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सीलिएक रोग

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सीलिएक रोग क्या है?

सीलिएक रोग, ग्नलुटेन की खपत के कारण पैदा होने वाला एक पाचन विकार है। यह पेट और शरीर में असामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा करता है। इसके कारण शरीर में कई सारे लक्षण विकसित होते हैं, जो शरीर के अन्य हिस्सों जैसे दांत, त्वचा आदि को प्रभावित करते है।

सीलिएक रोग से छोटी आंत को भी नुकसान पहुंचता है, जिसके परिणामस्वरूप पोषण की कमी हो सकती है।

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ग्लुटेन क्या है? किन खाद्य वस्तुओं में ग्लुटेन पाया जाता है?

ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन होता है, जो गेहूं, बार्ली और राई जैसे अनाजों में पाया जाता है। इस प्रकार यह रोटी, ब्रेड, पास्ता, केक, कुकीज़ जैसे प्रतिदिन सेवन किये जाने वाले खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है। इसके अलावा यह सॉस, सूप, सलाद ड्रेसिंग जैसे प्रोसेस्ड फूड आइटम्स, न्यूट्रीटमेंट्स, विटामिन में पाया जाता है। इसके अलावा यह रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों जैसे लिप बाम, लिपस्टिक, स्किन/ हेयर प्रोडक्ट्स, टूथपेस्ट में भी मौजूद होता है। कुछ दवाओं में यह शायद ही कभी मौजूद हो सकता है।

क्या सीलिएक रोग, ग्लुटेन सेन्सिटिविटी या व्हीट इंटोलिरेन्स के समान ही होता है?

सीलिएक रोग, ग्लुटेन सेन्सिटिविटी या व्हीट इंटोलिरेन्स से अलग होता है। ग्लुटेन सेन्सिटिविटी या व्हीट इंटोलिरेन्स में, व्यक्ति में सीलिएक रोग के समान ही लक्षण विकसित होते हैं,  लेकिन छोटी आंत को नुकसान नहीं पहुंचता है, जोकि सीलिएक रोग में होता है।

क्या सीलिएक रोग व्हीट इंटोलिरेन्स के समान है?

सीलिएक रोग, व्हीट इंटोलिरेन्स से अलग होता है। व्हीट इंटोलिरेन्स में, व्यक्ति में गेहूं के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित होती है। हालांकि, इसमें छोटी आंत को कोई लंबे समय तक का नुकसान नहीं होता है, जोकि सीलिएक रोग में देखा जाता है। इसके अलावा इसमें, आंखों में खुजली और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण विकसित हो सकते है, जोकि सिलिएक रोग में नहीं देखे जाते हैं।

गेहूं की एलर्जी भी छोटी आंत को लंबे समय तक नुकसान नहीं पहुंचाती है।

सीलिएक रोग कितना आम है?

यह माना जाता है कि, दुनिया में लगभग 1.4 प्रतिशत लोगों में सीलिएक रोग के विकसित होने की उच्च संभावना है (खून की जाँच से साबित होने वाला)। और 0.7 प्रतिशत आबादी में सीलिएक रोग साबित हो चुका है (बायोप्सी द्वारा साबित)। उत्तर भारत की 1.2 प्रतिशत आबादी पर इसका असर पड़ने का अनुमान है। जबकि पूर्वोत्तर और दक्षिणी भारत में लगभग 0.9 और 0.1 प्रतिशत व्यक्तियों पर इसका असर पड़ेगा।

हाँलांकि, गैर-सीलिएक ग्लुटेन सेन्सिटिविटी से प्रभावित व्यक्तियों की संख्या ज्ञात नहीं है, लेकिन इसे काफी अधिक माना जाता है।

कुछ सीलिएक रोग विशेषज्ञों के अनुसार, सीलिएक रोग से पीड़ित केवल 5 प्रतिशत लोगों की ही पहचान हो पाती है, बाकी बचे 95 प्रतिशत लोगों की पहचान नहीं हो पाती है।

सीलिएक रोग के विकास का खतरा किनको अधिक होता है?

सीलिएक रोग की बीमारी पूरी दुनिया में पायी जाती है, जोकि बच्चों, वयस्कों, पुरुषों, महिलाओं और विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को प्रभावित करती है। लेकिन निम्नलिखित समूहों में इसे अधिक आम पाया गया है:

परिवार का इतिहास: क्योंकि, सीलिएक रोग पीढी दर पीढी चलता है, इसलिए यदि किसी व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य को यह बीमारी है, तो उस व्यक्ति को यह बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। विशेष रूप से यदि यह बीमारी, माता- पिता या भाई- बहन को होती है, तो इस रोग के होने की संभावना 10 में से 1 होती है।

नस्ल: यह बीमारी ककेशियान लोगों में अधिक आम है।

सेक्स: यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम है।

आयु: यह बीमारी वयस्कों की तुलना में बच्चों में अधिक आम है।

ऑटो इम्यून कंडीशन: सीलिएक रोग आमतौर पर, टाइप 1 डायबिटीज, ऑटोइम्यून थायराइड रोग, एडिसन रोग और ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस जैसी ऑटो-प्रतिरक्षा स्थितियों में अधिक देखा जाता है।

आनुवंशिक स्थितियां: डाउन सिंड्रोम और टर्नर सिंड्रोम जैसी आनुवंशिक स्थितियों से पीड़ित लोगों में यह अधिक आम है।

सीलिएक रोग के लक्षण क्या हैं?

सीलिएक रोग के लगभग 200 लक्षण होते हैं, जो बहुत भिन्न हो सकते हैं। इन्हें मोटे तौर पर डायजेस्टिव लक्षणों और नाॅन-डायजेस्टिव संकेतों और लक्षणों में वर्गीकृत किया जा सकता है। डायजेस्टिव लक्षण बच्चों में अधिक आम हैं, जबकि वयस्कों में सामान्य रूप से नाॅन-डायजेस्टिव लक्षण पाये जाते हैं।

कुछ लोगों में सीलिएक रोग के कोई भी लक्षण विकसित नहीं होते हैं, जब तक कि, संक्रमण, गर्भावस्था, प्रसव, सर्जरी, या गंभीर मानसिक तनाव जैसी स्वास्थ्य समस्यायें इन लक्षणों के विकास को ट्रिगर न करें।

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डायजेस्टिव लक्षणों से पीड़ित बच्चे, निम्नलिखित शिकायत कर सकते हैँ:

• पेट में गैस, ऐंठन या सूजन की शिकायत

क्रोनिक दस्त की शिकायत

कब्ज की शिकायत

• मतली और उल्टी की शिकायत

• पीला, बदबूदार, या फैटी मल, जो पानी पर तैरता हैं

• पेट दर्द की शिकायत

 

सीलिएक रोग से पीड़ित बच्चों में आंत के नुकसान के परिणामस्वरूप पोषक तत्वों को अवशोषित करने में असमर्थता हो सकती है, जिससे उनमें निम्नलिखित समसयायें विकसित हो सकती हैं:

• दांतों के तामचीनी (कवर) को नुकसान हो सकता है।

• शिशुओं में, पोषण की कमी का कारण बन सकता है।

• वजन घट सकता है।

• लंबाई में कमी और विकास में धीमापन आ सकता है।

• एनीमिया हो सकता है।

• यौवन में देरी हो सकती है।

• चिड़चिड़ापन, या अधीर होना, मूड बदलाव हो सकता है।

• एडीएचडी, सिरदर्द, दौरे आदि पड़ सकते हैं।

 

वयस्कों में सीलिएक रोग सामान्यतः नाॅन-डायजेस्टिव लक्षण पैदा करता है जैसे:

एनीमिया, जोकि आमतौर पर लोहे की कमी के कारण होता है।

• थकान हो सकती है।

• हड्डी के घनत्व में कमी (ऑस्टियोपोरोसिस) जिसके परिणामस्वरूप हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।

• हड्डी और जोड़ों में दर्द हो सकता है।

• महिलाओं में मासिक धर्म मिस हो सकते हैं।

• प्रजनन में कमी या बार-बार गर्भपात हो सकता है।

• त्वचा में खुजली हो सकती और चकत्ते पड़ सकते हैं, जिसे डर्मेटाइटिस हर्पेटिफॉर्मिस कहा जाता है।

• जीभ लाल और चिकनी हो सकती है।

• मुंह में अल्सर हो सकता है या मुंह सूख सकता है।

• हाथ और पैर में झुनझुनी हो सकती है।

• सिरदर्द हो सकता है।

• चिंता या अवसाद हो सकता है।

• दौरे पड़ सकते हैं।

 

सीलिएक रोग से पिड़ित लगभग आधे लोगों मेंडायजेस्टिव लक्षण पैदा हो सकते हैं जैसे:

• पेट दर्द हो सकता है।

• गैस और सूजन हो सकती है।

• दस्त आ सकते हैं।

आंतों में बाधा पैदा हो सकती है।

• पेट या आंतों के अल्सर हो सकते हैं।

• कब्ज हो सकता है।

लक्षण जो ग्लुटेन मुक्त आहार की आवश्यकता को इंगित कर सकते हैं!

सीलिएक रोग और ग्लुटेन सेन्सिटिविटी के लक्षण समान होते हैं। इसमें बारबार होने वाला पेट दर्द, लम्बे समय से दस्त/कब्ज, हाथ और पैरों में झुनझुनी/सुन्नता, लम्बे समय से थकान, जोड़ों का दर्द, प्रजनन की समस्या, और हड्डियों के घनत्व में कमी (ऑस्टियोपेनिया या ऑस्टियोपोरोसिस) आदि लक्षण शामिल होते है। इसके लगभग 200 संभावित लक्षण हैं, जिनमें से कई दूसरी बीमारियों में भी देखे जा सकते हैं।

सीलिएक रोग वाले लोगों में स्वास्थ्य की अन्य अन्य स्थितियां क्या देखी जा सकती हैं? सीलिएक रोग की जटिलताएं क्या हैं?

यदि सीलिएक रोग का सही समय पर इलाज न किया जाये, तो यह शरीर में जटिलताओं या अन्य ऑटोइम्यून स्थितियों का कारण बन सकता है। सीलिएक रोग की पहचान में जितनी देरी होती है, जटिलताओं और अन्य ऑटोइम्यून स्थितियों के विकसित होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है। यह कम से कम 2-4 साल की उम्र में होता है, जिसका प्रतिशत लगभग 10.5  है, जोकि उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है और, 20 साल से अधिक उम्र के लोगों में 34 प्रतिशत हो जाता है। ये स्थितियां और सीलिएक रोग में उनकी अनुमानित व्यापकता नीचे दी गई है:

• एनीमिया 12-69%

• ऑटोइम्यून थायराइड रोग 26%

• डर्मेटाइटिस हर्पेटिफॉर्मिस 25%

• लिम्फोसाइटिक कोलाइटिस 15-27%

• प्रजनन न होने कारण समझ न आना 12%

• पेरिफेरल न्यूरोपैथी 10-12%

• ग्लुटेन एटैक्सिया 10-12%

• लिवर की बीमारी 10%

• टाइप 1 डायबिटीज 8-10%

सीलिएक रोग की दीर्घकालिक जटिलतायें, निम्नलिखित समस्यायों को जन्म दे सकता है:

कुपोषण: यह छोटी आंत की क्षति और उसकी भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करने की असमर्थता के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप एनीमिया और वजन घटने की समस्या हो सकती है। बच्चों में यह धीमी वृद्धि और छोटे कद का कारण भी बन सकता है।

हड्डियों का कमजोर होना: कैल्शियम और विटामिन-डी, की कमी (ऑस्टियोपेनिया/ऑस्टियोपोरोसिस) के कारण, वयस्कों में हड्डियों के घनत्व को नुकसान होता है। इसके कारण हड्डियाँ (ऑस्टियोमैलेसिया या रिकेट्स) कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनमें फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है।

लैक्टोज असहिष्णुता: छोटी आंत को नुकसान के कारण दूध और दुग्ध उत्पादों को पचा पाने की क्षमता में नुकसान होता है, जिसके परिणामस्वरूप लैक्टोज असहिष्णुता होती है।

कैंसर: यदि सीलिएक रोग का लंबे समय तक इलाज नहींं किया जाता है, तो यह आँतों में कैंसर का कारण बन सकता है।

रिफ्रैक्टरी सीलिएक रोग: यह कभी-कभार ही होता है। इसमें छोटी आंत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है, और ग्लुटेन मुक्त आहार शुरू करने के बाद भी ठीक नहीं हो पाती है, जिसके परिणामस्वरूप रिफ्रैक्टरी सीलिएक रोग होता है। ये लोग पोषक तत्वों को अवशोषित करने में असमर्थ होते हैं, इसलिए इन्हे नसों में के माध्यम से पोषक तत्व दिए जाते हैं।

सीलिएक बीमारी का कारण क्या है?

कई अध्ययनों से एैसी कई स्थितियों का पता चला है, जिसके कारण व्यक्ति में सीलिएक रोग विकसित होता है। इन्हें मोटे तौर पर तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

आनुवंशिक कारक: सीलिएक रोग लगभग हमेशा HLA DQ2 और/या HLA DQ8 जीन वाले लोगों में विकसित होता देखा गया है। हालांकि, इस जीन के सभी लोगों को सीलिएक रोग का विकास नहीं होता है। लगभग 1/3 वीं आबादी में यह इन जीन पाया जाता है, जिसमें से लगभग 1-5 प्रतिशत लोगों में सीलिएक रोग विकसित होता हैं। इस बीमारी के पनपने में पर्यावरणीय कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

ग्लुटेन की खपत: ग्लुटेन या गेहूं का सेवन करने वाले लोगों में, सीलिएक रोग अधिक आम होता है। यह उत्तर भारत के लोगों को अधिक प्रभावित करता है, क्योंकि यहाँ गेंहू की खपत अधिक होती है। उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के लोगों में यह कम पाया जाता है, क्योंकि यहाँ गेंहू की तुलना में चावल की खपता ज्यादा होती है।

ट्रिगर कारक: यह माना जाता है कि, कोई घटना या ट्रिगर मरीजों में सीलिएक रोग के विकास का कारण बनती है। कई ट्रिगर्स जिनकी पहचान की गयी है, वह इस प्रकार हैं, जैसे संक्रमण (वायरल, बैक्टीरियल), इमोशनल स्ट्रेस, ट्रॉमा, सर्जरी इत्यादि।

सीलिएक रोग की पहचान कैसे की जाती है?

सीलिएक रोग की पहचान करना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि सीलिएक रोग के कुछ लक्षण, अन्य बीमारियों जैसे इरिटेबल बाॅवल सिंड्रोम और लैक्टोज इंटोलिरेन्स के समान होते हैं।

सीलिएक रोग की पहचान के लिए, डाॅक्टर आपसे नैदानिक इतिहास और परिवारिक इतिहास के बारे में कुछ सवाल पूँछेंगे। इसके अलावा, डॅाक्टर आपके शरीर, पेट और दांतों की जांच करेंगे। यदि डाॅक्टर को सीलिएक रोग का संदेह होता है, तो इसकी पुष्टि करने लिए वह आपको, रक्त परीक्षण, आनुवंशिक परीक्षण, और बायोप्सी जैसे परिक्षण कराने के लिए कहेंगे।

नैदानिक इतिहास

डॉक्टर डायजेस्टिव और नाॅन-डायजेस्टिव लक्षणों सहित आपके अन्य लक्षणों की पूरी जानकारी लेंगे। जानकारी लेते वक्त, डॉक्टर सीलिएक रोग से जुड़े सभी संभावित जोखिमो जैसे, बीमारी का परिवारिक इतिहास, डायबिटीज को ध्यान में रखकर एक निदान पर आने की कोशिश करेंगे।

शारीरिक परीक्षण

इस परीक्षण में डॉक्टर शरीर पर सीलिएक रोग के स्पष्ट लक्षणों की जांच करने की कोशिश करेंगे, जैसे:

• कुपोषण के लक्षण जैसे एनीमिया आदि।

• त्वचा पर दाने (डर्मेटाइटिस हर्पेटिफॉर्मिस)

• दंत परिक्षण- दाँतों पर भूरे, सफेद या पीले रंग के धब्बे। ये बच्चों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

पेट को दबाकर और टैप करके वह पेट की जांच करेंगे, ताकि दर्द की जांच हो सके और आंत्र ध्वनियों को सुना जा सके।

डायग्नोस्टिक टेस्ट

I. रक्त परिक्षण

इसमें मोटे तौर पर एंटीबॉडी परीक्षण और आनुवंशिक परीक्षण शामिल होते हैं:

एंटीबॉडी परीक्षण: यह खून में मौजूदर एंटीबॉडी के स्तर का पता लगाते हैं और उन्हें मापते है, जोकि सेवन किये गये ग्लुटेन के खिलाफ बनते हैं।

1. टीटीजी-आईजीए (टीटीजी) एंटीबॉडी टेस्ट: सीलिएक रोग की संभावना के लिए, रोगी की स्क्रीनिंग के लिए, यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला एंटीबॉडी परीक्षण है। यह काफी अच्छा परीक्षण होता है, लेकिन इसकी व्याख्या के दौरान दो चीजों पर विचार करने की जरूरत होती है:

• आईजीए की कमी में और 2 साल से कम उम्र के बच्चे में परिणाम नकारात्मक हो सकते हैं।

• अन्य बिमारियों, विशेष रूप से संक्रमण के कारण भी परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं।

2. टोटल सीरम आईजीए: यह परीक्षण आईजीए की कमी की जांच करने के लिए किया जाता है। जिससे कि टीटीजी-आईजीए (टीटीजी) एंटीबॉडी परीक्षण के झूठे नकारात्मक परिणामों की संभावना से इंकार किया जा सके।

आनुवंशिक परीक्षण: यह परीक्षण, एचएलए डीक्यू 2 और एचएलए डीक्यू 8 जैसे विशिष्ट जीन की उपस्थिति की जाँच के लिए किया जाता है, जोकि सीलिएक रोग से पीड़ित लगभग सभी व्यक्तियों में पाये जाते है। सकारात्मक परिक्षण सीलिएक रोग के निदान का सुझाव नहीं देता है, लेकिन सीलिएक रोग विकसित करने की संवेदनशीलता का सुझाव देता है। नकारात्मक परीक्षण सीलिएक रोग विकसित न होने की संभावना को इंगित करता है।

रक्त परीक्षणों के परिणामों के बावजूद, सीलिएक रोग के संदेह वाले मामलों में, पहचान की पुष्टि करने के लिए आंतों की बायोप्सी प्राप्त करना आवश्यक है।

II. बायोप्सी:

यहां नमूना प्रभावित ऊतक से लिया जाता है, जिसे पहचान की पुष्टि करने के लिए माइक्रोस्कोप द्वारा देखा जाता है।

आंतों की बायोप्सी: आंतों की बायोप्सी एंडोस्कोपी की मदद से ली जाती है, जोकि कैमरा लगी हुयी एक ट्यूब होती है, जिसे मुंह के माध्यम से अंदर डाला जाता है। आंतों की बायोप्सी के सकारात्मक परिणाम को, सीलिएक रोग की पहचान की पुष्टि (स्वर्ण मानक) माना जाता है।

इस प्रक्रिया में रोगी को बेहोश करके, उसके मुंह के माध्यम से एंडोस्कोप डाला जाता है। एंडोस्कोप से जुड़ा कैमरा असामान्यता तथा उसके फैलाव को देखने में मदद करता है। संलग्न उपकरण, निदान की पुष्टि करने के लिए छोटी आंत से ऊतक का एक नमूना लेने में मदद करता है।

सावधानी: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि, जब तक बायोप्सी न हो जाये, तब तक व्यक्ति को ग्लुटेन खाना बंद नहीं करना चाहिये,  क्योंकि यह कुछ रोगियों में झूठा परिणाम दे सकता है।

स्किन बायोप्सी: यह परिक्षण तब किया जाता है, जब आपकी त्वचा पर चकत्ते दिखायी देते हैं, और डॉक्टर उन्हें डर्मेटाइटिस हेपर्टीफॉर्मिस होने का संदेह करते हैं। त्वचा के छोटे टुकड़े लेकर उन्हे जांच के लिए लैब भेजा जाता है। इन्हे माइक्रोस्कोप द्वारा देखकर और सीलिएक रोग में पाए जाने वाले एंटीबॉडी की जांच की जाती है। यदि स्किन बायोप्सी और रक्त परीक्षण दोनों सीलिएक रोग में देखे गए विशिष्ट एंटीबॉडी की उपस्थिति का सुझाव देते हैं, तो इससे सीलिएक रोग की पहचान की पुष्टि होती है। इस तरह आंतों की बायोप्सी से बचा जा सकता है।

सीलिएक रोग के लिए स्क्रीनिंग

स्क्रीनिंग का मतलब है, किसी विशेष बीमारी की जांच करने के लिए, बिना किसी लक्षण वाले लोगों में परीक्षण करना। सीलिएक रोग के लिए स्क्रीनिंग आम लोगों में ठीक नहीं होता है। हालांकि, यह उन लोगों में किया जा सकता है, जिनके परिवार में किसी सदस्य को सीलिएक रोग का इतिहास है, या टाइप 1 डायबिटीज की बीमारी है।

सीलिएक बीमारी का इलाज कैसे होता है?

सीलिएक रोग का एकमात्र उपचार, आहार (ज्ञात और अज्ञात स्रोतों) से ग्लुटेन को हटाना है।

आमतौर पर, सीलिएक रोग की कोई दवाई नहीं होती है। ग्लुटेन मुक्त आहार का सेवन छोटी आंत को और अधिक नुकसान से रोकता है।

ग्लुटेन मुक्त आहार के सेवन के बाद, कई लोगों में कई दिनों और हफ्तों के बाद लक्षणों में सुधार दिखाई देता हैं। बच्चों में, छोटी आंत को ठीक होने में लगभग 3-6 महीने लग सकते हैं, जबकि वयस्कों में इसमें कई महीने से लेकर साल तक लग सकते हैं।

ठीक होने के दौरान, कई रोगियों को पोषण की कमी का प्रबंधन करने और जटिलताओं से बचने के लिए कई महीनों के लिए पूरक दिया जाता है।

यदि सीलिएक रोग का इलाज या पहचान न की जाये, तो इससे कई समस्याये और जटिलतायें विकसित हो सकती है। इस स्थिति में ग्लुटेन मुक्त आहार का सेवन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

सीलिएक रोग का उपचार विस्तार से जाने

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