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पेशाब में खून की मौजूदगी (हिमैच्युरिया)

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हिमैच्युरिया क्या है?

पेशाब में खून की मौजूदगी को हिमैच्युरिया कहा जाता है।

खून की मौजूदगी के कारण यदि, पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या भूरे रंग का हो जाता है, तो उसे ग्रोस हिमैच्युरिया कहा जाता है।

कभी-कभी, पेशाब में खून की मौजूदगी के बावजूद, यह सामान्य रंग का दिखाई देता है। इन मामलों में खून का पता केवल माइक्रोस्कोप से चलता है, जिसे माईक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया कहा जाता है।

चिकित्सकीय रूप से इसे, माइक्रोस्कोप से देखे जाने पर, प्रति उच्च शक्ति क्षेत्र में 3 या उससे अधिक आरबीसी की उपस्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है।

दोनों प्रकार के हिमैच्युरिया काफी गंभीर होते हैं।

हिमैच्युरिया का क्या कारण है?

इसके कई अलग-अलग कारण होते हैं, जोकि नीचे दिए गए हैं:

• मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई): यह पेशाब में खून की मौजूदगी का सबसे सामान्य कारण होता है। यूटीआई, मूत्राशय, गुर्दे, या प्रोस्टेट में संक्रमण के कारण होता है। यह वयस्कों में 25 प्रतिशत मामलों और बच्चों में 50 प्रतिशत मामलों में, पेशाब में खून की मौजूदगी लिए जिम्मेदार होता है, जिनको किसी चोट का कोई इतिहास नहीं है।

• गुर्दे की पथरी: यह पेशाब में खून की मौजदूगी के, 20 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार होता है, जिनको किसी चोट का कोई इतिहास नहीं है।

• कैंसर: गुर्दे, मूत्राशय या प्रोस्टेट के कैंसर से पेशाब में खून आ सकता है। बिना दर्द वाले ग्रोस हिमैच्युरिया को कैंसर के एक लक्षण के रूप में माना जाता है, जब तक कि वह अन्यथा साबित न हो जाये। मूत्राशय के कैंसर के लगभग 85 प्रतिशत मामलों और गुर्दे के कैंसर (आरसीसी) के 40 प्रतिशत मामलों में, ग्रोस हिमैच्युरिया मौजूद होता हैं।

• गुर्दे की बीमारियां: माइक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया, आमतौर पर गुर्दे की कार्यप्रणाली की सूजन के कारण होता है, जिसे ग्लोमेरिरुलस (ग्लोमेरुलोनेफ्राईटिस) कहा जाता है। यह डायबिटीज, वास्कुलाइटिस, आईजीए नेचुरोपैथी के कारण हो सकता है। कई बार ग्लोमेरुलोनेफ्राईटिस का कारण अज्ञात रहता है ।

• गुर्दे की चोट: पेट पर एक मजबूत हिट या झटका गुर्दे को चोट पहुंचा सकता है, जिसके कारण पेशाब में खून निकल सकता है। यह आमतौर पर सड़क दुर्घटनाओं, मारपीट या खेल-कूद में देखा जाता है।

• बढ़े हुआ प्रोस्टेट: यह आमतौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में देखा जाता है।

• जोरदार व्यायाम: जोरदार व्यायाम करने से, पेशाब मे शायद ही कभी खून आता है। और यदि खून आता भी है, तो यह मूत्राशय को चोट, आरबीसी के टूटने और निर्जलीकरण (डिहाईड्रेशन) के कारण हो सकता है।

• यह खून के थक्के का विकार (हीमोफीलिया) के कारण हो सकता है।

• सिकल सेल डीजीज: यह एक एैसा विकार जिसमें व्यक्ति की आरबीसी सिकल के आकार की होती है, जिसका आसानी से टूटने का खतरा अधिक होता है।

• पॉलीसिस्टिक किडनी डीजीज: यह एक ऐसी स्थिति जिसमें गुर्दे में कई सारे अल्सर विकसित हो जाते हैं, जिसके कारण पेशाब में खून आ सकता है।

• यौन गतिविधि: यदि यौन गतिविधि के कारण, मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) या मूत्राशय (यूरेटर) को चोट पहुंचती है, तो यह पेशाब में खून आने का कारण बन सकता है।

• दवाएं: खून पतला करने की दवाये जैसे एस्पिरिन, हेपरिन और अन्य, तथा कैंसर रोधी दवाएं जैसे साइक्लोफोस्फामाइड के सेवन से, पेशाब में खून आ सकता है।

• इन सभी कारणों में से, पहले के चार कारण (मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई)/ गुर्दे की पथरी/ कैंसर/ गुर्दे की बीमारियां), पेशाब में खून आने के सबसे आम कारण हैं।

• कुछ खाद्य पदार्थों और दवाओं के सेवन से भी, पेशाब का रंग लाल या भूरे रंग का हो जाता है। इसमें घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें खून नहीं होता है।

• ये खाद्य पदार्थ चुकंदर, ब्लैकबेरी, एलो, ब्रॉड बीन्स आदि होते हैं।

• ये दवायें रिफाम्पिन, मेट्रोनिडाजोल, नाइट्रोफुरेंटोइन, इबुप्रोफेन, फिनीटोइनक्विन, क्लोरोक्वीन आदि होती हैं।

अभी भी 60 प्रतिशत मामलों में कोई स्पष्ट कारण नहीं पाया गया है।

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हिमैच्युरिया होने का खतरा किन को सबसे अधिक होता है?

हिमैच्युरिया बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी को भी हो सकता है। हालांकि, कुछ एैसे संवेदनशील कारक हैं, जिनकी वजह से व्यक्ति में हिमैच्युरिया के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता हैं। ये कारक नीचे दिए गए हैं:

• उम्र: 35 साल से अधिक उम्र के लोगों में मूत्र पथ कैंसर (यूरिनरी ट्रैक्ट कैंसर) के विकसित होने का खतरा अधिक होता है, जो अक्सर पेशाब में खून मौजूदगी के रूप में सामने आता है। बुजुर्ग पुरुषों को भी प्रोस्टेट ग्रंथि की बढ़ने का खतरा होता है, जो कुछ समय हिमैच्युरिया के रूप में मौजूद हो सकता है।

• पारिवारिक इतिहास: यदि किसी व्यक्ति के परिवार में, किसी सदस्य को गुर्दे की पथरी या गुर्दे की बीमारी है, तो उसे भी इन बीमारियों के विकसित होने का खतरा अधिक होता है। इस तरह उस व्यक्ति में पेशाब में खून आने का खतरा बढ़ जाता है।

• गुर्दे का संक्रमण: ग्लोमेरिली का वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण भी, किसी व्यक्ति में हिमैच्युरिया के विकसित होने का खतरा बढ़ा सकता है।

• कुछ दवाएं: वार्फरिन, एस्पिरिन, NSAIDs जैसी कुछ दवायें, व्यक्ति को हिमैच्युरिया  के लिए अधिक संवेदनशील बनाती हैं।

• जोरदार व्यायाम- जोरदार व्यायाम से शरीर पर अत्यधिक तनाव पड़ने के कारण पेशाब में खून आने का खतरा बढ़ जाता है। लंबी दूरी के धावकों में यह अधिक आम है, जहां इसे जॉगर हिमैच्युरिया कहा जाता है।

पेशाब में खून कैसा दिखता है?

पेशाब में खून की अधिक मात्रा (ग्रोस हिमैच्युरिया), पेशाब का रंग बदल देती है। यग रंग लाल, गुलाबी या भूरे रंग का दिखाई देता हैं। एैसा कहा जाता है कि, 1 लीटर पेशाब में सिर्फ 1 मिलीलीटर खून पेशाब के रंग में बदलाव ला सकता है।

पेशाब में खून की कम मात्रा, पेशाब का रंग नहीं बदलती है। यह सामान्य नजरों से नहीं दिखता है। इसका पता केवल माइक्रोस्कोप (माइक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया) के द्वारा लगाया जा सकता है।

हिमैच्युरिया से जुड़े संकेत और लक्षण क्या हो सकते हैं?

ग्रोस हिमैच्युरिया के अधिकांश मामले, अन्य किसी संकेतों और लक्षणों से जुड़े नहीं होते हैं। हालांकि कई मामलों में नीचे दिये गये संकेत और लक्षण हिमैच्युरिया से जुडे हो सकते हैं, जो अंतर्निहित कारण की ओर इशारा करते है:

1. यूटीआई: पेशाब तेजी से लगना, पेशाब का बारबार आना, पेशाब करते समय दर्द होना आदि हिमैच्युरिया से जुड़े लक्षण, सिस्टाईटिस का सुझाव दे सकते हैं। बुखार और ठंड के साथ पार्श्व (फ्लैंक) में दर्द, गुर्दे के संक्रमण का सुझाव दे सकता है।

2. गुर्दे की पत्थरी: बगल और पीठ में अचानक तेज दर्द,  गुर्दे की पथरी का संकेत देते है। यह दर्द मतली और उल्टी के साथ भी हो सकता है।

3 रक्तस्राव (ब्लीडिंग) विकार: शरीर के अन्य हिस्सों से खून के रिसने से, कॉस्गुलोपैथी या रक्तस्राव (ब्लीडिंग) विकार, का संकेत मिलता है।

4. आघात या व्यायाम प्रेरित: ज़ोरदार व्यायाम या पेट में आघात का इतिहास, संबंधित कारणों का सुझाव देते हैं।

5. दवा या भोजन: हिमैच्युरिया के लिए संवेदनशील दवाओं के सेवन का इतिहास, संभावित कारण के रूप में दवा का सुझाव दे सकता है। मूत्र का रंग बदलने वाले कुछ खाद्य पदार्थों के सेवन का इतिहास भी कारण सुझाने में मदद कर सकता है।

आपको डॉक्टर से परामर्श कब करना चाहिए?

तकनीकी रूप से, बिना दर्द के पेशाब में खून आने को, मूत्रपथ (यूरीनरी ट्रैक्ट) के कैंसर का संकेत माना जाता है, या फिर जब तक कि यह कोई अन्य समस्या साबित न हो जाये। इनमें से 30 से 40 प्रतिशत मामले द्रोह (मैलिग्नेंसी) से जुड़े पाए जाते हैं। जबकि, माईक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया के केवल 2.6 से 4 प्रतिशत मामलों में कैंसर विकसित होने का खतरा होता है।

हालांकि, पेशाब में खून के सभी मामलें चाहे सकल (ग्रोस) या सूक्ष्म (माईक्रोस्कोपिक) हों, या  फिर दर्द से जुड़े हो, इन सभी की पहचान करने के लिए तुरंत मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

हिमैच्युरिया की पहचान कैसे की जाती है?

हिमैच्युरिया और अंतर्निहित कारण की पहचान करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित परिक्षण कर सकते है:

 

1. चिकित्सा इतिहास:

डॉक्टर आपसे कुछ सवाल पूछेंगे, जो उन्हे संभावित निदान (डायग्नोसिस) बनाने में मदद कर सकते हैं। वह सवाल, पेशाब से संबंधित लक्षणों, जैसे पार्श्व दर्द या जलन से संबंधित हो सकते हैं। डॉक्टर, आपसे दवा और भोजन के इतिहास के बारे में, या किसी एैसी गतिविधि के बारे में भी पूछ सकते है, जो हिमैच्युरिया के लिए संवेदनशील हो सकती है। डॉक्टर आपकी उम्र और पारिवारिक इतिहास को नोट करेंगे।

 

2. शारीरिक परिक्षण:

• पेट की जांच: डॉक्टर पेट की जाँच हल्का दबाकर और कई जगह पर थप-थपाकर करते हैं।

• डिजिटल रेक्टल परिक्षण: यह परिक्षण प्रोस्टेट की किसी भी असामान्यता जैसे वृद्धि, कैंसर या सूजन की जांच करने के लिए किया जाता है। यहां डॉक्टर दस्ताने से ढकी चिकनी उंगली को गुदा के अंदर डालते है, जिससे की प्रोस्टेट महसूस हो सके और उसकी असामान्यता की जांच की जा सके ।

• पेल्विक परिक्षण: यह परीक्षण महिलाओं में पेल्विक अंगों में किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए किया जाता है, जोकि हिमैच्युरिया के लिए संवेदनशील हो सकता है। इसमें डॉक्टर पहले पेल्विक अंगों को देखते है, और फिर किसी असामान्यता की जाँच के लिए, योनि में दस्ताने से ढकी चिकनी उंगली डालते है।

 

3. यूरिनलिसिस:

• इस परिक्षण में, माइक्रोस्कोप द्वारा पेशाब में लाल रक्त कोशिकाओं की मौजूदगी का जाँच की जाती है, जिससे पेशाब में खून की मौजूदगी पता चलता है।

• यह पेशाब में, अन्य असामान्यताओं की भी जांच करता है, ताकि हिमैच्युरिया के किसी भी अंतर्निहित कारण की तलाश की जा सके।

• सेैंपल लेना: पेशाब के नमूने में किसी मिलावट से बचने के लिए, पेशाब का एक मध्य धारा नमूना लेने के लिए कहा जायेगा। डॉक्टर आपको यौन गतिविधि या जोरदार व्यायाम के बाद का मूत्र, या सुबह का पहला मूत्र का नमूना न लेने के लिए भी कहेंगे।

किसी महिला को यदि मासिक धर्म चल रहा हो, तो उसके पूरे होने के बाद परिक्षण करने के लिए कहा जाता है।

• परिणाम:

माईक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया: प्रति हाई पावर फील्ड में 3 या उससे अधिक आरबीसी का परिणाम, एक सामान्य दिखने वाले पेशाब के नमूने में माईक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया की पुष्टि करता है।

– आरबीसी का आकार पेशाब में खून के संभावित अंतर्निहित कारण का भी सुझाव देता है। यदि आरबीसी का आकार सेलुलर कास्ट और प्रोटीन (1 +से अधिक) की उपस्थिति के कारण असामान्य है, तो यह ग्लोमेरि्युलर रोग (कि़डनी पैरेंकाईमा डीजीज) का संकेत देता है। यदि आरबीसी का आकार सामान्य हैं, तो यह ग्लोमेरुलाई की जगह, अन्य कारण का सुझाव देता है जैसे पथरी, यूटीआई और अन्य।

– पेशाब में मवाद की कोशिकाओं और बैक्टीरिया की मौजूदगी यूटीआई का सुझाव देता है।

ग्रोस हिमैच्युरिया: पेशाब करने की शुरुआत में या उसके अंत में, पेशाब में खून की मौजूदगी यूरेथ्राईटिस या सिस्टाईटिस का सुझाव देती है। पेशाब करते रहने के दौरान, यदि खून रहता है, तो यह, मूत्राशय, यूरेटर, गुर्दे से संबँधित समस्या का सुझाव देता है।

खून के साथ पेशाब का नमूना, ऊपर बताये गये तरीके से लिया जाता है, और उसे प्रयोगशाला में भेजा जाता है। प्रयोगशाला में, पेशाब के नमूने के तल पर आरबीसी की तलछट को अलग करने के लिए, नमूने को तेजी से घुमाया जाता है, जिससे खून की मौजूदगी का पता चलता है।

कभी-कभी, घूमाने के बाद, नमूने के ऊपर लाल रंग दिखायी पड़ता है, जिसका परीक्षण डिपस्टिक का उपयोग करके किया जाता है। यह या तो फ्री हीमोग्लोबिन या मायोग्लोबिन (पिगमेंट) की उपस्थिति दिखा सकता है, जो मांसपेशियों के टूटने की बीमारी का सुझाव दे सकता है जिसे, रैब्डोमायलोसिस (rhabdomyolysis) कहा जाता है। वैकल्पिक रूप से यह चुकंदर, रिफाम्पिकिन जैसे भोजन, या दवाओं के सेवन के कारण हो सकता है।

 

4. इमेजिंग परीक्षण:

• अल्ट्रासाउंड केयूबी (KUB): हिमैच्युरिया के मामले में आमतौर पर किडनी यूरेटर और ब्लैडर का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यह परीक्षण गुर्दे की बीमारी, गुर्दे की पथरी, बड़ा घाव, मूत्र पथ संक्रमण जैसी असामान्यता की जांच करता है। आमतौर पर डॉक्टर द्वारा बताया गया, यह पहला इमेजिंग परीक्षण होता है। हाँलांकि, यह परिक्षण, सभी मामलों में कैंसर की उपस्थिति से इंकार नहीं कर सकता है। यह ग्लोमेरुलोनेफ्राईटिस जैसी किडनी की समस्या की जांच करना के लिए, अच्छा टेस्ट माना जाता है।

• सीटी स्कैन: इसमें सीटी यूरोग्राफी नामक एक विशेष प्रकार का सीटी स्कैन किया जाता है। इसमें खून में डाई इंजेक्ट करने  के बाद अलग-अलग समय पर कई स्कैन किए जाते हैं। इस परीक्षण को गैर ग्लोमर्युलर स्थितियों जैसे, कैंसर, पथरी से प्रभावित व्यक्तियों की जांच करने में अत्यधिक उपयोगी माना जाता है। यह परिक्षण उन लोगों में विपरीत संकेत देता है, जिनको डाई से एलर्जी होती, जिनके गुर्दे ठीक से काम नहीं करते हैं या वह महिलाये जो गर्भावती होती है।

• एमआरआई: एमआर यूरोग्राफी उन मामलों में की जाती है, जहां सीटी विपरीत संकेत देता है। यह परीक्षण आयोडीनेटेड कंट्रास्ट या एक्स-रे का उपयोग नहीं करता है जैसा कि सीटी स्कैन में देखा गया है।

 

5. सिस्टोस्कोपी:

सिस्टोस्कोपी प्रक्रिया, मूत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा की जाती है। इसमें, डॉक्टर आपके मूत्राशय (ब्लैडर) में कैमरा लगी हुयी एक पतली ट्यूब को मूत्रमार्ग के माध्यम अंदर डालते है। यह परीक्षण मूत्राशय के अंदर किसी भी असामान्यता जैसे कैंसर या विकास (ग्रोथ) को देखने में मदद करता है, और इसका नमूना लेने में मदद करता है। लिये गये नमूने के जाँच माइक्रोस्कोप द्वारा की जाती है, कैंसर और उसके प्रकार की पहचान की जाती है।

मतभेद: यह परिक्षण तीव्र संक्रमण में, या मूत्रमार्ग संकुचन (सख्त), या दर्द असहिष्णुता में विपरीत संकत दे सकता है।

 

6. किडनी बायोप्सी:

इस परीक्षण में, त्वचा के माध्यम से सुई डालकर, गुर्दे से ऊतक का नमूना लिया जाता है। लिये गये ऊतक के नमूने को, किसी असामान्यता की जाँच के लिए माइक्रोस्कोप द्वारा देखा जाता है। यह परीक्षण, कभी-कभी गुर्दे की बीमारी का सबूत तलाश करने के लिए किया जाता है, जिसके कारण हिमैच्युरिया होता है।

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हिमैच्युरिया का इलाज कैसे किया जाता है?

हिमैच्युरिया का उपचार अंतर्निहित कारण पर निर्भर करता है।

कोई विशिष्ट उपचार नहीं: यदि व्यक्ति को कोई दूसरी गंभीर बीमारी नहीं है, तो कोई विशिष्ट उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, और हिमैच्युरिया अपने आप ठीक हो जाता है।

एंटीबायोटिक्स: यदि हिमैच्युरिया मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) के कारण है, तो एंटीबायोटिक्स दिया जाता है।

पथरी को हटाने के लिए उपचार: यदि पथरी के कारण हिमैच्युरिया की समस्या हो रही है, तो आपके डॉक्टर चिकित्सा थेरेपी या यूरेट्रोस्कोपी, ईएसडब्ल्यूएल जैसी प्रक्रिया की मदद से, पथरी को हटाने की कोशिश कर करते हैं।

बढ़े हुए प्रोस्टेट का उपचार: इस समस्या के लक्षणों का प्रबंधन करने के लिए दवाएं दी जाती है या सर्जरी की जा सकती है।

अंतर्निहित कैंसर का उपचार: यदि अंतर्निहित कारण, गुर्दे या मूत्राशय में कैंसर है, तो आपके डॉक्टर ट्यूमर को हटाने के लिए नेफ्रेक्टॉमी या सिस्टेक्टॉमी/सिस्टोस्कोपी करते हैं। यदि ट्यूमर को हटाया नहीं जा सकता है, तो वे आपको ट्यूमर कोशिकाओं को मारने के लिए कीमोथेरेपी लेने के लिए कहेंगे।

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