Your browser does not support JavaScript!

पेशाब में खून की मौजूदगी (हिमैच्युरिया)- डायग्नोसिस

This post is also available in: English (English)

हिमैच्युरिया की पहचान कैसे की जाती है?

हिमैच्युरिया और अंतर्निहित कारण की पहचान करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित परिक्षण कर सकते है:

 

1. चिकित्सा इतिहास:

डॉक्टर आपसे कुछ सवाल पूछेंगे, जो उन्हे संभावित निदान (डायग्नोसिस) बनाने में मदद कर सकते हैं। वह सवाल, पेशाब से संबंधित लक्षणों, जैसे पार्श्व दर्द या जलन से संबंधित हो सकते हैं। डॉक्टर, आपसे दवा और भोजन के इतिहास के बारे में, या किसी एैसी गतिविधि के बारे में भी पूछ सकते है, जो हिमैच्युरिया के लिए संवेदनशील हो सकती है। डॉक्टर आपकी उम्र और पारिवारिक चिकित्सकीय इतिहास को नोट करेंगे।

 

2. शारीरिक परिक्षण:

• पेट की जांच: डॉक्टर पेट की जाँच हल्का दबाकर और कई जगह पर थप-थपाकर करते हैं।

• डिजिटल रेक्टल परिक्षण: यह परिक्षण प्रोस्टेट की किसी भी असामान्यता जैसे वृद्धि, कैंसर या सूजन की जांच करने के लिए किया जाता है। यहां डॉक्टर दस्ताने से ढकी चिकनी उंगली को गुदा के अंदर डालते है, जिससे की प्रोस्टेट महसूस हो सके और उसकी असामान्यता की जांच की जा सके ।

• पेल्विक परिक्षण: यह परीक्षण महिलाओं में पेल्विक अंगों में किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए किया जाता है, जोकि हिमैच्युरिया के लिए संवेदनशील हो सकता है। इसमें डॉक्टर पहले पेल्विक अंगों को देखते है, और फिर किसी असामान्यता की जाँच के लिए, योनि में दस्ताने से ढकी चिकनी उंगली डालते है।

 

3. यूरिनलिसिस:

• इस परिक्षण में, माइक्रोस्कोप द्वारा पेशाब में लाल रक्त कोशिकाओं की मौजूदगी का जाँच की जाती है, जिससे पेशाब में खून की मौजूदगी पता चलता है।

• यह पेशाब में, अन्य असामान्यताओं की भी जांच करता है, ताकि हिमैच्युरिया के किसी भी अंतर्निहित कारण की तलाश की जा सके।

• सेैंपल लेना: पेशाब के नमूने में किसी मिलावट से बचने के लिए, पेशाब का एक मध्य धारा नमूना लेने के लिए कहा जायेगा। डॉक्टर आपको यौन गतिविधि या जोरदार व्यायाम के बाद का मूत्र, या सुबह का पहला मूत्र का नमूना न लेने के लिए भी कहेंगे।

किसी महिला को यदि मासिक धर्म चल रहा हो, तो उसके पूरे होने के बाद परिक्षण करने के लिए कहा जाता है।

• परिणाम:

माईक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया: प्रति हाई पावर फील्ड में 3 या उससे अधिक आरबीसी का परिणाम, एक सामान्य दिखने वाले पेशाब के नमूने में माईक्रोस्कोपिक हिमैच्युरिया की पुष्टि करता है।

– आरबीसी का आकार पेशाब में खून के संभावित अंतर्निहित कारण का भी सुझाव देता है। यदि आरबीसी का आकार सेलुलर कास्ट और प्रोटीन (1 +से अधिक) की उपस्थिति के कारण असामान्य है, तो यह ग्लोमेरि्युलर रोग (कि़डनी पैरेंकाईमा डीजीज) का संकेत देता है। यदि आरबीसी का आकार सामान्य हैं, तो यह ग्लोमेरुलाई की जगह, अन्य कारण का सुझाव देता है जैसे पथरी, यूटीआई और अन्य।

– पेशाब में मवाद की कोशिकाओं और बैक्टीरिया की मौजूदगी यूटीआई का सुझाव देता है।

ग्रोस हिमैच्युरिया: पेशाब करने की शुरुआत में या उसके अंत में, पेशाब में खून की मौजूदगी यूरेथ्राईटिस या सिस्टाईटिस का सुझाव देती है। पेशाब करते रहने के दौरान, यदि खून रहता है, तो यह, मूत्राशय, यूरेटर, गुर्दे से संबँधित समस्या का सुझाव देता है।

खून के साथ पेशाब का नमूना, ऊपर बताये गये तरीके से लिया जाता है, और उसे प्रयोगशाला में भेजा जाता है। प्रयोगशाला में, पेशाब के नमूने के तल पर आरबीसी की तलछट को अलग करने के लिए, नमूने को तेजी से घुमाया जाता है, जिससे खून की मौजूदगी का पता चलता है।

कभी-कभी, घूमाने के बाद, नमूने के ऊपर लाल रंग दिखायी पड़ता है, जिसका परीक्षण डिपस्टिक का उपयोग करके किया जाता है। यह या तो फ्री हीमोग्लोबिन या मायोग्लोबिन (पिगमेंट) की उपस्थिति दिखा सकता है, जो मांसपेशियों के टूटने की बीमारी का सुझाव दे सकता है जिसे, रैब्डोमायलोसिस (rhabdomyolysis) कहा जाता है। वैकल्पिक रूप से यह चुकंदर, रिफाम्पिकिन जैसे भोजन, या दवाओं के सेवन के कारण हो सकता है।

 

4. इमेजिंग परीक्षण:

• अल्ट्रासाउंड केयूबी (KUB): हिमैच्युरिया के मामले में आमतौर पर किडनी यूरेटर और ब्लैडर का अल्ट्रासाउंड किया जाता है। यह परीक्षण गुर्दे की बीमारी, गुर्दे की पथरी, बड़ा घाव, मूत्र पथ संक्रमण जैसी असामान्यता की जांच करता है। आमतौर पर डॉक्टर द्वारा बताया गया, यह पहला इमेजिंग परीक्षण होता है। हाँलांकि, यह परिक्षण, सभी मामलों में कैंसर की उपस्थिति से इंकार नहीं कर सकता है। यह ग्लोमेरुलोनेफ्राईटिस जैसी किडनी की समस्या की जांच करना के लिए, अच्छा टेस्ट माना जाता है।

• सीटी स्कैन: इसमें सीटी यूरोग्राफी नामक एक विशेष प्रकार का सीटी स्कैन किया जाता है। इसमें खून में डाई इंजेक्ट करने  के बाद अलग-अलग समय पर कई स्कैन किए जाते हैं। इस परीक्षण को गैर ग्लोमर्युलर स्थितियों जैसे, कैंसर, पथरी से प्रभावित व्यक्तियों की जांच करने में अत्यधिक उपयोगी माना जाता है। यह परिक्षण उन लोगों में विपरीत संकेत देता है, जिनको डाई से एलर्जी होती, जिनके गुर्दे ठीक से काम नहीं करते हैं या वह महिलाये जो गर्भावती होती है।

• एमआरआई: एमआर यूरोग्राफी उन मामलों में की जाती है, जहां सीटी विपरीत संकेत देता है। यह परीक्षण आयोडीनेटेड कंट्रास्ट या एक्स-रे का उपयोग नहीं करता है जैसा कि सीटी स्कैन में देखा गया है।

 

5. सिस्टोस्कोपी:

सिस्टोस्कोपी प्रक्रिया, मूत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा की जाती है। इसमें, डॉक्टर आपके मूत्राशय (ब्लैडर) में कैमरा लगी हुयी एक पतली ट्यूब को मूत्रमार्ग के माध्यम अंदर डालते है। यह परीक्षण मूत्राशय के अंदर किसी भी असामान्यता जैसे कैंसर या विकास (ग्रोथ) को देखने में मदद करता है, और इसका नमूना लेने में मदद करता है। लिये गये नमूने के जाँच माइक्रोस्कोप द्वारा की जाती है, कैंसर और उसके प्रकार की पहचान की जाती है।

मतभेद: यह परिक्षण तीव्र संक्रमण में, या मूत्रमार्ग संकुचन (सख्त), या दर्द असहिष्णुता में विपरीत संकत दे सकता है।

 

6. किडनी बायोप्सी:

इस परीक्षण में, त्वचा के माध्यम से सुई डालकर, गुर्दे से ऊतक का नमूना लिया जाता है। लिये गये ऊतक के नमूने को, किसी असामान्यता की जाँच के लिए माइक्रोस्कोप द्वारा देखा जाता है। यह परीक्षण, कभी-कभी गुर्दे की बीमारी का सबूत तलाश करने के लिए किया जाता है, जिसके कारण हिमैच्युरिया होता है।

TOP HEALTH NEWS & RESEARCH

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

Breast cancer: One-dose radiotherapy ‘as effective as full course’

A single targeted dose of radiotherapy could be as effective at treating breast cancer as a full course, a long-term…

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

Coronavirus smell loss ‘different from cold and flu’

The loss of smell that can accompany coronavirus is unique and different from that experienced by someone with a bad…

Lancet Editor Spills the Beans

Lancet Editor Spills the Beans

Editors of The Lancet and the New England Journal of Medicine: Pharmaceutical Companies are so Financially Powerful They Pressure us…

मदर एंड चाइल्ड

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर जटिलतायें और देखभाल

प्रसवोत्तर अवधि क्या है? एक प्रसवोत्तर अवधि एक एैसा समय अंतराल है, जिसमें मां बच्चे को जन्म देने के बाद…

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर आहार- (बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रसव के बाद आहार सिफारिशें)

प्रसवोत्तर या स्तनपान आहार क्या है? पोस्टपार्टम डाइट वह डाइट है, जो मां को एक बार बच्चे के जन्म के…

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

गर्भावस्था के लिए खाद्य गाइड

बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए खाने और बचने वाले खाद्य पदार्थों की सूची गर्भ धारण करने के बाद, बच्चे…

मन और मानसिक स्वास्थ्य

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – निदान

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का निदान किया जाता है? नैदानिक इतिहास: डॉक्टर आम तौर पर लक्षणों का विस्तृत इतिहास…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) – उपचार

कैसे सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी) का इलाज किया जाता है? सामान्यीकृत चिंता विकार का उपचार लक्षणों की गंभीरता और जीवन…

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार (जीएडी)

सामान्यीकृत चिंता विकार क्या है? चिंता, किसी ऐसी चीज के बारे में परेशानी या घबराहट की भावना है, जो हो…