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स्तंभन दोष (नपुंसकता)

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स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) क्या है?

स्तंभन दोष एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एक व्यक्ति यौन क्रिया करने के लिए लिंग का पर्याप्त कड़ापन पाने, तथा उसे बनाए रखने में असमर्थ होता है।

इसे नपुंसकता भी कहा जाता है, लेकिन आमतौर पर डॉक्टर इस शब्द का इस्तेमाल करने से बचते हैं।

स्तंभन दोष,  शीघ्रपतन से अलग होता है। शीघ्रपतन में व्यक्ति अच्छा कड़ापन तो प्राप्त कर लेता है, लेकिन लिंग के प्रवेश के तुरंत बाद स्खलन हो जाता है (एक मिनट से भी कम)।

40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में, स्तंभन दोष एक सामान्य स्थिति है। इस स्थिति से व्यक्ति के आत्मविश्वास और रिश्तों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, यह अंतर्निहित (अंडरलायिंग) हृदय रोग का एक महत्वपूर्ण संकेतक भी माना जाता है। इस तरह इसमें उचित चिकित्सा मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।

ज्यादातर लोग, डॉक्टर से इस बारे में बात करने हिचकिचाते हैं, या बुढ़ापे में इसे अनावश्यक मनाते हैं। हालांकि स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का इलाज किसी भी उम्र में किया जा सकता है।

स्तंभन दोष से कितने पुरुष प्रभावित होते हैं?

स्तंभन दोष 20-29 साल की उम्र के लगभग 6 प्रतिशत पुरुषों को प्रभावित करता है। स्तंभन दोष, 40-79 साल की उम्र के 50 से 70 प्रतिशत लोगों में तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में इसका काफी तेजी से बढ़ने का अनुमान है, जोकि वर्ष 2025 तक 32 करोड़ पुरुषों को को प्रभावित कर सकता है।

भारत को ,पुरुष आबादी की सबसे बड़ी संख्या, और उनमें जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों की उच्च घटना के कारण दुनिया की स्तंभन दोष राजधानी माना जाता है।

यौन उत्तेजना पर लिंग कैसे कड़ा हो जाता है?

लिंग का कड़ापन एक सहज प्रतिक्रिया है, हालांकि इसके पीछे एक जटिल तंत्र होता है। इसमें हार्मोन, नसों, रक्त वाहिकाओं और मांसपेशियों की परस्पर क्रिया शामिल है।

जब कोई व्यक्ति स्पर्श, यौन छवियों या विचारों के रूप में यौन उत्तेजना का अनुभव करता है, तो उसका मस्तिष्क, लिंग को तंत्रिका (नर्व) संकेत भेजता है। संकेत प्राप्त करने पर, लिंग (कोप्रोरा कैवर्नोसा) की मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं, और खून को लिंग के स्पंजी ऊतक में जमा होने देती है। इस तरह से खून लिंग की मांसपेशियों में भर जाता है, और लिंग बढ़कर कड़ा हो जाता है।

इसके बाद खून से भरी नसें बंद हो जाती हैं, जिससे कड़ापन को बना रहता हैं। एक बार संभोग सुख प्राप्त हो जाने के बाद या जब व्यक्ति उत्तेजना महसूस नहीं करता है, तब रक्त वाहिकाएं खुल जाती है और खून का बहाव फिर से शुरु हो जाता है। जिसके परिणामस्वरूप लिंग की स्थिति सामान्य हो जाती है।

स्तंभन दोष के कारण क्या हैं?

लिंग की नसों के बंद हो जाने, या यौन उत्तेजना को प्राप्त करने के तंत्र (मैकेनिस्म) में कोई भी दखल, स्तंभन दोष का कारण बन सकती है। यह समस्या भावनाओं, हार्मोन, तंत्रिका (नर्व) या रक्त वाहिकाओं के आपसी क्रिया के किसी भी स्तर को प्रभावित कर सकती है।

इस स्थिति को पैदा करने या उत्तेजक करनेमें, तनाव और भावनात्मक मुद्दे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस तरह, कई स्थितियाँ स्तंभन दोष का कारण बन सकती हैं। इन्हे सामान्य तौर पर दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है: शारीरिक कारण और मनोवैज्ञानिक कारण।

शारीरिक कारण:

• दिल की बीमारी

• खून की नसों का रोग- प्लाक का बनना (एथेरोस्क्लेरोसिस)

• बढ़ा हुआ बीपी

• डायबिटीज

• बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल

• मोटापा

• मेटाबोलिक सिंड्रोम- यह एक ऐैसी स्थिति है, जिसमें बीपी, इंसुलिन, कोलेस्ट्रॉल, और कमर के चारों फैट बढ़ जाता है।

• क्रोनिक किडनी डीजीज

• मल्टीपल स्क्लेरोसिस

• पेरोनी रोग

• पार्किंसंस रोग

• प्रोस्टेट कैंसर के उपचार, जैसे रेडियेशन थेरेपी और सर्जरी

लिंग, पेल्विस, रीढ़ की हड्डी, प्रोस्टेट या यूरीनरी ब्लैडर की चोट

• यूरीनरी ब्लैडर के कैंसर की सर्जरी

मनोवैज्ञानिक कारण:

यौन उत्तेजना के शुरू होने से लेकर संभोग सुख प्राप्त करने तक, दिमाग लिंग के कड़ेपन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस तरह, दिमाग को प्रभावित करने वाले कई मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारक, स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का कारण बन सकते है, या इसे बदतर बना सकते हैं।

• चिंता

• अवसाद (डिप्रेशन)

जीवन में तनाव और अपने साथी के साथ संबंध

यौन विफलता का डर और चिंता

यौन गतिविधि के बारे में अपराधबोध (गिल्टी)

• खराब आत्मसम्मान

कुछ तरह व्यवहार से तथा विशेष दवाओं के सेवन से भी, स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) हो सकता है। ये इस प्रकार हैं:

व्यवहार: धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, अवैध ड्रग्स का उपयोग करना, शारीरिक रूप से निष्क्रियता।

दवाएं: रक्तचाप (बीपी) की दवाएं, अवसादरोधी (एन्टी डिप्रेशन) दवाएं, सिडेटिव या ट्रैंकुलाइजर, प्रोस्टेट कैंसर के लिए दवाओं का उपयोग, अल्सर दवायें या भूख दबाने के लिए उपयोग की जाने वाले दवाएं।

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) विकसित होने का खतरा किनको अधिक होता है?

यदि आपको निम्नलिखित स्थितियां हैं, तो आप स्तंभन दोष विकसित करने के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं:

• बढ़ी उम्र: यह आमतौर पर 40 साल की उम्र के बाद देखा जाता है, जहां बढ़ती उम्र के साथ इसकी संभावना बढ़ जाती है।

• दिल और रक्त वाहिका (ब्लड वेसल) रोग, डायबिटीज आदि जैसी चिकित्सा स्थितियां।

• अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होना

• तंबाकू के उपयोग का इतिहास

• शराब और नशीली दवाओं की सेवन का इतिहास

• प्रोस्टेट कैंसर के लिए विकिरण (रेडियेशन) चिकित्सा या सर्जरी जैसे कुछ उपचारों का इतिहास

• कुछ प्रकार की दवाओं के सेवन का इतिहास जैसे, अवसादरोधी (एन्टी डिप्रेशन), रक्तचाप (बीपी) की दवायें

• तनाव, चिंता या अवसाद जैसे कुछ मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक मुद्दे

कुछ कारक ईडी के विकास में  किस तरह योगदान दे सकते हैं, इसके बारे में पढ़े

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) की जटिलताएं क्या हैं?

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) निम्नलिखित जटिलताओं का कारण बन सकता है:

• खराब और असंतोषजनक यौन जीवन

• भागीदारों के बीच अंतरंगता की कमी और तनावपूर्ण संबंध

• अपके पार्टनर की गर्भवती होने में असमर्थता। इन मुद्दों से अंततः तलाक हो सकता है

• खराब आत्मसम्मान और आत्मविश्वास जो जीवन के अन्य भागों को प्रभावित करता है

• अवसाद (डिप्रेशन), चिंता और तनाव जो स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) में योगदान दे सकते है, जिससे एक तरह का दुष्चक्र शुरू हो जाता है

ये मुद्दे व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से काफी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जबरदस्त परेशानी होती है।

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) के लक्षण क्या हैं?

स्तंभन दोष के लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

• सेक्स करने के लिए इरेक्शन (कड़ापन) पाने में असमर्थता। यह कभी-कभी या हर बार हो सकता है, जब आप सेक्स करने की कोशिश करते हैं। इन्हे हल्के, मध्यम और गंभीर रूप में ग्रेड किया गया हैं।

• इरेक्शन प्राप्त करने में सक्षमता, लेकिन सेक्स करने के लिए इसे बनाए रखने में परेशानी होना

• इसमें से कोई भी कम सेक्स ड्राइव के साथ हो सकता है

जब आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए

• यदि आपको इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में परेशानी है, तो आपको डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए।

• जब आप शीघ्रपतन, देरी से स्खलन या खराब सेक्स ड्राइव जैसी अन्य यौन समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

• आपको अन्य स्वास्थ्य स्थितियां जैसे दिल की बीमारी या डायबिटीज आदि हैं।

• यदि कोई व्यक्ति किसी तनाव, अवसाद (डिप्रेशन) या स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) से संबंधित मनोवैज्ञानिक मुद्दों जूझ रहा है, तो उसे किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श करना चाहिए, ।

डॉक्टर स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का निदान कैसे करते हैं?

स्तंभन दोष का निदान आमतौर पर एक मूत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा किया जाता है। डाॅक्टर इसमें आपका चिकित्सकीय, व्यक्तिगत और यौन इतिहास लेंगे। इसके बाद वह आपके यौन अंगों की जांच करेगे, जिसके बाद कुछ रक्त परीक्षण और विशेष परीक्षण होंगे।

चिकित्सा और यौन इतिहास

यहाँ पर डॉक्टर आपको एक प्रश्नावली भरने के लिए कहेंगे। यह उन्हे स्तंभन दोष के कारण का मूल्यांकन करने की अनुमति देता है। आपसे निम्नलिखित प्रश्न पूछे जाएंगे:

• यदि आपको इरेक्शन (कड़ापन) प्राप्त करने या इसे बनाए रखने में कोई समस्या है?

• क्या यह कभी-कभार होता है या नियमित आधार पर आपको प्रभावित करता है?

• क्या यह समय, शामिल व्यक्ति या भावनात्मक तनाव से प्रभावित है?

• क्या सेक्स करने की इच्छा कम हो जाती है?

• आप अपने लिंग की दृढ़ता (कड़ेपन) को कैसे रेट करेंगे?

• आप कब से इस समस्या का सामना कर रहे हैं?

• आप कितनी बार सेक्स करते हैं?

• आप कितनी बार संभोग या स्खलन प्राप्त करने में सक्षम हैं?

• आप अपने साथी या रिश्ते के बारे में कैसे रेट करते हैं? क्या आपके रिश्ते में कोई बदलाव आया है?

• आप सुबह कितनी बार इरेक्शन (कड़ेपन) के साथ उठते हैं?

• आपके जीवन में सामान्य तनाव का स्तर कैसा है? क्या तनाव या चिंता बढ़ी है?

• चोट, सर्जरी या अतीत में किया उपचार का कोई इतिहास?

• शराब, धूम्रपान या नशीली दवाओं के दुरुपयोग का कोई इतिहास?

• दवा के सेवन का कोई इतिहास?

डॉक्टर आपके पार्टनर से आपके रिश्ते के बारे में कुछ सवाल भी पूछ सकते है, और उसके साथ चर्चा कर सकते है कि यह आपकी स्थिति को कैसे प्रभावित कर सकता है।

शारीरिक परिक्षण:

• लिंग की जांच: डॉक्टर आपके लिंग की जाँच करके, उसकी असामान्यताओं जैसे, असामान्य आकार, तंग चमड़ी या छिद्र केअसामान्य स्थान को देखेंगे। लिंग का आकार पेरोनी की बीमारी के कारण प्रभावित होता है। इसमें लिंग इरेक्शन (कड़ेपन) पर घुमावदार हो जाता है। तंग चमड़ी के कारण इरेक्शन की हानि भी हो सकती है।

• डॉक्टर लिंग को छूकर संवेदनशीलता की जांच करते हैं, जोकि तंत्रिका चोट के मामलों में अनुपस्थित हो सकती है।

वृषण (टेस्टिस) की जांच: डॉक्टर टेस्टिस के आकार की भी जाँच करते हैं, जो टेस्टोस्टेरोन की कमी के कारण छोटे हो जाते हैं।

• शरीर की जांच: यह जाँच शरीर में बाल गिरने, स्तन वृद्धि या मांसपेशियों में कमी की जाँच करता है, जोकि टेस्टोस्टेरोन की कमी का संकेत देते हैं।

• हृदय प्रणाली की जांच: डॉक्टर किसी भी संवहनी (वास्क्युलर) कारण की तलाश करने के लिए आपके रक्तचाप (बीपी), दिल की धड़कन की दर, और आपकी कलाई और टखने पर नाड़ी की जांच करेंगे।

रक्त परिक्षण:

रक्त परिक्षण से डायबिटीज, एथेरोस्क्लेरोसिस, क्रोनिक किडनी डीजीज, थायराइड रोग या कम टेस्टोस्टेरोन स्तर जैसी किसी भी अंतर्निहित कारण की जांच की जाती है। इसमें निम्नलिखित परिक्षण किये जाते है:

• टोटल टेस्टोस्टेरोन: यह टेस्टोस्टेरोन के निम्न स्तर को जांचने के लिए किया जाता है। इसके लिए आपको सुबह 10 बजे से पहले खाली पेट खून का नमूना देना होगा। यदि टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया जाता है, तो परिक्षण को कम से कम एक बार और दोहराया जाता है।

• लिपिड प्रोफाइल: टोटल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल-सी, एचडीएल-सी और ट्राइग्लिसराइड स्तर के लिए खाली पेट नमूना दिया जाता है।

• डायबिटीज के लिए फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज या हीमोग्लोबिन A1C की स्क्रीनिंग।

पेनाइल डॉप्लर अल्ट्रासाउंड

यह परीक्षण लिंग की नसों में किसी भी असामान्यता को देखने के लिए किया जाता है। यह परिक्षण, रेडियोलॉजिस्ट द्वारा लिंग के कड़ेपन से पहले और बाद में किया जाता है। लिंग को कड़ा करने के लिए डाॅक्टर आपकों सिल्डेनाफिल टैबलेट या पैपवेरिन इंजेक्शन देंगे। लिंग में कड़ापन विकसित होने के बाद, डॉक्टर उसका परीक्षण करेंगे। यह परिक्षण लिंग में खून के आने और जाने दोनों की जांच करता है।

नोक्टरनल इरेक्शन टेस्ट या एनपीटी: यह परिक्षण ये जांचने के लिए किया जाता है, कि क्या आपको स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का कोई शारीरिक या मनोवैज्ञानिक कारण है। आपको रात में सोते समय अपने लिंग के चारों ओर एक विशेष उपकरण या अंगूठी पहनने के लिए कहा जाएगा। स्वस्थ पुरुषों में रात को सोते समय एक बार कड़ापन होता है, जिससे आप परिक्षण पूरा कर सकते हैं। कड़ेपन की उपस्थिति मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारण की संभावना का सुझाव देता है।

यदि आपको परिक्षण के दौरान इरेक्शन नहीं मिलता है, तो आपको शारीरिक समस्या होने की संभावना अधिक होती है।

इंजेक्शन परिक्षण: इस परीक्षण में डॉक्टर आपके लिंग में एक दवा इंजेक्ट करेंगे या कड़ेपन को प्राप्त करने के लिए लिंग के मुँहाने में एक दवा डालेगे। इसके बाद डॉक्टर जांचेंगे कि आपका लिंग कितनी कड़ा हो जाता है और यह कब तक रहता है।

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का इलाज कैसे किया जाता है?

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का उपचार निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:

अंतर्निहित (अंडरलायिंग) कारण का उपचार

दवाओं के साथ उपचार

उपकरणों के साथ उपचार

सर्जरी के साथ उपचार

1. अंतर्निहित कारण का उपचार: डॉक्टरों द्वारा इलाज के लिए अपनाई गई यह पहली रणनीति है। आपके डॉक्टर यह सुनिश्चित करेंगे कि आपको अंतर्निहित स्थिति के लिए सही उपचार मिल रहा है, जोकि स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) में योगदान देता है या जिसके परिणामस्वरूप यह हो रहा है। इसमे डायबिटीज, रक्तचाप (बीपी), उच्च कोलेस्ट्रॉल और अन्य का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

डॉक्टर उस दवा को या उसकी खुराक को बदल देगें, जो आप में स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) पैदा करने के लिए जिम्मेदार पायी जाती है।

डॉक्टर आपको तनाव, मानसिक और रिश्ते के मुद्दों से निपटने के लिए एक मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास भेज सकते हैं। वह आपको और आपके साथी को आश्वासन भी देंगे, और सिखाएँगे कि स्थिति से बेहतर तरीके से कैसे निपटा जाए ।

2. दवाओं के साथ उपचार:

कई दवाएं हैं जिनका उपयोग किया जा सकता है:

• मौखिक दवाएं: ये दवाएं फॉस्फोडिस्टेरेस अवरोधक हैं, जो लिंग की मांसपेशियों में ढील का कारण बनती हैं। यह में खून को लिंग की मांसपेशियों में प्रवाहित करने की अनुमति देता है जिससे कड़ापन होता है। इन मौखिक दवाओं को कड़ापन के पहले विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। ये दवाएं इस प्रकार हैं-

• सिल्डेनाफिल जो लोकप्रिय रूप से वियाग्रा के नाम से जाना जाता है

• टैडलफिल

• वर्डेनफिल

• अवानफिल

ऊपर बतायी गयी दवाएं स्वचालित रूप से इरेक्शन का परिणाम नहीं देती हैं, और लिंग पर इस तरह के प्रभाव को लाने के लिए यौन उत्तेजना की आवश्यकता होती है। ये दवाएं आपकी सेक्स ड्राइव को बढ़ाने, या उत्तेजना पैदा करने का काम नहीं करती हैं। सामान्य इरेक्शन वाले स्वस्थ लोगों में  इसकी आवश्यकता नहीं होती हैं।

ये दवाएं 60 से 75 प्रतिशत मामलों में कारगर पाई गई हैं।

सावधानी: यह महत्वपूर्ण है कि नाइट्रेट्स के साथ इन दवाओं को न लें, जैसे नाइट्रोग्लीसेरिन जो आम तौर पर एंजाइना के लिए लिया जाता है। नाइट्रेट खून की नसों के फैलाव का कारण बनता है, जो इन दवाओं के साथ लिये जाने पर रक्तचाप (बीपी) में अचानक गिरावट का कारण बन सकते हैं।

यदि आपको निम्न रक्तचाप (लो बीपी), दिल की बीमारी या हृदय की विफलता (हार्ट फेलियर) हैं, या आप बढ़े हुए प्रोस्टेट के उपचार के लिए अल्फा ब्लॉकर्स नामक दवाएं लेते हैं, तो इन दवाओं को लेने से बचना चाहिये। यदि आप किसी भी दवा या हर्बल पूरक का उपयोग करना चाहते हैं, तो डॉक्टर की मंजूरी प्राप्त करने की सलाह दी जाती है।

नाक जमना, सिरदर्द, पीठ दर्द, फ्लशिंग आदि इसके संभावित दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) हो सकते है।

• पेनाइल सेल्प इंजेक्शन या सपॉजिटरी: आप इन दवाओं का भी उपयोग कर सकते हैं, जोकि बिना यौन उत्तेजना की आवश्यकता के लिंग को मजबूत और स्वचालित कड़ापन प्रदान करती हैं। उपयोग की जाने वाली दवा एल्प्रोस्टैडिल है, जिसे इंजेक्शन या सपॉजिटरी के रूप में लिया जा सकता है।

एल्प्रोस्टैडिल इंजेक्शन सीधे लिंग के आधार या साइड पर लिया जाता है। इस दवा को अन्य दवाओं जैसे पैपरेरिन और फेंटोलामाइन के साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि यह अधिक प्रभावी हो सके। इंजेक्शन का प्रभाव आमतौर पर लगभग एक घंटे तक रहता है। इंजेक्शन के कारण आप हल्का दर्द या असुविधा का अनुभव कर सकते हैं। इसके साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव), इंजेक्शन लगाने की जगह से हल्का रक्तस्राव, लंबे समय तक कड़ापन और शायद ही कभी, इंजेक्शन लगाने की जगह पर एक रेशेदार ऊतक का विकास हो सकता है।

अल्प्रोस्टैडिल सपोजिटरी को विकसित करने और इरेक्शन के लिए भी चुना जा सकता है, हालांकि, यह क्रमशः इंजेक्शन यानी 60 बनाम 90 की तुलना में कम पुरुषों में संतोषजनक निर्माण का उत्पादन करने के लिए पाया गया है। दवा की गोली को रीफिल्ड एप्लीकेटर का उपयोग करके मूत्रमार्ग में एक इंच अंदर डाला जाता है। यह लगभग 8 से 10 मिनट में इरेक्शन का कारण बनता है, जो आमतौर पर 30 से 60 मिनट तक रहता है। साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) आपके लिंग में जलन, मूत्रमार्ग में न्यूनतम रक्तस्राव (हल्की ब्लीडिंग) और आपके लिंग के अंदर रेशेदार ऊतक के विकास शामिल हो सकते है।

• टेस्टोस्टेरोन प्रतिस्थापन (रिप्लेसमेंट)। यदि आपके पास टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम है, और स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) को जटिल बना रहा है, तो आपके डॉक्टर आपको टेस्टोस्टेरोन थेरेपी लिख सकते है। यह उम्र से संबंधित या देर से शुरू हाइपोगोनाडिज्म में उपयोगी नहीं पाया गया है। टेस्टोस्टेरोन लेने से उच्च आरबीसी काउंट और मूत्र पारित करने के साथ मुद्दों जैसे, दुष्प्रभाव हो सकते हैं। यह इस बात को भी प्रभावित कर सकता है, कि अन्य दवाएं कैसे काम करती हैं, जिससे गंभीर जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। आपको हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श के बाद ही टेस्टोस्टेरोन लेना चाहिए।

3. उपकरणों के साथ उपचार:

यदि दवाएं आपके लिए मदद या उचित नहीं मानी जाती हैं, तो डॉक्टर वैक्यूम डिवाइस का सुझाव देंगे। डिवाइस, लिंग में खून खींचने के लिए वैक्यूम का उपयोग करके काम करता है जिससे इरेक्शन होता है। डिवाइस में तीन भाग होते हैं:

• प्लास्टिक ट्यूब, जो आपके लिंग को घेरता है

• पंप, जो हवा को ट्यूब से बाहर खींचता है, ट्यूब के अंदर वैक्यूम विकसित करता है, जिससे लिंग में रक्त भरजाता है

• लोचदार रिंग, जिसे ट्यूब को हटाते समय ट्यूब के अंत से लिंग के आधार तक खींचा जाता है। यह लिंग के भीतर खून को रोकता है, और इस प्रकार इरेक्शन को बनाए रखता है। लोचदार अंगूठी को 30 मिनट तक की स्थिति में रखा जा सकता है। संभोग खत्म होते ही अंगूठी को हटाना पड़ता है। सामान्य परिसंचरण को वापस लाने और त्वचा की जलन को रोकने के लिए उस समय के बाद अंगूठी को हटा दें।

आप महसूस कर सकते हैं, कि आपका लिंग ठंडा या सुन्न हो गया है, और उसका रंग बैंगनी हो गया है। आप अपने लिंग पर चोट के निशान भी विकसित कर सकते हैं जो आमतौर पर दर्द रहित होते हैं। वैक्यूम डिवाइस स्खलन को प्रतिबंधित कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर संभोग सुख का अनुभव करने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

4. सर्जरी के साथ उपचार:

स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) के लिए सर्जरी को अंतिम उपाय के रूप में तभी माना जाना चाहिए, जब दवाएं और वैक्यूम डिवाइस विफल हो जाएं।

एक विशेषज्ञ डॉक्टर जिन्हे, यूरोलॉजिस्ट कहा जाता है, स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) के लिए सर्जरी करता है:

• वह कृत्रिम इरेक्शन का उत्पादन करने के लिए एक उपकरण प्रत्यारोपित कर सकता है या,

• लिंग रक्त प्रवाह को बढ़ाने के लिए धमनियों का पुनर्निर्माण करना

लिंग प्रत्यारोपण: ये वे उपकरण हैं जो आपके लिंग के अंदर रखे जाते हैं, जो यौन गतिविधि करने में आपकी मदद करने के लिए, एक कड़े लिंग की तरह कार्य करते हैं। प्रत्यारोपण मूल रूप से दो प्रकार के हैं:

• इन्फ्लेटेबल इम्प्लांट: ये ऐसे प्रत्यारोपण हैं जिन्हें एक पंप का उपयोग करके आवश्यक होने पर आकार में बढ़ाया जा सकता है, जो उन्हें तरल पदार्थ के साथ फुलाता है। पंप को अंडकोश के अंदर रखा जाता है, जोकि जब दबाया जाता है, प्रत्यारोपण के बढ़ने का कारण बनता है जिससे इरेक्शन होता है।

• मैलिएबल प्रत्यारोपण: ये अर्ध कठोर छड़ होती हैं, जो आपके लिंग के अंदर रखी जाती हैं, जो आपके लिंग को हमेशा कड़ा रखती हैं। इन उपकरणों को शरीर के प्रति गठबंधन रखकर छुपाया जाता है, और उन्हें शरीर से दूर झुकाकर यौन गतिविधि के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सर्जरी से रिकवरी में ज्यादा समय नहीं लगता है और सर्जरी के बाद उसी दिन या अगले दिन आपको डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। एक बार जब आप घर पहुँच जाते हैं, आप सर्जरी के 4 से 6 सप्ताह के बाद प्रत्यारोपण का उपयोग शुरू कर सकते है।

सफलता

प्रत्यारोपण की जटिलतायें, खराबी या संक्रमण हो सकता है जो दुर्लभ है (5 प्रतिशत से कम), विशेष रूप से जब एक अनुभवी सर्जन द्वारा किया जाता है।

प्रत्यारोपण 72 प्रतिशत लोगों में 10 साल तक और 90 प्रतिशत लोगों में 5 साल तक रह सकता है।

साथी की संतुष्टि: सभी विकल्पों में सबसे अधिक पाया जाता है जो 95 प्रतिशत से ऊपर है।

धमनी पुनर्निर्माण सर्जरी (Artery reconstruction surgery): यह सर्जरी उन पुरुषों में की जाती है जिनमें लिंग की धमनियों में रुकावटें होती हैं। सर्जरी इन धमनियों की मरम्मत करती है, जिससे स्तंभन दोष का इलाज होता है। युवा पुरुष (30 वर्ष से कम) जिन्हे धमनी रोग के कारण स्तंभन दोष (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) होता है, वह इस प्रकार की सर्जरी के लिए सबसे अच्छे उम्मीदवार होते हैं।

जानिए कैसे आप प्राकृतिक तरीकों से स्तंभन दोष को दूर कर सकते हैं

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