआरआई) द्वारा पहचाना जाता है, जोकि किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या के लिए किये जाते है, यह फिर स्वास्थ्य जांच के दौरान किये जाते है।

फैटी लिवर के संदिग्ध मामलों में, डॉक्टर कारण की पहचान करने के लिए चिकित्सकीय इतिहास लेते है।

सबसे पहले, डॉक्टर शराब के सेवन के बारे में पूछेंगे। शराब के सेवन के मामलों में, डॉक्टर उसकी मात्रा के बारे में पूछताछ करेगें, यह जानने के लिए की क्या इससे फैटी लिवर हो सकता है।

फैटी लिवर के उन मामलों में जहां अल्कोहल का सेवन अत्यधिक पाया जाता है उसे अल्कोहल फैटी लिवर डिजीज (AFLD) के रूप में चिह्नित किया जाता है।

वह लोग जो शराब नहीं पीते हैं, उनमें फैटी लिवर का कारण जानने के लिए और जाँँच कराने के लिए कहा जाता है।

लैब टेस्ट:

1. लिवर फ़ंक्शन टेस्ट: एएलटी और एसीटी (यदि पहले नहीं किया गया है)। सिंपल फैटी लिवर में, ALT स्तर AST से अधिक होता है ।

2. संक्रमण:

• वायरल हेपेटाइटिस बी: एचबीएसएजी, यदि क्रोनिक हेपेटाइटिस के लिए पोजिटिव एंटी-एचबीसी और एंटी-एचबी्स किया जाता है।

• वायरल हेपेटाइटिस सी: एंटी एचसीवी, यदि पोजिटिव एचसीवी-आरएनए किया जाता है।

3. ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस: महिलाओं में अधिक आम, यदि उनमें चकत्ते या गठिया, थायराइडाइटिस, वास्कुलाइटिस की शिकायत है तो इसे विशेष रूप से किया जाना चाहिए।

परीक्षण: एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी और एंटी-स्मूद मसल एंटीबॉडी। कभी-कभी बार एंटी एलकेएम-1 एंटीबॉडी भी किया जाता है।

4. आयरन ओवरलोड: सीरम फेरिटिन और ट्रांसफर इन लेवल किया जाता है। यदि यह बढ़ा हुआ होता है तो आनुवंशिक हीमोक्रोमेटोसिस के लिए परीक्षण किया जाता है।

5. विल्सन रोग: यह एक आनुवंशिक रोग है जहां दिमाग और लिवर में अत्यधिक तांबा जमा हो जाता है। इसमें टोटल सीरम कॉपर और सेरुलोप्लास्मिन किया जाता है जिनका स्तर विल्सन में कम होता हैं। तांबे के लिए मूत्र परीक्षण से पता चलता है कि उत्सर्जन में वृद्धि हुई है।

यदि ऊपर दिये गये किसी भी परीक्षण का परिणाम सकारात्मक (पोजिटिव) आता है, तो उस स्थिति का तदनुसार इलाज किया जाता है।

यदि उपरोक्त परीक्षण नकारात्मक पाए जाते हैं, तो व्यक्ति को NAFLD होता है।

इन मामलों को निम्नलिखित परीक्षणों द्वारा फाइब्रोसिस या लिवर कोशिकाओ के नुकसान की उपस्थिति के लिए आगे मूल्यांकन किया जाता है:

1. फाइब्रोसिस प्रडेक्टिव सीरम बायोमार्कर (खून की जांच):

• एलएफटी: एएलटी, एसीटी अल्कालिन फॉस्फेटेस सहित, एल्बुमिन और γ-ग्लूटामाइल ट्रांसफरेस बच्चों के लिए की जाने वाली जांच। एडवाँस फाइब्रोसिस में, एसीटी से एएलटी अनुपात 1 से अधिक है।

• कोआगुलेशन परीक्षण: पीटी/आईएनआर

• सीबीसी के साथ प्लेटलेट काउंट

2. फास्टिंग ग्लूकोज या हीमोग्लोबिन A1C

3. लिपिड प्रोफाइल: सीरम टोटल कोलेस्ट्रॉल, एचडीएल-सी, और ट्राइग्लिसराइड स्तर

ग्लूकोज और लिपिड प्रोफ़ाइल के लिए ऊपर दी गयी जाँचें मेटाबोलिक सिंड्रोम के जोखिम का मूल्यांकन करने के लिए की जाती है।

यदि फाइब्रोसिस के लिए बायोमार्कर परीक्षण नकारात्मक (निगेटिव) है, तो कोई अन्य परीक्षण नहीं किया जाता है। व्यक्ति को फाइब्रोसिस के विकास की जांच करने और नियमित फोलोअप के लिए कहा जाता है।

यदि बायोमार्कर परीक्षण से फाइब्रोसिस का पता चलता हैं, तो फाइब्रोसिस की डिग्री की जांच करने के लिए इलास्टोग्राफी परीक्षण किया जाता है।

यदि इलास्टोग्राफी और बायोमार्कर दोनों परिणाम एक दूसरे के अनुरूप हैं, तो किसी अन्य परीक्षण की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि उपरोक्त परीक्षण मेल नहीं खाते हैं या NAFLD के कारण की पहचान नहीं हो पाती है, एैसी स्थिति में बायोप्सी की सलाह दी जाती है, जिसे खरा मानक माना जाता है:

NAFLD या NASH की पहचान की पुष्टि करें।

फाइब्रोसिस की उपस्थिति और फाइब्रोसिस की डिग्री की पुष्टि करें।

फैटी लिवर में इमेजिंग की क्या भूमिका है?

इमेजिंग परीक्षण फैटी लिवर और उसकी जटिलता की पहचान और प्रबंधन में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है।

ये परिक्षण स्थिति के साथ- साध  ग्रेड की गंभीरता की पहचान करने में मदद करते हैं। कुछ जाँचे लिवर फाइब्रोसिस की डिग्री को ग्रेड करने में मदद करती हैं।

ये परीक्षण स्थिति का निदान करने के साथ ही,  गंभीरता को ग्रेड करने में मदद कर सकते हैं। कुछ परीक्षण लिवर में फाइब्रोसिस की डिग्री को ग्रेड करने में मदद कर सकते हैं। इन परीक्षणों से सिरोसिस और पोर्टल हाइपरटेंशन जैसे फैटी लिवर की जटिलता का आकलन करने में भी मदद मिलती है। यह जाँचे फैटी लिवर की जटिलताओं जैसे सिरोसिस और पोर्टल हाईपरटेंशन के मूल्यांकन में मदद कर सकती है।

1. अल्ट्रासाउंड (यूएसजी): यह पहला इमेजिंग टेस्ट है, जिसका उपयोग फैटी लिवर का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह फैटी लिवर की पहचान कर सकता है और लिवर में फैट के जमा होने की स्थिति को ग्रेड कर सकता है। मध्यम से लेकर गंभीर फैटी लिवर की पहचान करने के लिए इसे अच्छा इमेजिंग परीक्षण माना जाता है।

अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर को 3 श्रेणियों में बाँटता है, जो हल्का, मध्यम और गंभीर है.

फैटी लिवर की अल्ट्रासाउंड ग्रेडिंग के बारे में अधिक जानकारी

2. सीटी स्कैन: हाँलांकि इसे फैटी लिवर का आकलन करने के लिए नहीं किया जाता है। इसे लिवर की जटिलताओं जैसे सिरोसिस, पोर्टल हाईपरटेंशन या एचसीसी (कैंसर) के मूल्यांकन के लिये किया जाता। यह छवियों को बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करता है।

3. एमआरआई: यह फैट के जमाव का पता लगाने में काफी संवेदनशील होता है। यह विकिरण (एक्स-रे) का उपयोग नहीं करता है। सीटी की तरह इसका इस्तेमाल भी लिवर फैट अनुमान में किया जा सकता है।

4. इलास्टोग्राफी: यह एक एैसा  परीक्षण है जो लिवर में मौजूद फाइब्रोसिस की डिग्री का पता लगा सकता है। यह फाइब्रोसिस की उपस्थिति या अनुपस्थिति का सुझाव देकर आगे के वर्कअप को निर्देशित करने में मदद करता है और कई बार बायोप्सी की आवश्यकता से बचने में मदद करता है। यह दो तरीकों से किया जा सकता है: अल्ट्रासाउंड इलास्टोग्राफी या एमआरआई इलास्टोग्राफी।

FIBROSCAN

फैटी लिवर/नैश में लिवर बायोप्सी की क्या भूमिका है?

लिवर बायोप्सी में डॉक्टर माइक्रोस्कोप की मदद से लिवर की कोशिकाओं की संरचना का बारीकी से निरीक्षण करते हैं। इससे वह लिवर की कोशिकाओं में विकसित होने वाली किसी भी असामान्यता की जांच करते है, जैसे फैट का जमाव, सूजन, फाइब्रोसिस या यहां तक कि ट्यूमर कोशिकाएं।

इसको NAFLD, NASH की पहचान और फाइब्रोसिस की डिग्री को ग्रेड करने के लिए खरा मानक परीक्षण माना जाता है। हालांकि, इसकी आक्रामक प्रकृति के कारण इसका उपयोग विशेष रूप से उन मामलों में किया जाता है जहां इमेजिंग परिणाम, क्लिनकल परिक्षम से मेल नहीं खाते हैं या जहां पर पहचान में असमंजस होता है।

प्रक्रिया:

यह प्रक्रिया सामान्य एनिस्थिसिया के बिना की जाती है। लिवर के टिश्यू का एक छोटा सा नमूना लेने के लिए एक विशेष सुई का उपयोग किया जाता है जो आमतौर पर आपके पेट की त्वचा के माध्यम से डाला जाता है। यह आम तौर पर अल्ट्रासाउंड की मदद से किया जाता है जो रक्त वाहिकाओं से बचते हुये सुई को सही दिशा में गाइड करता है। किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए निकाले गये ऊतक की जाँच माइक्रोस्कोप द्वारा की जाती है।

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