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डायबिटीज मेलाइटस

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डायबिटीज मेलाइटस (डायबिटीज) क्या है?

डायबिटीज मेलाइटस, जिसे आमतौर पर डायबिटीज के नाम से जाना जाता है, एक ऐसी स्थिति है जहां इंसुलिन का दोषपूर्ण उत्पादन होता है। जिसके कारण कोशिकायें ऊर्जा उत्पादन के लिए ग्लूकोज का उपयोग नहीं कर पाती हैं। शरीर की कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज का उपयोग न कर पाने से, खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है।

इसे विस्तार से समझने के लिए आपको निम्नलिखित चीजों को जानना होगा:

ग्लूकोज भोजन का मुख्य घटक है, जो शरीर की कोशिकाओं द्वारा ऊर्जा का उत्पादन करने, और अपना कार्य करने के लिए आवश्यक है। ग्लूकोज, चीनी का एक रूप है, जो भोजन खाने के बाद या तो आप से अवशोषित हो जाता है या लिवर में संश्लेषित (synthesized ) होता है।

इंसुलिन पैन्क्रियाज द्वारा उत्पादित हार्मोन है, जो ग्लूकोज को कोशिकाओं में प्रवेश कराकर ऊर्जा उत्पादन करता है।

इंसुलिन के उत्पादन (टाइप I डायबिटीज) या कामकाज (टाइप II डायबिटीज) में कोई भी असामान्यता, शरीर की कोशिकाओं द्वारा ग्लूकोज के उपयोग न कर पाने का परिणाम देता है, जिससे उसका कामकाज प्रभावित होता है। यह खून में उच्च स्तर के ग्लूकोज का परिणाम देता है। ये दोनों स्थितियाँ डायबिटीज के लक्षणों पैदा करती है।

डायबिटीज के प्रकार क्या हैं?

डायबिटीज के दो मुख्य प्रकार हैं: टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज

टाइप 1 डायबिटीज

यह इंसुलिन के न होने या कम उत्पादन के कारण होता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) की इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं (बीटा कोशिकाओं) के नुकसान के कारण होता है। इन लोगों को अपने ब्लड ग्लुकोज के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। यह डायबिटीज के मुख्य रूप से 30 साल से कम उम्र के लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन यह अधिक उम्र के लोगों में भी हो सकता है। यह डायबिटीज का एक कम आम रूप है, जिसमें डायबिटीज के केवल 10 प्रतिशत मामले शामिल हैं।

टाइप 2 डायबिटीज

यह तब होता है, जब पैन्क्रियाज कोशिकाएं ग्लूकोज पैदा करती हैं, लेकिन या तो वह पर्याप्त नहीं होता है या आपकी कोशिकाएं इंसुलिन के लिए प्रतिरोधी हो गई हैं। यह डायबिटीज का सबसे आम रूप है, जो डायबिटीज के 90 प्रतिशत मामलों में पाया जाता है। यह मुख्य रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों में देखा जाता है, हालांकि युवा व्यक्तियों में भी इसे देखा जा सकता है।

डायबिटीज के अन्य रूप हैं, जो या तो कम आम हैं या अस्थायी सेटिंग्स या शर्तों के कारण हो सकते हैं-

जेस्टेशनल डायबिटीज:

डायबिटीज का यह रूप, गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में विकसित होता है, और बच्चे होने के बाद के बाद अपने आप ठीक हो जाता है। यह हार्मोनल परिवर्तन के कारण होता है, जो गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर की कोशिकाओं को ग्लूकोज के लिए प्रतिरोधी बनाते हैं। इन महिलाएं को बाद में टाइप 2 डायबिटीज विकसित होने का खतरा भी बढ़ जाता हैं।

सर्जरी: ऑपरेशन होने के बाद

दवाओं

सिस्टिक फाइब्रोसिस जैसी कुछ बीमारियां

मधुमेह के लक्षण क्या हैं?

Diabetes-information

मधुमेह में आप जिन संकेतो और लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं:

• अत्यधिक प्यास लगना

• अत्यधिक भूख लगना (विशेष रूप से खाने के बाद)

• अत्यधिक पेशाब आना

• मुंह सूखना

• बिना कारण वजन घटना (खूब खाने और भूख महसूस करने के साथ)

• कमजोर और थका हुआ महसूस करना

• धुंधली दृष्टि

• हाथ या पैर में झुनझुनी या सुन्नता होना

• घावों का धीमी गति से भरना

• सूखी और खुजली वाली त्वचा

• बार-बार मूत्र पथ संक्रमण (यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन), या यीस्ट संक्रमण होना, जोकि ज्यादातर महिलाओं में होता है

• पुरुषों में सेक्स ड्राइव, इरेक्टाइल डिसफंक्शन  या मांसपेशियों की ताकत में कमी होना

टाइप 1 डायबिटीज में लक्षण आमतौर पर जल्दी शुरू होकर गंभीर हो जाते हैं। हालांकि, टाइप 2 डायबिटीज में लक्षण समय की अवधि में धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जो इतने हल्के होते हैं कि, जिन पर किसी का ध्यान नहीं जाता है। टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित कई लोगों को लक्षणों का अनुभव नहीं होता है। टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों को इस बात का पता खून की जाँच में चलता है, जो या तो स्वास्थ्य की जांच या किसी अन्य हालत के लिए किये जाते है। कुछ व्यक्ति को अंतर्निहित (अंडरलाइंग) स्थिति के बारे में पता तब तक नहीं चलता है, जब तक वे डायबिटीज से संबंधित जटिलताओं का विकास नही कर लेते जैसे, दिल की समस्या, देखने की समस्या और दूसरी समस्यायें।

डायबिटीज का निदान (डायग्नोसिस) कैसे किया जाता है?

जैसा की पहले चर्चा की गयी है कि, डायबिटीज के संकेत और लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते है, या जटिलताओं के विकसित होने तक किसी के ध्यान में नहीं आते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थायें जैसे अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (एडीए) नें डायबिटीज का पता, सही समय पर लगाने के लिए, लोगों को स्क्रीन करने के लिए एक सिफारिश तैयार की है। सिफारिश के अनुसार, निम्नलिखित स्थितियों वाले व्यक्तियों को डायबिटीज के लिए स्क्रीनिंग कराना चाहिए:

• 45 वर्ष से अधिक आयु: 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को प्रारंभिक स्क्रीनिंग के लिए जाना चाहिए, और यदि परिणाम सामान्य आते हैं, तो हर 3 वर्षों के बाद स्क्रीनिंग कराना चाहिये।

• 25 से अधिक बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई): बढ़ी हुयी बीएमआई और अन्य जोखिम कारकों जैसे, असामान्य कोलेस्ट्रॉल स्तर, उच्च बीपी, आलस भरी जीवन शैली और पीसीओएस या हृदय रोग जैसी अन्य स्थितियों वाले लोगों को डायबिटीज स्क्रीनिंग के लिए जरूर जाना चाहिए। एशियाई आबादी के लिए बीएमआई का मापदंड 23 से अधिक है।

• गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज के इतिहास वाली महिलाओं को हर तीन साल में डायबिटीज की जाँच करवाना चाहिये।

• प्री-डायबिटीज रोगियों को हर साल जांच की सलाह दी जाती है।

डायबिटीज के लिए परिक्षण (टाइप 1, टाइप 2 और प्री-डायबिटीज)

ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) परिक्षण:

(H4) यह रक्त परीक्षण पिछले तीन महीनों के आपके औसत ब्लड ग्लूकोज स्तर को मापता है। यह हीमोग्लोबिन (एचबी) से जुड़े ब्लड ग्लूकोज के प्रतिशत को मापता है, जो आरबीसी में मौजूद है जिसका जीवन काल 3 महीने है। पिछले 2 से 3 महीनों में आपके ब्लड ग्लुकोस का स्तर जितना अधिक होता है, उतना ही एचबी से जुड़े ग्लूकोज प्रतिशत और HbA1c परिक्षण का परिणाम अधिक होता है।

परिणाम:

• सामान्य: 5.7 % से कम

• प्री-डायबिटीज: 5.7 – 6.4 %

• डायबिटीज: 6.5 % या अधिक (दो अलग-अलग दिनों में)

परिक्षण से पहले आपको भूखा रहने की आवश्यकता नहीं है।

डॉक्टर डायबिटीज के निदान (डायग्नोसिस) को निश्चित करने के लिए कुछ अन्य रक्त परिक्षणों का भी उपयोग कर सकते हैं, खासकर यदि HbA1c परिणाम सिलसिलेवार नहीं हैं या परिक्षण उपलब्ध नहीं है।

फास्टिंग बल्ड शुगर परिक्षण (H4):

यह परिक्षण भूखे होने की स्थिति के दौरान खून में ग्लूकोज के स्तर को मापता है। इस टेस्ट के लिए आपको रात भर (करीब 8 घंटे) भूखा रहना होगा, और सुबह खून का सैंपल देना होगा।

परिणाम:

• सामान्य: स्तर 100 mg/dL से कम

• प्री-डायबिटीज: 100 से 125 mg/dL

• डायबिटीज: 126 mg/dL या अधिक (दो अलग-अलग दिनों में)

रैंडम ब्लड शुगर टेस्ट:

यह परिक्षण किसी भी समय पर खून में ग्लूकोज के स्तर को मापता है, भले ही आप ने आखिरी  बार कभी भी खाया हो।

परिणाम:

• मधुमेह: 200 mg/dL के बराबर या उससे अधिक स्तर।

ओरल ग्लूकोज टाॅलिरेन्स परिक्षण:

इस टेस्ट में आपको रात भर भूखा रहने की जरूरत होती है, ताकि सुबह फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज लेवल को मापा जा सके। इसके बाद, आपको तरल युक्त ग्लूकोज पीने के लिए कहा जाता है, जिसे पीने के 1 और 2 घंटे बाद खून का नमूना लिया जाता है।

परिणाम: 2 घंटे के बाद लिया गया सैंपल निम्नलिखित परिणाम देता है

• सामान्य: 140 mg/dL से कम का स्तर।

• प्री-डायबिटीज: 140 और 199 mg/dL के बीच का स्तर

• डायबिटीज: 200 mg/dL से अधिक का स्तर

टाइप 1 डायबिटीज के मामले में कीटोन की तलाश करने के लिए और ऑटो एंटीबॉडी के लिए जांच करने के लिए अतिरिक्त परीक्षण, किये जा सकते है।

गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज के लिए परिक्षण (गर्भावस्था के दौरान परिक्षण)

गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज के विकास की जांच करने के लिए गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में स्क्रीनिंग टेस्ट भी किया जाता है।

यदि आपके पास निम्नलिखित जोखिम कारक है, तो आपको गर्भावधि ((जेस्टेशनल) डायबिटीज के विकसित होने का खतरा अधिक है:

• यदि आपकी आयु 35 वर्ष से अधिक है

• गर्भावस्था की शुरुआत में अधिक वजन

• डायबिटीज का पारिवारिक इतिहास (माता-पिता, भाई-बहन या बच्चे में डायबिटीज)

• पिछली गर्भावस्था में गर्भावधि (जेस्टेशनल)) डायबिटीज का इतिहास

• पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम का इतिहास

यदि उपरोक्त कारकों में से कोई भी आप में मौजूद हैं, तो आपके डॉक्टर गर्भावस्था के सप्ताह की परवाह किए बिना, पहली विसिट में गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज के लिए आपका परीक्षण करेगे।

यदि कोई कारक मौजूद नहीं है, तो आम तौर पर आपकी जांच गर्भावस्था के 24 से 28 सप्ताह के बीच में की जाएगी।

निम्नलिखित स्क्रीनिंग परिक्षण गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज के लिए इस्तेमाल किया जा सकते है:

इनीशियल ग्लूकोज चैलेंज परीक्षण:

इस टेस्ट में आपको ग्लूकोज रिच लिक्विड पीने को कहा जाएगा। इसके एक घंटे के बाद ग्लूकोज के स्तर को मापने के लिए रक्त का नमूना लिया जाता है।

परिणाम:

• सामान्य: 140 mg/dL से नीचे का स्तर,

• यदि स्तर 140mg/dL से ऊपर हैं, तो यह गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज के लिए उच्च जोखिम का सुझाव देता है, और आपके डॉक्टर एक फोलो-अप परिक्षण का सुझाव देंगे।

फोलो-अप ग्लूकोज टाॅलिरेंस परिक्षण:

यहां आपको रात भर भूखा रहते हुये फास्टिंग ब्लड सैंपल देने के लिए कहा जायेगा। इसके बाद आपको ग्लूकोज पीने के लिए कहा जाएगा जिसमें तरल होता है, जो पिछले परिक्षण में उपयोग किए गए तरल से अधिक केंद्रित होगा। इसके बाद आपके खून के नमूनों को 3 घंटे के लिए प्रति घंटा लिया जाएगा और ब्लड ग्लूकोज के स्तर की जांच की जायेगी।

परिणाम:

• यदि ब्लड ग्लूकोज का स्तर, पेय के बाद लिये गये दो नमूनों में से किसी में भी सामान्य से अधिक पाया जाता है, तो यह गर्भावधि (जेस्टेशनल) डायबिटीज का निदान (डायग्नोस्ड) होता है।

डायबिटीज का इलाज कैसे किया जाता है?

मधुमेह के लिए कोई इलाज नहीं है, हालांकि इसे बहुत अच्छी तरह से प्रबंधित किया जा सकता है और नियंत्रण में रखा जा सकता है। आप इन माध्यमों से ऐसा कर सकते हैंः

• जीवनशैली में परिवर्तन

• नियमित ग्लूकोज की निगरानी

• दवाएं

• इंसुलिन इंजेक्शन

DIABETES TYPES

जीवनशैली में परिवर्तन

जीवन शैली में परिवर्तन में दो मुख्य बातें, स्वस्थ आहार का सेवन और शारीरिक गतिविधि शामिल हैं। इन जीवनशैली हस्तक्षेप का उद्देश्य आपके शरीर को स्वाभाविक रूप से सामान्य या सामान्य स्तर के रक्त ग्लूकोज को बनाए रखने की अनुमति देना है। यह आपको अपने रक्त कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर के साथ-साथ रक्तचाप को ठीक बनाए रखने में भी मदद करता है, जो मधुमेह को बिगड़ने के लिए महत्वपूर्ण जोखिम कारकों के रूप में कार्य करता है।

स्वस्थ आहार:

आपको एक ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए जो बहुत अधिक ग्लूकोज प्रदान नहीं करता है, या आपके ब्लड ग्लुकोज के स्तर में अचानक बढ़ोत्तरी का कारण नहीं बनता है। यह ब्लड लिपिड और ब्लड प्रेशर को बनाए रखने में भी मदद करता है:

• इसके लिए आपको ऐसी डाइट लेने से बचना चाहिए, जिसमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट (जैसे मैदा, चावल) हों या जिसमें ढेर सारी चीनी जैसे मिठाई, मीठा पेय पदार्थ हों।

• इसके बजाय आपको अपने शरीर की जरूरतों के अनुसार कार्बोहाइड्रेट लेना चाहिए, जैसे वह कार्बोहाइड्रेट जो धीरे-धीरे टूटते है और समय के साथ-साथ ग्लूकोज रिलीज करते हैं (जैसे कि साबुत गेहूं, जई आदि)।

• आप पतले प्रोटीन का भी सेवन कर सकते हैं, जो बहुत अधिक ग्लूकोज प्रदान किए बिना महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी प्रदान करता है।

• फल, सब्जियों और सलाद जैसे उच्च फाइबर आहार लेने से ग्लूकोज धीमी गति से रिलीज होता है, और लिपिड के नियंत्रण में बेहतर पाया जाता है।

• संतृप्त वसा (सैचुरेटेड फैट) से भरपूर भोजन के सेवन से बचना चाहिये, जो कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को बढ़ा सकता है।

• रक्तचाप (बीपी) के बेहतर नियंत्रण के लिए कम सोडियम आहार (नमक) का सेवन करें।

एक बार जब आप इसे समझ लेते हैं, तो आपके लिए अपने डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ द्वारा दिए गए आहार का पालन करना आसान हो जाता है। एक प्रशिक्षित आहार विशेषज्ञ आपको अपनी दैनिक आवश्यकताओं की गणना करने और यह तय करने में काफी मदद कर सकता है कि किन वस्तुओं को लिया जाना है और किस मात्रा में।

आहार के बारे में अधिक जानें (विस्तार से)

शारीरिक गतिविधि:

शारीरिक गतिविधि करना ब्लड ग्लुकोज के स्तर के प्रबंधन और डायबिटीज के कई जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखने जैसे कई लाभ प्रदान करता है।

• ब्लड ग्लुकोज के स्तर को कम करना: व्यायाम, इंसुलिन के प्रति शरीर की कोशिकाओं की संवेदनशीलता को बढ़ाता है, और ग्लूकोज को कोशिकाओं में ले जाने में भी मदद करता है।

• अतिरिक्त कैलोरी बर्निंग वजन ठीक बनाए रखने में मदद करता है

• कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है

• रक्तचाप (बीपी) को कम करता है

• रक्त प्रवाह में सुधार करता है

• तनाव को कम करता है

यह कहा जाता है कि, थोड़ी देर की शारीरिक गतिविधि भी डायबिटीज में मददगार होती है। आपको सप्ताह के अधिकांश दिनों (कम से कम 5) पर कम से कम 30 मिनट की महत्वपूर्ण शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना चाहिए। आप तेज घूमना, तैराकी या साइकिल चला सकते हैं।

यदि आप वजन कम करने और सही वजन बनाये रखने का लक्ष्य रखते हैं, तो सप्ताह के 5 दिनों पर कम से कम 60 मिनट की शारीरिक गतिविधि की सलाह दी जाती है।

अन्य जीवन शैली में परिवर्तन:

• शराब के सेवन से बचना

• पर्याप्त नींद लेना

• धूम्रपान छोड़ना

• तनाव से बचना

नियमित ग्लूकोज निगरानी:

कई लोगों के लिए, विशेष रूप से जो इंसुलिन ले रहे हैं, प्रत्येक दिन ब्लड ग्लुकोज के स्तर की जांच करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की डायबिटीज के लिए उपचार लेना।

यह ब्लड ग्लुकोज के स्तर को बहुत कम या बहुत अधिक होने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण है, जो किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।

यह व्यक्ति को अपनी दवाओं, इंसुलिन, भोजन या शारीरिक गतिविधि के अनुसार प्रबंधन करके ब्लड ग्लुकोज के स्तर का प्रबंधन करने की अनुमति देता है।

एक व्यक्ति को दिन में 3 से 4 बार या उससे भी अधिक अपने ब्लड ग्लुकोज के स्तर की जांच करने की आवश्यकता हो सकती है।

नियमित आधार पर रक्त ग्लूकोज के स्तर की निगरानी करने के तरीके।

ब्लड ग्लुकोज मीटर:

घर में ब्लड ग्लूकोज के स्तर की जांच करने के लिए यह सबसे आम तरीका है। यहां, आपको एक छोटे से लैंसेट के साथ अपनी उंगली के सिरे को चुभाते हुए खून की एक बूंद निकालनी होगी। इसके बाद खून की बूंद को एक टेस्ट स्ट्रिप से छुआ जाता है, जो हाथ में पकड़े हुये एक छोटे से डिवाइस से जुड़ा होता है, जो उसी समय पर आपके खून में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को दर्शाता है।

आपके डॉक्टर आपको सूचित करेंगे कि आपको अपने ब्लड ग्लुकोज के स्तर की निगरानी करने के लिए कितनी बार आवश्यकता होगी।

निरंतर ग्लूकोज निगरानी:

यह एक और तरीका है जो आपको दिन में कई बार अपनी त्वचा को चुभाये बिना भी निरंतर ब्लड ग्लूकोज की निगरानी प्रदान करता है। यहां, आपकी त्वचा के नीचे एक छोटा सेंसर डाला जाता है, जो आपके शरीर की कोशिकाओं के बीच मौजूद तरल पदार्थ में लगातार ग्लूकोज के स्तर को मापता है। यह विधि एक निरंतर रीडिंग प्रदान करती है, जो आपके वास्तविक ब्लड ग्लुकोज के स्तर के बहुत करीब होती है। यदि यह विधि काफी असामान्य ग्लूकोज स्तर दिखाती है, तो आपको ग्लूकोज मीटर के साथ अपने ब्लड ग्लुकोज स्तर को मापना चाहिए। यह विधि विशेष रूप से उपयोगी है, यदि आप इंसुलिन लेते हैं और लो ब्लड ग्लुकोज के कम स्तर को विकसित करने की प्रवृत्ति रखते हैं।

विशिष्ट ब्लड ग्लुकोज का स्तर, जो डायबिटीज के रोगी बनाने की कोशिश करते हैं:

• खाना खाने से पहले: 80 से 130 mg/dL

• भोजन खाने के लगभग 2 घंटे के बाद: 180 mg/dL से कम

मौखिक दवाएं:

इन दवाओं को टाइप 2 डायबिटीज में लेने की जरूरत होती है, जब जीवनशैली और आहार में बदलाव आपके ब्लड ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित करने में विफल रहते हैं।
इन दवाओं में आपके ब्लड ग्लुकोज के स्तर का प्रबंधन करने के विभिन्न तरीके हो सकते हैं, और आपके डॉक्टर दिन के समय, आपकी स्वास्थ्य स्थिति और अन्य कारकों के आधार पर एक विशेष दवा या कुछ लिख देगें।

मेटफार्मिन आम तौर पर टाइप 2 डायबिटीज के लिए लिखी जाने वाली पहली दवा होती है। कार्रवाई के अपने तंत्र के साथ आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं निम्नलिखित हैं:

दवाईसमारोह
अल्फा-ग्लूकोसिडेस इनहिबिटर्स- अकार्बोस और मिग्लिटोलआपके शरीर के ग्लूकोज और स्टार्च खाद्य पदार्थों को धीमा करता है
बिगुएनाइड्स- मेटफार्मिनआपके लिवर द्वारा बनाये गये ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है
ग्लूकागन की तरह पेप्टाइड्स- डुलाग्लूटाइड और लिराग्लूटिडइस तरीके को बदलता है जिस तरीके से आपका शरीर इंसुलिन का उत्पादन करता है
मेग्लिटिनाइड्स- नात्ग्लिनइड और रिपाग्लिनइडआपके अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) को अधिक इंसुलिन छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है
सल्फोंयलुरास- ग्लाइबुराइड और ग्लिमेपिराइडआपके अग्न्याशय (पैन्क्रियाज) को अधिक इंसुलिन छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है
थियाजोलिडिनेडिओन्स- पिओग्लिटाजोन और रोसिग्लिटाजोनइंसुलिन को बेहतर काम करने में मदद करता है

इंसुलिन

कार्रवाई की शुरुआत के आधार पर विभिन्न प्रकार के इंसुलिन उपलब्ध हैं, जब यह अपनी अधिकतम कार्रवाई प्राप्त करता है, और जब तक कार्रवाई चलती है।

आपको अपनी जरूरत के हिसाब से एक खास तरह का इंसुलिन लेने की जरूरत पड़ सकती है। कभी-कभी आपको प्रीमिक्स्ड इंसुलिन लेने की आवश्यकता हो सकती है, जहां दो प्रकार के इंसुलिन पहले से मिश्रित होते हैं।

नीचे दिए गए चार्ट में विभिन्न प्रकार के इंसुलिन को उनके विशिष्ट पात्रों के साथ दिखाया गया है।

इंसुलिन के प्रकार
इंसुलिन प्रकारकार्रवाई की शुरुआतपीक टाइमकार्रवाई की अवधि
रैपिड एक्टिंगइंजेक्शन के बाद लगभग 15 मिनट1 घंटा2-4 घंटे
साॅर्ट एक्टिंगइंजेक्शन के बाद 30 मिनट के भीतर2- 3 घंटे3-6 घंटे
इंटरमिडियेट एक्टिंगइंजेक्शन के बाद लगभग 2 से 4 घंटे4-12 घंटे12-18 घंटे
लोंग एक्टिंगइंजेक्शन के बाद कई घंटेनो पीक24 घंटे; कुछ लंबे समय तक रहते हैं

स्रोत: इंसुलिन बेसिक्स- अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन वेबसाइट।

ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप अपने शरीर में इंसुलिन इंजेक्ट कर सकते हैं। इंसुलिन लेने के सबसे आम तरीके सिरिंज, पेन या इंसुलिन पंप हैं। इंसुलिन लेने की सबसे कम आम विधि इंजेक्शन पोर्ट, इनहेलर, और जेट इंजेक्टर हैं।

सुई और सिरिंज

यहां सुई और सिरिंज का इस्तेमाल करके इंसुलिन का इंजेक्शन लगाया जाता है। इंसुलिन की एक विशेष खुराक, सुई और सिरिंज का उपयोग करके इंसुलिन शीशी या बोतल से तैयार की जाती है। फिर वह शरीर में इंसुलिन को इंजेक्ट करते हैं, आमतौर पर पेट में। अन्य क्षेत्रों में जहां इंसुलिन इंजेक्शन लगाया जा सकता है, जांघ, नितंबों, या ऊपरी हाथ हैं। उन धब्बों को घुमाने की सलाह दी जाती है जहां इंसुलिन का इंजेक्शन लगाया जाता है।

इंसुलिन पेन

यह एक नियमित कलम (पेन) की तरह लगता है, लेकिन इसके निचले सिरे पर एक सुई होती है। कुछ इंसुलिन पेन केवल एक बार उपयोग करने वाले होते हैं, और उनमें इंसुलिन पहले से भरा होता है। दूसरे इंसुलिन पेन को कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जहां हर उपयोग के बाद एक कार्टिरिज डाला जाता है। इंसुलिन पेन सुई और सीरिंज की तुलना में महंगे होते है, लेकिन उपयोग करने में अधिक सुविधाजनक होते हैं।

पंप

इंसुलिन पंप, एक छोटा सा मोबाइल फोन जैसा डिवाइस होता है, जिसे बेल्ट, कपड़े या आपकी जेब के अंदर जोड़कर दिन भर ले जाया सकता है। डिवाइस 24 घंटे में एक दिन में कई बार तेजी से अभिनय इंसुलिन की छोटी खुराक बचाता है। डिवाइस में ट्यूब होता है, जो मशीन से कैनुला तक इंसुलिन ले जाती है जो आपकी त्वचा के नीचे डाली जाती है। कैनुला को हर 2 से 3 दिन में बदलना पड़ता है।

पंप का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को अपने ब्लड ग्लुकोज के स्तर की निगरानी रखने की आवश्यकता होती है, ताकि वह इंसुलिन की मात्रा का जरूरत के अनुसार प्रबंधन कर सके। पंप का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को पंप में अपने कैलोरी सेवन और ब्लड ग्लुकोज के स्तर को प्रवेश करने की जरूरत होती है, ताकि वह आवश्यकताअनुसार इंसुलिन की खुराक की गणना कर सके।

लाभ: दिन में कई बार इंसुलिन इंजेक्शन की कोई जरूरत नहीं है। बेहतर जीवन शैली, बेहतर विनियमित और इंसुलिन के लगातार डिलिवरी होती है।

एक अन्य प्रकार के पंप में कोई ट्यूब नहीं होती है, और आपकी त्वचा पर सीधे चिपकायी जाती है, जैसे कि खुद चिपकने वाला पोड।

इंसुलिन और मौखिक दवाओं का संयोजन

आपके डॉक्टर ग्लूकोज का बेहतर नियंत्रण हासिल करने के लिए इंसुलिन और ओरल मेडिसिन दोनों को साथ लेने की सलाह भी दे सकते है। दोनों दवाओं के संयोजन अक्सर टाइप 2 डायबिटीज वाले लोगों में मददगार पाया गया है। आमतौर पर आपके डॉक्टर आपको दिन के दौरान एक मौखिक दवा (ओरल मेडिसिन) और रात में इंसुलिन लेने के लिए कह सकते हैं।

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