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इलेक्ट्रोएंसेफलोग्राफी (ईईजी)

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इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी) क्या है?

ई.ई.जी एक ऐसी जाँच है, जिसमें दिमाग की कोशिकाओं की विधुतीय गतिविधि (electrical activity) का आंकलन करके दिमाग की काम करने की प्रक्रिया को जांचा जाता है। ये कोशिकाएं जिन्हें न्युरोन कहा जाता है, विधुतीय संवेगों (electrical impulses) द्वारा एक दूसरे के साथ सम्पर्क स्थापित करती हैं। ईईजी इन विधुतीय संवेगों को सिर के ऊपर लगी हुयी धातु की कई डिस्क की मदद से पकड़ता है। कम्प्यूटर इन विधुतीय संवेगों को बढ़ाकर इसका विश्लेषण करता है, तथा तेज उतार-चढ़ाव के साथ लहरदार रेखाओं के रूप में इसे स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है।

मस्तिष्क की कोशिकाओं की सामान्य गतिविधि से कई तरह के विशेष नमूने (पैटर्न) बनते हैं। किसी भी प्रकार का असामान्य नमूना (पैटर्न) असामान्य विधुतीय गतिविधि को दर्शाता है, जिससे रोग की पहचान करने में मदद मिलती है।

ई.ई.जी का इस्तेमाल आमतौर पर मिर्गी या दौरे संबंधी विकार की पहचान या आंकलन के लिये किया जाता है। हाँलांकि, यह दिमाग की अन्य स्थितियों में भी सहायक होता है।

EEG

यह किस लिये किया जाता है? इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी) का उपयोग क्या है?

ई.ई.जी दिमाग की कोशिकाओं के आरपार जाने वाली विधुतीय गतिविधि पर नजर रखकर दिमाग की गतिविधि के आंकलन में मदद करती है। ईईजी दिमाग को मांपने वाली तकनीकियों जैसे सीटी (CT) और एमआरआई (MRI) में इजाफे का काम करती हैं। यह जाँच तब काफी कारगर मानी जाती है, जब अन्य जाँचों द्वारा दिमाग की बनावट में कोई कमी नहीं पायी जाती है।

ई.ई.जी इसके अलावा, दिमाग के कामकाज करने की प्रक्रिया को परखने का काम करती है। इस प्रकार, ई.ई.जी मिर्गी या दौरे संबंधी विकार की पहचान और आंकलन में विशेष रुप से मददगार होती है।

epilespy types 1

अन्य परिस्थितियाँ जहाँ ई.ई.जी मददगार साबित हो सकती हैं, वह इस प्रकार हैं

• मस्तिष्क विक्रति (इन्सिफेलोपैथी): कई कारणों से दिमाग का सही से काम न करना।

• इंसेफेलाइटिस: दिमाग की सूजन।

• दिमाग में गाँठ (ट्युमर)

• सिर की चोट से दिमाग को होने वाला नुकसान।

• स्ट्रोक: नाड़ी संबंधी (वैस्क्युलर) समस्याओं से दिमाग की कोशिकाओं को होने वाला नुकसान।

• नींद संबंधी विकार

• ब्रेन डेथ: इसका उपयोग कोमा में रहने वाले व्यक्ति में ब्रेन डेथ को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

• सर्जरी के दौरान: एक व्यक्ति में बेहोशी के एक सही स्तर को बनाये रखने के लिए ई.ई.जी द्वारा लगातार निगरानी रखी जाती है।

• रोग के लक्षणों के समझने के लिए: दौरा पड़ने के बाद की स्थिति को समक्षने के लिए यह काफी मददगार साबित हो सकता है। एक असामान्य ई.ई.जी, वयस्को और बच्चों में दौरे के दुबारा होने के खतरे को दर्शाता है, विशेष रूप से तब जब समस्या मिर्गी से संबन्धित होती है। अनुपचारित मरीजों में यदि ई.ई.जी असामान्य होती है तो दौरे के बार-बार होने का खतरा 1.54 प्रतिशत अधिक होता है।

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) कैसे की जाती है? इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) जाँच के दौरान क्या होता है?

ई.ई.जी आमतौर पर अस्पताल या क्लिनिक में ई.ई.जी टैकनोलजिस्ट द्वारा की जाती है। ई.ई.जी स्नायु-विशेषज्ञ (न्यूरोलजिस्ट) द्वारा पढ़ी जाती है, जोकि नसों से संबंधित बीमारी को पहचानने और उसका इलाज करने में महारत हासिल करने वाले एक चिकित्सक होते है।

ई.ई.जी जांच मरीजों द्वारा अच्छी तरह से स्वीकार की जाती है, तथा मरीज को परिक्षण के दौरान कोई दर्द या परेशानी महसूस नहीं होती है। जांच पूरी होने में आमतौर पर 45 से 60 मिनट का समय लगता है। कभी- कभी इसमें अधिक समय भी लग सकता है, क्योंकि इस जाँच के दौरान मरीज को सोने की आवश्यकता पड़ती है। इस जाँच को निम्नलिखित चरणों में बाँटा जा सकता है:

1. सिर पर इलेक्ट्रोड लगाना: जाँच की शुरूआत में तकनीशियन एक विशेष पेस्ट का उपयोग करके सिर पर इलेक्ट्रोड चिपकाते हैं। कभी-कभी सिर पर इलेक्ट्रोड चिपकाने के बजाय मरीज को एक विशेष प्रकार की इलेक्ट्रोड लगी हुयी टोपी को पहनने के लिए दी जाती है। ये इलेक्ट्रोड कई तारों द्वारा कम्प्यूटर से जुड़े होते हैं।

2. मरीज की स्थिति (पोजिसन): इलेक्ट्रोड लगाने के बाद मरीज को बेड या कुर्सी पर लेटने तथा सीधा रहते हुये आराम करने के लिए बोला जाता है, जिससे की जांच शुरू की जा सके।

3. कुछ क्रिया-कलाप करना: जाँच के दौरान मरीज को अलग-अलग समय पर कुछ क्रियाएं करने के लिए कहा जाता है ,जैसे की आँख खोलना और बंद करना, कुछ सामान्य गणना करना, पैराग्राफ पढ़ना, चमकती रोशनी की ओर देखना या तेज और गहरी सांस लेना।

4. नींद के दौरान इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) करना: कुछ मामलों में चिकित्सक मरीज में नींद को लाने के लिए नींद की दवाई देते है, और नींद के दौरान दिमाग की गतिविधि पर नजर रखते है। इस जाँच में समय लगता है। कुछ जाँचों में कुछ घंटो या पूरी रात की रिकार्डींग की आवश्यकता पड़ सकती है।

sleep-induced-EEG

5. वीडियो इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी): इस प्रकार की ई.ई.जी में चिकित्सक कैमरे की मदद से शरीर की हलचल पर तथा ई.ई.जी की मदद से दिमाग की गतिविधि को रिकार्ड करते हैं। दिमाग की गतिविधि, प्रदर्शन और स्थिति को अच्छी तरह से समक्षने के लिए वह दोनों चीजों का आंकलन करते हैं।

6. एंबुलेटरी इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी): इस प्रकार की ई.ई.जी में, इलेक्ट्रोड लगाने के बाद मरीज को ईईजी रिकार्डर के साथ घर जाने के लिए कहा जाता है। मरीज को इसे कई दिनों तक पहनने के लिए कहा जाता है, जिससे की विभिन्न कार्यो को करने के दौरान दिमाग की गतिविधि रिकार्ड की जा सके। इससे दौरों को रिकार्ड करने की संभावना बढ़ जाती है। हाँलांकि, यह ई.ई.जी मिर्गी के दौरे या अन्य दौरे में अंतर करने के लिए अस्पताल में की जाने वाली पारंपरिक ई.ई.जी से कम कारगर होती है।

जाँच के बाद

ई.ई.जी तकनीशियन जांच के बाद इलेक्ट्रोड या इलेक्ट्रोड लगी हुयी टोपी को हटा देते हैं, और मरीज बिना किसी दुष्परिणाम के घर जा सकता है। वह अपनी नियमित दिनचर्या को जारी रख सकता है। यदि मरीज को जाँच के दौरान नींद की दवाई दी गयी है, तो उसे पूरे दिन गाड़ी न चलाने या बड़ी मशीनों को न चलाने के लिये कहा जाता है।

क्या इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) करने की कोई सावधानी या तैयारी होती है?

कैफीन: व्यक्ति को जाँच के दिन कैफीन मिली किसी भी चीज का सेवन करने से परहेज करना चाहिये। कैफीन का सेवन करने से जाँच के परिणाम पर असर पड़ सकता है। कैफीन मिले पदार्थ जैसे कि काॅफी, चोकलेट, कोला और ऊर्जा प्रदान करने वाले पेय का सेवन नहीं करना चाहिये।

दवाईयाँ: व्यक्ति को केवल लिखी गई दवाई ही लेनी चाहिये, जब तक की दूसरी दवाई डाक्टर द्वारा न बतायी जाये।

बालों में लगाने वाले पदार्थों से बचें: जाँच के दिन या एक रात पहले व्यक्ति को अपना सिर अच्छी तरह से धोना चाहिये। उनकों कंडीशनर, हेयर क्रीम, स्टाइलिंग जैल या स्प्रे के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिये। बालों में लगाने वाले पदार्थ सिर के चिपकने वाले भाग पर असर डाल सकते हैं, जोकि इलेक्ट्रोड को पकड़कर रखते हैं।

नींद के निर्देश: ई.ई.जी से पहले चिकिसक आपको कम नींद या नींद न लेने के लिए कह सकते है।

क्या इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) के कोई दुष्प्रभाव या नुकसान है?

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) किसी भी नुकसान के बिना सुरक्षित है। ई.ई.जी जाँच केवल दिमाग की विधुतीय गतिविधि (electrical activity) को मापता है। यह आपके दिमाग की विधुतीय गतिविधि में कोई दखल नहीं देता है, तथा दिमाग के अंदर विधुत संवेग (electrical impulses) को नहीं डालता है। यह अपनें आप में दौरे को प्रेरित नहीं करता है, हाँलांकि कुछ क्रियाकलापों को रोगी द्वारा करने के लिए कहा जा सकता है जिससे दौरा पड़ सकता है।

ई.ई.जी के दौरान, एक चिपकने वाने पेस्ट का उपयोग किया जाता है, जोकि आपके बालों में चिपक सकता है, जिसमें जाँच के बाद आपको सिर धोने की आवश्कता पड़ सकती है। कभी-कभी जब व्यक्ति को जाँच के दौरान तेज सांस लेने के लिए कहा जाता है, तो उन्हें सिर में हल्कापन या उंगलियों में सुन्नता महसूस हो सकती है जोकि कुछ मिनटों के बाद अपने आप ही चली जाती।

यह कैसे काम करता है?

मस्तिष्क को कार्य करने के लिए, न्युरोन्स नामक मस्तिष्क कोशिकाओं को, सूचना का लगातार आदान-प्रदान तथा एक दूसरे के साथ सम्पर्क स्थापित करना होता है। सूचना का यह आदान-प्रदान विधुत संवेगों द्वारा होता है, जोकि इसे न्युरोन्स के सिरों तक ले जाता है जिसे सिनैप्सस कहा जाता है। ये सिनैप्सस विधुत संवेगों के आने-जाने के लिए नकारात्मक तथा सकारात्मक विधुत क्षमता विकसित कर सकते हैं।

विधुतीय धारा का यह प्रवाह ई.ई.जी द्वारा पकड़ा जाता है, जोकि नकारात्मक तथा सकारात्मक विधुत क्षमता के योग रूप में दिमाग के आवरण में उपस्थित हजारों तथा लाखों न्युरोन्स से उत्पन्न होती है। इस प्रकार ई.ई.जी रिकार्डिंग एक निश्चित समय में दिमाग के आवरण के विभिन्न भागों में निरंतर बदलते विधुतीय वोल्टेज क्षेत्रों को दर्शाता है।

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) की बाधायें क्या हो सकती हैं और इसे कैसे दूर किया जा सकता है?

नियमित रुप से की जाने वाली ई.ई.जी में मिर्गी या दौरे के विकार के आंकलन में कमियां पायी जाती हैं।

1. गैर आघात संबंधी निगरानी: पारंपरिक ई.ई.जी आमतौर पर आघात संबंधी घटनाओं (वह समय जब दौरा पड़ रहा होता है) को रिकार्ड नहीं करती है, जिसके लिए मरीज चिकित्सकीय सहायता ले रहा होता है। इसलिए, यह एक अप्रत्यक्ष आंकलन है, जहाँ पर कुछ मामले गैर-स्ट्रोक संबंधित समय में गलत लक्षण या अलग-अलग परिणाम को दर्शाते हैं, जब दिमाग में उम्मीद से कम या कोई असामान्य विधुत गतिविधि नहीं होती है।

लंबे अवधि की इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी) वीडियो: इस वजह से, लंबे अवधि की ई.ई.जी इन मामलों में काफी मददगार साबित हो सकती है। हाँलांकि, लंबे अवधि की ई.ई.जी जाँच महंगी होती है, और हर जगह उपलब्ध नहीं होती। इसलिए इसे निम्नलिखित मामलों में ही इस्तेमाल किया जाता है।

• वह मरीज जिनमें विचित्र कारणों के साथ बार-बार दौरे पड़ते हैं।

• वह मामलें जिनमें सामान्य या नींद की कमी वाली ई.ई.जी किसी भी परिणाम का संकेत नहीं देती।

• वह मरीज जिनमें पर्याप्त इलाज के बावजूद बार-बार दौरे पड़ते हैं, जिनसे दौरे की गलत पहचान और वर्गीकरण का संदेह होता है।

2. पहली इंटरगिकल इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी) का परिणाम: मिरगी से ग्रसित 50 प्रतिशत मरीजों में पहली इंटरगिकल इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) सामान्य पायी गयी है। इस कमी को कई ई.ई.जी करके बेहतर किया जा सकता है, जोकि 90 प्रतिशत मामलों में आसामान्यता को दर्शाती है। हाँलांकि 4 बार से अधिक ई.ई.जी करना ज्यादा मददगार साबित नहीं होता है।

3. समय: ई.ई.जी करने का समय काफी महत्वपूर्ण होता है। सामान्य मिरगी के मामलों में, दोपहर के बजाय सुबह ई.ई.जी करने से रोग की पहचान करने की क्षमता में बेहतरी लायी जा सकती है।

4. नींद से वंचित इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी): ऐसा पाया गया है कि नींद से ई.ई.जी. यदि नींद लेने के बाद की जाये तो वह जुवेनाइल मायोक्लोनिक मिर्गी (JME) के मरीजों में काफी मददगार होती है। क्योंकि, मिर्गी और एपिलेप्टिफॉर्म डिस्चार्ज दोनों के होने की संभावना नींद से उठने के बाद अधिक होती है।

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी.) के परिणामों को कैसे पढ़ा जाता है? इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) में सामान्य दिमाग कैसा दिखता हैं?

इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ई.ई.जी.) को दो एक्सिस ग्राफ (एक्स और वाई एक्सिस ग्राफ) के रूप में देखा जाता है जहां विधुत गतिविधि की निरंतर तरंगों (एक्स अक्ष पर) को समय (वाई अक्ष) के विपरीत दर्ज किए गए तेज उतार-चढ़ाव के रूप में देखा जाता है। समय के इस तरंग पैटर्न को हर्ट्ज के रूप में दिखाया गया है। विधुतीय गतिविधी के बहुत सारे स्वरूप होते हैं जिनको दिमाग की गतिविधि के विभिन्न रूपों के दौरान नोट किया जाता है, उनमें कुछ नीचे दिये गये हैं:

1. अल्फा रिदम: यह लय आमतौर पर 8 से 12 हर्ट्ज के बीच होती है और आँख बंद किये हुये सामान्य व्यक्तियों में देखी जाने वाली यह प्रमुख तरंग पैटर्न होती है। यह 3 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों में देखी जाती है और सिर के पीछे के निचले हिस्से से उठने वाली तरंगों को मुख्यत: ई.ई.जी. पर नोट करती है। अल्फा लय आँख खोलने, दिमागी गतिविधी और सुस्ती आदि क्रियाओं से पूरी तरह से बंद या कम हो जाती है। आमतौर पर अल्फा लय सिर के दोनों हिस्सों पर एक जैसी मात्रा में होती हैं, और जब एक हिस्से में 50 प्रतिशत का अंतर होता है तो इसे असामान्य माना जाता है। सामान्य अल्फा लय के कई प्रकार होते हैं जैसे कि टेम्पोरल अल्फा, एंटीरियर अल्फा तथा पैराडोक्सिकल अल्फा।

2. बीटा फ्रिक्वेसी: जगने के दौरान होने वाली ई.ई.जी का हिस्सा होती है जोकि सिर के टेम्पोरल हिस्से के सामने और बीच वाले भाग में दिखायी देती है। ये आवृत्तियाँ कम स्पाइक्स के साथ 13 हर्ट्ज के ऊपर होती हैं। जब बीटा आवृत्तियाँ में महत्वपूर्ण स्पाइक्स होते हैं और वह सामने के हिस्से में या सामाय वितरण में देखे जाते हैं, तब वह शांत करने वाली दवाओं जैसे बेंज़ोडायजेपाइन या बार्बिटुरेट्स के उपयोग का सुक्षाव देते हैं।

3. थीटा और डेल्टा फ्रिक्वेसी: ये फ्रिक्वेसी अल्फा फ्रिक्वेसी की तुलना में कम रेंज में होती है यानी 8 हर्ट्ज से नीचे। थीटा आवृत्ति में 4 से 7 हर्ट्ज की सीमा होती है जबकि डेल्टा आवृत्ति में 1 से 3 हर्ट्ज की सीमा होती है। सामान्य वयस्क में माथे के नीचे के हिस्से में कभी-कभी थीटा आवृत्तियाँ देखी जा सकती हैं जोकि 60 साल के बाद और अधिक प्रमुख हो जाती है। डेल्टा गतिविधियाँ सामान्य वयस्कों में जागने की अवस्था के दौरान कभी-कभी या नहीं भी देखी जाती हैं। इन आवृत्तियों की मात्रा और शक्ति नींद की गहराई पर निर्भर करती है। ये आवृत्तियों शिशुओं और छोटे बच्चों में अधिक प्रमुख होती हैं जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ कम होती जाती हैं।

4. एमयू रिदम: इन लयों की आवृत्ति रेंज अल्फा तरंगों जैसी होती है जोकि 8 से 12 हर्ट्ज के बीच में रहती है। हालांकि, एमयू लय को सिर के बीच के भाग में देखा जाता है और अल्फा लय के विपरीत यह आंख खोलने या बंद से संबंधित नहीं होती है। एमयू लय को 20 से 40 प्रतिशत सामान्य वयस्कों में देखा जाता है और इसे किसी हलचल, हलचल के बारे में सोच या सोमाटोसेंसरी उत्तेजना में प्रतिक्रिया करते हुये देखा जाता है।

5. लाम्बडा तरंगें (वेव): ये तरंगें ग्रीक अक्षर “लैम्ब्डा (Λ) “के समान दिखाई देती हैं। इन तरंगों को स्वरुप द्वारा पहचाना जा सकता है जोकि मुख्य रुप से सिर के पीछे के निचले हिस्से (occipital region) मे होती है।

वह कौन सी समस्यायें हैं जिन्हें इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राफी (ईईजी) द्वारा पहचाना जा सकता है?

मिरगी के दौरान होने वाला डिस्चार्ज: ये तेज तरंगें या स्पाइक्स होती हैं जो मिर्गी के मरीज़ों में इंटरैक्टल पीरियड (मिरगी के होने की बीच की अवधि) में देखे जाती हैं। कभी-कभी ये उन लोगों में भी देखे जाते हैं जिनको मिरगी का दौरा नहीं पड़ा है लेकिन जिनमें मिर्गी की आनुवंशिक प्रवृत्ति है। ये डिस्चार्ज फोकल या सामान्य हो सकते हैं, जो मिरगी के अनुभव पर निर्भर करता है।

फोकल पाोलिमोर्फिक स्लो एक्टिविटी: जब मस्तिष्क के एक क्षेत्र से डेल्टा (1 से 4 हर्ट्ज) या थीटा (4 से 7 हर्ट्ज) आवृत्तियों की सीमा में एक निरंतर अनियमित गतिविधि देखी जाती है, तो यह स्थानीयकृत मस्तिष्क घाव जैसे रक्तस्राव, रोधगलन, ट्यूमर, या फोड़ा के होने का मजबूत संदेह देते हैं। लगातर फोकल धीमी गतिविधि ऐसे घावों का कम संकेत देती है।

जेनेरलाईज्ड पाोलिमोर्फिक स्लो एक्टिविटी: यह पैटर्न को विषैले, मेटाबोलिक या संक्रामक कारकों के कारण एन्सेफैलोपैथियों के मामलों में ईईजी पर प्राप्त किया जाता है और स्थैतिक एन्सेफैलोपैथी के मामलों में दिमाग को क्षति पहुँचाता है। यहां ईईजी अत्यधिक धीमी गतिविधि के साथ-साथ पृष्ठभूमि की लय में गड़बड़ी को दिखाता है।

इंटरमिटेंट मोनोमोर्फिक स्लो एक्टिविटी: यह पैटर्न सामान्य द्विभाजक लयबद्ध थीटा या डेल्टा तरंगों के अचानक विकास को दर्शाता है। यह आमतौर पर थैलामोकोर्टिकल डिसफंक्शन (thalamocortical dysfunction), ऑब्सट्रक्टिव हाइड्रोसिफ़लस (obstructive hydrocephalus), मेटाबोलिक या टाॅक्सिक विकारों में देखा जाता है।

वोल्टेज की कमी: यह आमतौर पर दिमाग से संबंधित लंबे रोगों में देखा जाता है। सामान्य वोल्टेज की कमी आमतौर पर कार्य में कमी जैसे कि एनोक्सिया के मामलों में या कुछ उम्र बढ़ने के साथ होने वाले रोगों में देखा जाता है। जब ई.ई.जी में विद्युत वोल्टेज दिखायी नही देता है तो यह उपयुक्त क्लिनिकल स्थिति में मस्तिष्क की मृत्यु को दर्शाता है। जब रोग की जगह वाले क्षेत्र में वोल्टेज की कमी को देखा जाता है, तो यह स्थानीयकृत कॉर्टिकल असामान्यता का संकेत देता है जैसे कि क्षय (अट्रोफी), भीतरी चोट (कन्ट्युसन), सिस्ट या एक अतिरिक्त-अक्षीय घाव (एक्स्ट्रा-एक्सियल लीजन) जैसे कि मेनिंगियोमा या अतिरिक्त-अक्षीय हेमेटोमा (एक्स्ट्रा-एक्सियल हेमेटोमा)।

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