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चक्कर आना

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चक्कर आना क्या है?

चक्कर आना एक एैसा शब्द है, जिसका उपयोग कई तरह की भावनाओं को बतलाने के लिए किया जाता है। ये भावनायें विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं, जैसे चलने की भावना, सिर का हल्कापन, चक्कर से डरना, अस्थिरता, संतुलन बिगड़ना, या बेहोशी की भावना।

चक्कर आना एक व्यापक शब्द है जिसे निम्नलिखित में वर्गीकृत किया जा सकता है:

• सिर का चक्कर: अपने चारों और कुछ घूमने का भ्रम। इसे आमतौर पर कमरे का घूमना या कमरे के भीतर खुद के घूमने के रूप में बतलाया गया है। हालांकि, खालीपन में भटकाव की भावना भी सिर का चक्कर का सुझाव दे सकती है।

• सिंकोप के पास: बेहोशी या सिर के हल्केपन की भावना होना।

• असंतुलन: चलते समय अस्थिरता की भावना होना।

• गैर-विशिष्ट चक्कर आना: सेंसरी डिस्आर्डर से जुड़ी चिंता के कारण होने वाली स्थिति।

चक्कर आना अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद विकार का लक्षण है। यह काफी आम है, और अक्सर अपने आप या हल्के उपचार के साथ ठीक हो जाता है।

हालांकि, कभी-कभी यह पहले से मौजूद किसी गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकता है, खासकर जब इसके साथ महत्वपूर्ण लक्षण दिखते है या यह लंबे समय तक रहता है।

क्या चक्कर आने के कोई पहचाने जाने योग्य लक्षण हैं?

चक्कर आने के एक एपिसोड के दौरान, आप नीचे दिये निम्न लक्षणों में से एक या उससे अधिक का अनुभव कर सकते हैं:

• सिर में हल्कापन महसूस होना

• बेहोशी की भावना होना

• अपने चारों ओर चीजों के घूमने की भावना या चीजों के चारों और खुद के घूमने की भावना

• अस्थिर होना

• संतुलन का बिगड़ना

• चक्कर से डरना

लक्षणों के विभिन्न सेट एक अलग कारण का सुझाव दे सकते हैं। ये लक्षण कुछ सहायक संकेतों और लक्षणों के साथ हो सकते हैं, जो आगे चलकर पहले से मौजूद किसी विशेष कारण का संकेत दे सकते हैं।

ये लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं:

• जी मिचलाना

• उल्टी होना

• सिरदर्द होना

• पसीना आना

• कान में आवाज आना

• सुनने में परेशानी होना

• आंखों में असामान्य गतिविधि होना

• देखने में कठिनाई होना

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चक्कर आने के मामले में आपको डॉक्टर से कब परामर्श करना चाहिए?

आम तौर पर, यह भावना अपने आप ही या हल्के प्रबंधन के साथ ठीक हो जाती है। हालांकि, जब लक्षण लंबे समय तक रहते हैं, या अचानक दिखाई देते हैं, या तीव्रता में गंभीर होते हैं, तो आप डॉक्टर से तुरंत परामर्श करें।

यदि आपको चक्कर के साथ निम्नलिखित चेतावनी संकेत और लक्षण दिखायी देते है, तो आप डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:

• सीने में दर्द होना

• सांस लेने में समस्या या कठिनाई होना

• अचानक और तेज सिरदर्द होना

• बेहोशी या चेतना की हानि होना

• दोहरा या धुंधला दिखायी देना

• हाथ या पैरों में सुन्नता या पक्षाघात (पैरालिसिस) की भावना होना

• चेहरे की मांसपेशियों में सुन्नता होना या उनमें ढीलेपन के साथ नीचे लटकने की भावना होना

• दिल की धड़कन अनियमित होना

• बोलने में परेशानी होना या लड़खड़ाकर बोलना

• भ्रम होना

• चलने में कठिनाई होना

• लगातार उल्टी होना

• दौरा पड़ना

• सुनने में परेशानी होना या सुनने की क्षमता खो जाना

ये सभी लक्षण पहले से मौजदू किसी खतरनाक स्वास्थ्य की स्थिति की ओर इशारा कर सकते है, जिसमें समय बर्बाद किये बिना तुरंत उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

निदान (डायग्नोसिस) में देरी से शारीरिक स्वास्थ्य और बिगड़ सकता है, जिससे प्रतिकूल परिणाम सामने आ सकते हैं।

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किसी व्यक्ति को चक्कर क्यों आता है?

चक्कर आना कई कारणों से हो सकता है, और चक्कर आने की आवृत्ति (फ्रिक्वेंसी) और उसकी अवधि डॉक्टर को उसके कारण की पहचान करने मे मदद करते हैं। यह समझने के लिए कि चक्कर क्यों आता है, यह जानना महत्वपूर्ण है कि, शरीर अपना संतुलन बनाए रखने के लिए कैसे काम करता है।

दिमाग को यह समझाने के लिए कि हम कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, या किस दिशा में जा रहें है, या सिर कितना आगे चला गया है, शरीर को तीन जानकारियों की जरूरत होती है।

 

कान

• कान के अंदरुनी हिस्से में कई सारी कनाल होती हैं, जो तरल पदार्थ से भरी होती हैं।

• सिर के हिलाने से इन तरल पदार्थों में होने वाली गति, दिमाग को गति समझने में मदद करता है।

 

संवेदी नसें

ये शरीर की हलचल और स्थिति में परिवर्तन के बारे में दिमाग को संकेत भेजती हैं, जो कानों से उपलब्ध डेटा को इनसे मिलाती है।

 

आँखें

• आंखें एक दृश्य सुराग (विजुअल क्ल्यु) प्रदान करती हैं कि, आपका शरीर अपने आसपास के माहौल के संबंध में कहां है, और किस दिशा में है या यह आगे कैसे बढ़ रहा है।

• आंखें कान मे मौजूद तरल पदार्थ द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार समायोजित और स्थानांतरित होती है, ताकि देखी गई छवि साफ दिख सके।

तीन अलग-अलग स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने के बाद, दिमाग शरीर की वास्तविक स्थिति की व्याख्या करता है, और शरीर को उसी अनुसार कार्य करने के लिए तैयार करता है।

एैसी कोई भी स्थिति जो इन संकेतों के आपस में होने वाली क्रिया को प्रभावित करती है, जो अंदरूनी कान से शुरु होकर दिमाग तक जाती है, चक्कर आने का कारण बन सकती है।

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चक्कर आने के क्या कारण हैं?

चक्कर आना कई अन्य कारणों से हो सकता है, और उनमें से कुछ नीचे बताए गए हैं।

 

I. कान अंदरुनी हिस्से में समस्याओं के कारण होने वाला सिर का चक्कर

कानों से आने वाली झूठी जानकारी जो आंखों से देखी गयी स्थिति से मेल नहीं खाती हैं, मिश्रित संकेत पैदा करती है। इस संकेतों के कारण दिमाग में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, जो सिर का चक्कर की भावना का कारण बन सकती है।

 चक्कर आने के सभी मामलों के लगभग 50% मामले अंदरुनी कान में समस्याओं के कारण होती हैं।

आंतरिक कान की समस्याओं में शामिल हैं:

 

1. बेनाइन पैरोक्सिसमल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी)

यह स्थिति सिर के चक्कर का एक आम कारण है, जो सोते सिर के तेजी से घूमने या सिर की चोट के कारण ट्रिगर हो सकती है।

कारण: यह कान के कैनाल में कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल के जमाव के कारण होता है, और दिमाग इन क्रिस्टल की मौजूदगी के कारण जानकारी का गलत अर्थ निकालता है।

 

2. मेनियर रोग

यह स्थिति सिर का चक्कर पैदा कर सकती है। यह कान में सुनने की क्षमता को नुकसान पहँचा सकती है। यह कान में बजने वाली आवाज के साथ कई घंटों तक चल सकती है।

कारण: इस स्थिति का प्रमुख कारण अंदरुनी कान या कान के कैनाल में अचानक तरल पदार्थ का निर्माण के कारण होता है। इस बीमारी का कोई ज्ञात कारण नहीं है।

 

3. वेस्टिबुलर न्यूराइटिस

वेस्टिबुलर तंत्रिका (नर्व) में सूजन सिर का चक्कर की एक विशाल भावना पैदा कर सकती है, जिसे वेस्टिबुलर न्यूराइटिस कहा जाता है।

 

4. लेब्रिन्थाईटिस

यह तब होता है जब अंदरूनी कान या लेब्रिन्थाईटिस में सूजन होती है, और अचानक सुनने की हानि या सुनने में परेशानी के साथ हो सकती है।

 

II. परिसंचरण की समस्याओं के कारण चक्कर आना/नियर सिंकोप:

नियर सिंकोप

चक्कर आने का यह रूप तब होता है, जब दिमाग में खून के बहाव में कुछ क्षणों के लिए कमी आती है।

आम तौर पर जब आप बैठने की स्थिति से खड़े होने की स्थिति में आते हैं, इस दौरान एक प्रक्रिया दिमाग में खून के निरंतर बहाव को बनाए रखने में मदद करती है। यह दिमाग के लिए खून की नसों को सिकोड़ करके काम करती है। यह ब्लड प्रेशर को बनाये रखती है, जो गुरुत्वाकर्षण के खिलाफ स्थिति में अचानक परिवर्तन का मुकाबला करता है। जब यह रिफ्लेक्स ठीक से काम करने में असफल रहता है, तो यह सिर के हल्केपन या बेहोशी की भावना का कारण बनता है।

यह ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन, वासोवागल सिंड्रोम का कारण माना जाता है। यह कुछ ट्रिगरिंग कारकों के जवाब के कारण भी होता है जैसे:

• गर्भावस्था

• खून की कमी

• निर्जलीकरण (डिहाईड्रेशन)

• कुछ दवाओं का सेवन

 

दिल से संबंधित समस्याएं

कार्डियोमायोपैथी, कार्डियक अरिदमिया, कार्डियक अरेस्ट या स्ट्रोक जैसी कार्डियक समस्याएं, अंदरूनी कान और दिमाग में खून की आपूर्ति में कमी के कारण सिर के चक्कर का कारण बन सकती हैं।

अतिरिक्त लक्षण: चक्कर आना अक्सर छाती में जमाव, छाती में जकड़न, या सांस लेने में कठिनाई जैसे अन्य लक्षणों के साथ होता है।

 

III. सेंसरी और मोटर संतुलन में बाधा जिससे असंतुलन पैदा होता है

डिस्क्विलिब्रिम आमतौर पर सेंसरी इनपुट और मोटर आउटपुट के बीच असंतुलन के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप अस्थिरता और असंतुलन पैदा होता है ।

यह आमतौर पर सेंसरी इनुपट और मुद्रा से संबंधित सजगता के प्रबंधन में उम्र से संबंधित कमी के कारण बड़े वयस्कों में देखा जाता है।

यह अक्सर असमान जमीन, अनजाने माहौल, या खराब रोशनी से शुरू होता है।

सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस एक आम कारण है जो रीढ़ की हड्डी में बदलाव ला सकता है।

 

IV. चक्कर आने के विविध कारण:

1. दवायें

कुछ दवायें, जब ली जाती तो चक्कर का कारण बन सकती है जैसे:

• अवसाद रोधी (एन्टी डिप्रेशेन्ट)

• एंटी-सीजर

• ट्रैंक्विलाइजर

• शामक (सिडेटिव)

• ब्लड प्रेशर की कुछ दवा जो ब्लड प्रेशर को काफी कम कर सकती है।

 

2. मोशन सिकनेस

कार, हवाई जहाज या नाव में यात्रा करते समय दोहराव की गति जी मिचलाना, उल्टी और चक्कर आने की भावना को जन्म दे सकती है, जिसे अक्सर सी-सिकनेस या मोशन सिकनेस कहा जाता है।

यह आमतौर गति के रुक जाने के बाद ठीक हो जाता है।

 

3. माइग्रेन

आमतौर पर बार-बार होने वाला सिरदर्द जो एक घंटे से अधिक समय तक चल सकता है। कुछ लोग माइग्रेन की शुरुआत के दौरान या उससे पहले चक्कर आना और सिर का चक्कर का अनुभव करते हैं, भले ही सिरदर्द प्रमुख न हो।

 

4. कम आयरन या एनीमिया

आयरन की कमी की वजह से शरीर में ऑक्सीजन युक्त खून की आपूर्ति में कमी आ जाती है। इसमें अक्सर बेहोशी, कमजोरी, पीली त्वचा, सीने में दर्द, और सांस की तकलीफ जैसे अन्य लक्षणों के साथ चक्कर आ सकता है।

 

5. न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर

शरीर में न्युरल नेटवर्क से संबंधित कुछ विकार जैसे मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पेरिफेरल न्यूरोपैथी, या पार्किंसंस रोग शरीर के संतुलन के नुकसान के कारण चक्कर आने का कारण बन सकते है।

 

6. लो ब्लड शुगर या हाइपोग्लाइकेमिया

जब खून में ब्लड शुगर एक विशेष स्तर से नीचे गिर जाता है, तो यह थकान या कमजोरी, हल्कापन, मूड स्विंग, पसीना, चिंता आदि जैसे अन्य लक्षणों के साथ चक्कर आने का कारण बन सकता है।

लो ब्लड शुगर निम्न कारणों से हो सकती है:

• डायबिटीज रोगियों में इंसुलिन या अन्य दवा का सेवन

• समय पर भोजन करना या भूखा रहना

• शराब का सेवन करना

 

7. चिंता

चक्कर आना चिंता का सामना कर रहे लोगों में एक आम घटना है। किसी भी व्यक्ति को, किसी भी कारण से होने वाली चिंता या पैनिक अटैक से चक्कर आने का अनुभव हो सकता है। कभी-कभी इसका उल्टा भी हो सकता है, यानि चक्कर आने से पैनिक अटैक भी हो सकता है।

अन्य लक्षण- बेचैनी, चिंता, मूड स्विंग, सांस लेने में परेशानी, एकाग्रता में कठिनाई, नींद की समस्या आदि शामिल हैं।

 

8. तनाव

अतिरिक्त तनाव भी अतिरिक्त हृदय गति और उथले सांस लेने के कारण, एक पैनिक अटैक या चक्कर आने का कारण बन सकता है।

यह डिप्रेसन, दिल की बीमारी या डायबिटीज सहित कई अन्य चिकित्सा स्थितियों का कारण बन सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

• पसीना आना

• तेजी से सांस लेना

• जी मिचलाना

• नींद न आना

• शरीर कांपना

 

9. निर्जलीकरण

शरीर से पानी की अधिक हानि, खासकर जब बाहर का तापमान काफी अधिक होता है, तो शरीर के तापमान में वृद्धि के कारण लोगों को चक्कर आने का अनुभव हो सकता है।

 

10. कार्बन मोनोऑक्साइड

कार्बन मोनोऑक्साइड एक बेहद जहरीली गैस है, जो खून में ऑक्सीजन की जगह ले सकती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे चक्कर आने सहित कई और घातक परिणाम हो सकते हैं, जिसमें मौत भी शामिल है।

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चक्कर आना और उससे जुड़ी स्थितियों का निदान कैसे किया जा सकता है?

जब यह स्थिति एक लंबे समय तक रहती है और नियमित अंतराल में होती है, तो डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण हो जाता है। समय पर निदान, कारण को समझने में मदद कर सकता है और आगे होने वाले किसी नुकसान को रोकने में मदद कर सकता है।

निदान कई कारकों पर निर्भर करता है, उनमें से कुछ नीचे दिये गये हैं।

चक्कर आने का इलाज कैसे किया जा सकता है?

चक्कर आना, अगर अपने आप कम हो जाता है तो किसी भी चिकित्सा सहायता की जरूरत नहीं होती है। लेकिन पहले से मौजूद चिकित्सा स्थिति में उपचार की आवश्यकता हो सकती है। प्रत्येक स्थिति के लिए एक अलग उपचार की आवश्यकता हो सकती है। कोई भी चक्कर आना का इलाज करने का विकल्प चुन सकता है यदि उसे कोई पहले से मौजूद स्थिति नहीं है।

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