Your browser does not support JavaScript!

मिर्गी (एपिलेप्सी)

This post is also available in: English (English)

मिर्गी क्या है? दौरा क्या है?

मिर्गी दिमाग की एक लम्बे समय तक रहने वाली स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के जीवन में कई बार बिना किसी कारण के दौरे पड़ते हैं। किसी व्यक्ति में मिर्गी को निश्चित करने लिए, इससे पीड़ित व्यक्ति में दो बार बिना किसी कारण के दौरे पड़ने चाहिये।

दौरा, आमतौर पर दिमाग की कोशिकाओं के एक समूह से, थोड़े समय के लिए होने वाला, एक अत्यधिक बिगड़ा हुआ विधुत संवेग है। इससे कई सारी संवेदी (सेन्सरी) और मोटर संबंधी दिक्कते होती हैं।

संवेदी (सेन्सरी) असामान्यता: यह शरीर में कई सारी दिक्कते पैदा कर सकती है जैसे, सूँघने में, स्वाद लेने में और सुनने में समस्या। इससे व्यक्ति सोचने समझने की क्षमता और अपना होश भी खो सकता है।

मोटर असामान्यता: ये असामान्यता माँशपेशियो की टोन और सिकुड़न को प्रभावित करती है। इससे माँशपेशियो में जकड़न, माँशपेशियो पर कम नियंत्रण या माँशपेशियो में तेज गति या मरोड़ हो सकती है।

बिना किसी कारण के पड़ने वाला दौरा: यह एक ऐसा दौरा है, जो बिना किसी ठोस कारण से होता है। ये ठोस कारण थोड़े समय तक चलने वाली स्थिति या हाल ही की स्थिति जो दिमाग को प्रभावित करती है जैसे बुखार। बिना किसी कारण के पड़ने वाला दौरा नसों के तंत्र, शरीर की स्थिति या बीमारी के कारण हो सकता है।

किसी कारण से पड़ने वाला दौरा: यह एक ऐसा दौरा है, जो किसी गंभीर स्थिति के दौरान या उसके एक हफ्ते के भीतर होता है, या फिर किसी बीमारी से जो नसों के तंत्र या शरीर को प्रभावित करती है। यह बुखार, एल्कोहल विड्राल, कुछ प्रकार की दवाओं और शरीर में किसी प्रकार के असंतुलन जैसे ब्लड सुगर की कमी के कारण हो सकता है।

मिर्गी दुनिया भर में सबसे आम न्यूरोलॉजिकल रोगों में से एक है, जो दुनिया में लगभग 5 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है। मिर्गी के लगभग 80 प्रतिशत मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में देखे जाते हैं।

मिर्गी व्यक्ति के जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित कर सकती है, जिसमें सुरक्षा, संबंध, आत्मविश्वास, काम और अन्य शामिल हैं।

मिर्गी से प्रभावित लोगों में समय से पहले मौत का खतरा 3 गुना अधिक होता है

विकलांगता को कम करने और जटिलताओं को रोकने के लिए, जितनी जल्दी हो सके मिर्गी की पहचान और इलाज करना महत्वपूर्ण होता है। ऐसा पाया गया है कि मिर्गी के लगभग 70 प्रतिशत मामलों में, उचित प्रबंधन से दौरे को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

मिर्गी के लक्षण क्या है?

मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति में, दौरे, मुख्य लक्षण होते है।

दौरे विभिन्न प्रकार के होते हैं, जो मोटे तौर पर दो भागों में विभाजित होते हैं, जो इस बात पर निर्भर करता है कि, क्या असामान्य विद्युत गतिविधि दिमाग के किसी एक हिस्से से उत्पन्न हुई है या यह सामान्य है।

दौरे के आधार पर अलग-अलग लोगों को अलग-अलग लक्षणों का अनुभव होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि, दौरा किस प्रकार का है।

विभिन्न प्रकार के दौरे और संबंधित लक्षण नीचे दिए गए हैं:

फोकल या आंशिक दौरे:

ये ऐसा दौरा हैं, जो दिमाग के सिर्फ एक भाग में होने वाली असामान्य विद्युत गतिविधि से उत्पन्न होता हैं। ये दो प्रकार के हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह जागरूकता/ होश को प्रभावित करता है या नहीं।

ए) होश खोने के बिना होने वाला फोकल दौरा: पहले इसे सरल आंशिक दौरे के रूप में जाना जाता था। इस दौरे में मरीज बेहोश नहीं होता है और इसमें निम्नलिखित लक्षण शामिल हो सकते हैं:

• स्वाद लेने, सूँघने, देखने, सुनने, या छूने की भावनाओं में परिवर्तन या धारणा में परिवर्तन।

• अचानक होने वाले मोटर लक्षण जैसे कि हाथ या पैर में अकड़न का या मरोड़।

• संवेदी (सेन्सोरी) लक्षण जैसे झुनझुनी, चक्कर आना और अन्य।

बी) बिगड़ी हुयी जागरूकता के साथ फोकल दौरा: इसे पहले जटिल आंशिक दौरे के रूप में जाना जाता था। इसमें जागरूकता या होश खोना शामिल है। अन्य लक्षणों में शामिल हैं:

• बिना किसी कारण के आसमान में घूरना

• पर्यावरण के प्रति कोई प्रतिक्रिया न देना

• एक ही चीज को बार-बार करना जैसे चबाना, निगलना या हाथ रगड़ना।

इन लक्षणों को गलती से दिमाग की दूसरी स्थितियों जैसा माना जा सकता है, इस प्रकार से इसका सही मूल्यांकन करने की आवश्यकता होती है।

सामान्य दौरे

ये वह दौरे होते हैं जिसमें दिमाग के सभी भाग शामिल होते हैं।

इन्हें छह भागों में वर्गीकृत किया गया है:

ए) एबसेंस दौरा: यह ज्यादातर बच्चों या किशोरों में देखा जाता है। यह वयस्कों में कम होता है। पहले इसे “पेटिट माल दौरा” कहा जाता था। इसमें व्यक्ति खाली जगहों पर घूरना शुरू कर देता है और होंठों का चाटने या आँख झपकने जैसी दोहराने वाली गतिविधियाँ विकसित कर सकता है। ये दौरे समूहों में दिन में कई बार आ सकते हैं और होश खोने का कारण बन सकते हैं। ये दौरे खतरनाक नहीं होते हैं, लेकिन बच्चो के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं।

बी) टॉनिक दौरा: इसमें व्यक्ति की पीठ और अंगों की मांसपेशियों में अचानक अकड़न विकसित हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप कभी-कभी संतुलन बिगड़ सकता है और व्यक्ति जमीन पर गिर सकता है।

सी) एटॉनिक दौरा: इसमें व्यक्ति की मांसपेशियों में नियंत्रण खो जाता है, जिससे व्यक्ति जमीन पर नीचे गिर जाता है। इस प्रकार इसे ड्रॉप सीजर भी कहा जाता है।

डी) क्लोनिक दौरा: इसमें व्यक्ति के चेहरे, सभी अंगों, गर्दन में बार-बार झटके विकसित हो जाते है।

ई) मायोक्लोनिक दौरा: इसमें व्यक्ति के हाथों, चेहरे और पैरों में थोड़ी देर के लिए झटके विकसित हो जाते है।

एफ) टॉनिक-क्लोनिक दौरा: पहले इसे “ग्रैंड माल सीजर” के रूप में जाना जाता था। यह बहुत ही नाटकीय प्रकार के दौरे होते हैं। इससे व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण विकसित होते हैं।

• शरीर का अकड़ना और हिलना

• जीभ का कटना

• बेहोशी

• कभी-कभी मूत्राशय या आंत्र पर नियंत्रण खो जाना

जब्ती के एक एपिसोड के बाद, व्यक्ति दौरे के पड़ने से अनजान रह सकता है, या कई घंटों तक थोड़ा बीमार महसूस कर सकता है।

मिर्गी कितनी आम है? मिर्गी से कितने लोग प्रभावित होते हैं?

मिर्गी दुनिया में लगभग 5 करोड़ लोगों और भारत में लगभग 1 करोड़ लोगों को प्रभावित करने वाली सबसे सामान्य तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) की स्थिति है। यह भारत के ग्रामीण भाग में 2% आबादी को और शहरी भागों में 0.6% आबादी को प्रभावित करता है।

भारत में विशेष रूप से ग्रामीण भागों में मिर्गी की उँची दर संक्रामक कारणों जैसे मलेरिया या न्यूरोकाइस्टिरोसिस, जन्म से संबंधित चोटों या सड़क यातायात की चोटों की अधिक घटनाओं और उचित बुनियादी ढाँचे और देखभाल की कमी के कारण पाई गई है।

मिर्गी की जटिलताओं क्या हो सकती हैं?

दौरे शरीर की चेतना और मांसपेशियों की टोन को प्रभावित कर सकते हैं, और इस प्रकार उन स्थितियों को जन्म दे सकते हैं, जो व्यक्ति और दूसरों के लिए खतरनाक बन जाती हैं।

दौरे से निम्नलिखित समस्यायें हो सकती है:

• गिरना और सिर पर चोट: मांसपेशियों की टोन में बदलाव और दौरे के दौरान जागरूकता में कमी के कारण व्यक्ति जमीन पर गिर सकता है, जिससे सिर में चोट लग सकती है। यह अनुमान लगाया गया है कि गिरने के कारण लगने वाली सिर की चोट के साथ आने वाले लगभग 4% लोगो में यह दौरे के कारण होता हैं।

• सड़क यातायात दुर्घटनाएँ: यह अनुमान लगाया जाता है कि मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति में दुर्घटना होने का जोखिम लगभग 1.1 से 2.2 गुना अधिक होता है। दौरे से होश या नियंत्रण का नुकसान हो सकता है, जिससे मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति और उसके आसपास के लोगों के लिए खतरा हो सकता है।

ड्राइविंग और मिर्गी के बारे में अधिक जानें

• डूबना: मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति के पानी में डूबने से मरने का खतरा 15 से 19 गुना अधिक होता है। यह तब होता है, जब वह पानी में तैर रहा होता है, या स्नान कर रहा होता है, क्योंकि तब पानी में दौरा कभी भी पड़ सकता है।

• भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं: इन लोगों में मनोवैज्ञानिक समस्यायें जैसे चिंता, अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति होने की संभावना अधिक होती है। यह मिर्गी के प्रभाव के कारण हो सकता है जिसमें दवाओं के साइड इफेक्ट भी शामिल हैं।

• गर्भावस्था की जटिलताओं: मिर्गी से ग्रसित माहिलाओं में गर्भवती होने की संभावना आम महिलाओं की तरह ही होती है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान पड़ने वाले दौरे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, मिरगी की कुछ विशेष दवाएं भी बच्चे में जन्म दोष का खतरा बढ़ाती हैं।

हालांकि, मिर्गी से ग्रसित ज्यादातर महिलायें सुरक्षित गर्भ धारण कर सकती है और स्वस्थ बच्चों को जन्म दे सकती हैं। उन्हें गर्भवती होने से पहले अपने डॉक्टरों से परामर्श करना चाहिये। गर्भावस्था के दौरान दवाओं के इस्तेमाल के साथ-साध सावधानीपूर्वक निगरानी करने की आवश्यकता होती है।

• स्टेटस एपिलेप्टिकस: यह एक गंभीर और कभी-कभी इलाज न कर पाने वाली स्थिति होती है, जिसे अगर बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो लगभग 20% लोगों की मृत्यु हो सकती है। एक व्यक्ति जब 5 मिनट से अधिक समय तक लगातार दौरे की स्थिति में रहता है, या वह बीच में होश में आये बिना दौरों का अनुभव करता है, तो व्यक्ति को मिर्गी के दौरे का विकास होता है। यह एक चिकित्सकीय (मेडिकल) इमरजेंसी है, जहां 80% लोग जो दौरा शुरू होने के 30 मिनट के भीतर दवा प्राप्त करते हैं, उनमे दौरा पड़ना बंद हो जाता है।

• मिर्गी में अचानक मौत: मिर्गी के दौरान लोगों की अचानक मौत शायद ही कभी होती है। सही कारण अभी तक पता नहीं चला पाया है, लेकिन इसे हाइपोवेंटिलेशन या कार्डियक अरिदमिया के कारण हुआ माना जाता है। मिर्गी से पीड़ित लगभग 1000 में से 1 व्यक्ति की हर साल मौत हो जाती है। इसको संभवतः दी गयी दवाओं के न लेने से या न संभलने वाले दौरे से संबंधित माना जाता है।

मिर्गी के कारण क्या हैं?

मिर्गी विभिन्न स्थितियों के कारण हो सकती है। हालांकि, लगभग 50% लोगों में मिर्गी का कारण पता नहीं चल पाता है।

दिमाग की कोई भी स्थिति जो असामान्य विद्युत गतिविधि के विकास का कारण बनती है, उससे मिर्गी का दौरा पड़ सकता है।

निम्नलिखित स्थितियां हैं जो मिर्गी का कारण बन सकती हैं:

आनुवांशिक कारक: आनुवंशिक कारक मिर्गी के कुछ रूपों में भूमिका निभाते हैं। परिवार के किसी करीबी सदस्य जैसे कि माता-पिता जिनको मिर्गी है, उनमें मिर्गी का खतरा 2 से 5 गुना बढ़ जाता है

कुछ लोगों में दौरे के लिए आनुवंशिकी भी भूमिका निभाती है।

जेनेटिक कारणों में चैनलोपैथी, ग्लूकोज ट्रांसपोर्टर टाइप 1 की कमी जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

संरचनात्मक परिवर्तन: दिमाग की बनावट में परिवर्तन और उसके कुछ क्षेत्रों में चोट मिर्गी का कारण हो सकती है। मिर्गी के पहचाने जाने वाले कारणों में हिप्पोकैम्पल स्केलेरोसिस, कॉर्टिकल विकृतियां, ट्यूबरल स्केलेरोसिस, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस आदि परिवर्तन शामिल हैं।

प्रसवकालीन चोट: गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के तुरंत बाद या जन्म के तुरंत बाद बच्चे का दिमाग कम खून की आपूर्ति, खराब पोषण या संक्रमण जैसे कारणों के प्रति संवेदनशील होता है, जो मिर्गी के विकास के परिणामस्वरूप क्षति और स्थायी निशान पैदा कर सकता है।

संक्रमण: मस्तिष्क और आसपास की संरचनाओं के संक्रमण के परिणामस्वरूप दौरे पड़ सकते हैं। ये संक्रमण न्यूरोकाइस्टिसरकोसिस, तपेदिक, इंसेफेलाइटिस, मेनिन्जाइटिस, सेरेब्रल मलेरिया, एचआईवी, सेरेब्रल टोक्सोप्लाज़मोसिज़, सबस्यूट स्केलेरोसिंग पैनेंसफेलाइटिस हो सकते हैं। एनसीसी बचपन में अधिग्रहित मिर्गी का सबसे आम कारण है

स्ट्रोक: 35 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में मिर्गी के सबसे सामान्य कारणों में से एक है।

ट्यूमर: ट्यूमर दिमाग की विद्युत गतिविधि में रूकावट पैदा कर सकते है, जिसके कारण दौरा पड़ता है। ट्यूमर से पीड़ित ज्यादातर लोगों में दौरा मुख्य लक्षण होता है।

सिर की चोट: सिर की चोट से दिमाग में नुकसान हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप मिर्गी का विकास हो सकता है। यह सड़क यातायात दुर्घटनाओं, गिरने या हमले और अन्य के मामलों में देखा जा सकता है।

ऑटोइम्यून स्थितियों के कारण मस्तिष्क की सूजन: ऑटोइम्यून स्थितियों जैसे वोल्टे-गेटेड पोटेशियम चैनल एंटीबॉडी एन्सेफलाइटिस और एन-मिथाइल-डी-एस्पेरेट रिसेप्टर एंटीबॉडी इंसेफेलाइटिस और अन्य से मिर्गी हो सकती हैं।

दिमाग का मेटाबोलिक विकार: पाचन में बदलाव दिमागे के कामकाज में दखल दे सकता है, जिससे मिर्गी होती है। ये स्थितियां ग्लूकोज ट्रांसपोर्टर टाइप 1 की कमी, पाइरिडोक्सिन की कमी हो सकती हैं।

अज्ञात कारण: ये ऐसे मामले हैं जिनमें मिर्गी का कोई कारण नहीं पहचाना जा सकता है। इन्हे मिर्गी के 50% मामलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

मिर्गी के जोखिम कारक क्या हैं?

ऐसी कुछ स्थितियां हैं जो मिर्गी के विकास के जोखिम से जुड़ी हैं और किसी व्यक्ति में मिर्गी होने के खतरे को बढ़ती हैं। ये इस प्रकार हैं।

सिर का आघात: सिर की चोट के साथ मिर्गी के विकसित होने का खतरा 20 से 30 गुना तक बढ़ जाता है। आघात (ट्रामा) के बाद मिर्गी के विकास का खतरा आघात (ट्रामा) की डिग्री पर निर्भर करता हैचोट लगने के 10 साल बाद भी मिर्गी विकसित होने का खतरा बना रहता है।

स्ट्रोक: स्ट्रोक के एक मरीज में मिर्गी के विकसित होने का खतरा 20 गुना बढ़ जाता है। यह अनुमान है कि स्ट्रोक के बाद लगभग 3 से 30% लोगो को मिर्गी का विकास होता है।

अपक्षयी (डीजिनेरेटिव) बदलाव: दिमाग के अपक्षयी (डीजिनेरेटिव) बदलाव जैसे अल्जाइमर मिर्गी होने के जोखिम को 10 गुना बढ़ा देता है।

केंद्रीय तंत्रिका तंत्र संक्रमण जैसे कि न्यूरोकाइस्टिरोसिस, स्थानिक क्षेत्रों में मिर्गी के 10% मामलों के लिए जिम्मेदार है। एनसीसी को भारत में प्रति 1000 लोगों में 1 में मिर्गी होने का कारण माना जाता है।

जन्म के समय होने वाला दिमागी नुकसान जैसे सेरेब्रल पाल्सी मिर्गी होने के जोखिम से जुड़ा हुआ है।

न्यूरोक्यूटेनियस सिंड्रोम जैसी दिमागी स्थिति में स्टर्गे-वेबर सिंड्रोम, न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस, ट्यूबरल स्केलेरोसिस शामिल हैं।

मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति में दौरे पड़ने के कुछ ऐसे कारक हैं, जो इसके जोखिम को बढ़ाते हैं:

• शराब और ड्रग्स: शराब या सीएनएस उत्तेजक दवाएं जैसे कोकीन।

• शराब और कुछ दवाओं जैसे बेंज़ोडायज़ेपींस, और एंटी-इलेप्टिक्स को छोड़ने से।

• चमकती रोशनी, तेजी से टीवी या वीडियो स्क्रीन पर चमकदार छवियों को बदलने जैसे फोटो उत्तेजना।

• नींद की कमी

• बुखार

• औक्सीजन की कमी

• शरीर में यूरिया का बढ़ना

• माइग्रेन (Migralepsy)

जब कोई व्यक्ति या उसका कोई जानने वाला दौरे का अनुभव करता है, तो उसे डॉक्टर से तुरंत परामर्श करना चाहिए। यह आने वाली गंभीर बीमारी का संकेत दे सकती है, जिसमें तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है जैसे कि स्ट्रोक, संक्रमण या मेटाबोलाइट असंतुलन। ऐसी मिर्गी जिसका इलाज चल रहा हो, उसमें दौरे का विकास स्थिति के बिगड़ने, अपर्याप्त उपचार या गैर अनुपालन का संकेत हो सकता है।

मिर्गी का निदान कैसे किया जाता है?

मिर्गी की पहचान के लिए, डॉक्टर लक्षणों की समीक्षा करेंगे और कुछ परीक्षण करेंगे। डॉक्टर यह निश्चित करेंगे कि क्या घटना एक दौरा थी या नहीं। डॉक्टर ऐसे मामलों को भी जानने की कोशिश करेंगे जिनसे दौरा पड़ सकता है। मिर्गी के मामले में वह कारण जानने की कोशिश करेंगे और आगे उचित कदम उठायेंगे।

डॉक्टर निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुये, मिर्गी और दौरे के लिए एक व्यक्ति का मूल्यांकन करेंगे:

1. चिकित्सकीय इतिहास: डॉक्टर निम्नलिखित चीजों को ध्यान में रखकर मरीज के चिकित्सकीय इतिहास की जानकारी लेंगे:

• चश्मदीद गवाह

• दौरे की शुरुआत से पहले रोगी की स्थिति, जिसमें हाल ही में शुरू हुई या बंद की गई दवा, शराब या अल्कोहल का उपयोग, नींद या इसकी कमी, बुखार का इतिहास, हाल ही में सिरदर्द, या फोकल न्यूरोलॉजिक लक्षणों के बारे में जानकारी शामिल है।

• आभा की उपस्थिति या कथित चेतावनी जैसे सूँघने में स्पष्ट बदलाव, रोशनी की चमक, मिचली या डेजा-वु की स्थिति।

• दौरे की गतिविधि के प्रकार और शुरुआत: दौरे को निम्नलिखित प्रकारों में अलग करना जैसे, चेतना या जागरूकता की हानि के बिना का दौरा।

2. शारीरिक परीक्षण

एक चिकित्सक व्यवहार, जागरूकता, मानसिक कार्यप्रणाली, मोटर क्षमता का आकलन करने के लिए एक सामान्य शारीरिक परीक्षण और केंद्रित न्यूरोलॉजिकल परीक्षण करेगा।

मिर्गी से पीड़ित व्यक्ति में शारीरिक परीक्षण में अक्सर कोई असामान्यता नहीं होती है।

3. खून की जाँचे: मिर्गी के नियमित मामलों में बुनियादी प्रयोगशाला परीक्षण किए जाएंगे, व्यक्तियों की हालत और शारीरिक परीक्षण परिणामों के आधार पर अतिरिक्त परीक्षण किए जाएंगे। ये संक्रमण, मेटाबोलिक या विषाक्त कारणों की जाँच के लिए किये जाँयेगे।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ इमरजेंसी चिकित्सकों ने न्यूनतम रूटीन प्रयोगशाला परीक्षणों की सिफारिश की है जो इस प्रकार हैं:

▪ ब्लड ग्लूकोज और सीरम सोडियम: यह ऐसे सभी रोगियों में किया जाता है, जो पहली बार दौरे का अनुभव करते हैं, जिसमें स्थिति दौरे के बाद सामान्य आधार रेखा पर लौट आई है।

▪ सीरम कैल्शियम, मैग्नीशियम, और फॉस्फेट

▪ गर्भावस्था परीक्षण: गर्भदारण की उम्र की सभी महिलाओं में किया जाता है

▪ लंबर पंचर: यह बुखार से पीड़ित रोगियों में मस्तिष्कमेरु द्रव (CSF) (या केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के संक्रमण के अन्य संकेतों और लक्षणों के साथ) या इम्यूनोकम्प्रेस्ड अवस्था की जांच करने के लिए किया जाता है। इसको एमआरआई या सीटी ब्रेन के बाद ही किया जाना चाहिये।

CBC: WBC काउंट बढ़ना या घटना, संक्रमण का सुझाव दे सकता है।

क्लिनिकल तस्वीर जैसे कि मेटाबोलिक गड़बड़ी या नशा के संदिग्ध मामलों के आधार पर अतिरिक्त प्रयोगशाला परीक्षणों की सिफारिश की जाएगी,

अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी दिशानिर्देशों ने बिना किसी कारण के पड़ने वाले दौरों में ईईजी और इमेजिंग परीक्षणों को नियमित रूप से किए जाने की सिफारिश की है:

4. इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (ईईजी): मिर्गी के मूल्यांकन में एक अनिवार्य परीक्षण है। यह परीक्षण खोपड़ी पर कई सारे छोटे इलेक्ट्रोड लगाकर दिमाग की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है।

यह एक आसान और सस्ता परीक्षण है जो असामान्य विद्युत गतिविधि दिखा सकता है जिसके परिणामस्वरूप दौरा पड़ता है।

मिर्गी के पहचान और प्रबंधन में इसकी निम्नलिखित भूमिका है:

पहचान की पुष्टि करने के लिए

दौरे के प्रकार का वर्णन करने के लिए

होने वाले दौरे के जोखिम का निर्धारण करने के लिए

चिकित्सा उपचार की योजना और मार्गदर्शन करने के लिए

यह परीक्षण अस्पताल या न्यूरोलॉजिस्ट के क्लिनिक में किया जा सकता है। आमतौर पर परीक्षण में लगभग एक घंटा लगता है। परीक्षण के दौरान चिकित्सक विद्युत आवेगों के साथ व्यक्तियों की गतिविधि को भी रिकॉर्ड कर सकता है जिसे वीडियो ईईजी कहा जाता है।

वयस्कों में एक सामान्य ईईजी दिमाग के दोनों हिस्सों पर मुख्य रूप से अल्फा और बीटा तरंगों को समानता के साथ दिखाता है।

एक असामान्य ईईजी विद्युत गतिविधि के अचानक बढ़ने या धीमा होने के साथ दिमाग के दो भागों में विद्युत गतिविधि के पैटर्न में अंतर दिखाएगा।

मिर्गी का प्रकार असामान्य विद्युत गतिविधि के स्थान, शुरुआत और पैटर्न से निर्धारित होता है।

इंटरिक्टल अवधि में पहला ईईजी परिणाम मिर्गी के लगभग 50% मामलों में सामान्य होता हैं। हालांकि, ये रोगी बाद के ईईजीएस में असामान्य परिणाम दिखाते हैं।

ईईजी के बारे में अधिक जानें

5. इमेजिंग परीक्षण: एमआरआई और सीटी स्कैन दो ऐसे इमेजिंग परीक्षण हैं जो आमतौर पर मिर्गी के मूल्यांकन में किए जाते हैं।

• ये मिर्गी के किसी भी संरचनात्मक कारणों जैसे कि सिस्टीकोर्सोसिस, तपेदिक, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, मेनिन्जाइटिस और अन्य को देखने के लिए किये जाते है।

• ये परीक्षण मिर्गी के लगभग 10% मामलों में पासिटिव रिजल्ट दिखाते हैं।

• दौरे के दोबारा होने के जोखिम का सुझाव देने में भूमिका निभा सकता है।

आपातकालीन स्थिति में, विशेष रूप से पर सीटी स्कैन को असामान्य न्यूरोलॉजिकल परीक्षण या दौरे के मामले में पसंद किया जाता है ।

गैर-आपातकालीन स्थिति में कोन्ट्रास्ट के साथ या उसके बिना की गयी एमआरआई को सीटी से बेहतर माना जाता है।

अन्य कम इस्तेमाल होने वाले इमेजिंग परीक्षण हो सकते हैं:

• फंक्शनल एमआरआई (fMRI)

• पोजीट्रान एमिसन टोमोग्राफी (पीईटी)

• सिंगल फोटॉन एमिसन कम्प्यूटराईज्ड टोमोग्राफी (SPECT)

कुछ नई और अतिरिक्त तकनीकें हैं जिनका उपयोग उन बिंदुओं पर किया जा सकता है जहां से दिमाग में दौरे शुरू होते हैं:

• स्टैटिस्टिकल पैरामीट्रिक मैपिंग (एसपीएम): दौरे के समय बढ़े हुए मेटाबोलिस्म के साथ दिमाग के हिस्से की तुलना सामान्य दिमाग के साथ करता है।

• करी विश्लेषण: असामान्यता दिखाने के लिए दिमाग के एमआरआई पर ईईजी डेटा को प्रोजेक्ट करता है।

• मैग्नेटोएन्सेफालोग्राफी (एमईजी): दिमाग द्वारा पैदा हुये चुंबकीय क्षेत्रों का उपयोग करता है ताकि दौरे की शुरुआत के असामान्य क्षेत्रों की पहचान की जा सके।

जब्ती के प्रकार का सटीक निदान स्थापित करना और यह जानना कि बरामदगी कहाँ से है

TOP HEALTH NEWS & RESEARCH

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

A single targeted dose of radiotherapy could be as effective at treating breast cancer as a full course, a long-term…

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

The loss of smell that can accompany coronavirus is unique and different from that experienced by someone with a bad…

Lancet Editor Spills the Beans

Lancet Editor Spills the Beans

Editors of The Lancet and the New England Journal of Medicine: Pharmaceutical Companies are so Financially Powerful They Pressure us…

मदर एंड चाइल्ड

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर अवधि क्या है? एक प्रसवोत्तर अवधि एक एैसा समय अंतराल है, जिसमें मां बच्चे को जन्म देने के बाद…

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर या स्तनपान आहार क्या है? पोस्टपार्टम डाइट वह डाइट है, जो मां को एक बार बच्चे के जन्म के…

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाने और बचने वाले खाद्य पदार्थों की सूची गर्भ धारण करने के बाद, बच्चे…

मन और मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का निदान किया जाता है? नैदानिक इतिहास: डॉक्टर आम तौर पर लक्षणों का विस्तृत इतिहास…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का इलाज किया जाता है? सामान्यीकृत चिंता विकार का उपचार लक्षणों की गंभीरता और जीवन…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है? चिंता, किसी ऐसी चीज के बारे में परेशानी या घबराहट की भावना है, जो हो…