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क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) – डायग्नोसिस

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क्रोनिक किडनी डीजीज की पहचान कैसे की जाये?

ज्यादातर, किडनी की बीमारी के कोई शुरुआती लक्षण दिखायी नही देते हैं, इसलिए क्रोनिक किडनी डीजीज को पहचानने का एकमात्र तरीका, किडनी की कार्यप्रणाली को जाँचने वाले परिक्षण होते हैं। उन व्यक्तियों को किडनी की बीमारी की जाँच अवश्य करानी चाहिए, जिनको की निम्न समस्यायें हैं:

डायबिटीज

• हाई ब्लड प्रेशर

दिल की बीमारी

परिवार में किडनी फेल्योर का इतिहास

वह व्यक्ति जो डायबिटीज से पीड़ित है, उनको किडनी की जाँच वार्षिक रूप से करानी चाहिये। वह व्यक्ति जो हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी से पीड़ित हैं या जिनके परिवार में किसी को किडनी फेल्योर हुआ है, उनको डाॅक्टर से यह सलाह अवश्य लेनी चाहिये कि, जाँचें कब और कितनी बार कराई जाँयें। किडनी की बीमारी का पहचान जितनी जल्दी हो सके उतनी ही जल्दी इलाज में आसानी होती है, जिससे की किडनी को अन्य नुकसानों से बचाया जा सके।

किडनी के नुकसान को जानने के लिए कौन सी जाँचे की जाती है?

किडनी की बीमारी की पहचान दो सामान्य जाँचों से की जा सकती है।

यूरीन टेस्ट फोर प्रोटीन (अल्ब्युमिन): किडनी में प्रोटीन की मौजूदगी किडनी खराब होने का संकेत हैं।

urine in container for the test scaled

क्रियेटिनिन के लिए खून की जाँच: यह ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (जीएफआर) का पता लगाने के लिए किया जाता है, जोकि किडनी के काम करने की हद का पता लगाता है।

blood test how to take sample scaled

यदि ये जाँचें सामान्य आती भी हैं, तो भी इन्हें भविष्य में कराते रहना चाहिये, विशेष रूप से तब, जब किडनी की बीमारी होने के जोखिम मौजूद हों।

ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (जीएफआर) क्या है?

जीएफआर या इजीएफआर का मतलब ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट है, जो एक अवधि है। इसका इस्तेमाल ग्लोमेरुलाई से एक मिनट में कितना खून गुजरता है इसका पता लगाने के लिए किया जाता है। ग्लोमेरुलाई किडनी के अंदर मौजूद बहुत छोटे फिल्टर होते हैं, जोकि खून से खराब पदार्थों को हटाते हैं।

ग्लोमेरुलाई से खून गुजरने की दर हमें किडनी के काम करने का आकलन प्रदान करती है।

जीएफआर को किडनी के काम करने और बीमारी के स्तर का पता लगाने का एक बेहतर जाँच माना जाता है।

जीएफआर का अनुमान कैसे लगाया जाता है?

खून का नमूना लेकर, उसे प्रयोगशाला में क्रियेटिनिन का पता लगाने के लिए भेजा जाता है। क्रियेटिनिन, क्रिटाईन का एक खराब पदार्थ है, जोकि एक रसायन होता है। यह शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति करती है, खासकर माँशपेशियों में।

लिये गये क्रियेटिनिन स्तर को दूसरे कारकों के साथ मिलाकर जीएफआर का अनुमान लगाया जाता है। बच्चों और वयस्कों के लिए अलग-अलग फार्मूले अपनाये जाते हैं, जोकि निम्नलिखित में से कुछ या सभी हो सकते हैः

• उम्र

• ब्लड क्रियेटिनिन की माप

• नस्ल

• लिंग

• कद की लम्बाई

• वजन

किडनी के कामकाज को जाँचने के लिए एक अन्य जाँच की जा सकती है, जिसे क्रिएटिनिन क्लीयरेंस टेस्ट कहा जाता है। इसमें 24 घंटे तक पेशाब इकट्ठा करना पड़ता है।

असामान्य जीएफआर का मतलब क्या है?

3 या उससेअधिक महीने के लिए  60 mL/min/1.73 m2 से कम स्तर, क्रोनिक किडनी डीजीज का संकेत है। 15 mL/min/1.73 m2 से नीचे जीएफआर, किडनी फेलियर का सुझाव देता है, जिसमें तुरंत चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।

जीएफआर के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें

अपने जीएफआर की गणना करें (वयस्को के लिए- 18 वर्ष की आयु से अधिक)

18 वर्ष तक की आयु के समूह में जीएफआर की गणना करें 

किडनी खराब होने के आंकलन के लिए कौन सी जाँच की जाती है? क्रोनिक किडनी डीजीज में पेशाब की जाँच की भूमिका क्या है?

यूरीन टेस्ट फोर अल्ब्युमिन: यह जाँच किडनी को होने वाले नुकसान को जानने के लिए की जाती है। यह इस तथ्य पर आधारित है कि, स्वस्थ्य किडनी अल्ब्युमिन को पेशाब में जाने से रोकती है। अल्ब्युमिन एक प्रोटीन होता है, जोकि खून में पाया जाता है। पेशाब में अल्ब्युमिन के पाये जाने को अल्ब्युमिनुरिया कहते हैं, जिससे किडनी के क्षतिग्रस्त होने का पता चलता है। पेशाब में अल्ब्युमिन की मात्रा जितनी कम हो, वह उतना ही अच्छा होता है।

एक स्वास्थ्य कर्मचारी पेशाब में अल्ब्युमिन का पता दो तरीके से लगा सकता है।

मूत्र परिक्षण जाँच (डिपस्टिक टेस्ट): एक रसायन से उपचारित पट्टी जिसे डिपस्टिक कहा जाता है, जिसको इकट्ठा किये गये पेशाब के नमूनें में डालकर अल्ब्युमिन का पता लगाया जाता है। पेशाब में अल्ब्युमिन की उपस्थिति से डिपस्टिक का रंग बदल जाता है।

यूरीन अल्ब्युमिन टू क्रिएटिनिन रेटियो (यूएसीआर)): यह दिये गये पेशाब के नमूनें में अल्ब्युमिन की मात्रा की जाँच तथा इसका मिलान क्रिएटिनिन की मात्रा के साथ करता है। यदि यूरीन अल्ब्युमिन का परिणाम 30 mg/g या इससे कम होता है, तो वह सामान्य होता है। यदि यूरीन अल्ब्युमिन का परिणाम 30 mg/g से अधिक होता है तो यह किडनी की बीमारी के होने के लक्षण को दर्शाता है। किडनी की बीमारी में, पेशाब में अल्ब्युमिन की मात्रा को जाँचने से, कौन सा इलाज मरीज के लिए बेहतर है इसको निर्धारित करने में मदद मिलती है। यूरीन अल्ब्युमिन लेबल के सामान्य रहने या गिरने से दिये गये इलाज की प्रतिक्रिया का पता चलता है।

किडनी की बीमारी की स्टेज क्या हैं?

किडनी की बीमारी की पाँच स्टेज होती हैं। यह किडनी की बीमारी को उसके नुकसान तथा ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट (जीएफआर) के आंकडे के आधार पर बाँटती हैं। इसका इलाज बीमारी के स्टेज पर निर्भर करता है, जोकि इस प्रकार है।

स्टेजकिडनी किडनी फंक्शनजीएफआरकिडनी के काम करने का प्रतिशत
स्टेज 1सामान्य किडनी फंक्शन के साथ किडनी की क्षति90 या उससे ज्यादा90-100%
स्टेज 2माइल्ड किडनी फंक्शन के साथ किडनी की क्षति80 से 6089-60%
स्टेज 3 एकिडनी के काम करने में हल्की से मद्यम क्षति59 से 4559-45%
स्टेज 3 बीकिडनी के काम करने में मद्यम से गंभीर क्षति40 से 3040-30%
स्टेज 4किडनी के काम करने में गंभीर क्षति29 से 1529-15%
स्टेज 5किडनी का काम करना बंद हो जाना15 से कम15% से कम

जीएफआर की सँख्या आपके किडनी के कामकाज को बताता है। जैसे-जैसे किडनी की बीमारी गंभीर होती जाती है, वैसे-वैसे जीएफआर की सँख्या कम होती जाती है।

CKD-stages

इसका पता कैसे लगायें कि किडनी की बीमारी गम्भीर तो नही हो रही ? क्या दिया गया इलाज काम कर रहा है?

एक व्यक्ति यह जान सकता है कि, दिया गया इलाज काम कर रहा है यदि:

• जीएफआर सामान्य रहता है।

• यूरीन अल्व्युमिन सामान्य रहता है या कम हो जाता है।

• ऊपर दिये गये परिणामों का बिगड़ना बीमारी के बिगड़ने को दर्शाता है।

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